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टांग खिंचाई में कोई जवाब नहीं हमारा

वैसे तो खेलों और खेल भावना से हमारा दूर-दूर तक का कोई रिश्ता नहीं था, पर क्या करें मज़बूरी है। पूरी दुनिया दौडऩे कूदने में लगी है। सोने और चांदी के पदक जीत रही है। देश की प्रतिष्ठा और झंडे का सम्मान खिलाडिय़ों की जीत-हार के साथ जोड़ कर देखा जाने लगा है। हम सैद्धांतिक तौर पर इन सभी बातों से सहमत नहीं है, पर सियासत में सब को साथ लेना पड़ता है। वोट जो लेने हैं।

चलो हम मान लेते हैं कि खेलों में भाग लेना चाहिए, तो भाई आर्थिक खेल खेलो, सामाजिक खेल खेलो या फिर संप्रदायिक खेलों की तरफ जाओ। इन खेलों में जीतोगे तो सोने-चांदी के नकली पदक नहीं बल्कि असली सोना-चांदी मिलेगा। अपनी तिजोरी जितनी चाहे भर लो। फिर उस धन को काले से सफेद बनाने के लिए इन ‘नकली’ खेलों के प्रायोजक बन जाओ।

अपन लोग पदक तालिका में नौवें स्थन पर हैं। यदि कबड्डी जैसे टांग खिंचाई के खेल में हमने खिलाडिय़ों को भेजने की बजाए अपने छुट भैया नेताओं या नौकरशाहों को भेजा होता तो ‘गोल्ड मैडल’ पक्का था। टांग खिंचाई के मामले में इन दो प्रजातियों का कोई मुकाबला नहीं। मजाल है किसी को तरक्की करने दें या ऊपर उठने दें। एक उठेगा तो दूसरा उसकी टांग खींच कर नीचे ला देगा। टांग पकड़ कर खीचनें में हमारा जवाब नहीं। फिर यदि टांग पकड़ कर काम न चले , तो ये लोग पैर पकडऩे में भी देरी नहीं लगाते। ये टांग घसीटेंगे या तलवे चाटेंगे। इन खेलों में हमारे पदक पक्के। इसी टांग खिंचाई की वजह से बास्केटबाल में हम फिसड्डी। ऊपर ‘रिंग में गेंद डालने जाते हैं तो दूसरा ‘जंप’ लेते ही टांग पकड़ कर नीचे ले आता है।

एक मुकाबला झूठ बोलने का होता तो उसकी व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं के स्वर्ण पदक सभी हमारी झोली में होते। सरेआम दिन को रात बताने और फिर उस बात पर लोगों को सहमत करा लने की जो खूबी हम में है वह विश्व के किसी देश में नहीं। हमारे यहां तो शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र भी घर बैठे मिल जाते हैं। यहां कई ‘डिग्री होल्डर’ ऐसे भी हैं जिनका न तो कभी कोई सहपाटी रहा और न ही ऐसा कोई शिक्षक मिला जिसने उसे पढ़ाया, डिग्री भी छुट्टी वाले दिन जारी कर दी गई। है न कमाल। अब यह कोई आसान काम तो है नहीं, इस तरह की जाली डिग्री बनवाने में कितने जोखिम हैं। खैर पदक जीतना हो तो जोखिम तो उठाना ही पड़ता है।

एक प्रतियोगिता होनी चाहिए थी ‘कुर्सी के लिए दौड़’ यानी ‘रन फॉर चेयर’ मजाल हमारे अलावा कोई और उसमें स्वर्ण पदक जीत पाता। साहब कुर्सी की ‘आस’ में तो हमारे राजनेता 80-90 साल की उम्र में भी आत्मसम्मान को दरकिनार कर अपने से कहीं कनिष्ठ और कम उम्र नेताओं के हाथ-पैर जोड़ते रहते हैं। न हाथ जोडऩे वालों को कोई शर्म महसूस होती है और न जुड़वाने वालों को। कई बूढ़े बेचारे कुर्सी का अरमान दिल में वाले इस दुनिया से कूच कर जाते हैं। कुर्सी केवल बैठने या आपको अधिकार देने की चीज़ नहीं अपितु कई बार हमने इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल होते देखा है। क्या निशाना ताड़-ताड़ कर कुर्सी फैंकी जा रही थी। साथ ‘माईक’ भी थे, पर ‘माईक’ में वह प्रहार क्षमता कहां तो कुर्सी में है।

जकार्ता में खेली गई एशियायी खेल प्रतियोगिता के निशानेबाजी के मुकाबलों में हमें उतने पदक नहीं मिले जितनी आस थी। अरे भई मिलते कैसे? आपने सभी निशानेबाज भेजे एक भी तो राजनेता नहीं भेजा। एक भी राजनीतिज्ञ होता तो मजाल है एक भी निशाना चूकता। हमने देखा है इन लोगों को दूसरों पर निशाना साधते। चाहे ये दूसरों पर पत्थर उछालें या तानाकशी करें निशाना सही लगेगा। ये तो ऐसे लोग हैं जो टारगेट को उस स्थान पर ला कर खड़ा कर दें जहां निशाना लगा है। जब तक जांच दल रपट देगा कि टारगेट के साथ छेड़-छाड़ की गई थी, तब तक तो अगले मुकाबले का समय आ जाएगा।

इन महान लोगों से ‘खिलाड़ीपन’ की भावना सीखने की ज़रूरत है। ये उस आदमी के जनाजे में सबसे अधिक रोते हुए मिलेंग , जिसकी हत्या इन्होंने खुद की हो। अब इससे अधिक ‘स्पोर्टस मैन्स स्पिरट’ क्या होगी। मेरी बिरादरी के सभी लोग जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (आईओसी) के पदाधिकारी से मिल कर उन खेलों को ओलंपिक खेल चार्टर में डलवाले का प्रयास करेंगे, जिसमें भारत को पदक मिलने की पूरी उम्मीद हो। इन खेलों में ‘घूस देना लेना’ को भी एक स्पर्धा के रूप में शमिल किया जा सकता है। फिर देखते हैं पदक तालिका में कौन माई का लाल हमसे आगे निकलता है।

बेगूसराय से लोक सभा चुनाव लड़ सकते है कन्हैया कुमार

जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (जेएनयूएसयू) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार बेगूसराय से भाकपा के उम्मीदवार के तौर पर महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, हम और राकांप) के सहयोग से 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

बता दें कि कन्हैया बेगूसराय जिला के बरौनी प्रखंड अंतर्गत बिहट पंचायत के मूल निवासी हैं जबकि उनकी मां एक आंगनवाड़ी सेविका तथा उनके पिता एक छोटे किसान हैं।

न्यूज़ एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भाकपा के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी सहित सभी वामदल चाहते हैं कि कन्हैया कुमार बेगूसराय से 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ें।

सत्यनारायण सिंह ने यह भी बताया कि राजद और कांग्रेस जैसे अन्य दल भी चाहते हैं कि वह चुनाव में हिस्सा लें।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के भी इस संबंध में अपनी सहमति दिए जाने की चर्चा के बारे में सत्यनारायण ने कहा कि पूर्व में उनसे हुई वार्ता के दौरान वह एक सीट कन्हैया कुमार के लिए छोड़ देने को लेकर राजी थे ।

उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने अगले आम चुनाव में बिहार में छह लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है लेकिन इस बारे में अंतिम निर्णय हमख्याल दलों के साथ वार्ता के बाद लिया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार जिन छह सीटों पर भाकपा अपना उम्मीदवार उतारना चाहती है, उनमें बेगूसराय, मधुबनी, मोतिहारी, खगड़िया, गया और बांका शामिल हैं।

न्यूज़ एजेंसी भाषा के इस सवाल पर कि क्या कन्हैया कुमार ने बेगूसराय से चुनाव लड़ने को लेकर अपनी सहमति दी है तो सत्यनारायण ने कहा कि इसके लिए वह राजी हैं।

हरियाणा से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने बनाई नयी पार्टी

कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने न सिर्फ पार्टी से बगावत कर दी है बल्कि लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी नाम से एक नई पार्टी बनाने का भी ऐलान कर दिया है।

याद करा दें कि 2014 के आम चुनाव में भाजपा के टिकट पर लड़े राजकुमार सैनी उद्योगपति नवीन जिंदल को हराकर लोकसभा पहुंचे थे.

उन्होंने जाट आरक्षण का खुलकर विरोध किया था और पिछले काफी समय से उन्होंने अपनी ही पार्टी के साथ-साथ दूसरी राजनीतिक पार्टियों के ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोल रखा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सैनी ने कहा है कि वह अन्याय के खिलाफ कुछ भी सहने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह गलत हैं तो उनको पार्टी (बीजेपी) से निकाला जा सकता है।

सैनी ने यह भी कहा कि बीजेपी के शासनकाल में प्रदेश में एक विशेष वर्ग के लोगों ने जो हालात पैदा किए, उससे दुखी होकर उन्होंने यह कदम उठाया।

सैनी ने यह भी कहा है कि अगर प्रदेश की जनता ने उनकी पार्टी को सत्ता में लाने का काम किया तो वह 6 महीने के अंदर ही प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए पांच प्रमुख मुद्दों पर काम करेंगे।

इन पांच मुद्दों में जनसंख्या के आधार पर 100 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था, हर घर में एक रोजगार की नीति, किसानों और मजदूरों की नीति को मनरेगा के साथ जोड़ने की नीति, हम दो और हमारे दो की नीति को प्रभावी रूप से लागू करना राज्यसभा को समाप्त करने की नीति शामिल है।

सैनी ने कहा कि राज्यसभा की व्यवस्था देश हित में नहीं है।

पेट्रोल डीज़ल के साथ साथ अब घरेलू सिलिंडर भी हुआ महंगा

जहां पेट्रोल और डीज़ल की कीमत ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है वहीं तेल कंपनियों ने घरेलू श्रेणी के 14.2 किग्रा भार वाले सिलेंडर की कीमत 31 रुपये और व्यावसायिक श्रेणी के 19 किग्रा वाले सिलेंडर की कीमत 47 रुपये बढ़ा कर जनता की जेब पर फिर से चोट की है।

मासिक रेट रिवीजन के बाद एक सितंबर से लागू दरों के अनुसार घरेलू सिलेंडर 828 के बजाय 859 रुपये मिलेगा। सब्सिडी की रकम खाते में आएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार आईओसी के एक प्रवक्ता के बताया है कि व्यावसायिक सिलेंडर अब 1,446 के बजाय 1493 रुपये में मिलेगा।

इधर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले ही आग लगी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 16 पैसे की बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से अब कीमत 78.84 रुपये लीटर पर पहुंच गई है।  डीजल में 34 पैसे का इजाफा होने के कारण नई कीमत 70.76 पर पहुंच गई है।

मुंबई में पेट्रोल में 16 पैसे की बढ़ोतरी के बाद नई कीमत 86.25 रुपये लीटर पर पहुंच गई है।  वहीं डीजल में 36 पैसे का इजाफा हुआ है और नई कीमत रिकॉर्ड बनाते हुए 75.12 रुपये लीटर पर पहुंच गई है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बढ़ती कीमतों की मार सीएनजी और पीएनजी पर भी पड़ी है। दिल्ली में सीएनजी की कीमत में शनिवार को प्रति किलोग्राम 63 पैसे और पाइपलाइन रसोई गैस (पीएनजी) की कीमत में 1.11 रुपये का इजाफा किया गया।

2021 की जनगणना में अन्य पिछड़े वर्गों के आंकड़े भी होंगे एकत्रित

साल 2021 की जनगणना में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) से संबंधित आंकड़े भी एकत्रित किये जाएंगे। ऐसा आज़ादी के बाद  पहली बार हो रहा है।

देश में 1931 की जनगणना में आखिरी बार एकत्रित किए गए जातिगत आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई मंडल आयोग की सिफारिशों पर तत्त्कालीन वी पी सिंह सरकार ने ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 2021 की जनगणना के लिए तैयारियों की समीक्षा की जिसके बाद ओबीसी आंकड़े एकत्रित करने के फैसले के बारे में बताया ।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन की एक शाखा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) ने 2006 में देश की आबादी पर नमूना सर्वेक्षण रिपोर्ट की घोषणा की और कहा कि देश में ओबीसी आबादी कुल आबादी की करीब 41 फीसदी है।

एनएसएसओ ने ग्रामीण इलाकों में 79,306 परिवारों और शहरी इलाकों में 45,374 परिवारों की गणना की।

भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2019 के लोकसभा चुनावों में 2021 जनगणना में ओबीसी आंकड़े एकत्रित करने के फैसले का उल्लेख कर सकती है क्योंकि कई ओबीसी संगठन लंबे समय से इसके लिए मांग कर रहे हैं।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने 2011 में सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना कराई थी और मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने तीन जुलाई 2015 में इसके नतीजों का ऐलान किया।

इसके बाद 28 जुलाई 2015 को सरकार ने कहा था कि जाति जनगणना के संबंध में कुल 8.19 करोड़ गलतियां पाई गई हैं जिनमें से 6.73 करोड़ गलतियां सुधार दी गई। हालांकि 1.45 करोड़ गलतियों में अभी सुधार नहीं किया गया है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जनगणना 2021 तीन वर्षों में पूरी हो जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने इसके रोडमैप पर चर्चा की। इस बात पर भी चर्चा हुई कि डिजाइन और तकनीकी चीजों में सुधार पर जोर दिया जाए ताकि जनगणना करने के तीन साल के भीतर आंकड़ों को अंतिम रूप दे दिया जाए।

बता दें किअभी तक पूरे आंकड़े जारी करने में सात से आठ साल का समय लग जाता है। इस बड़ी कवायद के लिए 25 लाख से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है।

आईटीआर भरने वालों की तादाद में 71 फीसदी की वृद्धि

आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की आखिरी तारीख , जो 31 अगस्त थी, तक वित्त वर्ष 2017-18 के लिए कुल 5.42 करोड़ लोगों ने रिटर्न भरा।
आंकड़े के अनुसार आईटीआर भरने वालों की तादाद में 71 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि पिछले साल 3.17 करोड़ रिटर्न भरे गए थे।
अगस्त 2017 तक  ई-फाइल के जरिये प्रीसंप्टिव टैक्स योजना का लाभ उठाते हुए 14.93 लाख लोगों ने रिटर्न भरा था जबकि इस बार यह संख्या 1.17 करोड़ हो गई है।
इस प्रकार इसमें आठ गुना वृद्धि हुई है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 31 अगस्त वैसे कारोबारियों और वेतनभोगियों के लिए आईटीआर भरने की आखिरी तारीख थी, जिन्हें ऑडिट करवाने की जरूरत नहीं है।
इस दौरान वेतनभोगियों द्वारा ई-फाइलिंग में 54 फीसदी की वृद्धि देखी गई। इससे कर संग्रह में बड़ी वृद्धि हुई है और इससे सरकारी खजाना भी बढ़ेगा।
माना जा रहा है कि ये सब 31 अगस्त के बाद रिटर्न भरने वालों के लिए जुर्माना लगाने के सरकार के फैसले का असर था ।
मंत्रालय के बयान में कहा गया है किआयकर दाताओं की संख्या से रिटर्न भरने वालों की संख्या बहुत अधिक है।
इस साल सीबीडीटी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज) ने इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़कर 31 अगस्त तक कर दी थी यानी टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए पूरे एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था।
सैलरीड क्लास के साथ वो कारोबारी या प्रोफेशनल्स जिन्हें ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है उनके लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2018 तय की गई थी।
पिछले साल 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने के चलते भी इनकम टैक्स भरने के लिए कारोबारियों को और ज्यादा समय की जरूरत थी लिहाजा इसी को ध्यान में रखते हुए 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल करने की सुविधा दी गई।

आतंकियों ने 10 लोगों को अगवा किया

जे एंड के में अशांति फैलाने के मकसद से आतंकी संगठनों ने अब पुलिसवालों को अपने निशाने पर रखा है। शुक्रवार सुबह तक आतंकियों ने इसी मकसद से 10 लोगों को अगवा किया है जो कि सभी पुलिसवालों के परिजन या रिश्तेदार हैं।

मकसद इसका यही है कि सुरक्षा बलों का मनोबल गिराया जा सके। इसके बाद से सुरक्षा बलों ने बडे पैमाने पर सर्च अभियान छेड़ दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि आंतकी संगठनों ने यह सब उस स्थिति में किया जब एनआईए ने वांछित आतंकी सैयद सलाउद्वीन के दूसरे बेटे को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी आतंकी फंडिंग के मामले में की गई ।

आतंकियों द्वारा अगवा किए गए जुबैर अहमद भट्ट पुलिस कर्मी मोहम्मद मकबूल भट्ट के बेटे हैं। इसी तरह फैजान अहमद भी पुलिस कर्मी बशीर अहमद के बेटे हैं,सुमैर अहमद के पिता अब्दुल सलाम भी पुलिस में हैं।

अगवा किए गए आरिफ के भाई नाजिर अहमद पुलिस में एसएचओ हैं। गोहर अहमद के भाई एजाज डीएसपी हैं। उसी तरह अन्य अगवा किए गए भी पुलिस वालों के परिजन या रिश्तेदार हैं। यह सभी शोपियां,कुलगाम,अनंतनाग व अवंतिपोरा से अगवा किए गए हैं।

लालू ने सीबीआई कोर्ट में किया सरेंडर

चारा घोटाले से जुड़े मामले में सजा काट रहे राजद प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने गुरुवार को रांची की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर किया।

अदालत ने थोड़ी राहत देते हुए खराब स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत दे दी है।

रिपोर्ट्स की मुताबिक़ लालू को कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जाएगा. उसके ठीक बाद उन्हें रांची स्थित रिम्स अस्पताल भेजा जाएगा. जहां वे डॉक्टर की निगरानी में रहेंगे. जेल में लालू यादव का मेडिकल चेकअप होगा.

सरेंडर करने से पहले लालू यादव ने कहा कि वो कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। जो भी कोर्ट का आदेश होगा वह उसका पालन करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनकी कोई इच्छा नहीं है. हालांकि, लालू ने कहा कि रिम्स अस्पताल में सुविधाओं की कमी है, वहां पर इन्फेक्शन फैला हुआ है।

लालू यादव पिछले कई दिनों से जमानत पर थे। रांची हाईकोर्ट के सरेंडर करने के आदेश से पहले वे मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती थे।

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 25 अगस्त को लालू यादव पटना पहुंचे थे।

शोपियां में ४ पुलिस जवान शहीद

जम्मू कश्मीर में एक बड़े आतंकी हमले में बुधवार को आतंकवादियों ने ४ पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी।  वे उनके हथियार भी छीन कर ले गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीर के शोपियां जिले के  तहत अरहामा गांव में आतंकियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। हमले में 4 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। आतंकी सुरक्षा बलों के हथियार छीनकर मौके से फरार हो गए। सुरक्षा बालों ने इलाके की घेराबंदी कर ली है और आतंकियों की धार-पकड़ की पूरी कोशिश जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकियों ने एक एस्कॉर्ट पार्टी पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमले में चार जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां सभी जवानों ने दम तोड़ दिया। एस्कॉर्ट पार्टी इस इलाके में एक पुलिस वाहन के रिपेयरिंग के लिए गई थी।
इस बीच एक अन्य घटना में सुरक्षाबलों ने अनंतनाग में हिज्बुल के दो शीर्ष आतंकियों को मार गिराया था। मारे गए आतंकियों की पहचान शीर्ष हिज्बुल कमांडर अल्ताफ अहमद डार उर्फ अल्ताफ कचरू और उसके सहयोगी उमर राशिद के रूप में हुई। अल्ताफ अहमद डार उर्फ कचरू बुरहान वानी का करीबी भी था। हिज्बुल मुजाहिद्दीन का ये आतंकी कुलगाम में डिस्ट्रिक्ट कमांडर के रूप में कई वर्षों से सुरक्षा बलों को निशाना बना रहा था। कचरू घाटी में बरहान की जगह लेना चाहता था लेकिन उससे पहले ही सुरक्षा बालों ने उसे मार गिराया।

टीटी सेमीफाइनल में हारे कमल-मनिका

एशियाई खेलों में बुधवार का दिन भारत के लिए मिला जुला रहा। स्टार महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा और उनके पुरुष जोड़ीदार अचंत शरथ कमल को खेलों के 11वें दिन सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा जिससे वे कांस्य पदक ही जीत पाए। अब तक भारत के कुल पदकों की संख्या 51 है जिनमें ९ स्वर्ण, 19 रजत और २३ कांस्य पदक हैं और वह पदक तालिका में 9वें स्थान पर है।
मिश्रित युगल टेबल टेनिस के सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी को चीन के चुकिन वांग और सुन यिंगशा की जोड़ी ने 4-1 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई। चीन की जोड़ी ने पांच सेटों तक चले मुकाबले में 11-9, 11-5, 11-13, 11-4, 11-8 से जीत हासिल कर फाइनल में स्थान पक्का किया।
भारत को आज पहला पदक, कांस्‍य के रूप में में टेबल-टेनिस में ही मिला।  भारत की उम्‍मीदें मुख्‍य रूप से मुक्केबाजों और एथलीटों पर टिकी हुई हैं। बॉक्सिंग में भारत के अमित फोंगल पुरुषों के 49 किलो वर्ग और विकास कृष्‍ण 75 किलो वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। अमित ने उत्तर कोरिया के बॉक्‍सर को हराया जबकि विकास कृष्‍ण ने बॉक्सिंग के 75 किग्रा वर्ग के क्‍वार्टर फाइनल में अपने चीन प्रतिद्वंद्वी को शिकस्‍त दी।
उधर स्‍क्‍वॉश के महिला वर्ग के टीम इवेंट में भारत ने सेमीफाइनल में पहुंचकर एक पदक पक्‍का कर लिया है। महिला टीम ने चीन को 3-0 से पराजित किया।