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आलोक वर्मा की जासूसी करते ४ लोग पकड़े

सीबीआई मामले में मोदी सरकार की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। गुरूवार को तीन बड़े घटनाक्रम हुए। एक सीबीआई के छुट्टी  पर भेजे गए निदेशक आलोक वर्मा के घर के बाहर चार लोगों को संदिग्ध हालात में पकड़ा गया है और आरोप है कि आईबी के यह लोग उनकी जासूसी के लिए तैनात किये गए थे। दूसरे सरकार की तरफ से आलोक वर्मा से सीबीआई निदेशक का कामकाज छीने जाने और एम नागेश्वर राव की अंतरिम निदेशक के तौर पर नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। तीसरे भाजपा के वरिष्ठ सांसद सुब्रमणियम स्वामी ने मोदी सरकार की तरफ से छुट्टी पर भेजे गए निदेशक आलोक वर्मा को ईमानदार अधिकारी बताते हुए सरकार की ही मंशा पर सवाल उठा दिये हैं।

पहले बात जासूसी की। गुरूवार सुबह सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के घर के बाहर चार लोगों को संदिग्ध हालात में पकड़ लिया गया। चारों पर वर्मा के घर के बाहर उनकी जासूसी करने का आरोप लगा है। तलाशी पर उनके पास से सरकार की एजेंसी इंटेलीजेन्स ब्यूरो (आईबी) के आईकार्ड मिले हैं।  दिल्ली पुलिस के लोगों ने चारों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ चल रही है। हालांकि आईबी ने अपने लोगों के गतिविधि को ”रूटीन” बनाया है।

दूसरा घटनाक्रम आलोक वर्मा से सीबीआई निदेशक का कामकाज छीने जाने और एम नागेश्वर राव की अंतरिम निदेशक नियुक्त किये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने का है। उधर  कथित तौर पर दो करोड़ घूस लेने के आरोपी राकेश अस्थाना के खिलाफ कोर्ट की निगरानी में एसआइटी जांच की याचिका कोर्ट में पहुंची गयी है। यह याचिका एनजीओ कॉमन कॉज ने दाखिल की है।

कॉमन कॉज की तरफ से याचिका सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दाखिल की है।  उनका कहना है कि अंतरिम निदेशक राव पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप (मामले) हैं लिहाजा उन्हें सीबीआई का अंतरिम निदेशक नहीं बनाया जा सकता। भूषण  ने कोर्ट से इस मसले की सुनवाई जल्दी करने की मांग की और कहा कि शुक्रवार को ही इस मामले की भी सुनवाई हो सकती है। मुख्या न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि सुनवाई का मामला वे देख लेंगे।

विपकस्ग ने सीबीआई की घटनाओं के बाद मोदी सरकार पर हमला तेज कर दिया है।  कांग्रेस अपने प्रचार में सीबीआई की घटनाओं को राफेल विमान खरीद से जोड़ रही है और उसका आरोप है कि सरकार राफेल में भ्रष्टाचार के मामले में फंसे होने के कारण बैक फुट पर है। दरअसल सीबीआई का मामला मोदी सरकार के गले की फांस बन गया है और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसे लगातार राफेल खरीद में भ्रष्टाचार से जोड़ रहे हैं जिससे लगता है कि २०१९ में यह एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

मुख्यसचिव मारपीट मामले में केजरीवाल को राहत

आम आदमी पार्टी को गुरूवार को दोहरी राहत मिली। दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया  सहित ११ विधायकों को को राहत देते हुए जमानत दे दी है। उधर रोगी कल्याण समिति के मामले में भी आप को रहत मिली है।

अंशु प्रकाश मारपीट के मामले में कोर्ट ने सीएम अरविंद केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के अन्‍य विधायकों को जमानत दे दी। इन सभी को ५० हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी गयी है। न्यायालय ने मामले में दस्तावेजों के जांच के लिए अब ७ दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है।

मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि १९ फरवरी की रात उन्हें दिल्ली के सीएम के घर बुलाया गया और वहां मौजूद दो विधायकों ने उनके साथ कथित तौर पर हाथापाई की। मुख्य सचिव ने शिकायत में लिखा है कि सोमवार रात १२ बजे मीटिंग में आने के लिए उन पर दवाब भी बनाया गया था।

गौरतलब है कि  दिल्ली पुलिस ने इस मामले में केजरीवाल सिसोदिया समेत कुल १३ लोगों को आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोपी बनाया है। आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास शिविर में उनके साथ १९-२० फरवरी की रात मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में विधायकों अमानतुल्ला और प्रकाश जरवाल सहित अन्य विधायकों ने मारपीट की थी। मुख्य सचिव के मुताबिक, उन्हें आम आदमी पार्टी की सरकार के तीन साल पूरे होने पर जारी किए जाने वाले टीवी विज्ञापन के बारे में बातचीत करने के लिेए बुलाया गया था।

टॉप पर विराट, वनडे में १०,००० रन

भारत के स्टार क्रिकेटर कप्तान ने बुधवार को अपने एक दिवसीय करिअर के १०,००० रन पूरे कर लिए। इसके लिए उन्होंने २०५ पारियां खेलीं और १०,००० रन बनाने के लिए दुनिया में यह सबसे कम खेली पारियां हैं। इस तरह कोहली ने विश्व रेकार्ड बना दिया है। इस मैच में विराट ने अपने वनडे करियर का ३७वाँ शतक भी ठोका।
भारत और वेस्‍टइंडीज के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मैच में कोहली ने एक दिवसीय मैचों में सबसे तेज १०००० रन बनाने का यह रेकार्ड बनाया।  भारत के लिए उन्होंने दिग्गज सचिन तेंदुलकर का रेकार्ड तोड़ा है। सचिन तेंदुलकर ने २५९ पारियां खेलकर १०,००० रन पूरे किये थे। इस मैच से पहले कोहली २१२ वनडे की २०४ पारियों में ९९१९ रन बना चुके थे।
सचिन तेंदुलकर ने ३१  मार्च, २००१ को वनडे मैचों में १०,००० रन पूरे किये थे, लेकिन विराट कोहली ने केवल २०५ पारियों में ही १०,००० रन पूरे कर लिए जो विश्व रेकार्ड है। इस शिखर तक पहुंचने के लिए विराट को केवल ८१ रन की जरूरत थी। ३० रन बनाते ही कोहली, भारत में ४,००० वनडे रन पूरे करने वाले बल्‍लेबाज भी बन गए। कोहली ने २०१८ में १००० रन के आंकड़े को छू लेंगे, इसकी भी पूरी सम्भावना है।
वनडे क्रिकेट में सबसे तेज 10,000 रन बनाने वाले बल्लेबाजों की बात करें तो पहले पर विराट कोहली (205 पारी), दूसरे पर सचिन तेंदुलकर (259 पारी), तीसरे पर सौरव गांगुली (263 पारी), चौथे पर रिकी पोंटिंग (266 पारी), पांचवें पर जैक्स कैलिस (272 पारी), छठे पर एम एस धोनी (273 पारी), सातवें पर ब्रायन लारा (278 पारी), आठवें पर राहुल द्रविड़ (287 पारी), 9वें पर तिलकरत्ने दिलशान (293 पारी) और 10वें पर कुमार संगकारा (296 पारी) हैं।

चौकीदार ने राफेल जांच के डर से सीबीआई निदेशक को हटा दिया – राहुल

सीबीआई में चल रहे घमासान के बाद कांग्रेस और हमलवार हो गई है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के फैसले के मोदी सरकार के फैसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे  राफेल से जोड़ा है और सीधे प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया है।
राजस्थान के हड़ौती में एक चुनाव रैली में बुधवार को राहुल ने कहा –  ”कल रात चौकीदार ने सीबीआई निदेशक को पद से हटा दिया। सीबीआई निदेशक ने राफेल सौदे पर सवाल उठाए थे। उनको हटा दिया गया। मोदी सरकार की मंशा आपके सामने है”।
राहुल कहा कि देश का संविधान खतरे में है। उन्होंने कहा कि पीएम ने अनिल अंबानी के लिए राफेल सौदे में दखलअंदाजी की। ”यूपीए सरकार ने इस सौदे का कॉन्ट्रैक्ट एचएएल को दिया था। यूपीए सरकार के दौरान राफेल की कीमत ५२६ करोड़ रुपये प्रति विमान थी जो मोदी सरकार में १५०० करोड़ हो गयी”।
सीबीआई वाले मसले पर कांग्रेस ने बुधवार  को प्रवक्ताओं की पूरी फ़ौज मैदान में उतार दी। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार भारतीय एजेंसियों को ध्वस्त कर रही है। ”उन्हें आईसीयू में धकेल दिया गया है”। सिंघवी ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार घोटालों की पोल खुलने से डरी हुई है। ”मोदी सरकार और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपना विशिष्ट गुजरात मॉडल केंद्र और सीबीआई में लागू कर दिया है”। कहा कि  राफेल घोटाले से घबराई सरकार ने यह कदम उठाए हैं।
सिंघवी ने कहा कुछ लोग बहुत ज्ञान बाँट रहे थे। ”मैं भी कुछ ज्ञान बाँटना चाहता हूँ। और ज्ञान यह है कि राफेल फोबिया से बचने और अपने तमाम गलत कारनामों को बचाने के लिए आज असंवैधानिक रूप से सीबीआई निदेशक को सस्पेंड कर दिया गया है। यह गैरकानूनी है”। सिंघवी के मुताबिक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को भी नकार दिया है जिसमें शीर्ष अदालत ने सीबीआई चीफ के कार्यकाल को दो वर्ष का बताया था। केंद्र ने चालाकी से सीबीआई निदेशक को ”जबरन छुट्टी” पर भेज दिया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं। ”पीएम अधिकारियों को बुलाते हैं और फौजदारी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हैं”।

कोइ अफसर सरकार का ‘ब्लू’ या ‘रेड’ आइड नहीं : जेटली

सीबीआई में मचे घमासान और दो बड़े अफसरों को छुट्टी पर भेजने के बाद मोदी सरकार की तरफ से पहली प्रतिक्रिया वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली की तरफ से आई है। उन्होंने इन आरोपों कि एक अधिकारी (राकेश अस्थाना) मोदी सरकार के ”ब्लू आइड” हैं पर कहा कि सरकार के लिए कोइ अधिकारी ”ब्लू” या ”रेड आईड” नहीं। उन्होंने कहा कि चीज किसी टीवी चैनल के लिए ”मसाला” हो सकती है लेकिन सरकार के लिए ऐसी कोइ बात नहीं।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में जोर देकर कहा कि सीबीआई के अफसरों राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा ने एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए हैं। ऐसे में दोनों में से कोई भी मामले की जांच नहीं कर सकते हैं और न ही उनके अधीन में मामले की जांच हो सकती है। ”मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया गया है”।
जेटली ने कहा कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के अफसरों के बीच विवाद की जांच के लिए ”एसआईटी” का गठन किया गया है। वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि सीबीआई के मामलों की जांच का अधिकार सरकार के पास नहीं है। ”ऐसे में एसआईटी का गठन किया गया है”। कहा कि सीबीआई की जांच की निगरानी सीवीसी कर सकती है, लेकिन उसके पास भी जांच का अधिकार नहीं है।
जेटली ने कहा कि अस्थाना और वर्मा ने एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए हैं लिहाजा दोनों में से कोई भी मामले की जांच नहीं कर सकते हैं और न ही उनके अधीन में मामले की जांच हो सकती है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि अभी से अंदाजा नहीं लगाया जा चाहिए कि कौन अफसर सही हैं या गलत। ”निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा”। उन्होंने कहा कि सीबीआई मुख्य जांच एजेंसी है और इसकी स्वायत्ता बनी रहनी चाहिए। ”यह  असाधारण मामला है”।

सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा

मोदी सरकार की लगातार फजीहत और दो बड़ों की लड़ाई सीबीआई में कई अफसरों पर भारी पड़ी है। निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया है। सीवीसी के दखल के बाद सरकार ने यह फैसला किया है और इसके रात एक बजे का समय चुना गया।
वैसे निदेशक की नियुक्ति दो साल के लिए एक विशेष प्रक्रिया से होती है लिहाजा उन्हें ऐसे हटाया नहीं जा सकता। सरकार के इस फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला कर लिया है। कुछ ही देर पहले उनकी मुख्या न्यायाधीश के सामने प्रस्तुति हुई है और इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। आलोक वर्मा  ने इसके लिए जो याचिका दाखिल; kee है use विचार के लिए मंजूर कर लिया गया है।
इस बीच संयुक्त निदेशक नागेश्वर राव को निदेशक पद की अंतरिम जिम्मेबारी सौंपी गयी है।
मोदी सरकार की सीबीआई मन चल रह घमासान से बहुत फजीहत हो रही थी। पीएमओ इन घटनाओं पर लगातार नज़र रखे था लिहाजा ऐसा लग रहा था कि सख्त कार्रवाई सरकार को मजबूरी में करनी पड़ेगी ही। सीबीआई के भ्रष्टाचार और उगाही का अड्डा बनने के आरोप और किसी नहीं बल्कि सीवीआई के ही वरिष्ठ अफसरों की तरफ से आये ऐसे में एजेंसी की विश्वसनीयता पर जबरदस्त चोट पहुँची है।
आधी रात को की गयी कार्रवाई में सीबीआई हेडक्वार्टर के १०वें और ११वें माले को भी सील कर दिया गया है। इसके अलावा उस पूरी टीम हो हटा दिया गया है जो राकेश अस्थाना के मामले की जांच कर रही थी। संयुक्त निदेशक अरुण शर्मा और डीआईजी मनीष शर्मा को भी बदला गया है।   सरकार ने निदेशक आलोक वर्मा को लम्बी छुट्टी पर भेजने के पत्र में तकनीकी रूप से उन्हें उनके पद से हटाने का जिक्र नहीं किया है। ऐसा करके सरकार ने आलोक के कोर्ट जाने की स्थति में खुद की स्थिति कानूनन ठीक रखने की कोशिश की है। वैसे वर्मा का सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाना लगभग तय है। सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजा गया है।
रात के कार्रवाई में सीबीआई के १०वें और ११वें माले को भी सील कर दिया गया है।

पश्चिम बंगाल में फुटओवर ब्रिज पर मची भगदड़ में दो की मौत

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में मंगलवार देर शाम संतरागाछी जंक्शन के एक फुटओवरब्रिज पर मची भगदड़ में 2 लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हो गए।
 ये फुटओवर ब्रिज फ्लेटफॉर्म 2 और 3 के ऊपर था। घायलों में कई बच्चे व महिलाएं शामिल हैं। एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है।
दक्षिण पूर्व रेलवे के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब एक एक्सप्रेस ट्रेन और दो ईएमयू लोकल ट्रेनें एक ही समय करीब 6:30 बजे स्टेशन पर पहुंचीं और ट्रेनों पर चढ़ने के लिए यात्री प्लेटफॉर्म की ओर जाने लगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नागरकोइल-शालीमार एक्सप्रेस और दो ईएमयू ट्रेनें एक ही वक्त पर स्टेशन पर पहुंचीं, वहीं शालीमार-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस और संतरागाछी-चेन्नई एक्सप्रेस जल्द ही पहुंचने वाली थीं।
एक ही समय ट्रेनों से उतरे यात्रियों के फुट ओवरब्रिज पर चढ़ने और दूसरे यात्रियों के उतरने के कारण भगदड़ की स्थिति बन गई।
सूत्रों के अनुसार11 घायलों को उपचार के लिए हावड़ा सामान्य अस्पताल ले जाया गया जबकि तीन अन्य का स्टेशन पर ही प्राथमिक उपचार किया गया।
यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन पर इस तरह की घटनाएं आए दिन होती हैं।
पिछले महीने में दक्षिणी कोलकाता के माजेरहाट में एक पुल गिर गया था जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे।  यह पुल बेहाला को कोलकाता के दूसरे इलाकों से जोड़ता था।

विस्फोट में मरे नागरिकों के परिजनों को मुआबजा

जम्मू कश्मीर के हालात का जायजा लेने मंगलवार को श्रीनगर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात की। बैठक में सिंह ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
वैसे राजनाथ सिंह विभिन्न दलों के नेताओं के साथ मिले।  इस दौरान उन्होने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी मुलाकात की। गृहमंत्री ने २१ अक्टूबर को कुलगाम में मुठभेड़ के बाद विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों को ५ -५ लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की घोषणा भी की। गौरतलब है कि दो दिन पहले मुठभेड़ स्थल पर विस्फोट होने से कुलगाम इलाके में ७ नागरिकों की मौत हो गयी थी।
राजनाथ सिंह ने बताया कि राज्य और केंद्र दोनों जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि जम्मू कश्मीर को विकसित राज्य बनाया जाए। निकाय चुनाव को लकर राजनाथ ने मीडिया के लोगों से बातचीत में कहा कि जम्मू कश्मीर निकाय चुनाव के दौरान किसी तरह की कोई हिंसा नहीं हुई जो इस बात का संकेत है कि स्थिति में सुधार हुआ है।
उधर राजनाथ सिंह के श्रीनगर दौरे के बीच पाकिस्तान ने मंगलवार को जम्मू इलाके के पुंछ में सीजफायर का उल्लंघन किया। पाकिस्तान की ओर से दागा गया बम का गोला शहर के इलाके और ब्रिगेड मुख्यालय के पास गिरा। यह पहली बार है कि पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए शहर और ब्रिगेड हेडक्वार्टर्स को निशाना बनाने की कोशिश की। इस हमले में किसी के हताहत होने की कोइ खबर नहीं है।

देवेंदर सस्पेंड, अस्थाना को रहत

सीबीआई में घमासान जारी है। दो बड़े अधिकारियों की खुली जंग के बीच रिश्वत लेने के आरोपी अपने ही डीएसपी देवेंद्र कुमार को एजेंसी ने सस्पेंड कर दिया है। उधर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को हाई कोर्ट से थोड़ी राहत मिली है और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख २९ अक्टूबर तय की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मांस व्यवसायी मोइन कुरैशी मामले में सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए अपने डीएसपी देवेंदर कुमार को मंगलवार को निलंबित कर दिया। सोमवार को गिरफ्तार किये गए कुमार को आज दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया जहाँ कोर्ट ने उन्हें सात दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। वैसे सीबीआई ने देवेंद्र की १० दिन की कस्टडी माँगी थी।
उधर सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मामले में हाई कोर्ट ने अस्थाना को फिलहाल अंतरिम राहत दी है। हाई कोर्ट ने मामले के अगली सुनवाई के लिए २८ अक्टूबर की तारीख तय की है। मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि २९ अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर के राकेश अस्थाना पर लगाए आरोपों पर जवाब देंगे। कोर्ट ने तब तक इस मामले में अस्थाना की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी और मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा।
सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि आरोपी के खिलाफ रिश्वत लेने समेत कई गंभीर मामले हैं जिसमें पराधिक षड्यंत्र के साथ भ्रष्टचार के मामले शामिल हैं। उधर अस्थाना के वकील ने कोर्ट से अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।

सीबीआई उगाही का अड्डा : सीबीआई

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उगाही का अड्डा है। यह बात किसी और ने नहीं खुद सीबीआई ने कोर्ट में कही है। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना से जुड़े रिश्वत मामले में कल डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया था और मंगलवार को उन्हें दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में सीबीआई ने देवेंद्र कुमार का १० दिन की रिमांड मांगते हुए कहा कि एजेंसी में जांच के नाम पर ”उगाही का धंधा” चल रहा है।  सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर दो करोड़ रिश्वत का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की है जबकि अस्थाना ने इस मुकद्दमे को साजिश बताया है। अस्थाना ने एफआईआर रद्द कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की हुई है। वे निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर पीएमओ और मुख्य सतर्कता आयुक्त को शिकायत वाली चिट्ठी लिख चुके हैं। उधर रिश्वतखोरी के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार ने भी दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।  गौरतलब है कि सीबीआई ने मांस निर्यातक मोईन कुरैशी मामले में रिश्वत के आरोपों में अस्थाना, कुमार और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ हाल में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने मामले को कमजोर करने के लिये रिश्वत ली। देवेंद्र कुमार मीट कारोबारी मोईन कुरैशी के खिलाफ चल रहे मामले में जांच अधिकारी थे। उन्‍हें सतीश सना के बयान दर्ज करने में जालसाजी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने रविवार को अपने ही हेडक्वॉर्टर में छापा मारा था। देवेंद्र कुमार के दफ्तर से छापे में कुछ  मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। सीबीआई इस सारे घटनाक्रम से सुर्ख़ियों में हैं और जनता रोज उसके बारे में हो रहे खुलासों को हैरानी और परेशानी से देख रही है। मोदी सरकार की छवि को भी इससे बट्टा लगा है।  माना जाता है कि पीएमओ सीबीआई में चल रहे घटनाक्रम से बहुत ज्यादा आहत है। निदेशक सहित अस्थाना को भी पीएमओ तालाब कर चुका है। अब यह निदेशक आलोक वर्मा और अस्थाना में सीधी लड़ाई बन गयी है।