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प्रतिशोध का उन्माद दो सौ साल बाद भी!

koregaon

अजीबो गरीब बात है कि प्रतिशोध का उन्माद दो सौ साल बाद भी अपना असर दिखाए। मारपीट-आगजनी-हिंसा देखते-देखते भयावह हो जाए। दूसरे दिन महाराष्ट्र के दूसरे इलाकों में भी पथराव-तोडफ़ोड़, हिंसा का फैलाव हो। इन सबके लिए राज्य का पुलिस प्रशासन और खुफिया एजंसियां जि़म्मेदार हैं। मुख्यमंत्री ने ज़रूर न्यायिक जांच बिठा दी है लेकिन क्या यह समाधान है? यह मामला राज्यसभा में भी उठा। जिस पर सदन स्थगित हुआ।
महाराष्ट्र के पुणे मेें आठ-दस हजार की आबादी का गांव है कोरेगांव-भीमा। यहां दो सौ साल पुराना युद्ध स्मारक है। हर साल की तरह इस साल भी पहली तारीख को युद्ध स्मारक के आस-पास मेला जुड़ा। भाषण हुए। विचित्रानुष्ठान हुए। अचानक मारपीट हुई और वहां खड़ी गाडिय़ों में आग लगा दी गई। वहां मौजूद पुलिस-होमगार्ड भी तमाशबीन बने रहे। यहां हुई हिंसा का फैलाव महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में दिखा। राजधानी मुंबई के कई इलाके इसकी चपेट में आए। तीसरे दिन इन घटनाओं के विरोध में ‘बंदÓ हुआ। शाम को यह ‘बंदÓ वापस लिया गया। लेकिन कई शहरों में दो सौ साल से बनी जातीय एकजुटता की चूलें हिला गया। यदि राज्य प्रशासन पहले से सक्रिय रहा होता तो यह नौबत ही नहीं आती। पुणे की देहात पुलिस के क्षेत्र में आता है पिंपरी पुलिस स्टेशन। पुलिस ने भिडे, एकबोटे और उनके समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें हिंदूवादी मिलिंद एकबोटे है जो समस्त हिंदू अगाडी के ही हैं और ‘शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तानÓ के सामाजी भिडे है। इन पर भीमा कोरेगांव के युद्ध की दो सौवीं वर्षगांठ पर हिंसा भड़काने का आरोप है।
भिडे इस समय 85 साल के हैं और सांगली निवासी हैं। जबकि एकबोटे साठ साल के हैं और पुणे में ही रहते हैं। दोनों का महाराष्ट्र में खासतौर पर युवा वर्ग में काफी प्रभाव है। इस मारपीट, पथराव, आगजनी और हिंसा में इन्होंने खासी भूमिका निभाई।
नए साल पर मंगलवार को कई नेता मसलन दलित नेता और भारतीय रिपब्लिकन पार्टी, बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने इन दोनों हिंदूवादियों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया जिसमें 30 साल के एक नौजवान की मौत हो गई। पिंपरी पुलिस स्टेशन में भिडे, एकबोटे और उनके  समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है और इन्हें पुणे देहात पुलिस के हवाले कर दिया गया है। जिसकी सीमा क्षेत्र में कोरेगांव भीमा है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता अमित रवींद्र साल्वे की शिकायत पर दर्ज की गई जो बहुजन रिपब्लिक सोशलिस्ट पार्टी की सदस्य हैं।
अपनी शिकायत में साल्वे ने लिखा है कि जब वह अपनी मित्र के साथ भीमा कोरेगांव सोमवार को पहुंचीं तो कुछ लोगों ने उनसे झंडे छीने और उनमें आग लगा दी। मैंने खुद आरोपी ‘भिडेÓ एकबोटे और उनके समर्थकों को आगजनी करते हुए, पत्थर फेंकते हुए देखा है। इन्होंने पुलिस पर भी हमला किया।
भिडे को भिडे गुरूजी के नाम से पूरे महाराष्ट्र में जाना जाता है। वे शिवाजी के अनुयायी हैं और उनके भक्तों में कई सौ नौजवान हैं। भिडे ने अपना संगठन चलाने से पहले पुणे में किसी कॉलेज में कुछ समय पढ़ाया भी। पहले से उनके संगठन के सदस्यों के खिलाफ कई मामले पुलिस में दर्ज हैं। एकबोटे पहले कारपोरेटर थे। उसके संगठन ने कई ऐसी गाडिय़ां पकड़ी जिनसे गाएं ले जाई जाती थीं। इन पर हत्या, दंगा करने और प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटी कानून की धाराएं भी हैं।
इस बीच दक्कन पुलिस स्टेशन में गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्र उमर खालिद जो एल्गार परिषद के शनिवाखडा में 31 दिसंबर को बोल रहे थे उनके खिलाफ उत्तेजक भाषण देने की शिकायत दर्ज की गई है। इसे अक्षय बिक्कड (22) और आनंद घोंड (25) ने दायर किया है। इन्होंने मांग की है कि इनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो।
भीम कोरेगांव झड़पों का मुद्दा ज़ोरदार तरीके से राज्यसभा में उठा। जबकि बहस द मुस्लिम वीमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑफ मैरीज) बिल 2017 पर होनी थी। यह तीन तलाक के बतौर भी जाना जाता है। यह पहले ही लोकसभा में पास हो चुका है। विपक्षी सदस्यों ने शून्य काल में यह मामला उठाया और सदन दो बजे तक स्थगित कर दिया गया। पहले अध्यक्ष ने सदन के स्थगन की अनुमति नहीं दी फिर सदस्यों ने विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया।
तकरीबन दो सौ साल पहले भीमा कोरेगांव युद्ध पुणे जि़ले में हुआ था। यहीं ईस्ट इंडिया कंपनी ने पेशवा की सेना को हराया था। नए साल पर सोमवार को हिंसा की घटनाओं से पुणे शहर में जबदस्त तनाव रहा। इसमें एक मौत हुई और कई घायल हो गए।
इस हिंसा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा-आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उनकी निगाह में ऐसा भारत है जिसमें भारतीय समाज में दलित सबसे नीचे के पायदान पर हैं। ट्विटर पर उन्होंने लिखा ‘आरएसएस व भाजपा के फासीवादी दृष्टिपत्र में ऐसा भारत बताया गया है जहां दलित भारतीय समाज में सबसे नीचे रहेंगे। ऊमा, रोहित वेमुला और भीम कोरेगांव उसी प्रतिरोध के प्रतीक हैं।Ó
इस हिंसा का असर मुंबई पर भी पड़ा। चेंबूर, मुलंड खासे उपद्रवग्रस्त रहे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ने तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। इस बीच मरिया बहुजन महासंघ (बीबीएम) के नेता प्रकाश अंबेडकर ने बुधवार (तीन जनवरी को) हिंसा न रोक पाने में राज्य सरकार की नाकामी पर विरोध जताने के लिए ‘बंदÓ का आयोजन किया जो पचास फीसदी से ज्य़ादा प्रभावी रहा है। महाराष्ट्र सरकार की न्यायिक जांच के आदेश को प्रकाश अंबेडकर ने मानने से इंकार कर दिया है।
अंबेडकर का कहना है कि हिंसा के लिए हिंदू एकता अधाडी के लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र डेमोक्रेटिक फ्रंट, महाराष्ट्र लेफ्ट फ्रंट और ढाई सौ संगठनों ने बुधवार को बंद रखा। पुणे में हुई हिंसा के चलते महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से हिंसा की खबरें हैं।

युवाओं का साथ पाने के लिए हुई हुंकार रैली

Jignesh Mevani Rally

देश के जनसमाज को जागरूक करने के लिए देश का युवा वर्ग आज आंदोलन की राह पर है। जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल, और अल्पेश ठाकोर जैसे युवाओं ने आपसी एकजुटता के साथ एक राज्य में सत्ता को चुनौती दी। मुकाबला भी खासा चुनौती पूर्ण रहा। देश के युवाओं को साथ लेने की अपील के साथ दिल्ली में ‘युवा हुंकार रैलीÓ तमाम पुलिसिया-प्रशासनिक बाधाओं के बाद भी हुई।

इस रैली से यह आभास ज़रूर हुआ कि देश का युवा फिर सक्रिय है जनसमाज को साथ लेकर आंदोलन करने के लिए। वह भारतीय छात्रों को धर्मों और जातियों में नहीं बांटने देने चाहता। वह तो सस्ती, उपयोगी और उच्च स्तरीय शिक्षा और स्तरीय शोध की मांग कर रहा है। वह रोज़गार की बात कर रहा है। युवा लोगों की यह हुंकार रैली थी। इसमें वादा किया गया कि हर प्रदेश, हर जि़ले में छात्रों की अब बड़ी रैलियां होंगी। इस रैली में युवाओं ने किसी भी राजनीतिक दल से अपने जुड़ाव की बात नहीं की। अपनी निराशा की वजहें गिनाई। अपनी एकता पर ज़ोर दिया और दमन और गिरफ्तारियों का विरोध किया। संविधान को माना और कहा व्यवस्था परिवर्तन में अब अपनी हिस्सेदारी लेनी होगी।

नई दिल्ली में नौ जनवरी को संसद मार्ग पर युवाओं की हुंकार रैली हुई। गुजरात के युवा नेता जिग्नेश मेवाणी और कई दूसरे युवा नेताओं की अपील पर यह रैली आयोजित थी। यह रैली दूसरी रैलियों से कहीं अलग और जबरदस्त थी। यह

रैली बेरोजगारी दूर करने, सरकार की नाकामी और मुस्लिम एवं दलितों के दमन के विरोध में हुई।

पुलिस प्रशासन ने पहले यह प्रचारित किया कि रैली रद्द हो गई है। फिर सवाल उठाया गया कि क्या नियमों को तोड़ कर यह रैली होनी चाहिए थी। जिन्होंने हिम्मत की उन्हें दिल्ली क्षेत्र की सीमाओं पर ही रोक दिया गया। गाडिय़ों, बसों और ट्रकों में आ रहे युवाओं को रोक दिया गया।यह जानकारी दी आयोजकों ने। यह रैली इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोक के बाद भी लोग जुटे। यहां विभिन्न जाति, संप्रदाय के युवक ही नहीं, युवतियां भी थीं।

इस रैली में गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी , कन्हैया कुमार, उमर खालिद, असम के किसान नेता अखिल गोगोई, शहला रशीद और कई युवा संगठनों के युवा नेताओं ने समानता की बात की। सामाजिक न्याय की बात की। इन वक्ताओं ने न सुनने वाली व्यवस्था को बदलने की बात की। देश के संविधान को सर्वोपरि माना। भगत सिंह, डा. अंबेडकर के दर्शन को माना और अपील की कि घर-घर से युवा निकलें और आंदोलन से जुडें़। हम शोषित किए जाते रहे हैं। संविधान को बदलने और महिलाओं को सम्मान नहीं देने वाले देशद्रोही हैं।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने चिरपरिचित अंदाज में सीधे तौर पर मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज देश में भाजपा और आर एस एस के नेता विभाजन की रेखाएं खींच रहे हैं। जो लोग दलित और अल्पसंख्यक हैं और वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हां -हां में नहीं मिलाते हैं उन्हें गाली दी जाती है, उनके घर जलाए जाते हैं और मारपीट की जाती है। देश के किसान आत्म हत्या कर रहे हैं। बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है बस सरकार अम्बानी और अड़ानी को फायदा पहुंचाने पर सोचती है।सरकार की नीतियों में विकास की बात नहीं हो रही है उन्होंने कहा कि अभी हाल में जेएनयू में प्रोफेसर पद के चयन के लिये गौशाला के बारे में पूछा गया। इससे साफ होता है कि सरकार की सोच किस दिशा में जा रही है।

युवा नेता उमर खालिद ने तीखे अंदाज में सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मीडिया को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज दोनों भटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि साढ़े तीन साल पहले जब देश में मोदी की लहर और मोदी सरकार की बातें होती थी तो विपक्ष डरा था कि अब विपक्ष नहीं बचा है। लेकिन अब उस सरकार के दिन लदने वाले हैं। क्योंकि सरकार विकास की बात न करके धु्रवीकरण कर देश को बांटने में लगी है। सरकार दलित, किसानों और मजदूरों के साथ- साथ गरीबों की पढ़ाई के लिए तो पैसों का रोना रोती है जबकि अंबानी और अड़ानी के लिये हजारों करोड़ रुपये मांफ करने में लगी है।

खालिद ने कहा कि जिस तरह सन् 1857 में आजादी की लड़ाई लड़ी लगी थी उसी तर्ज पर किसानों ,अल्पसंख्यकों और दलितों के अधिकारों की लडाई लडी जा रही है। पुणे के कोरेगांव में दलितों पर जो आरएसएस और भाजपा ने साजिश रची है वह निदंनीय है। खालिद ने कहा कि सहारनपुर में चन्द्रशेखर पर जो रासुका लगाया गया है उसको हटाया जाए। दलित नेता सुनील तेवतिया और डॉ ए के गौतम ने कहा कि पुणे के कोरेगांव में दलितों के साथ आरएसएस और भाजपा ने किया है उसकी उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा, संसद मार्ग पर रैली होने देना लेकिन जंतर-मंतर पर युवा हुंकार रैली को अनुमति न देना मोदी का गुजरात मॉडल है। देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए यह सरकार खतरा है। जब भी वे गुजरात आते हैं, मुझे हिरासत में ले लिया जाता है। दिल्ली में रैली करने आता हूं तो अनुमति नहीं मिलती। देश की 125 करोड़ जनता देख रही है कि लोगों को बोलने नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने दलित नेता चंद्रशेखर आजाद रावण की रिहाई की मांग की। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुई ठाकुरों और दलितों के बीच हिंसक झड़प में तीस साल के आजाद को पिछले साल जून में गिरफ्तार किया गया। वे जमानत पर छूटे फिर उन्हें रासुका में बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि हम यहां जोडऩे की बात करने आए हैं। वे लव जिहाद में गिरफ्तारी करते हैं। हम 14 फरवरी को ‘वैलेटाइन डेÓ भी सेलिब्रेट करेंगे। दलित-आदिवासी को ज़मीन दो ,अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरियां दो। लेकिन ये उसके लिए तैयार नहीं हैं। युवा वर्ग की अगुवाई में इनको चुनौती दी इसलिए हमें टारगेट किया जा रहा है। हम किसी भी समुदाय, जाति और धर्म के खिलाफ नहीं हैं। हम प्यार-मुहब्बत का ही गाना गाएंगे।

प्रधानमंत्री जवाब दें कि कोरेगांव की हिंसा क्यों कराई गई। अखिल गोगई पर मुकदमा क्यों दर्ज हुआ। सहारनपुर, भीमा कोरेगांव क्यों हो रहा है। मध्यप्रदेश के किसानों पर गोलियां क्यों दागी गईं। रोहित की हत्या क्यों हुई।

हम प्रधानमंत्री से सवाल पूछेंगे। उनसे ये सवाल गुजरात विधानसभा और सड़कों पर भी पूछेंगे। हम लोकतंत्र और संविधान बचाना चाहते हैं। मेरे एक हाथ में मनुस्मृति और दूसरे में संविधान है। हमारा एक प्रतिनिधिमंडल लोक कल्याण मार्ग पर उनके घर तक जाएगा और उनसे दोनों में से किसी एक को चुनने को कहेगा।

आज प्रधानमंत्री मोदी को मनुस्मृति और संविधान में से किसी एक को चुनना होगा और रोहित वेमुला की हत्या और नजीब अहमद के लापता होने और चन्द्रशेखर की रिहाई पर जवाब देना होगा।

 

हुंकार रैली क्या वाकई थी फ्लाप शो

देश का युवा जिग्नेश मेवाणी, कन्हैया, उमर, अखिल गोगई, शेहला और दूसरे कई और युवा नेताओं ने जंतर-मंतर पर नौ जनवरी को रैली की। ज़्यादातर मीडिया के लिए यह ‘फ्लाप शो था लेकिन देश और लोकतंत्र की खातिर युवाओं की यह जन-सामाजिक रैली थी। देश का युवा अब गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहा है और सत्ता राजनीति के खेल को समझ रहा है।

अजय कुमार सिंह

जामिया मिलिया उस्मानिया विश्वविद्यालय

इस साल से हज सब्सिडी समाप्त करने का एलान

haj subsidy

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार सरकार इस साल से हज के लिए कोई सब्सिडी नहीं देगी।
नकवी ने संवाददाताओं से कहा कि सब्सिडी निकासी के बावजूद इस साल भारत से 1.75 लाख मुसलमानों के हज पर जाने की उम्मीद है।
नकवी ने यह भी कहा कि सऊदी अरब सरकार ने सिद्धांत रूप से जहाजों द्वारा भारत से हज यात्रा की अनुमति देने के लिए सहमति दी है और दोनों देशों के अधिकारियों ने रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए एक बैठक की जाएगी।
नकवी ने संवाददाताओं से कहा, ” यह क़दम अल्पमत के साथ अतुष्टिकरण के बिना ल्पसंख्यकों को सशक्त बनाने की हमारी नीति हिस्सा है।”
अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कई उपायों का हवाला देते हुए इस साल के शुरू में नकवी ने कहा था कि केंद्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हज यात्रियों के लिए सब्सिडी खत्म करेगा।
“सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने 2012 में कांग्रेस शासन के दौरान निर्देश दिया था कि हज सब्सिडी समाप्त की जाये। इसलिए एक समिति की सिफारिशों के अनुसार हमने फैसला किया है कि धीरे-धीरे हज सब्सिडी ख़तम कर दी जाएगी, “उन्होंने कहा था।

इस सप्ताह के अंत तक सुलझ सकती है सर्वोच्च न्यायालय की दुविधा

supreme court

सर्वोच्च न्यायालय दुविधा से अभी पूरी तरह उबर नहीं पाया है हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि इस सप्ताह के भीतर सब कुछ समान्य जायेगा ।

जहाँ अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने आज कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उच्चतम न्यायालय में संकट अभी सुलझा नहीं है, वहीं उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने उम्मीद जताई कि इस सप्ताह के अंत तक संकट सुलझ जाएगा।

वेणुगोपाल ने कल कहा था कि शीर्ष न्यायालय में सब कुछ सुलझ गया है। हालांकि आज उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि संकट अभी सुलझा नहीं है। उम्मीद करते हैं कि दो-तीन दिन के भीतर चीजें सुलझ जाएंगी।’’

उच्चतम न्यायालय में 12 जनवरी को तब संकट उत्पन्न हो गया था जब चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में शीर्ष न्यायालय के कामकाज की खुले तौर पर आलोचना की थी।

संकट के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ वकील और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष सिंह ने पी टी आई को आज बताया कि इस संकट के सप्ताह के अंत तक सुलझ जाने की संभावना है।

मौजूदा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इस सप्ताह के अंत तक संकट के सुलझने की उम्मीद है।’’

सिंह ने कहा कि जब उन्होंने रविवार को प्रधान न्यायाधीश को एससीबीए का प्रस्ताव सौंपा तो उन्हें ऐसा लगा कि संकट सुलझ जाएगा।

सिंह ने कहा कि सीजेआई ने उम्मीद जताई थी कि एक सप्ताह के भीतर स्थिति सामान्य हो जाएगी।

उन्होंने भी यह कहा कि अभी तक ऐसा लग रहा है कि सबकुछ सामान्य हो रहा है।

एससीबीए ने शनिवार को अपनी आपात बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर प्रधान न्यायाधीश से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की बैठक बुलाने तथा सभी लंबित जनहित याचिकाओं को सुनवाई के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को स्थानांतरित करने के लिए कहा, जो कॉलेजियम के सदस्य हैं।

चार न्यायाधीशों या सीजेआई से कोई मुलाकात या उनसे कोई बातचीत करने के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ नहीं हुआ।’’

बहरहाल, उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ दिनों में संकट सुलझ जाएगा।

उच्चतम न्यायालय के शीर्ष चार न्यायाधीशों ने कल काम शुरू कर दिया। अटॉर्नी जनरल ने इस अभूतपूर्व संकट को ‘‘राई का पहाड़ बना देना’’ बताया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ चारों न्यायाधीशों ने उच्चतम न्यायालयों में मामलों के आवंटन समेत कुछ समस्याएं उठाई और उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो देश के शीर्ष न्यायालय को प्रभावित कर रहे हैं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने रविवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तथा उच्चतम न्यायालय की बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह से मुलाकात की थी तथा उन्हें आश्वासन दिया था कि संकट जल्द ही सुलझ जाएगा तथा फिर से सद्भावना कायम होगी।

मोदी, नेतन्याहू ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर की बातचीत

modi netanyahu

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इस्राइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ आज प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बातचीत की। इस दौरान उन्होंने रक्षा, कारोबार और आतंकवाद समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की।
नेतन्याहू अपनी छह दिवसीय यात्रा पर कल यहां पहुंचे थे। उनके साथ इस्राइल के वरिष्ठ अधिकारी और उच्च स्तरीय कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
अपने भारत दौरे के दौरान इस्राइली प्रधानमंत्री गुजरात और मुंबई भी जाएंगे।
नेतन्याहू ने उन सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिनकी मृत्यु प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफ़ा में हुई थी। प्रधान मंत्री मोदी ने इजरायली नेता के लिए एक निजी रात्रिभोज की मेजबानी की। दोनों ने पिछले साल प्रधान मंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा के दौरान एक अच्छे संबंधों की शुरूआत की थी।
नेतन्याहू और मोदी ने शिष्टमंडल स्तर की वार्ता आयोजित की और एक संयुक्त बयान दिया। बाद में दिन में, इजरायल के नेता राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करेंगे नेतनयाहू को भारत-इजरायल बिजनेस समिट के साथ दिन का अंत होगा।

बीसीआई की 7-सदस्यीय टीम सर्वोच्च न्यायालय के जजों से मिलेगी

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बार कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान संकट पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों से मिलने के लिए सात सदस्यीय टीम बनाई।

इस टीम ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया कि किसी भी राजनैतिक दल या नेता को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रेस सम्मेलन से उत्पन्न होने वाली स्थिति का अनुचित फायदा उठाना नहीं चाहिए।

बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों से मिलने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने सात सदस्यीय दल की स्थापना की गयी है, जो पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों को छोड़कर बाक़ी सबसे मौजूदा संकट पर चर्चा करेगी।

वरिष्ठ वकीलों की कॉउन्सिल ने यह भी निर्णय लिया कि वह अन्य न्यायाधीशों की राय लेगी और उनसे ये भी आग्रह करेगी कि न्यायाधीशों के ऐसे मुद्दों को सार्वजनिक नहीं बनाया जाना चाहिए।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति चेलेमेश्वर, रंजन गोगोई, एम बी लोकुर और कुरियन जोसेफ ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ एक प्रेस कांफ्रेंस करके न्यायलय में होने वाली मुश्किलों का ख़ुलासा किया था।

भारत में पहली बार अदालत की कार्यप्रणाली पर जजों ने खड़े किये सवाल

देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके १२ जनवरी को शीर्ष अदालत के प्रशासन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रंजन गोगोई ने शुक्रबार को दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस करके देश में हलचल मचा दी है। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर माने जाने वाले जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा – ”करीब दो महीने पहले हम चार जजों ने मुख्या न्यायधीश (दीपक मिश्रा) को पत्र लिखा और उनसे भेंट भी की। हमने मुख्य न्यायाधीश को बताया कि जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है। यह मामला एक केस के असाइनमेंट को लेकर था।”
प्रेस कांफ्रेंस से जाहिर होता है कि मुख्या न्यायाधीश से कुछ मुद्दों पर इनके मतभेद हैं।  देश में यह पहला मौका है कि वरिष्ठ आज मीडिया से रूबरू हुए हैं। जजों ने प्रेस कांफ्रेंस के बाद मीडिया को एक स्टेटमेंट की कॉपी भी बंटी है। ऐसा मन जा रहा है कि इस प्रेस कांफ्रेंस का बड़ा असर हो सकता है। जजों  के पत्र से साफ़ जाहिर होता है कि इसमें कहीं न कहीं सरकार के हस्तक्षेप का भी आरोप है। चेलामेश्वर ने कहा, ” बीस साल बाद कोई यह न कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी है। इसलिए हमने मीडिया से बात करने का फैसला किया।” चेलामेश्वर ने कहा कि भारत समेत किसी भी देश में लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था सही ढंग से काम करे। कहा कि ”हालांकि हम चीफ जस्टिस को अपनी बात समझाने में असफल रहे। इसलिए हमने राष्ट्र के समक्ष पूरी बात रखने का फैसला किया।”
प्रेस कांफ्रेंस में यह पूछे जाने पर कि किस मामले को लेकर उन्होंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा कि यह एक केस के असाइनमेंट को लेकर था। यह पूछे जाने पर कि क्या यह सीबीआई जज जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत से जुड़ा मामला है, कुरियन ने कहा, ‘हां’। इस बीच सीजेआई को लिखा पत्र जज मीडिया को देने वाले हैं, जिससे पूरा मामला स्पष्ट हो सकेगा कि किस मामले को लेकर उनके चीफ जस्टिस से मतभेद हैं।
चेलामेश्वर ने कहा कि हमारे पत्र पर अब राष्ट्र को विचार करना है कि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए या नहीं। जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि यह खुशी की बात नहीं है कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही से नहीं चल रहा है। बीते कुछ महीनों में वे चीजें हुई हैं, जो नहीं होनी चाहिए थीं।

चारों जजों की तरफ से लिखा गया पत्र –

judge 7 judge 2 (1) judge 2 (2) judge 3 judge 5 judge 6

16 अंकों की वर्चुअल आईडी से हो सकेगी आपके आधार की सुरक्षा

aadhaar

अगर आपको किसी सर्विस की सेवा के लिए बार-बार आधार कार्ड या आधार नंबर की पहचान कराने की जरूरत होती है या फिर आधार के डेटा की गोपनीयता का खतरा बना रहता है तो अब न सिर्फ इस झंझट से छुटकारा मिलने वाला है, बल्कि आपका डाटा और भी ज्यादा सुरक्षित होने वाला है।
आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने इसकी सिक्योरिटी के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस दिशा में यूआईडीएआई ने एक नया कॉन्सेप्ट पेश किया है जिसका नाम है ‘वर्चुअल आईडी’। अब विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अपना आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा। आधार कार्ड होल्डर इसकी वेबसाइट से अपना 16 अंकों का वर्चुअल आईडी बना सकेगा जिसे वह सिम वेरिफिकेशन समेत विभिन्न जगह दे सकता है। यानी अब उसे अपना 12 अंकों का बायोमेट्रिक आईडी देने की जरूरत नहीं होगी।
नई प्रणाली का उद्देश्य आधार संख्या के लीक होने और दुरुपयोग के मामलों को कम करना है और 119 करोड़ लोगों की पहचान संख्या की गोपनीयता को बढ़ावा देना है. अब आधार डिटेल देने के समय या वेरिफिकेशन के समय इसी 16 अंको से काम चल जाएगा. ध्यान देने वाली बात है कि यह 16 अंकों का वर्चुअल आईडी कुछ समय के लिए ही मान्य होगा. तय समय के बाद यूजर को अपना नया आईडी जारी करना होगा।
यूआईडीएआई ने कहा है कि एक मार्च से यह सुविधा आ जाएगी। हालांकि 1 जून से यह अनिवार्य हो जाएगी।
यूजर जितनी बार चाहे उतनी बार वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकेगा। यह आईडी सिर्फ कुछ समय के लिए ही वैलिड रहेगी।
यूआईडीएआई के मुताबिक यह सीमित केवाईसी होगी। इससे संबंधित एजेंसियों को भी आधार डिटेल की एक्सेस नहीं होगी। ये एजेंसियां भी सिर्फ वर्चुअल आईडी के आधार पर सब काम निपटा सकेंगी। यूआईडीएआई ने वर्चुअल आईडी की जो व्यवस्था लाई है, इसके तहत यूजर जितनी बार चाहे उतनी बार वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकेगा। यह आईडी सिर्फ कुछ समय के लिए ही वैलिड रहेगी।
लिमिटेड केवाईसी सुविधा आधार यूजर्स के लिए नहीं बल्कि एजेंसियों के लिए है। एजेंसियां केवाईसी के लिए आपका आधार डिटेल लेती हैं और उसे स्टोर करती हैं। लिमिटेड केवाईसी सुविधा के बाद अब एजेंसियां आपके आधार नंबर को स्टोर नहीं कर सकेंगी। इस सुविधा के तहत एजेंसियों को बिना आपके आधार नंबर पर निर्भर हुए अपना खुद का केवाईसी करने की इजाजत होगी। एजेंसियां टोकनों के जरिए यूजर्स की पहचान करेंगी। केवाईसी के लिए आधार की जरूरत कम होने पर उन एजेंसियों की तादाद भी घट जाएगी जिनके पास आपके आधार की डिटेल होगी।
करीब 15,000 लोगों पर किए गए एक सवेर्क्षण में सामने आया है कि 52 फीसदी लोग सरकारी एजेंसियों द्वारा अपने आधार विवरणों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस सवेर्क्षण को नागरिक मंच लोकलसर्किल ने किया है। इसमें लोगों से उनके आंकड़ों की साइबर सुरक्षा के बारे में पूछा गया। इसमें यूआईडीएआई द्वारा आधार जानकारी को हैकरों व सूचना विक्रेताओं से सुरक्षा में समर्थ होने को लेकर सवेर् में 20 फीसदी लोगों ने ‘कुछ हद तक आश्वस्त’ होने की बात कही, जबकि 23 फीसदी ने ‘पूरा विश्वास’ जताया।

बजट पर चर्चा शुरू: टैक्स छूट सीमा में हो सकती है बढ़ोतरी

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आगामी आम बजट आने से करीब तीन सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास दर और रोजगार बढ़ाने के लिए उठाए जाने योग्य कदमों पर विचार-विमर्श करने के लिए नीति आयोग में प्रमुख अर्थशास्त्रियों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों से मुलाकात करेंगे।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक इस बैठक में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन और सदस्य, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य, अर्थशास्त्री और क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
उल्लेखनीय है कि सरकारी अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.5 फीसदी रह सकती है, जो चार साल का निचला स्तर है। विकास दर 2016-17 में 7.1 फीसदी रही थी और उससे पिछले वित्त वर्ष में आठ फीसदी थी।
2014-15 में विकास दर 7.5 फीसदी थी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को आम बजट पेश करेंगे। यह 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का आखिरी बजट होगा।

‘तूतिंग मसला’ सुलझा लिया गया है: सेना प्रमुख

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भारतीय सेना के प्रमुख बिपिन रावत के अनुसार अरुणाचल प्रदेश का ‘‘तूतिंग मसला” सुलझा लिया गया है।
याद रहे कुछ दिन पहले ही भारतीय सीमा के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में चीनी सड़क निर्माण दल के सडक बनाने के प्रयासों को भारतीय सेना ने विफल कर दिया था।
पी टी आई की रिपोर्ट के मुताबिक़ रावत ने बताया कि अरुणाचल में दो दिन पहले दोनों पक्षों के बीच हुई एक सीमा कार्मिक बैठक (बीपीएम) में इस मुद्दे को सुलझा लिया गया।
उन्होंने संवाददाताओं को बताया, “तूतिंग मुद्दा सुलझा लिया गया है।” उन्होंने बताया कि यह बैठक दो दिन पहले हुई थी।
सेना प्रमुख के मुताबिक सिक्किम सेक्टर के डोकलाम क्षेत्र में चीनी सैन्य टुकड़ियों की तैनाती में भी काफी कमी देखी गई है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि चीनी सड़क निर्माण दल, तूतिंग में भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर अंदर तक घुस आए थे। उन्होंने बताया कि वह रास्ता बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में घुसे थे।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय सैन्य दलों से सामना होते ही ये दल वापस लौट गए और पीछे सड़क निर्माण के बहुत सारे उपकरण छोड़ गए।
सिक्किम सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना के बीच 73 दिन तक चले डोकलाम विवाद के खत्म होने के चार महीने बाद इस तरह की कोई घटना सामने आई थी।