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शादी के बाद दीपिका के घर पर रहेंगे रणवीर

अब तक आप को पता चल ही गया होगा कि दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह नवंबर 14 और 15 को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं।

मगर हो सकता है कि आपको ये न पता हो कि शादी के बाद रणवीर दीपिका के घर में ही रहेंगे। अरे नहीं, हमेशा के लिए नहीं।

असल में रिपोर्ट्स की मानें तो रणवीर और दीपिका नये घर की तलाश कर रहे हैं। जब तक उन्‍हें नया घर नहीं मिल जाता तब तक दोनों के फैसले के मुताबिक़ रणवीर दीपिका के साथ ही रहेंगे।

बताया जा रहा है कि बंगला खरीदने के लिए दोनों का बजट करीब 70 करोड़ रुपए है।

जहां दीपिका फिलहाल प्रभादेवी इलाके में रह रही हैं। रणवीर के पास गोरेगांव, मुंबई में एक फ्लैट है जिसकी कीमत 10 करोड़ रुपए है । प्रभादेवी, मुंबई में सी-फेसिंग एक और फ्लैट है, जिसे उन्होंने 15 करोड़ रुपए में खरीदा था।

दीपिका का बांद्रा, मुंबई, में एक फ्लैट है जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपए है। यह फ्लैट उन्होंने किराए पर दे रखा है। हर महीने उन्हें 2 लाख रुपए किराया मिलता है। इसके अलावा प्रभादेवी इलाके में भी उनका एक फ्लैट है, जिसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपए है।

शादी की रस्‍में शुरू हो चुकी है। रणवीर के घर से मेहंदी सेरेमनी की तसवीरें हाल ही में वायरल हुई थी।

ख़बरों के अनुसार दीपिका ने 20 लाख का मंगलसूत्र खरीदा है और लगभग 1 करोड़ के गहने खरीदे हैं।

दीपिका साउथ इंडियन और रणवीर नार्थ इंडियन हैं इसलिए दोनों की फैमिली ने तय किया है कि शादी दोनों के ही रीति-रिवाजों से होगी।

नवंबर 14 को दीपिका-रणवीर की साउथ इंडियन रीति-रिवाज से शादी होगी।  नवंबर15 को सिंधी-पंजाबी अंदाज़ में शादी होगी।

पूर्व गवर्नर ने कहा आरबीआई के पास ‘ना’ कहने की है आजादी

केंद्रीय बैंक किसी सरकार के लिए ‘कार की सीट बेल्ट’ की तरह होता है, जिसके बिना नुकसान हो सकता है। यह बात  भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने आरबीआई का पक्ष लेते हुए कही।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राजन ने कहा कि सरकार अगर आरबीआई पर लचीला रुख अपनाने का दबाव डाल रही हो तो केंद्रीय बैंक के पास ‘ना’ कहने की आजादी है।
आरबीआई निदेशक मंडल की 19 नवंबर को होने वाली बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि बोर्ड का लक्ष्य संस्था की रक्षा करना होना चाहिए, न कि दूसरों के हितों की सुरक्षा। ‘
राजन ने ‘एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘आरबीआई सीट बेल्ट की तरह है. सरकार चालक है, चालक के रूप में हो सकता है कि वह सीट बेल्ट न पहने. पर, हां यदि आप अपनी सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं और दुर्घटना हो जाती है तो वह दुर्घटना अधिक गंभीर हो सकती है। ‘
भाषा की एक रिपोर्ट ने बताया कि अतीत में आरबीआई और सरकार के बीच रिश्ता कुछ इसी प्रकार का रहा है। सरकार वृद्धि तेज करने की दिशा में काम करना चाहती है और वह आरबीआई द्वारा तय सीमा के तहत जो कुछ करना चाहती है करती है। आरबीआई ये सीमाएं वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखकर तय करता है।
राजन ने कहा, ‘इसलिए सरकार आरबीआई पर अधिक उदार रुख अपनाने के लिए जोर देती है। ‘
राजन ने कहा कि केंद्रीय बैंक प्रस्ताव की ठीक ढंग से पड़ताल करता है और वित्तीय स्थिरता से जुड़े खतरों का आकलन करता है।
उन्होंने कहा, ‘हमारी (आरबीआई की) जिम्मेदारी वित्तीय स्थिरता को बनाये रखना है और इसलिए हमारे पास ना कहने का अधिकार है.’
राजन ने कहा, ‘निश्चित तौर पर आरबीआई यूं ही ना नहीं कहता है. वह ऐसा तब कहता है, जब परिस्थितियों की जांच के बाद उसे लगता है कि प्रस्तावित कदम से बहुत अधिक वित्तीय अस्थिरता आएगी। मेरे ख्याल से यह रिश्ता लंबे समय से चलता आ रहा है और यह पहला मौका नहीं है जब आरबीआई ने ना कहा हो। ‘

कर्नाटक उपचुनाव में भाजपा को जोरदार झटका

कर्नाटक में तीन लोक सभा और दो विधानसभा उपचुनावों के नतीजे में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। सरदार पटेल की मूर्ती की स्थापना और भाजपा में राम मंदिर के शोर के बीच कर्नाटक ने इन उपचुनावों में कुल पांच सीटों में से भाजपा को सिर्फ एक सीट मिली है जबकि चार सीटों पर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। नतीजे आते ही कांग्रेस ने इसे पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ देश में बन रहे माहौल का संकेत बताया है।

कांग्रेस ने सबसे बड़ी जीत बेल्लारी में दर्ज की है जहाँ भाजपा के पास सीट थी। बेल्लारी में कांग्रेस के यूएस उगरप्पा, मांड्या में जेडीएस के एलआर शिवराम गौड़ा, शिवमोगा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष येदियुरप्पा के बेटे बीवाई राघवेंद्र, रामनगर में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी की पत्नी अनीता कुवारस्वामी और जमखंडी में कांग्रेस के ए सिद्दू न्यामगोडा जीत गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसे राहुल गांधी और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की जीत बताया है।

बेल्लारी लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने भाजपा को २ लाख १४ हजार वोट से हराया, मांड्या लोकसभा सीट पर जेडीएस ने भाजपा उम्मीदवार को २.५० लाख वोट से हराया, शिवमोगा सीट पर भाजप ने जेडीएस को ४७ हजार वोट से हराया, रामनगर विधानसभा सीट पर जेडीएस ने भाजपा को १ लाख ९ हजार वोट से हराया, जामखंडी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी को ३९४८० वोट से हराया है।

मतों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरू हुई और इसके लिए कुल १२४८ मतगणना कर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मतगणना के दौरान कोई भी अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इन पांच सीटों के लिए कुल 31 उम्मीदवार मैदान में थे।   हालांकि मुकाबला मुख्यत: कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन और भाजपा के बीच है।

शनिवार को हुए मतदान में औसतन ६७ फीसदी वोट पड़े थे। शिवमोग्गा, बल्लारी और मांड्या लोकसभा सीट पर क्रमश: ६१.०५, ६३.८५ और ५३.९३ फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। रामनगर और जामखंडी विधानसभा सीटों पर क्रमश: ७३.७१ और ८१.५८ फीसदी मतदान हुआ था।

दिवाली के दिन दिल्ली पर मौसम का नज़रे करम: मिलेगी बेहतर हवा

दिल्ली-एनसीआऱ के इलाकों में अगले दो दिनों में हवा की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों के अनुसार सात नवंबर को दीवाली के मद्देनजर दिल्ली की हवा को बेहतर बनाये रखने में मौसम का मिजाज अहम भूमिका निभायेगा।

दिल्ली क्षेत्र की मौसम पूर्वानुमान इकाई के वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार को देर शाम छिटपुट बूंदाबांदी के कारण वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ने, हवा की गति में कमी आने और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गयी।

भाषा से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस सप्ताह बारिश के कोई आसार नहीं है, हवा की गति में बढ़ोतरी होगी और सात नवंबर के बाद तापमान भी बढ़ेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिये पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित 52 निगरानी दल दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में लगातार औचक निरीक्षण अभियान चला रहे हैं।

वायु प्रदूषण पर नियंत्रण में अनुकूल मौसम की भूमिका को देखते हुये सभी एजेंसियों की नजरें अब मौसम विभाग पर टिकी हैं।

श्रीवास्तव के अनुसार सात नवंबर तक दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में हवा की गति 10 से 12 किमी प्रति घंटा रहेगी और न्यूनतम तापमान 12 से 13 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि बुधवार तक सुबह के समय कोहरा और धुंध रहेगी लेकिन दिन में हवा की गति बढ़ने से कोहरा और धुंध से राहत मिलेगी।

नवंबर 9 और 10 को एक बार फिर पहाड़ों पर बर्फबारी शुरु होने से दिल्ली सहित उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जायेगी।

अमेरिका दादागिरी बंद करे : ईरान

ईरान ने अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में इसे ”अमेरिका की दादागीरी” बताया है। गौरतलब है कि अमेरिका ने एक दिन पहले ही ईरान पर यह  प्रतिबंध लागू किया हैं।

हालांकि, प्रतिबंधों के बावजूद अमेरिका ने भारत समेत आठ देशों को ईरान से तेल खरीदने की छूट दी है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि ईरान से तेल खरीदने की पाबंदी से भारत, चीन और जापान सहित इटली, यूनान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और तुर्की को फिलहाल अस्थायी रूप से राहत दी गयी है। पोम्पियो ने  मीडिया को बताया था कि ”हमने खास परिस्थितियों को देखते और बाजार में पर्याप्त मात्रा में तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये इन गिने-चुने देशों को ईरान से तेल आयात की छूट अस्थायी रूप देने का फैसला किया है।

उधर अपनी प्रतिक्रिया में ईरान ने अमेरिका को जमकर कोसा है उसे ”दादागीरी से बाज आने” के लिए कहा है। प्रतिबंधों पर ईरान के विदेश मंत्रालय के स्पोक्समैन बहराम काजमी को उद्धत करते हुए मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ”अमेरिका को अपनी सर्वाधिकारवादी और दमनकारी नीतियों को त्याग देना चाहिए। आर्थिक प्रतिबंध लगाकर ईरान को हराने की अमेरिका की योजना विफल रही है। अमेरिका का मनोवैज्ञानिक युद्ध भी सफल नहीं हो सका है।”

प्रवक्ता को यह कहते रिपोर्ट्स में उद्धत किया गया है – ”अमेरिका को दूसरे देशों के प्रति अपना व्यवहार बदलना चाहिए।”  गौरतलब है कि अमेरिका के प्रतिबंध के तहत यदि कोई देश या कंपनी ईरान से तेल खरीदती है तो उस देश या कंपनी पर भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हो सकती है।

आरबीआई गवर्नर को बैंक डिफॉल्टर्स की सूची न जारी करने पर मिला नोटिस

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को  केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसमें उनसे जानबूझकर बैंक ऋण नहीं चुकाने वालों की सूची का खुलासा करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ‘अनुपालना नहीं’ करने की वजह पूछी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सीआईसी ने इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कहा है कि वे फंसे हुए कर्ज पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का पत्र सार्वजनिक करें।
भाषा की खबर के अनुसार उच्च न्यायलय के आदेश के बावजूद 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक का ऋण लेने और जानबूझकर उसे नहीं चुकाने वालों के नाम के संबंध में सूचना आरबीआई द्वारा नहीं उपलब्ध कराने को लेकर नाराज सीआईसी ने पटेल से यह बताने के लिए कहा है कि फैसले की ‘अनुपालना नहीं करने’ को लेकर उन पर क्यों न अधिकतम जुर्माना लगाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्होंने जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के नामों का खुलासा करने को कहा था।
सीआईसी ने बताया कि पटेल ने गत 20 सितम्बर को सीवीसी में कहा था कि सतर्कता पर सीवीसी की ओर से जारी दिशानिर्देश का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले संगठनों में समग्र सतर्कता प्रशासन को बेहतर बनाना है।
सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा, ‘आयोग का मानना है कि आरटीआई नीति को लेकर जो आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर कहते हैं और जो उनकी वेबसाइट कहती है उसमें कोई मेल नहीं है।  जयंती लाल मामले में सीआईसी के आदेश की उच्चतम न्यायालय द्वारा पुष्टि किये जाने के बावजूद सतर्कता रिपोर्टों और निरीक्षण रिपोर्टों में अत्यधिक गोपनीयता रखी जा रही है।’
उन्होंने कहा कि इस अवज्ञा के लिए सीपीआईओ को दंडित करने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी क्योंकि उन्होंने शीर्ष प्राधिकारियों के निर्देश के तहत कार्य किया।

शीला के ड्रीम प्रोजेक्ट के उद्घाटन पर आप-भाजपा भिड़े

यह दिलचस्प ही है कि पूर्व कांग्रेस सरकार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के ”ड्रीम प्रोजेक्ट” के उदघाटन पर  सत्तारूढ़ आप और विपक्षी भाजपा के नेता आपस में भिड़ गए। शीला दीक्षित तो इस उदघाटन  कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं थीं लेकिन आप और भाजपा ने ”सिग्नेचर ब्रिज” के बनने का श्रेय लेने की होड़ ज़रूर दिखी। मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इसका उदघाटन किया।

यमुना नदी पर बने सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन से पहले दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी वहां पहुंचे और इसके बाद जमकर हंगामा हो गया। दिल्ली सरकार ने उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था लेकिन तिवारी का कहना था कि वे इस क्षेत्र के सांसद हैं।

दिल्ली वासियों को सबसे ऊँचे ”सिग्नेचर ब्रिज” की सौगात तो मिल गई लेकिन उदघाटन खटास भरा रहा। केजरीवाल को काले झंडे दिखाए गए जबकि मनोज तिवारी की पुलिस के लोगों से झड़प हो गयी।  रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्यक्रम की जगह भाजपा और आप समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में तिवारी ने ट्वीट कर कहा – ”कुछ शर्म बची है मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल। बैरिकेड लगवा हमें रोक रहे हो। मेरे निर्वाचन क्षेत्र (उत्तर-पूर्व दिल्ली) में मैंने कई वर्षों से रुके पुल के निर्माण को शुरू कराया और अब अरविंद केजरीवाल उद्घाटन समारोह आयोजित कर रहे हैं”।

कार्यक्रम के मौके पर एक पतरकार की तरफ से सवाल उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी पूछा गया कि जिन शीला दीक्षित का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था उन्हें क्यों नहीं आमंत्रित किया तो सिसोदिया का जवाब था – तमाम दिल्लीवाले उद्घाटन के मौके पर आमंत्रित हैं। सभी दिल्लीवालों में शीलाजी भी आती हैं”।

उधर आज की घटना से खफा मनोज तिवारी ने कहा कि उन्हें उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया था। ”मैं यहां से सांसद हूं। तो समस्या क्या है? क्या मैं अपराधी हूं? पुलिस ने मुझे क्यों घेर लिया? मैं उनका (सीएम केजरीवाल) स्वागत करने के लिए यहां हूं। आप (पार्टी के लोगों) और पुलिस ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया है”।

 इसका जवाब केजरीवाल ने भी ट्वीट से दिया – ‘अप्रत्याशित। सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन स्थल पर भाजपा की अराजकता। यह दिल्ली सरकार का कार्यक्रम है। पुलिस मूकदर्शक है। क्या एलजी, दिल्ली पुलिस के प्रमुख होने के नाते सिग्नेचर पुल उद्घाटन स्थल पर शांति और व्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं”?

यह पुल करीब आठ साल में १५१८ करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है। सिग्नेचर ब्रिज से मध्य,उत्तर और पूर्वी दिल्ली के बीच आवागमन सुगम हो जाएगा। अभी घंटों जाम में फंसना पड़ता है। सिग्नेचर ब्रिज के १५४ मीटर ऊंचे टावर के शीर्ष पर ५ मंजिला ग्लास बॉक्स भी है। टावर के दोनों खंभों के अंदर से लिफ्ट ऊपर आएगी और फिर यहां से दूसरे लिफ्ट के जरिए ग्लास बॉक्स में आने की सुविधा मिलेगी जो पर्यटकों को शहर का विहंगम दृश्य दिखा सकेगा।

सोनीपत के पास हादसे में १३ की मौत

हरियाणा के सोनीपत में एक बड़े सड़क हादसे में १३ लोगों की मौत की खबर है। तहलका को मिली जानकारी के मुताबिक यह हादसा गोहाना-सोनीपत मार्ग पर हुआ है।  इसमें एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल भी हो गए हैं।

सोनीपत जिले में गोहाना-पानीपत हाईवे पर हुए इस सड़क हादसे के घायल कम से कम १५ लोगों को खानपुर के पीजीआई में भर्ती किया गया है। जानकारी के मुताबिक हादसा गोहाना के गांव मुंडलाना के पास हुआ है।  सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गयी है।

कहा जा रहा है कि गलत साइड से एक ट्राले ने कार ,क्रूजर और मोटरसाइकिल को जरदस्त टक्कर मार दी जिससे यह हादसा हुआ है। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं और घायल को अस्पताल भेजा जा रहा है। शवों को वाहनों के नीचे से निकला जा रहा है। हादसा इतना जबरदस्त था कि मरने वालों के शरीर बुरी तरह कट-फैट गए हैं।

बताया गया है कि क्रूजर पानीपत से आ रही थी। मुंडलाना के पास बड़े ट्राले को ओवरटेक करने की नाकाम कोशिश की और इस दौरान हादसा हो गया। ट्राले में क्रूजर के साथ नजदीक से जा रही स्विफ्ट गाड़ी भी चपेट में आ गई। मौत का शिकार लोगों में से ज्यादातर क्रूजर में सवार थे।

असम में दो संदिग्ध नागा आतंकी मारे

असम में तिनसुखिया की घटना के बाद अब कछार ज़िले में हरीनगर गाँव में दो संदिग्ध नागा आतंकवादियों की लोगों ने पीट-पीट कट कर हत्या कर दी है। अभी तक इन दोनों की पहचान नहीं हो पाई है लकिन स्थानीय लोगों का आरोप है की यह लोग हथियार दुसरी जगह ले जाने का काम करते थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों की पिटाई से इन दोनों संदिग्ध नागा उग्रवादियों की घटनास्थल पर ही  मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि ये आतंकी बड़ी संख्या में हथियार का ज़खीरा दूसरे  गाँव को ले जा रहे थे जब लोगों ने इन्हें नोटिस किया।

जानकारी के मुताबिक स्थानीय लोगों ने दोनों को पकड़ लिया और उनकी जमकर पिटाई की। उन्हें लोग तब तक पीटते रहे जब तक वे दम नहीं तोड़ गए। लोगों का आरोप है कि यह दोनों नागा आतंकी हैं और बड़ी संख्या में हथियार पास के दूसरे इलाके में देने जा रहे थे।

उनका कहना है कि आतंकी  हरीनगर गाँव का हथियारों को सूबे के अन्य हिस्सों में ले जाने के इस्तेमाल करते हैं जिससे स्थानीय लोग भी उनसे खफा हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मरे गए दोनों संदिग्ध आतंकवादियों की पहचान नहीं हो पाई है।

मानवीय चूक के चलते हुआ हादसा

इस साल दशहरे पर जो रेल हादसा अमृतसर में हुआ उसकी परछाई काफी लंबे समय तक लोगों के जहन में छाई रहेगी। इस हादसे में सरकारी आंकडों के अनुसार 59 लोगों की जान चली गई। मरने वालों में औरतें-पुरुष, बच्चे-बूढ़े और जवान शमिल हैं। 10-15 सेकेंड में जलंधर से अमृतसर जा रही डीएमयू गाड़ी ने रेल के ट्रैक पर खड़े इन लोगों को कुचल डाला। पता चला है कि जोड़ा फाटक पर जहां यह हादसा हुआ हर साल रावण के पुतले का दहन किया जाता है। यदि हालात पर नजऱ डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ऐसा हादसा कभी भी हो सकता था। यह संयोग की बात है कि यह घटना अब हुई। इससे भी दुखद बात यह है कि हादसे के बाद उस पर पूरी सियासत शुरू हो गई। अकाली नेता सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को दोषी मान कर उस पर आरोप लगा रहे हैं और कांग्रेस पार्टी अकालियों को चपेट में लेने पर लगी है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की कोशिश इन दोनों को घेर कर अपने लिए एक वोट बैंक तलाश करने की ही।

इसी प्रकार नागरिक प्रशासन रेलवे को दोषी बता रहा है और रेलवे बोर्ड ने अपने पर लगे आरोप सिरे से खारिज कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि आखिर इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है। किसी की जिम्मेदारी तय करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना होगा।

सबसे पहले कि क्या दशहरे के लिए स्थान का चयन करने से पहले यह अंदाजा लगाया गया था कि जिस स्थान पर रावण का दहन होगा वहां कितने लोगों के लिए स्थान है, और कितने लोगों के इक_ा होने का अनुमान है? क्या किसी आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञों से कोई राय ली गई थी? क्या आयोजकों ने इतने बड़े आयोजन के लिए प्रशासन से औपचारिक इज़ाजत ली थी? यदि प्रशासन ने इज़ाजत दी थी तो क्या उसने इसके लिए कोई आपात योजना तैयार की थी? क्या आयोजन से संबंधित सभी विभागों को पहले से सूचित कर दिया गया था? क्या फायर बिग्रेड और डाक्टरी सहायता वहां उपलब्ध थी?

हालात का जायजा लेने पर साफ पता चलता है कि उपरोक्त सभी सवालों के जवाब ‘नहींÓ में हैं। शहर के बीचो-बीच हुए इस हादसे में पहली डाक्टरी सहायता एक एंबुलेंस के तौर पर 30 मिनट के बाद घटना स्थल पर पहुंची। कहीं कोई योजना नहीं थी। चारों ओर अफरा-तफरी मची हुई थी। प्रशासन पूरी तरह पंगु नजऱ आ रहा था। हादसे के समय वहां मौजूद मुख्य अतिथि नवजोत कौर हादसा होते ही वहां से निकल गईं।

ऐसा नहीं है कि इस प्रकार का यह पहला हादसा है। हमारे देश में ऐसे हादसे होते रहते हैं। खास कर धार्मिक स्थलों में जहां लोगों की अपार  भीड़ जमा होती है। वहां कभी  भगदड़ में सैंकड़ों लोग मर जाते हैं तो कभी पंडालों में लगी आग में लोग झुलस जाते हैं। सरकार वोटों की राजनीति के चलते किसी भी धार्मिक समागम पर कोई रोक नहीं लगाती।  आयोजकों को सुरक्षा संबंधी हिदायतें नहीं दी जाती। यदि कागज़ों में कुछ निर्देश दिए भी गए हों तो उन पर अमल करने के लिए ज़ोर नहीं दिया जाता। बाकी की बात तो दूर है, पर प्रशासन आज तक रात को 10 बजे के बाद ‘लाऊड स्पीकरÓ का प्रयोग ही बंद नहीं करवा पाया। शादियों में तो कभी-कभी ऐसा हो भी जाता है, पर धार्मिक आयोजन में तो पूरी-पूरी रात यह सब चलता रहता है। आस पास के लोग सो नहीं सकते, मरीजों को आराम नहीं मिलता और बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती पर पुलिस प्रशासन ‘लाऊड स्पीकरÓ बंद नहीं करवा पाता । जब कोई हादसा हो जाता है तो फिर एक-दूसरे पर दोषारोपण शुरू हो जाता है। कुछ दिन उस पर टीवी पर बहस होती है, बड़े-बड़े  दावे किए जाते हैं, पर हालात नहीं बदलते। इंतजार रहता है अगले हादसे का।

दोषी कौन?

अमृतसर रेल हादसे के लिए दशहरे के आयोजक और नागरिक प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस आयोजन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन और आयोजकों को यह अनुमान तक नहीं था कि वहां कितने लोगों की भीड़ जुटने वाली है। उन्होंने आयोजन स्थल के निकट से गुजरने वाली रेल लाइन को भी पूरी तरह अनदेखा किया। वहां पर पूरी ‘बैरीकेटिंग’ नहीं की गई थी। फिर इस आयोजन को दिखाने के लिए लगाई गई एक बड़ी टीवी स्क्रीन ऐसे स्थान पर थी जिसे देखने के लिए लोग रेलवे ट्रैक पर चले गए। रावण के पुतले की ऊंचाई वहां उपलब्ध स्थान के अनुपात में बहुत ज़्यादा थी। लोगों की भीड़ के पास पीछे हटने की पूरी जगह नहीं थी। यही कारण था कि जैसे ही पुतले में आग लगाई गई, उसकी आग भड़की और उसमें रखे पटाखे फूटने लगे तो लोग घबराहट में पीछे हटते गए और रेलवे ट्रैक पर जा पहुंचे। संयोग से उसी वक्त वहां से डीएमयू गाड़ी गुजर रही थी। पटाखों के शोर में किसी को गाड़ी की आवाज़ सुनाई नहीं दी। जिन्हें सुनी भी उन्हें  ट्रैक से बाहर आने का समय तक नहीं मिला। गाड़ी के चालक का यह कहना सही है कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि ट्रैक पर सैकड़ों लोग खड़े हैं। फिर भी उसने गति को धीमा किया जो 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घटकर 65-68 किलोमीटर प्रति घंटा पर आ गई, लेकिन उस गति में गाड़ी के ‘इमरजेंसीÓ ब्रेक नहीं लगाए जा सकते थे, नही ंतो गाड़ी के पलटने का खतरा हो सकता था। यही वजह थी कि गाड़ी रुकी नहीं। वैसे भी ऐसे मौकों पर भीड़ अक्सर चालक पर हमला कर देती है। अब चालक अपनी जान बचाए या उन लोगों कि जो ट्रैक के बीच में खड़े हो कर तमाशा देख रहे थे।

आपदा प्रबंधन को गंभीरता से लेना ज़रूरी

अमृतसर की इस घटना के बारे में कनाडा में ब्रेंम्पटन इमरजेंसी मैनेजमेंट आफिस  (बीईएमओ) से जुड़े कम्युनिटी इमरजेंसी रिस्पांस वलंटियर क्षितिज मोहन का कहना है कि इस घटना को बड़ी आसानी से रोका जा सकता था यदि आयोजकों ने पहले से ही आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञों के साथ पूरी योजना पर विचार किया होता। कनाडा की मिसाल देते हुए क्षितिज ने बताया कि वहां चाहे छोटे से छोटा समारोह भी आयोजित करना हो, जिसमें बहुत कम लोग इक_ा होने हों, तो भी आयोजकों को आपदा प्रबंधन विभाग के साथ संपर्क करना पड़ता है। उसके बाद आपदा होने के जो-जो भी संभावित कारण हो सकते हैं, उन सभी पर विचार करके उनके निवारण के सभी प्रबंध पहले से कर लिए जाते हैं। क्षितिज के मुताबिक छोटे समारोहों के लिए जारी निर्देशों की जो फाइल बनती है उसके 24 से 25 पृष्ठ होते हैं। इस प्रकार वहां मानव जीवन को प्राथमिकता दी जाती है।

क्षितिज ने बताया कि किसी भी समारोह के लिए सबसे पहले उस समारोह के आयोजकों समेत उस आयोजन में शामिल होने वाले सभी लोगों और विभागों को आपस में जोड़ा जाता है। फिर एक -दूसरे से पुख्ता संबंध स्थापित करने के लिए पूरी योजना बनती है। एक-दूसरे से बातचीत करने के सभी माध्यमों को अपनाया जाता है।

 इसके पश्चात समारोह स्थल और उसके आस-पास जहां से कोई भी खतरा हो सकता है, उन बिंदुओं को निर्धारित किया जाता है। तकनीकी भाषा में इसे ‘हैजडऱ् आइडेंटिफिकेशन एंड रिस्क एसेसमेंटÓÓ यानी एचआईआरए (हीरा) कहा जाता है। इसमें खराब से खराब स्थिति को ध्यान में रख कर पूरी तैयारी की जाती है। ताकि यदि कोई आपदा पैदा हो तो उससे आसानी से निपटा जा सके।

अब आयोजकों और उस समारोह से जुड़े दूसरे लोगों के साथ मिल कर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समारोह स्थल पर आपदा की विभिन्न परिस्थितियों के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करता है। फिर उन योजनाओं का पूरा ब्यौरा आयोजकों और उससे जुड़े दूसरे लोगों में बांट दिया जाता है। इसके बाद ‘मॉक ड्रिल’ की जाती है, ताकि आपदा बचाव से जुड़े हर व्यक्ति को उसकी भूमिका पूरी तरह समझ में आ जाए। पूरे समारोह के दौरान इससे जुड़े सभी लोग और संस्थान रेडियो जैसे संचार माध्यमों से एक-दूसरे के साथ लगातार संपर्क में जुड़े रहते हैं।

इसके अलावा ‘इमरजेंसी रिस्पांस वालंटियर्स’ की भी तैनाती की जाती है। भारत में अभी ‘इमरजेंसी रिस्पांस वालंटियर्स’ वाली सोच नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ आम लोगों को इसका प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

क्षितिज के मुताबिक यदि इन छोटी-छोटी  बातों पर भी ध्यान दिया गया होता और आयोजकों ने सिविल प्रशासन और रेलवे के साथ तालमेल बिठाया होता तो आज यह घटना न होती और बेकसूर लोग मारे नहीं जाते।

फुट ब्रिज पर भगदड़, दो मरे

इसी प्रकार की एक घटना 23 अक्तूबर 2018 की है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एक फुट ब्रिज पर भगदड़ मच गई और दो लोग मारे गए व 17 घायल हो गए। रेलवे का यह फुटब्रिज प्लेटफार्म दो और तीन को जोड़ रहा था। घायलों में कई बच्चे और महिलाएं भी हैं। एक व्यक्ति की हालत बेहद गंभीर बताई गई। दक्षिण-पूर्वी रेलवे के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब एक एक्सप्रैस ट्रेन और ईएमयू स्थानीय गाडिय़ां सवेरे 6.30 बजे एक साथ ही आ पहुंची। इन गाडिय़ों में सवार होने के लिए लोग इक_े ही फुटब्रिज पर चढऩे लगे। इसके साथ ही शालीमार-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस और संतरागाछी-चेन्नई एक्सप्रेस भी शीध्र ही आने वाली थीं। एक ही समय उतरने और चढऩे का प्रयास कर रहे यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की होने के बाद भगदड़ मच गई।

यात्रियों का कहना था कि इस प्रकार की घटनाएं यहां, अक्सर होती रहती हंै, पर इन्हें  रोकने के लिए कोई कोशिश नहीं की जाती।