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क्रोएशिया

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विश्व रैंकिंग: 18
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : तीसरे स्थान पर (1998)

खास बात

कहा जाता है कि क्रोएशिया के पास ब्राजील के बाद प्रतिभाशाली खिलाडियों का सबसे बड़ा पूल है. यही बात टीम के लिए उम्मीद का सबब है. ल्यूका मॉडरिक, इवान राकटिक और मारियो कोवासिस टीम के बड़े स्टार हैं. तीनों में ही किसी भी टीम के ऊपर हावी होने की पूरी क्षमता है

ब्राजील के अलावा क्रोएशिया वह टीम है जो ग्रुप ए से अगले राउंड में जाने की प्रबल दावेदार है. इस यूरोपियन टीम के पास मिडफील्डरों (मध्य पंक्ति) और फॉरवर्ड (अग्रिम पंक्ति या आक्रमण पंक्ति) खिलाड़ियों की पूरी फौज है. टीम के कोच नीको कोवाक खुद टीम के पूर्व कप्तान और शानदार मिडफील्डर रहे हैं. 42 वर्षीय कोवाक के बारे में कहा जाता है कि नई प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें तराशने में उनका कोई सानी नहीं है. अग्रिम पंक्ति में टीम के पास तेज-तर्रार मारियो मैंजुकिक हैं पर पहले मैच में टीम को उनकी सेवाएं नहीं मिल सकीं क्योंकि क्वालीफायर मैच में आइसलैंड के खिलाफ उन्हें रेड कार्ड दिखाया गया था. यह कमी क्रोएशिया को ब्राजील के खिलाफ पहले मैच में काफी भारी पड़ी. फारवर्ड लाइन में मेंजुकिक के अलावा क्रोएशिया के पास आइविका ओलिस, निकिसा जेलाविक और एडुआर्डो जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं. एडुआर्डो का तो जन्म ही ब्राजील में हुआ है. फुटबॉल के पंडितों का मानना है कि अगर मिडफील्ड से पर्याप्त सहयोग मिला तो एडुआर्डो टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की कतार में शामिल हो सकते हैं. इसकी पूरी उम्मीद भी है क्योंकि टीम के पास लूका मोडरिक और इवान राकटिक जैसे विश्वस्तरीय मिडफील्डर मौजूद हैं. राकटिक का पिछला प्रदर्शन इतना सनसनीखेज रहा है कि यूरोपियन लीग के सबसे महत्वपूर्ण क्लब बार्सिलोना ने अगले सीजन में उनकी सेवाएं लेने का मन बना लिया है. क्रोएशिया की कमजोर नस है उनके डिफेंडर और गोलकीपर. अगर यहां भी उनका लचर रवैया जारी रहा तो टीम को भारी पड़ सकता है.

इक्वाडोर

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विश्व रैंकिंग: 26
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : दूसरा दौर (2006)खास बात

रूस में डायनामो मास्को के लिए खेलने वाले क्रिश्चियन नोबाओ इस टीम के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर हैं. यह खिलाड़ी गेंद पर अपने नियंत्रण से अपनी टीम का भाग्य तय करने में अहम भूमिका निभाएगा

इस विश्व कप में इक्वाडोर की टीम जब-जब मैदान पर होगी तो 11 नंबर की जर्सी में कोई खिलाड़ी न तो मैदान पर और न ही डगआउट में नजर आएगा. इक्वाडोर के फुटबॉल फेडरेशन ने गत जुलाई में स्टार स्ट्राइकर क्रिश्चियन बेनिटेज के अचानक निधन के बाद इस जर्सी को ही रिटायर कर दिया. बेनिटेज की महज 27 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी. 2006 के विश्व कप में टीम को दूसरे दौर में पहुंचाने में बेनिटेज ने अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में उनके अनुभव की कमी खलेगी. कोच रेनाल्डो रुएडा ने एन्नार वालेंसिया को बेहद करीने से तैयार किया है ताकि वे बेनितेज की जगह भर सकें. मिडफील्ड में एंतोनियो वालेंसिया टीम की असली ताकत होंगे. मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए खेलने वाले एंतोनियो वालेंसिया और जैफरसन मोंटेरो के रूप में टीम के पास दो ऐसे खिलाड़ी हैं जो खेल को अपनी शर्तों पर चला सकते हैं. हालांकि अपने क्लबों के लिए इस सीजन में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं लेकिन ब्राजील में उनका प्रदर्शन टीम में नई जान फूंक सकता है. डायनामो मॉस्को के लिए खेलने वाले क्रिश्चियन नोबाओ एक और बेहतरीन खिलाड़ी हैं जो बिना मौका गंवाए रक्षण से आक्रमण पर उतर सकते हैं. हालांकि रक्षा पंक्ति में जायरो कांपोस के घायल होने ने टीम को बड़ा झटका दिया है. अभी तक टीम के पास उनका कोई विकल्प नहीं है.

अल्जीरिया

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विश्व रैंकिंग: 22
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : ग्रुप स्टेज (1982,1986, 2010)

खास बात

20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 10 गोल कर चुके इस्लाम सुलेमानी इन दिनों शानदार फॉर्म में हैं. जरूरत के वक्त गोल करने की उनकी क्षमता का ही कमाल है कि 25 साल का यह स्ट्राइकर अपने क्लब और देश दोनों का चहेता है. पेनाल्टी बॉक्स के दायरे में उनकी तेजी देखते ही बनती है. अल्जीरिया के प्रदर्शन में उनकी भूमिका अहम होगी

2010 के विश्व कप में अल्जीरिया का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. एक भी गोल किए बिना वह पहले चरण में ही बाहर हो गई थी. चार साल बाद आज स्थितियां बदली हुई हैं. अल्जीरिया आज अफ्रीकी महाद्वीप की शीर्ष टीम है और उसके पास अपने ग्रुप की रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों को झटका दे सकने वाले कई खिलाड़ी हैं. 2011 में टीम का जिम्मा संभालने वाले कोच वाहिद हलीलहोज्डिक ने इस टीम का कायापलट कर दिया है. आज अल्जीरिया की टीम जिस शैली में खेलती है उसमें 2010 के उलट सकारात्मकता और आक्रामकता के दर्शन होते हैं. बोस्निया में जन्मे हलीलहोज्डिक ने मिडफील्ड और फॉरवर्ड पोजीशन के लिए नौजवान और फुर्तीले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी है. टीम की सुरक्षा पंक्ति की अगुवाई माजिद बगहेरा कर रहे हैं जो 62 अंतर्राष्ट्रीय मैचों के तजुर्बे के साथ टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. नबील बिनतालिब , हसन येब्दा और लासन के साथ मिलकर वे एक बढ़िया सुरक्षा घेरा बनाते हैं. उधर, सोफियान फेगौली, अल अरबी सूडानी और इस्लाम सुलेमानी के रूप में अल्जीरिया के पास काफी प्रभावशाली आक्रमण है. इन सबके साथ अल्जीरिया 2010 के उलट प्रदर्शन कर सकता है.

बेल्जियम

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विश्व रैंकिंग: 11
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : चौथा स्थान (1986)

खास बात

मशहूर क्लब चेलसी में जगह पाने में नाकाम रहने के बाद केविन डी ब्रुइन ने वुल्फ्सबर्ग का रुख किया और जर्मन लीग बंुडेसलीगा में शानदार प्रदर्शन किया. क्वालीफाइंग मुकाबलों में वे बेल्जियम के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी के तौर पर उभरे. विपक्षी टीम का ध्यान हजार्ड पर रहने की वजह से ब्रुइन मौका चुराकर ज्यादा ुनकसान का सबब बन सकते हैं

बेल्जियम की इस टीम में कुछ खास बात है. वर्ष 2002 के विश्व कप के दूसरे दौर में ब्राजील (जो बाद में विजेता बनी) से हारने वाला बेल्जियम 2006 में जर्मनी तथा 2010 में दक्षिण अफ्रीका में हुए विश्व कप के लिए क्वालिफाई तक नहीं कर सका. लेकिन 12 साल के इस अंतराल में टीम ने युवा खिलाड़ियों की एक ऐसी फौज तैयार की है जो बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए तैयार दिखते हैं. उनमें से कई तो पहले ही अपने-अपने क्लब के लिए काफी नाम कमा चुके हैं. स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लीगा में अटलेटिको मैड्रिड की जीत के दौरान थिबाउत कोर्टियो के शानदार बचाव को भला कौन भूल सकता है. वहीं विंसेंट कोपनी मैनचेस्टर सिटी की रक्षापंक्ति के आधार हैं और उन्होंने टीम को प्रीमियर लीग में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उधर, इडेन हर्जाड चेलसी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रह चुके हैं.इस टीम के बारे में आम शिकायत यही है कि इसके खिलाड़ी क्लब के लिए किए गए प्रदर्शन को अपने देश के लिए दोहरा नहीं पाते. लेकिन उन्होंने विश्व कप के लिए बेहतरीन ढंग से क्वालिफाई किया. क्रोएशिया, सर्बिया और स्कॉटलैंड की मौजूदगी में उन्होंने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया. कोच मार्क विलमॉट्स के लिए स्ट्राइकर क्रिश्चियन बेंटेक की चोट और अच्छे फुलबैक की कमी चिंता का विषय है. हालांकि एक्सेल विटसेल और केविन डी ब्रुइन तथा अदनान जानुजाज जैसी प्रतिभाओं से सजा टीम का मिडफील्ड इसकी भरपाई करने में सक्षम है.

दक्षिण कोरिया

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विश्व रैंकिंग: 52
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : चौथा स्थान (2002)

खास बात

राष्ट्रीय टीम के पूर्व कप्तान के रूप में कोच होंग म्युंग बो पुराने और नए दोनों तरह के खिलाड़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं. पार्क च्वांग जैसे खिलाड़ी जिन्होंने अपने करियर का अधिकतर समय ‘मेरा नंबर कब आएगा’ की तर्ज पर आर्सनल क्लब में अपनी बारी का इंतजार करते हुए बिताया है, के लिए होंग प्रेरक के तौर- तरीके संजीवनी का काम कर सकते हैं

अगर उत्तर कोरिया के तानाशाह अपनी न्यूक्लियर क्षमता का हवाला देकर विश्व को धमका सकते हैं तो दक्षिण कोरिया के पास सोन हियुंग मिन्ह जैसा करिश्माई खिलाड़ी है जिसके दम पर वह विश्व कप में विपक्षी टीमों के अरमानों पर पानी फेर सकती है. अपनी जबर्दस्त फुर्ती के लिए चर्चित और दोनों पैरों में से किसी से भी बेहद सटीकता के साथ वार करने में पारंगत मिन्ह सभी एशियाई टीमों द्वारा मैदान पर किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों का केंद्रबिंदु होंगे. स्ट्राइकर पार्क च्वांग जो इंग्लिश चैंपियनशीप में वाटफोर्ड के लिए खेलते हैं, उनसे एक शानदार खेल दिखाने की पूरी उम्मीद है. दक्षिण कोरिया में 2002 में हुए विश्व कप के समय वर्तमान कोच होंग म्युंग बो राष्ट्रीय टीम के कप्तान थे. उस समय दक्षिण कोरियाई टीम ने सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाकर सभी को चौंका दिया था. होंग की रणनीति के तहत मिडफील्ड में हान कुक यंग, पार्क जंग वू और किम बो यूंग मोर्चा संभालेंगे. एक और खिलाड़ी ली चुंग यॉंग पर सबकी नजर रहेगी. हालांकि ली के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अनुभव ज्यादा नहीं है, लेकिन मैदान पर वे दाएं छोर के खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन पार्टनर साबित हो सकते हैं. दक्षिण कोरिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी कमजोर रक्षा पंक्ति साबित होने वाली है. गोलकीपर के रूप में कोच की पहली पसंद जुंग सुंग यॉंग को टीम की कमजोर कड़ी कहा जा रहा है. कहा जा रहा है कि कोच को अब पांच खिलाड़ियों को मिलाकर रक्षा पंक्ति तैयार करने में बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए.

रूस

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विश्व रैंकिंग: 37
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : चौथा स्थान (1966)

खास बात
एलेग्जेंडर कोकोरिन के चर्चा में आने का मुख्य कारण उनका जस्टिन बीबर की तरह दिखना था. विशेष तौर से विश्व-भर के अखबारों में वे इसी कारण से सुर्खियों में बने रहे. लेकिन मास्को के इस आक्रामक स्ट्राइकर को आने वाले वक्त का सितारा भी माना जाता है. रूस के कई फुटबॉल पंडितों का मानना है कि कोकोरिन ब्राजील की धरती पर अपना जादू दिखा सकते हैं

फेबिओ कपेलो की बेहतरीन रणनीतियां इस बार बिखरती हुई नजर आ रही हैं. कप्तान रोमन शिरोकोव के चोटिल होने से न सिर्फ टीम में एक प्रभावशाली खिलाड़ी कम हुआ है बल्कि टीम का सहारा भी खो चुका है. शिरोकोव के रहते रूस ने क्वालीफाइंग मैचों में कमाल का प्रदर्शन किया था और पुर्तगाल जैसी टीम पर भी जीत हासिल की थी. लेकिन आज वे टीम में नहीं हैं. ऐसे में कोच फेबिओ को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा. अब भी रूस के पास डिफेन्स में कुछ जाने-पहचाने चेहरे जरूर हैं. गोलकीपर इगोर एकिनफीव सालों से अपनी जिम्मेदारी बखूबी संभाले हुए हैं और कोई भी उनकी जगह नहीं ले सका है. साथ ही सेर्गेय इगानशेविच भी पूरे साहस के साथ रक्षण में मौजूद हैं. लेकिन कोच फेबिओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिडफील्ड और फॉरवर्ड को साधने की है. सेंट्रल-मिडफील्ड पर इगोर डेनिसोव और विक्टर फैजलिन कुछ सार्थक कर सकते हैं, लेकिन बाकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवालिया निशान उठ रहे हैं. यूरो 2012 में अपनी प्रतिभा से सबको चौंकाने वाले आक्रामक मिडफील्डर एलान जागोएव भी इस टीम में हैं, लेकिन अब उनकी चमक कुछ फीकी पड़ती नजर आ रही है. अग्रणी पंक्ति में एलेग्जेंडर कोकोरिन हैं जिनका अनुभव भले ही कम है लेकिन वे बॉल को गोल पोस्ट के पार पहुंचाने की उम्मीद जरूर जगाते हैं. इनके अलावा फुर्तीले एलेग्जेंडर करझाकोव भी हैं जिनमें विपक्षियों को छकाने की प्रतिभा तो है लेकिन वे इसे गोल में कम ही तब्दील कर पाते हैं.

पुर्तगाल

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विश्व रैंकिंग: 4
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : तीसरा स्थान (1966)खास बात
चपलता और पास देने की अपनी क्षमता के चलते जो मॉटिन्हो की तुलना स्पेन के दिग्गज शावी से होती है और यही वजह है कि उन्हें पुर्तगाली टीम की धुरी भी कहा जा रहा है. यूरो 2012 में उन्होंने अपने अच्छे प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान खींचा था और अब सबसे बड़ा मंच उनका इंतजार कर रहा है
कहते हैं कि मौत और टैक्स के अलावा कुछ भी निश्चित नहीं. वैसे इस सूची में जरूरत पड़ने पर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के गोल को भी शामिल किया जा सकता है. 2013-14 में रियल मैड्रिड के लिए खेलते हुए उन्होंने 47 मैचों में 51 गोल ठोके हैं जो एक असाधारण उपलब्धि है. 29 वर्षीय रोनाल्डो अपनी क्षमताओं के चरम पर हैं और यही सबसे बड़ी वजह है कि पुर्तगाल के पास विश्व कप जीतने का अब तक का सबसे अच्छा मौका है. हालांकि ब्राजील तक पहुंचने का उसका सफर मुश्किल रहा. विश्व कप के लिए क्वालीफाइ करने के सफर में पाउलो बेंटो की इस टीम की राह स्वीडन ने रोक दी थी. हालांकि स्वीडन को 4-2 से पछाड़कर पुर्तगाल इस बाधा से पार पाने में कामयाब रहा. अपनी टीम के लिए चारों ही गोल रोनाल्डो ने किए.यही वजह है कि पुर्तगाल की टीम का केंद्र रोनाल्डो ही हैं. इसके अलावा ब्रूनो एल्वेस और पेपे के रूप में टीम के पास दो अच्छे डिफेंडर हैं जबकि जे पेरेरा और फाबियो कोएंट्राव पर रोनाल्डो के साथ मिलकर विपक्षी रक्षापंक्ति को भेदने का जिम्मा है. विलियम कारवाल्हो और जे माटिन्हो के रूप में पुर्तगाल के पास दो शानदार मिडफील्डर हैं. पिछले कुछ समय में लगातार अपने खेल में सुधार करने वाले माटिन्हो का रोनाल्डो के साथ कितना अच्छा तालमेल बनता है, इस पर पुर्तगाल का काफी कुछ निर्भर करेगा. पुर्तगाल के साथ हमेशा से यह समस्या रही है कि उसके पास सही मायनों में एक ऐसे खिलाड़ी की कमी रही है जिसे गोल के मामले में अकेला शिकारी कहा जा सके. लेकिन फिर यह भी है कि उसके पास क्रिस्टियानो रोनाल्डो तो हैं ही.

अमेरिका

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विश्व रैंकिंग: 13
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनतीसरा स्थान (1930)

खास बात
स्ट्राइकर जोजी एल्टीडोर की फॉर्म पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही थी. 2013-14 में अपने क्लब संडरलैंड के लिए प्रीमियर लीग के 30 मैचों में वे सिर्फ एक ही गोल कर पाए. लेकिन कोच युर्गन क्लिंसमन ने उन पर भरोसा जताया है और 24 साल के एल्टीडोर भी अपने देश के लिए खेलते हुए बिल्कुल अलग ही खिलाड़ी नजर आ रहे हैं
इस अमेरिकी टीम के कोच वही युर्गन क्लिंसमन हैं जिन्होंने 1990 में पश्चिमी जर्मनी को विश्व कप जिताने और फिर इस सदी के शुरुआती दशक में जर्मनी की टीम को गर्त से उठाने में अहम भूमिका निभाई थी. सटीक जवाबी हमला करने के लिए मशहूर अमेरिकी टीम को अपने ग्रुप में मौजूद घाना, पुर्तगाल और जर्मनी से पार पाने के लिए इससे भी ज्यादा कुछ करके दिखाना होगा. वैसे यह भी दिलचस्प है कि इस वक्त जर्मनी के कोच वही जोशिम लो हैं जो कभी क्लिंसमन के सहायक हुआ करते थे. इस लिहाज से 26 जून को होने वाला अमेरिका-जर्मनी मुकाबला दिलचस्प होगा. क्लिंसमन की रणनीतियों पर अमेरिका में सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि टीम में उत्साह फूंकने के मामले में उनकी क्षमताओं का कोई जवाब नहीं. अमेरिकी टीम में टिम हॉवर्ड की ख्याति एक अच्छे गोलकीपर की है तो मैट बेसलर की अगुवाई में उसकी सुरक्षा पंक्ति भी मजबूत मानी जाती है. मध्यपंक्ति की ताकत माइकल ब्रैडली हैं जिनका साथ देने के लिए जर्मेन जोंस और जूलियन ग्रीन रहेंगे. जोंस और ग्रीन दोनों की ही जड़ें जर्मनी में हैं और वे भी जर्मनी से होने वाले मुकाबले का इंतजार कर रहे होंगे. क्लिंसमन ने मशहूर स्ट्राइकर लैंडन डोनोवैन को टीम में न लेने का फैसला किया था जिसके चलते गोल करने के लिए अमेरिका को और ज्यादा संघर्ष करना पड़ सकता है. क्लिंट डेंप्सी और जोजी एल्टीडोर भले ही रोनाल्डो या मैसी न हों, लेकिन कभी-कभी बड़े-बड़े नाम फुस हो जाते हैं और वे ही कमाल कर जाते हैं जिनकी तरफ लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं होता.

ईरान

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विश्व रैंकिंग: 43
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनप्रथम चरण (1978, 1998, 2006) 

खास बात
ईरानी टीम की खास बात है इसकी ठसक. क्वालीफाइंग मुकाबलों में उसका आखिरी मैच दक्षिण कोरिया से था. ईरानी टीम के कोच कार्लोस क्वीरोज ने उस मैच के दौरान दुखी भाव लिए द. कोरिया के कोच का एक फोटो अपनी शर्ट पर टांक रखा था. प्रशंसकों को यह अंदाज खूब पसंद आया

एशिया में ईरान की रैंकिंग पहली है और क्वालीफाइंग मुकाबलों में उसने यह बात साबित भी की. ईरानी टीम ने अपने ग्रुप में सबसे ऊपर रहते हुए विश्व कप में प्रवेश किया है. क्वालीफाइंग मैचों की शुरुआत में उसका प्रदर्शन कुछ खास नहीं था, लेकिन फाइनल ग्रुप के तीनों मैच और दक्षिण कोरिया के खिलाफ आखिरी मैच में फारसियों का प्रदर्शन शानदार रहा. ईरानी टीम के बारे में एक बात महत्वपूर्ण है कि क्वालीफाइंग मुकाबलों में वह 10 क्लीन शीट ( दस मैचों में टीम के विरुद्ध एक भी गोल नहीं हुआ) के साथ काफी रक्षात्मक दिखाई दी. यह उसकी कमजोरी भी है और ताकत भी. इन मैचों में उसका आक्रामक प्रदर्शन दिखाई नहीं दिया. इसके बावजूद भी इस टीम से विश्वस्तरीय प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है. टीम के दो खिलाड़ी – अश्कान देजगह (फुल्हम के मिडफील्डर) और रेजा घूचन्नेजाद (चार्ल्टन क्लब के स्ट्राइकर) इंग्लैंड में खेलते हैं. फिर मिडफील्डर के तौर पर खेलने वाले जवाद निकोनम भी हैं जिन्हें ईरान का सबसे खूबसूरत खिलाड़ी कहा जाता है. हालांकि ईरान को दूसरे राउंड में जाने के लिए मैचों में सही समय पर जवाद का अनुभव और 26 वर्षीय रेजा की चुस्तीफुर्ती की जरूरत होगी.

नाइजीरिया

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विश्व रैंकिंग: 44
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : द्वितीय चरण (1994, 1998)

खास बात
मिकेल जॉन ओबी को उनकी स्पीड और चतुराई भरे पास के लिए नहीं जाना जाता लेकिन यह काम विक्टर मोसेज बहुत अच्छे से कर सकते हैं. वे लेफ्ट मिडफील्डर की तरह से खेल सकते हैं तो विंगर (आक्रमण पंक्ति के खिलाड़ी) के तौर पर भी आ सकते हैं. विरोधी टीम पर आक्रमण की रणनीति में विक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

ग्रुप एफ में नाइजीरिया के बारे में कहा जा रहा है कि वह अर्जेंटीना के साथ ही आगे बढ़ेगा. अफ्रीका की यह टीम अपने लंबे और ऊंचे फुटबाल पास तथा पेनॉल्टी बॉक्स के पास खतरनाक ड्रिबलिंग के लिए जानी जाती है. अर्जेंटीना के मैसी को इससे सावधान रहना होगा. पिछले दिनों अफ्रीका कप के फाइनल में नाइजीरिया ने बुरकीना फासो को इन्हीं रणनीतियों से 4-1 की शिकस्त दी थी. लंबे और तगड़े नाइजीरियाई अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के सामने दीवार की तरह मजबूत रक्षा पंक्ति बना सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अर्जेंटीना के सामने इस टीम से बहुत उम्मीदें बढ़ाई जाएं. आखिर अर्जेंटीना में मैराडोना की विरासत वाले खिलाड़ियों की कमी नहीं है. नाइजीरिया टीम के लिए एक झटका इस टीम में फॉरवर्ड खिलाड़ी चिनेडी ओबासी का न होना है जो 2010 की विश्व कप टीम में थे. उस टीम से गोलकीपर विन्सेंट एनीयेमा इस टीम में भी हैं. वे मैसी के लिए एक चुनौती होंगें क्योंकि उन्होंने अर्जेंटीना के इस स्टार खिलाड़ी को अपनी टीम के खिलाफ एक भी गोल नहीं करने दिया था.