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विश्व चैंपियनशिप के 400 मीटर ट्रैक में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनी हिमा

देश को मिली नई उड़न परी

हम यह तो नहीं कहेंगे कि देश अब पीटी ऊषा और मिल्खा सिंह को भूल जाएगा लेकिन हिमा दास ने जो किया है वह देश के एथलेटिक्स हितहास में गौरवशाली ज़रूर है। टेम्पेरे (फिनलैंड)। भारत की नई उड़नपरी कही जा रही  हिमा दास ने  गुरुवार देर रात आईएएएफ की 400 मीटर ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

भारत की यह नई सनसनी हिमा इस जीत के बाद से सोशल मीडिया में हीरो बनकर उभर रही है। उसकी जीत पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांघी ने ट्वीट कर उसे बधाई दी है। कई अन्य नामी खिलाड़ीयों  ने भी हिमा को बधाई देकर उसका उत्साह बढ़ाया है।

इस खिलाड़ी ने आईएएफ वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर उड़न सिख और देश की पहली उड़न परी पीटी ऊषा को पीछे छोड़ दिया है। अब तक कोई भी भारतीय एथलीट विश्व इवेंट में गोल्ड नहीं जीत सका है। इस तरह हिमा ने अपने प्रदर्शन से एक बड़ा रेकार्ड देश के लिए बना दिया है।

हिमा दास से पहले सबसे अच्छा प्रदर्शन मिल्खा सिंह और पीटी उषा का रहा था। पीटी उषा ने जहां 1984 ओलंपिक में 400 मीटर हर्डल रेस में चौथा स्थान हासिल किया था।

मिल्खा सिंह 1960 रोम ओलंपिक में 400 मीटर रेस में चौथे स्थान पर रहे थे। बुधवार को हुए सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए हिमा ५२.१० सेकंड का समय निकालकर पहले स्थान पर रही थीं। आईएएफ वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के लिए हिमा ने ४०० मेटर की इस स्पर्धा में ५१.४६ सेकण्ड का समय निकाला।

कोशिश की और उस समय की तरह हस्तक्षेप करने की कोशिश की तो मुझे लगता है कि 1987 की तरह ही हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख सैयद सलाहूद्दीन और यासिन मलिक पैदा होंगे।’

पिछले महीने 19 तारीख को भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था। तब से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है। ८७ सदस्यीय जम्मू और कश्मीर विधानसभा में सरकार बना सकने लायक आंकड़े किसी भी पार्टी के पास नहीं हैं। पीडीपी के २८, भाजपा के २५, कांग्रेस के १२ और एनसी के १५ विधायक हैं। पीपल्स कांफ्रेंस के दो विधायकों और लद्दाख के एक विधायक के समर्थन का भाजपा दावा करती रही है। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल  को 44 विधायकों के समर्थन की जरूरत रहेगी।

बगावत करने वाले विधायकों का आरोप रहा है कि पीडीपी ”फैमिली डेमोक्रेटिक पार्टी” बन गई है। बागी विधायकों में जावेद बेग, यासिर रेशी, अब्दुल मजीद, इमरान अंसारी, अबीद हुसैन अंसारी और मोहम्मद अब्बास वानी शामिल माने जाते हैं।

पीडीपी को तोड़ा तो कश्मीर में कई सलाहुद्दीन: महबूबा

जम्मू कश्मीर में एक बार फिर उबाल है। भाजपा के समर्थन वापस लेने के करीब एक महीने बाद शुक्रवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने चेताया है कि यदि नई दिल्ली ने उनकी पार्टी पीडीपी को तोड़ने की कोशिश की तो नब्बे के दशक जैसे हालात पैदा हो जायेंगे और कश्मीर में कई सलाहुद्दीन  पैदा होने का रास्ता खुल जाएगा। उधर पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने महबूबा के ब्यान पर टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा कि ”मैं यहाँ सब को याद दिलाना चाहता हूँ कि पीडीपी के टूटने से एक भी मिलिटेंट पैदा नहीं होगा। कश्मीर में लोग एक ऐसी पार्टी के ख़त्म होने का मातम नहीं मनाएंगे जिसका गठन दिल्ली में कश्मीर के वोट बाँटने के लिए किया गया”।

चर्चा है कि पीडीपी के करीब आधे विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और भाजपा जम्मू कश्मीर में अपनी सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है। कहा जा रहा है कि भाजपा २०१९ के लोक सभा चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर में एक हिन्दू मुख्यमंत्री बनाकर देश भर में वोटों का साम्प्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण  करना चाहती है क्योंकि उसे लगता है कि केवल इसी तरीके से वह दुबारा सत्ता में आ सकती है।

अपनी पार्टी के अस्तित्व पर खतरे को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अब पूरी तरह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मैदान में आ जुटी हैं।

कुछ महीने पहले तक इन्हीं मुफ्ती ने कहा था कि मोदी ही एक मात्रा ऐसे नेता हैं जो कश्मीर की तकदीर बदल सकते हैं, हालांकि उस समय भी उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस तरह की बात कहने के हक़ में नहीं थे क्योंकि उन्हें लगता था भाजपा का एजेंडा खतरनाक है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अब शुक्रवार (१३ जुलाई) को मुफ्ती ने कहा कि भाजपा (नई दिल्ली) ने पीडीपी को तोड़ने की कोशिश की तो कश्मीर में कई और सलाहुद्दीन पैदा होंगे और सूबे के हालात नब्बे के दशक जैसे हो जाएंगे।

महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 1987 के चुनाव में जब गड़बड़ हुई तो यासिन मलिक और हिजबुल मुजाहिद्दिन के प्रमुख सैय्यद सलाउद्दीन पैदा हुए थे। ”अगर इस बार भाजपा ने पीडीपी को तोड़ने की कोशिश की और कश्मीर के लोगों के हक पर डाका डाला तो हालात उससे भी ज्यादा खराब होंगे”।

पिछले कुछ समय से चर्चा है कि भाजपा अपने महासचिव राम माधव के जरिये पूर्व अलगाववादी और  पिछली पीडीपी-भाजपा सरकार में मंत्री रहे सज्जाद गनी लोन को अपने पाले में लाने की गंभीर कोशिश कर रही है। यह माना जाता है कि भाजपा पीडीपी में टूट करवाकर लोन को कश्मीर में उसका सर्वेसर्वा बनाने की कोशिश कर रही है। वैसे राम माधव ने इस बात से कुछ दिन पहले ही इंकार किया था कि भाजपा की ऐसी कोइ मंशा है लेकिन कश्मीर में इस बात की बड़ी चर्चा है कि भाजपा जम्मू कश्मीर में अपनी सरकार बनवाकर देश में २०१९ के लोक सभा चुनाव के मद्देनजर एक सन्देश देकर इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।

अभी तक पीडीपी के कम से कम पांच विधायक सार्वजनिक तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बयान दे चुके हैं। बागी नेता इमरान अंसारी ने दो दिन पहले ही अलग मोर्चा बनाने की बात कही थी। उन्होंने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर ”दिल्ली को ब्लैकमेल करने” का आरोप भी लगाया था। हालांकि अब कहा जा रहा है कि भाजपा के निशाने पर कमसे काम १४ पीडीपी विधायक हैं।

पार्टी में पड़ रही फूट के बीच मुफ्ती ने भाजपा को अब सीधे तौर पर चेतावनी दे दी है। उनका कहना है कि अगर दिल्ली ने पीडीपी को तोड़ने की कोशिश की तो और सलाहुद्दीन पैदा होंगे। उन्होंने कहा, ”यदि दिल्ली ने साल 1987 की तरह लोगों से उनके मतदान का अधिकार छीना, यदि उसने बंटवारे की कोशिश की और उस समय की तरह हस्तक्षेप करने की कोशिश की तो मुझे लगता है कि 1987 की तरह ही हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख सैयद सलाहूद्दीन और यासिन मलिक पैदा होंगे।’

पिछले महीने 19 तारीख को भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था। तब से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है। ८७ सदस्यीय जम्मू और कश्मीर विधानसभा में सरकार बना सकने लायक आंकड़े किसी भी पार्टी के पास नहीं हैं। पीडीपी के २८, भाजपा के २५, कांग्रेस के १२ और एनसी के १५ विधायक हैं। पीपल्स कांफ्रेंस के दो विधायकों और लद्दाख के एक विधायक के समर्थन का भाजपा दावा करती रही है। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल  को 44 विधायकों के समर्थन की जरूरत रहेगी।

बगावत करने वाले विधायकों का आरोप रहा है कि पीडीपी ”फैमिली डेमोक्रेटिक पार्टी” बन गई है। बागी विधायकों में जावेद बेग, यासिर रेशी, अब्दुल मजीद, इमरान अंसारी, अबीद हुसैन अंसारी और मोहम्मद अब्बास वानी शामिल माने जाते हैं।

उपराज्यपाल बनते हैं सुपरमैन मगर दिल्ली में करते कुछ भी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

राजधानी दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से स्टेटस रिपोर्ट मांगते हुए कहा कि बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद कूड़ा कम नहीं हो रहा और न ही इससे निपटने का अभी तक कोई समाधान हुआ है।

हालाँकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई मगर सबसे ज़्यादा गाज गिरी उपराज्यपाल पर।  कोर्ट ने उपराज्यपाल के कार्यालय को 16 जुलाई तक हलफनामा देकर ठोस कूड़ा प्रबंधन पर उठाए जाने वाले कदमों की समयसीमा बताने को कहा है।

सुनवाई के दौरान LG की ओर से हलफनामे में कहा गया कि पूर्वी दिल्ली में गाजीपुर, दक्षिणी दिल्ली में ओखला और उत्तरी दिल्ली में भलस्वा लैंडफिल साइट्स हैं. उपराज्यपाल अपने स्तर पर लगातार बैठकें कर रहे हैं।

इस पर उच्च न्यायलय ने कहा, “आप 25 बैठकें करते या 50 कप चाय पीते हैं इससे हमें कोई मतलब नहीं है। दिल्ली को कूड़े से निजात दिलाने पर बात करें।

… उपराज्यपाल कहते हैं कि मेरे पास पावर है, मैं सुरमैन हूं तो बैठकों में क्यों नहीं शामिल होते हैं?”

केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कोर्ट ने कहा कि “एलजी और दिल्ली सरकार दोनों मान रहे हैं कि उनकी जिम्मेदारी है कूड़ा हटवाना और अगर नहीं होता तो केंद्र उसमें निर्देश देगा। क्या केंद्र ने निर्देश दिए? … कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा गिरने से आदमी की मौत हो जाती है और आप इसको लेकर अभी भी गंभीर नहीं। ”

“हर मामले में मुख्यमंत्री को मत घसीटिए, बस अंग्रेजी की एक लाइन में बताइए कि कूड़े के जो पहाड़ खड़े हैं वो कब हटेंगे। …. केंद्र इस मुद्दे पर एक टाइमलाइन बताए कि कब कूड़े पर हल निकाला जाएगा।” उच्च न्यायलय ने पूछा है।

बीएसएनएल ने शुरू की पहली इंटरनेट टेलीफोन सेवा

बीएसएनएल ने देश की पहली इंटरनेट टेलीफोन सेवा शुरू की है। इससे पहले मोबाइल एप पर कॉल करने की सुविधा किसी विशिष्ट एप के जरिए आपस में ही कर सकते थे, लेकिन अब एप से किसी भी टेलीफोन नंबर पर कॉल  किया जा सकेगा।

इससे बीएसएनएल के उपभोक्ता देश में किसी भी नेटवर्क पर कॉल कर सकेंगे।

इग्लैंड को हरा इतिहास रचा क्रोएशिया ने

रूस में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2018 के दूसरे सेमीफाइनल मैच में क्रोएशिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हरा कर पहली बार फाइनल ने अपनी जगह बना ली है।  रविवार को उसका सामना 1998 की विजेता फ्रांस से होगा।

एक गोल से पिछड़ने के बाद अतिक्ति समय में 109वें मिनट में मारिया मांड्जुकिक ने  गोल करके अपने देश को फीफा विश्व कप के 21वें संस्करण के फाइनल में फाइनल में पहुँचाया।

किरेन ट्रिपियर ने पांचवें मिनट में ही दमदार फ्री किक पर गोलकीपर डेनियल सुबेसिच को छकाते हुए इंग्लैंड को 1-0 से आगे कर दिया था लेकिन इवान पेरिसिच (68वें मिनट) ने क्रोएशिया को दूसरे हाफ में बराबरी दिला दी।

विश्व कप सेमीफाइनल में 18 मौकों में यह सिर्फ दूसरी बार है जब मध्यांतर तक बढ़त बनाने वाली टीम को हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 1990 में इटली की टीम अर्जेन्टीना के खिलाफ बढ़त बनाने के बावजूद पेनल्टी शूटआउट में हार गई थी।

इसके साथ ही इंग्लैंड की टीम का पांच से अधिक दशक बाद दूसरी बार फाइनल में जगह बनाने का सपना भी टूट गया। इंग्लैंड ने पहली और एकमात्र बार 1966 में फाइनल में जगह बनाई थी और तब अपनी सरजमीं पर खिताब जीतने में सफल रहा था।

विश्व कप कप हतिहास में सिर्फ दूसरी बार सेमीफाइनल में खेल रही क्रोएशिया की टीम इससे पहले फ्रांस में 1998 में सेमीफाइनल में पहुंची थी और तब उसे मेजबान टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।

इंग्लैंड की टीम  — जो अब तीसरे स्थान के प्ले आफ में 14 जुलाई को सेंट पीटर्सबर्ग में बेल्जियम से भिड़ेगी — जहां पहले हाफ में हावी रही वहीं दूसरे हाफ में क्रोएशिया का दबदबा देखने को मिला। मैच के दौरान हालांकि कई बार दोनों टीमों के खिलाड़ियों को आपस में भिड़ते देखा गया।

उच्च न्यायलय तय करे कि समलैंगिकताअपराध है या नहीं: केंद्र

समलैंगिकता संबंधी धारा 377 की संवैधानिकता के मुद्दे को केंद्र सरकार ने न्यायलय के विवेक पर छोड़ दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से एएसजी तुषार मेहता ने कहा अब न्यायलय को ही तय करना है कि समलैंगिकताअपराध है या नहीं।

हदिया मामले में बताया गया है कि पार्टनर चुनने का अधिकार है, लेकिन ये खून के रिश्ते में नहीं हो सकता।

मेहता ने  कहा कि हिंदू कानून में इस पर रोक है. अदालत सिर्फ ये देखे कि धारा 377 को अपराध से अलग किया जा सकता है या नहीं. बड़े मुद्दों पर विचार करने के दूरगामी परिणाम होंगे।

इसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि मुद्दा ये है कि सहमति से बालिग समलैंगिकों द्वारा यौन संबंध अपराध हैं या नहीं। “समहति से बालिग द्वारा बनाया गया अप्राकृतिक संबंध अपराध नहीं होना चाहिए।  हम बहस सुनने के बाद इस पर फैसला देंगे।”  .

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करने संबंधी याचिकाओं पर मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू की और स्पष्ट किया कि वह एलजीबीटी समुदाय से संबंधित विवाह या लिव-इन संबंधों में उत्तराधिकार के मुद्दों पर गौर नहीं करेगा।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह केवल भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की संवैधानिक वैधता पर विचार करेगी जो समान लिंग के दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से यौन संबंधों को अपराध घोषित करती है।

पीठ ने कहा कि वह वर्ष 2013 के अपने उस फैसले के सही होने के संबंध में गौर करेगी जिसमें उसने उच्च न्यायालय द्वारा दो समलैंगिक व्यक्तियों के बीच यौन संबंधों को दंडनीय अपराध बनाने वाली धारा 377 को असंवैधानिक करार देने के फैसले को निरस्त किया था।

धारा 377 के तहत अप्राकृतिक यौन संबंध दंडनीय अपराध है और इसके लिये दोषी व्यक्ति को उम्र कैद, या एक निश्चित अवधि के लिये, जो दस साल तक हो सकती है, सजा हो सकती है और उसे इस कृत्य के लिये जुर्माना भी देना होगा.

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार: मरम्मत नहीं कर सकते तो तोड़ दो ताज महल

ताज महल बंद कर दो या फिर तोड़ दो। वरना इसकी मरम्मत करनी होगी। ये बात उच्च न्यायलय ने मुगलकाल की इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण के संदर्भ में  केंद्र तथा उसके प्राधिकारियों को फटकार लगते हुए कही।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ताज महल की सुरक्षा और उसके संरक्षण को लेकर दृष्टि पत्र लाने में विफल रही है।

केंद्र को निर्देश दिया गया है कि वह विस्तृत जानकारी पेश करे कि इस महत्वपूर्ण स्मारक के संरक्षण को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं और किस तरह की कार्रवाई की जरूरत है।

ताजमहल को कैसे बचाया जाए इस पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘इस बंद कर दो या फिर तोड़ दो। वरना इसकी मरम्मत करनी होगी।’

न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने फटकार लगते हुए कहा कि ताजमहल के संरक्षण के बारे में संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

केंद्र ने पीठ को बताया कि आईआईटी-कानपुर ताजमहल और उसके आसपास वायु प्रदूषण के स्तर का आकलन कर रहा है और चार महीने में अपनी रिपोर्ट देगा।

केंद्र के मुताबिक़ ताजमहल और उसके इर्दगिर्द प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है जो इस विश्व प्रसिद्ध स्मारक के संरक्षण के उपाय सुझाएगी।

उच्च न्यायलय की पीठ ने कहा है  कि 31 जुलाई से वह इस मामले की रोज़ सुनवाई करेगी।

निर्भया केस के दोषियों को फांसी ही दी जाएगी: न्यायालय

साल 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में फांसी की सजा के खिलाफ दोषियों की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

मामले में मृत्युदंड की सजा पा चुके चार दोषियों में से तीन ने सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

जिस पर उच्च न्यायालय ने कहा है कि दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रहेगी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने आरोपी विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश सिंह की याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दोषी अक्षय ठाकुर ने पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को इस मामले में दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालत द्वारा 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप और मर्डर के मामले में उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।

आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। वहीं आरोपियों में एक किशोर भी शामिल था। उसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था। उसे तीन साल सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

नॉएडा-स्थित दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्‍ट्री देगी 70,000 को रोज़गार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के पीएम मून जेई आज दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्‍ट्री का उत्तर प्रदेश में उद्घाटन कर रहे हैं।

यह फैक्ट्री नोएडा के सेक्टर 81 में स्थित सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की 35 एकड़ में फैली है जिसमें 70 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलने की आशा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नोएडा अब मोबाइल बनाने वाले शहरों के नक्‍शे में सबसे ऊपर आ जाएगा. चीन और अमेरिका के शहर उससे काफी पीछे रह जाएंगे.

मौजूदा मोबाइल विनिर्माण इकाई 2005 में लागई गई। पिछले साल जून में दक्षिण कोरियाई कंपनी ने 4,915 करोड़ रुपये का निवेश कर नोएडा संयंत्र में विस्तार करने की घोषणा की, जिसके एक साल बाद नई फैक्ट्री अब दोगुना उत्पादन के लिए तैयार है।

भाषा के अनुसार भारत में कंपनी इस समय 6.7 करोड़ स्मार्टफोन बना रही है और नए संयंत्र के चालू हो जाने पर तकरीबन 12 करोड़ मोबाइल फोन का विनिर्माण होने की संभावना है।

नई फैक्ट्री में न सिर्फ मोबाइल बल्कि सैमसंग के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे रेफ्रिजरेटर और फ्लैट पैनल वाले टेलिविजन का उत्पादन भी दोगुना हो जाएगा और कंपनी इन सारे सेगमेंट में अग्रणी की भूमिका में बनी रहेगी। काउंटर पॉइंट रिसर्च के असोसिएट डायरेक्टर तरुण पाठक के अनुसार नई फैक्ट्री से सैमसंग बाजार में कम समय में उत्पाद उतारने में सक्षम होगी।

सैमसंग की नई फैक्‍ट्री उसके 1997 में बनाए गए प्‍लांट के करीब है. पिछले साल जून में कंपनी ने 4915 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया था. इसके चलते कंपनी का उत्‍पादन दुगुना हो जाएगा. सैमसंग वर्तमान में 6.70 करोड़ फोन भारत में बना रही है और नए प्‍लांट के शुरू होने पर उसकी उत्‍पादन क्षमता बढ़कर 12 करोड़ फोन सालाना हो जाएगी.

नए प्‍लांट के शुरू होने से मोबाइल के साथ ही रेफ्रिजरेटर और फ्लैट पेनल टीवी की उत्‍पादन क्षमता भी बढ़ जाएगी और इसके जरिए कंपनी इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर लेगी. भारत में सैमसंग के दो प्‍लांट नोएडा और तमिलनाडु में श्रीपेरुम्‍बुदुर है. इनके अलावा नोएडा में एक डिजाइन सेंटर और पांच रिसर्च व डेवलपमेंट सेंटर हैं. इनमें करीब 70 हजार लोग काम करते हैं. कंपनी की डेढ़ लाख के करीब रिटेल दुकानें भी हैं.

सैमसंग ने 1996 में नोएडा प्‍लान का निर्माण शुरू किया था और अगले साल तक यहां पर पहला टीवी बना लिया गया था. 2003 में रेफ्रिजरेटर का उत्‍पादन भी शुरू कर दिया. कंपनी ने 2007 में यहां पर मोबाइल बनाना शुरू किया. अगले पांच साल में कंपनी देश की नंबर वन मोबाइल कंपनी बन गई. इसके बाद नोएडा प्‍लांट में पहली बार ‘गैलेक्‍सी एस3’मॉडल बनाया गया.

कोरियाई कंपनी वर्तमान में अपना 10 प्रतिशत उत्‍पादन भारत में करती है और अगले तीन सालों में वह इस आंकड़े को 50 प्रतिशत पर ले जाना चाहती है. काउंटरपॉइंट रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्‍टर तरुण पाठक का कहना है कि नए प्‍लांट से सैमसंग को मार्केट तक पहुंचने में कम समय लगेगा. साथ ही वह सार्क देशों में अपने निर्यात को भी बढ़ा सकती है.

बुरहान की बरसी पर कश्मीर में तनाव

हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की दूसरी बरसी के चलते कश्मीर में तनाव का माहौल है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैन्य बलों को भी तैनात किया गया है।

सूत्रों के अनुसार कश्मीर के कई जिलों में माहौल खराब होने के कारण अमरनाथ यात्रा पर रोक लगाईं जा सकती है।

शनिवार को सेना और पत्थरबाजों के बीच हुई झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए।

सुरक्षा बल शनिवार सुबह से ही जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

अलगाववादियों ने श्रीनगर बंद का ऐलान किया है जिसकी वजह से कई इलाकों में कर्फ्यू जैसा माहौल बना हुआ है।

बुरहान वानी की मौत को दो साल पूरा होने पर रविवार को अलगाववादियों की रैली करने की योजना को नाकाम करने के लिए प्रशासन ने कश्मीर के त्राल में कर्फ्यू लगा दिया है।। घाटी के शेष हिस्सों में भी लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां हैं।

शहर की तरफ जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया है और प्रतिबंधों को लागू करने के लिए पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को भारी संख्या में तैनात कर दिया गया है।