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निर्भया केस के दोषियों को फांसी ही दी जाएगी: न्यायालय

साल 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में फांसी की सजा के खिलाफ दोषियों की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

मामले में मृत्युदंड की सजा पा चुके चार दोषियों में से तीन ने सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

जिस पर उच्च न्यायालय ने कहा है कि दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रहेगी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने आरोपी विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश सिंह की याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दोषी अक्षय ठाकुर ने पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को इस मामले में दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालत द्वारा 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप और मर्डर के मामले में उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।

आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। वहीं आरोपियों में एक किशोर भी शामिल था। उसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था। उसे तीन साल सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

नॉएडा-स्थित दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्‍ट्री देगी 70,000 को रोज़गार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के पीएम मून जेई आज दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्‍ट्री का उत्तर प्रदेश में उद्घाटन कर रहे हैं।

यह फैक्ट्री नोएडा के सेक्टर 81 में स्थित सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की 35 एकड़ में फैली है जिसमें 70 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलने की आशा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नोएडा अब मोबाइल बनाने वाले शहरों के नक्‍शे में सबसे ऊपर आ जाएगा. चीन और अमेरिका के शहर उससे काफी पीछे रह जाएंगे.

मौजूदा मोबाइल विनिर्माण इकाई 2005 में लागई गई। पिछले साल जून में दक्षिण कोरियाई कंपनी ने 4,915 करोड़ रुपये का निवेश कर नोएडा संयंत्र में विस्तार करने की घोषणा की, जिसके एक साल बाद नई फैक्ट्री अब दोगुना उत्पादन के लिए तैयार है।

भाषा के अनुसार भारत में कंपनी इस समय 6.7 करोड़ स्मार्टफोन बना रही है और नए संयंत्र के चालू हो जाने पर तकरीबन 12 करोड़ मोबाइल फोन का विनिर्माण होने की संभावना है।

नई फैक्ट्री में न सिर्फ मोबाइल बल्कि सैमसंग के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे रेफ्रिजरेटर और फ्लैट पैनल वाले टेलिविजन का उत्पादन भी दोगुना हो जाएगा और कंपनी इन सारे सेगमेंट में अग्रणी की भूमिका में बनी रहेगी। काउंटर पॉइंट रिसर्च के असोसिएट डायरेक्टर तरुण पाठक के अनुसार नई फैक्ट्री से सैमसंग बाजार में कम समय में उत्पाद उतारने में सक्षम होगी।

सैमसंग की नई फैक्‍ट्री उसके 1997 में बनाए गए प्‍लांट के करीब है. पिछले साल जून में कंपनी ने 4915 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया था. इसके चलते कंपनी का उत्‍पादन दुगुना हो जाएगा. सैमसंग वर्तमान में 6.70 करोड़ फोन भारत में बना रही है और नए प्‍लांट के शुरू होने पर उसकी उत्‍पादन क्षमता बढ़कर 12 करोड़ फोन सालाना हो जाएगी.

नए प्‍लांट के शुरू होने से मोबाइल के साथ ही रेफ्रिजरेटर और फ्लैट पेनल टीवी की उत्‍पादन क्षमता भी बढ़ जाएगी और इसके जरिए कंपनी इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर लेगी. भारत में सैमसंग के दो प्‍लांट नोएडा और तमिलनाडु में श्रीपेरुम्‍बुदुर है. इनके अलावा नोएडा में एक डिजाइन सेंटर और पांच रिसर्च व डेवलपमेंट सेंटर हैं. इनमें करीब 70 हजार लोग काम करते हैं. कंपनी की डेढ़ लाख के करीब रिटेल दुकानें भी हैं.

सैमसंग ने 1996 में नोएडा प्‍लान का निर्माण शुरू किया था और अगले साल तक यहां पर पहला टीवी बना लिया गया था. 2003 में रेफ्रिजरेटर का उत्‍पादन भी शुरू कर दिया. कंपनी ने 2007 में यहां पर मोबाइल बनाना शुरू किया. अगले पांच साल में कंपनी देश की नंबर वन मोबाइल कंपनी बन गई. इसके बाद नोएडा प्‍लांट में पहली बार ‘गैलेक्‍सी एस3’मॉडल बनाया गया.

कोरियाई कंपनी वर्तमान में अपना 10 प्रतिशत उत्‍पादन भारत में करती है और अगले तीन सालों में वह इस आंकड़े को 50 प्रतिशत पर ले जाना चाहती है. काउंटरपॉइंट रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्‍टर तरुण पाठक का कहना है कि नए प्‍लांट से सैमसंग को मार्केट तक पहुंचने में कम समय लगेगा. साथ ही वह सार्क देशों में अपने निर्यात को भी बढ़ा सकती है.

बुरहान की बरसी पर कश्मीर में तनाव

हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की दूसरी बरसी के चलते कश्मीर में तनाव का माहौल है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैन्य बलों को भी तैनात किया गया है।

सूत्रों के अनुसार कश्मीर के कई जिलों में माहौल खराब होने के कारण अमरनाथ यात्रा पर रोक लगाईं जा सकती है।

शनिवार को सेना और पत्थरबाजों के बीच हुई झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए।

सुरक्षा बल शनिवार सुबह से ही जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

अलगाववादियों ने श्रीनगर बंद का ऐलान किया है जिसकी वजह से कई इलाकों में कर्फ्यू जैसा माहौल बना हुआ है।

बुरहान वानी की मौत को दो साल पूरा होने पर रविवार को अलगाववादियों की रैली करने की योजना को नाकाम करने के लिए प्रशासन ने कश्मीर के त्राल में कर्फ्यू लगा दिया है।। घाटी के शेष हिस्सों में भी लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां हैं।

शहर की तरफ जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया है और प्रतिबंधों को लागू करने के लिए पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को भारी संख्या में तैनात कर दिया गया है।

कई अहम परीक्षाएं अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी

केंद्र सरकार सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देशों के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से करवाई जाने वाली कई परीक्षाएं अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करएगी।

इन परीक्षाओं में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आवश्यक नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए करवाई जाने वाली जेईई और सीएमएटी भी शामिल है।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि नीट, जेईई, नेट की परिक्षाओं का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से किया जाएगा, जो पहले सीबीएसई की ओर से किया जाता था।

वहीं सरकार की ओर से परीक्षा के समय में भी बदलाव किया गया है।

जावड़ेकर ने बताया कि नीट की परीक्षा हर साल फरवरी और मई में कराई जाएगी. साथ ही ये परीक्षाएं कम्प्यूटर के माध्यम से करवाई जाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि नेट की परीक्षा दिसंबर में और जेईई (मेन्स) की परीक्षा हर साल जनवरी और अप्रैल में होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पहले ही इस बात की सिफारिश की थी कि परीक्षा के आयोजन के लिए एक एंजेसी होनी चाहिए जो परीक्षाओं का आयोजन कर सके।

अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर एलजी और सरकार के बीच टकराव जारी

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान जारी है।

दिल्ली के सेवा विभाग के अधिकारियों ने पुरानी पालिसी के अनुसार काम करने का फैसला किया है। पहले ये विभाग एलजी के पास था।

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नियुक्ति व तबादले के बारे में नया आदेश जारी कर दिया है,लेकिन अधिकारी इसे कानूनी तौर पर गलत बता रहे हैं।

शीर्षस्थ अधिकारियों ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बता दिया है कि वह इस आदेश को नहीं मानेंगे।

मई 2015 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के इससे जुड़े नोटिफिकेशन पर बुधवार का फैसला लागू नहीं होता।

इसके अनुसार सेवा संबंधी मामले उपराज्यपाल के अधीन चले गए थे। फिर केंद्र शासित प्रदेश होने से यह मामला समवर्ती या राज्य सूची में भी नहीं है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस मसले से जुड़ी एक याचिका पर अभी सुप्रीम कोर्ट की रेगुलर बेंच में सुनवाई चल रही है इसलिये सरकार को इस पर आदेश नहीं जारी करना चाहिये था।

बुराड़ी केस: पोस्टमॉर्टम के अनुसार सबने की थी आत्महत्या; जांच अभी जारी

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही घर में परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में हुई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक़ सब लोगों की मौत फांसी के फंदे से हुई।

लेकिन भाटिया परिवार के करीबी और रिश्तेदारों का अभी भी ये मानना है कि वह लोग आत्महत्या नहीं कर सकते।

एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अब तक गला घोंटे जाने या हाथापाई के कोई संकेत नहीं मिले हैं. पुलिस ने बताया कि दस लोग लोहे के जाल में फांसी से लटके थे जबकि 77 वर्षीय महिला घर के एक अन्य कमरे में मृत मिली थीं.

पीटीआई के मुताबिक, पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि नारायण देवी की मौत गला घोंटे जाने से हुई है लेकिन चिकित्सकों का कहना है उनकी मौत भी फांसी लगने के कारण ही हुई है क्योंकि रस्सी उनके शव के निकट लटकी हुई पाई गई. पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब यह जांच का विषय है कि उनके गले से रस्सी को निकाला किसने होगा. उन्होंने कहा, ‘शुरुआती जांच में ऐसा लगता है कि उन सभी की मौत फांसी पर लटकने की वजह से ही हुई है. अंतिम रिपोर्ट अभी आई नहीं है.’

पुलिस को घटनास्थल से मिले हाथ से लिखे कुछ नोट्स को देखते हुए पुलिस को संदेह है कि यह मामला सोच-समझकर की गई आत्महत्या का है जो किसी धार्मिक अनुष्ठान के लिए की गई प्रतीत होती है. अधिकारी के मुताबिक, कुछ नोट्स पर लिखा है कि ‘कोई मरेगा नहीं’ बल्कि कुछ ‘महान’ हासिल कर लेगा.

इस रजिस्‍टर में लिखा है कि पटिया अच्छे से बांधनी हैं, शून्य के अलावा कुछ नही दिखना चाहिए. रस्सी के साथ सूती चुनिया या साड़ी का प्रयोग करना हैं. 7 दिन बाद लगातार पूजा करनी है्. इस पूजा को थोड़ा लग्न और श्रद्धा के साथ करना है. इस पूजा के दौरान अगर कोई घर में आ जाए तो यह पूजा अगले दिन करनी है. इस पूजा के लिए गुरुवार और रविवार को चुना है.

रजिस्‍टर में लिखा है कि बुजुर्ग महिला बेबे खड़ी नहीं हो सकती तो अलग कमरे में लेट सकती हैं. इस रजिस्‍टर में लिखा है कि परिवार के सभी लोगों की सोच एक जैसी होनी चाहिए. ये पहले से ज्यादा दृढ़ता से बढ़ना होगा और ये करते ही तुम्हारे आगे के काम दृढ़ता से शुरू होंगे.

पुलिस की छानबीनअभी भी जारी है और वह अंधविश्वास समेत सभी ऐंगल पर मामले की जांच कर रही है।

मृतकों में नारायण देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57) और दो बेटे भावनेश (50) और ललित भाटिया (45) शामिल हैं।

भावनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15), ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उनका 15 वर्ष का बेटा शिवम , प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) भी मृत पाए गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रियंका की पिछले महीने ही सगाई हुई थी और इस साल के अंत तक उसकी शादी होनी थी। मीनू प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी जबकि निधि स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही थी.

1,500 भारतीय तीर्थयात्री ख़राब मौसम के कारण तिब्बत में फंसे

खराब मौसम और भारी बारिश के चलते लगभग 1,500 भारतीय — जो तिब्बत के कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा से लौट रहे थे — नेपाल में फंस गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ करीब 525 भारतीय श्रद्धालु हुमला जिले के सिमिकोट में , 550 हिलसा में और अन्य तिब्बत की तरफ ही फंसे हुए हैं।

यहां स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि वह कैलाश मानसरोवर यात्रा (नेपाल के जरिए) के नेपालगंज – सिमिकोट – हिलसा मार्ग के पास स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मौसम खराब होने के चलते निकासी विमानों के परिचालन की संभावना बेहद कम है।

दूतावास ने पीटीआई भाषा को बताया कि उसने नेपालगंज और सिमिकोट में अपने प्रतिनिधि तैनात किए हैं जो फंसे हुए प्रत्येक तीर्थयात्री के साथ व्यक्तिगत संपर्क में हैं। वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि श्रद्धालुओं को खाने और रुकने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो रही है।

उन्हें कहा है कि वह हिलसा में स्थितियों से निपटने को पहली प्राथमिकता दें जिसकी अवसंरचना दूसरे इलाकों के मुकाबले ज्यादा झुकी हुई है।

साथ ही दूतावास ने सभी यात्रा संचालकों से कहा है कि वह ज्यादा से ज्यादा तीर्थयात्रियों को जहां तक संभव हो तिब्बत की तरफ रोकने का प्रयास करें क्योंकि नेपाल की तरफ चिकित्सीय और नगरीय सुविधाएं कम हैं।

भारत ने भी फंसे हुए भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए नेपाल सरकार से सेना की हेलीकॉप्टर सेवाएं देने का आग्रह किया है।

बैंक कर्ज नहीं चुकाने वालों की पहचान बन गया हूं मैं: माल्या

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने कहा है कि वह बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वालों की ‘पहचान’ बन गए हैं और उनका नाम आते ही मानों लोगों का गुस्सा भड़क जाता है।

माल्या ने काफी समय बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक बयान जारी किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने कहा है कि वह दुर्भाग्य से जिस विवाद में घिरे हुए हैं उसकी ‘तथ्यात्मक स्थिति’ सामने रखना चाहते हैं।

पीटीआई भाषा के अनुसार माल्या ने इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए पांच अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री को पत्र लिखा।

बयान में बताया गया कि “उन्हें किसी से भी प्रत्युत्तर नहीं मिला।”

इसमें माल्या ने कहा है, “राजनेताओं व मीडिया ने मुझ पर इस तरह आरोप लगाए मानों किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 9000 करोड़ रुपये का कर्ज मैंने चुरा लिया और भाग गया। कुछ कर्जदाता बैंकों ने भी मुझे जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाला करार दिया।”

माल्या ने इस मामले में सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ दायर आरोप पत्रों को ‘सरकार व कर्जदाता बैंकों की ओर से आधारहीन व सर्वथा झूठे आरोपों पर की गई कार्रवाई’ बताया है।

माल्या के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी, उनकी समूह कंपनियों व उनके परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों की आस्तियां कुर्क कर दीं जिनका मूल्य लगभग 13900 करोड़ रुपये है।

माल्या ने कहा है, ‘मैं बैंक डिफॉल्ट करने वालों का ‘पोस्टर ब्वाय’ बन गया हूं और मेरा नाम आते ही लोगों का गुस्सा भड़क जाता है।’

माल्या उन्हें ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ रहे हैं।

मोदी की सुरक्षा के लिये बने नए नियम; मंत्री भी नहीं जा सकेंगे पास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को बड़ा खतरा बताते हुये गृह मंत्रालय ने नये नियम बनाये हैं।

सभी राज्यों को भेजे गये अलर्ट में आदेश दिया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की विशेष सुरक्षा में तैनात एजेंसी की इजाजत के बिना अब मंत्री और अधिकारी भी उनके नजदीक नहीं जा सकेंगे।

सूत्रों के मुताबिक़ सुरक्षा एजेंसियों की ओर से पीएम मोदी को सलाह दी गई है कि वह रोड शो के कार्यक्रम में कटौती करें. गौरतलब है कि पीएम मोदी ही 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से प्रचार की कमान संभालेंगे और वही मुख्य चेहरा हैं।

गृह मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के डीजीपी को लिखे पत्र में पीएम मोदी के लिये किसी ‘अज्ञात खतरे’ की बात कही गई है. साथ ही कहा गया है कि किसी को भी पीएम मोदी के नजदीक न जाने दिया जाए, इसका कड़ाई से पालन करने की बात कही गई है।

यहां तक कि पीएम मोदी की सुरक्षा में लगी एसपीजी भी अब मंत्रियों की भी तलाशी ले सकती है. वहीं पीएम मोदी जिस तरह आम जनता से मिलने के लिये लोगों के बीच चले जाते हैं इसको लेकर भी आशंका जाहिर की गई है. पीएम मोदी को रोड शो न करने की सलाह दी गई है. वहीं छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनाव के दौरान पीएम मोदी की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की गई है।

उत्तरपूर्व में तिल का ताड़ बनी छोटी सी जातीय झड़प

शिलांग मशहूर रहा है महिलाओं की सुरक्षा के लिए। लेकिन शिलांग में अभी हाल एक लंबी रात हुई झड़पों, लूटपाट और आगजनी की क्या बीती उसकी गंूज पंजाब तक पहुंची। इसकी अहम वजह थे वाल्मीकि सिख जो यहां तीन दशकों से जमे हुए हैं। शिलांग में बसे सिखों को इस झड़प में अपनी बेशकीमती वस्तुए और घरेलू ज़रूरत का सम्मान खोना पड़ा। गनीमत रही कि किसी की जिंदगी नहीं गई और कोई घायल भी नहीं हुआ।

अफवाह या कहें एक झूठ जो वाट्सएप के जरिए शिलांग के निचले इलाकों में फैली और पूरे सप्ताह झड़पों, आगजनी और लूटपाट का बाज़ार गर्म रहा। इसके चलते दो समुदायों के बीच घृणा और अफवाहें खूब फैली। मजहबी सिख समुदाय के सदस्यों, शहर के पंजाबी लेन में बरसों से रह रहे लोगों और एक ‘खासीÓ युवक और उसके सहयोगियों के बीच किसी स्थानीय मुद्दों पर नाराज़गी देखते-देखते तिल का ताड़ बन गई। हालांकि झूठ यह प्रचारित किया गया एक घायल युवक की उसके जख्मों के चलते मौत हो गई और ‘खासीÓ प्रदर्शन प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी लेन के चारों और घेरा डाल रखा है। उनकी मांग है कि इस इलाके के सिख निवासी इस क्षेत्र से बाहर जाएं। यहां आकर बसे निवासी लगभग एक डेढ़ शताब्दी से यहां रह रहे हैं। उन्हें यहां लाए थे ब्रिटिश कोलोनियर। इनसे वे साफ-सफाई के काम कराते थे। तब से ये यहीं बस गए। उन्हें बाहर से आकर यहां बसा हुआ माना भी नहीं जा सकता। प्रशासन ने ज़रूर बड़ी सजगता से पंजाबी लेन में रहने वालों को हिंसा का शिकार होने से बचाया हालांकि वहां इकट्ठी हुई भीड़ हिंसा पर उतारू रही। तब वहां कफ्र्यू लगाया गया और सेना को ‘अल्र्टÓ रखा गया।

तस्वीरों में आकर्षक ‘पहाडिय़ों की रानी शिलांगÓ अब वह आकर्षक पहाड़ी स्थल नहीं रहा। अब यह शोर भरा शहर है जो बगैर किसी नक्शे के फैला हुआ है। हालांकि अब ज़रूरत है कि यहां भी नगरीय अनुशासन अमल मेें लाएं जाएं। आंदोलनकारियों की मांग है कि सिख समुदाय को यहां से दूसरी जगह बसाया जाए। उनकी यह मांग पूरी तौर पर अतार्किक है और इसका प्रतिवाद किया जाना चाहिए। दरअसल मेघालय हाईकोर्ट ने जि़ला कमिश्नर के उस आदेश पर 1986 में रोक लगा दी जिसमें पंजाबी लेन (जिसे स्वीपर्स कॉलोनी नाम से भी जाता है।)

ऐसी घटनाएं फिर न हों इसलिए सरकार को यहां के सिख निवासियों की रक्षा करनी चाहिए। आंदोलनकारियों की मांग का समर्थन तो कतई नही होना चाहिए। सिख फोरम ने देश की धार्मिक अधिकारों पर नज़र रखने वाली संस्था ‘नेशनल कमीशन फार माइनॉरिटीज (एनसीएम) में अपनी गुहार लगाई है। इसमें कहा गया है कि शिलांग का छोटा सा सिख समुदाय आज एक मजबूत स्थानीय समुदाय के अन्याय का शिकार हो रहा है। सिख फोरम एक गैर राजनीतिक मंच है जिसमें विभिन्न पेशे के लोग हैं जिनमें व्यापारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, नौकरशाह आदि हैं। इसका गठन लेफ्टिनेंट जगजीत सिंह अरोड़ा ने किया था जो बांग्लादेश युद्ध के नायक थे। जब पूरे देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में सिख विरोधी दंगे हुए थे तब इसका गठन जगजीत सिंह अरोडा ने किया था। इस फोरम में महासचिव पूर्व डीआईजी प्रताप सिंह ने दिल्ली में एनसीएस प्रतिनिधि मंडल के साथ शिलांग पंजाबी लेन में बसे सिखों की रक्षा की मांग की थी।

मेघालय राज्य की राजधानी शिलांग में 29 मई से अखबारों में ‘खासीÓ समुदाय और पंजाब कॉलोनी (स्वीपर्स कालोनी) के निवासियों के बीच झगड़े फसाद की खबरें आने लगी थीं। तकरीबन एक दर्जन लोग घायल हुए। इनमें सिपाही भी थे। यहां बसे सिख निवासी उन दलित पंजाबियों की वंशज हैं जिन्हें ब्रिटिश 1857 के पहले यहां लाए थे। पूरे उप महाद्वीप तब फिरंगी जल बिछ रहा था।

हमने दिल्ली में एनसीएम के सिख सदस्य मनजीत सिंह राय से बातचीत की और अनुरोध किया कि शिलांग में अल्पसंख्यक सिखों की हर तरह की सुरक्षा की जाए। यह जानकारी दी लेफ्टिनेंट- कर्नल सुखविंदर सिंह सोढ़ी ने वे धार्मिक अधिकारों पर नज़र रखने वाली संस्था के प्रतिनिधियों से मिले थे।

एनसीएम सदस्य ने वादा किया कि राज्य और केंद्रीय अधिकारियों ने पहले ही शिलांग के सिख समुदाय की सुरक्षा संबंधी तमाम कदम उठा लिए हैं।

शिलांग में परस्पर विरोधी बयान सामने आए जिनके कारण ‘खासीÓ समुदाय और दलित पंजाबियों में झड़पें हुईं। कुछ खबरों में यह आरोप था कि एक पंजाबी महिला को पार्किग के बहाने परेशान किया गया। यह मामला तब उठा जब एक जगह जो मेघालय स्टेट ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन बस की पार्किग के लिए नियत थी वहां बस खड़ी करने के मुद्दे पर पंजाबी महिला और ‘खासीÓ बस चालक के बीच वाद-विवाद छिड़ा। वह महिला पंजाबी कॉलोनी में ही रहती थी। सिख समुदाय के कुछ सदस्यों का कहना है कि जब एक सिख महिला को ‘खासीÓ समुदाय के लोगों ने परेशान करना शुरू किया तो वह महिला और चार दूसरी महिलाओं ने ‘खासीÓ समुदाय के लोगों की पिटाई कर दी। खासियों का कहना था कि विवाद तो पार्किंग पर था लेकिन बेवजह उन्हें पीटा गया। जिसमें बाद में पंजाब लाइन कॉलोनी के पुरु ष भी आ मिले।

परस्पर दावों का यह मामला स्थानीय कैंटोनमेंट बोर्ड पुलिस स्टेशन जा पहुंचा जहां आपस में सुलह-सफाई की कोशिश हुई। ‘खासीÓ समुदाय के बस चालक ने ‘खासीÓ में समझौते में लिखा है कि उस पर सिख महिला और पुरु षों ने जो हमला किया उस पर उसके मन में कोई प्रतिरोध का भाव नहीं है।

लेकिन व्हाट्सएप पर जो ‘फेक न्यूजÓ (गलत सूचना) प्रसारित हुई उसमें कहा गया कि कॉलोनी के कुछ लोगों ने ‘खासीÓ समुदाय के दो बच्चों को पकड़ लिया है। तुरंत ही एक समूह कॉलोनी के पास इकट्ठा हो गया। वहां मौजूद स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के साथ उन्होंने हाथा-पाई शुरू कर दी। दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े जिससे हिंसा पर उतारू भीड़ तितर-बितर हो।

शिलांग के कई हिस्सों में कफ्र्यू लगा। इंटरनेट और व्हाट्सएप वगैरह सेवाएं बंद कर दी गई। जिससे अफवाहों पर रोक लगे। सेना को सतर्क किया गया। अशांत इलाके से सेना ने तीन सौ नागरिकों को कैं टोनमेंट में पनाह दी।

मेघालय की सिख आबादी और उनके धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के संबंध में मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से बातचीत की। उन्हें भरोसा दिया कि सिख समुदाय और उनके धर्मस्थलों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। उधर पंजाब सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने राज्य में हुई संप्रदायिक हिंसा की जानकारी पंजाब के मुख्यमंत्री को दी। एक मामूली विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया जिसका संदेश गया कि सिखों के साथ हिंसा हुई है। संगमा ने यह भरोसा दिया कि किसी भी गुरूद्वारे या किसी सिख संस्थान को कोई नुकसान नहीं हुआ है।