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करूणानिधि की हालत बेहद नाजुक और अस्थिर

काफी दिन से चेन्नेई के कावेरी अस्पताल में भर्ती द्रमुक अध्यक्ष एम करूणानिधि की हालत बेहद नाजुक और अस्थिर बताई गयी है। वह पिछले 11 दिन से इस अस्पताल में भर्ती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य भर में पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है जिससे संकेत मिलते हैं हैं कि बुजुर्ग नेता करुणानिधि की हालत अच्छी नहीं है। अस्पताल के हेल्थ बुलेटिन में भी करुणानिधि की सेहत को लेकर कहा गया है कि पिछले कुछ घंटों में इसमें तेजी से गिराबट आई है। बड़ी संख्या में करुणानिधि के समर्थक कावेरी अस्पताल और उनके आवास के बाहर जमा हो गए हैं और वे अपने प्रिय नेता के लिए दुआ कर रहे हैं। करुणानिधि के परिवार के तमाम सदस्य जिनमें स्टालिन भी शामिल हैं, इस समय अस्पताल में मौजूद हैं।
इस से पहले सोमवार शाम कावेरी अस्पताल की ओर से जारी किए गए मेडिकल बुलेटिन में कहा गया था कि

कारयणानिधी की तबीयत बहुत नाजुक है और अगले 24 घंटे उनके लिए बहुत अहम हैं। करुणानिधि 29 जुलाई से चेन्नई के कावेरी अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। इस दौरान देश के कई बड़े नेता जिनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा शामिल हैं, उन्हें देखने अस्पताल जा चुके हैं। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आज रात चेन्नई पहुँच रही हैं।
कावेरी अस्पताल के बयान में कहा गया है कि करुणानिधि की उम्र के हिसाब से उनके शरीर के सभी अंग काम नहीं कर रहे हैं। डॉक्टर उन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और एक्टिव मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि तीन जून को करुणानिधि ने अपना 94वां जन्मदिन मनाया था। करीब ५० साल पहले 26 जुलाई को उन्होंने डीएमके की कमान अपने हाथ में ली थी। लंबे समय तक करुणानिधि के नाम हर चुनाव में अपनी सीट न हारने का रेकार्ड भी रहा है।

वे पांच बार सीएम और 12 बार विधानसभा सदस्य रहे हैं। अभी तक वह जिस भी सीट पर चुनाव लड़े हैं, उन्होंने हमेशा जीत दर्ज की। करुणानिधि ने 1969 में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाला था और इसके बाद 2003 में आखिरी बार मुख्यमंत्री चुने गए थे।

अनुच्छेद ३५ए पर सुनवाई अब २७ अगस्त को

जम्मू और कश्मीर में धारा 35ए को लेकर चल रहे समर्थक और विरोधी प्रदर्शनों के बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुडी सुनवाई २७ अगस्त तक के लिए टल गयी। गोरतलब है कि सूबे को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा ३५ए को रद्द करने संबंधी याचिका सुप्रीम कोर्ट में है जिसपर आज सुनवाई होनी थी।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ के तीन न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के उपस्थित न होने के कारण धारा ३५ ए पर सुनवाई स्थगित की गयी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है कि क्या अनुच्छेद 35ए के मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाए। हम केवल यह देखेंगे कि क्या अनुच्छेद 35ए संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ जाता है?

आजकल इस अनुच्छेद को ख़त्म करने के खिलाफ कश्मीर में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं जबकि जम्मू संभाग में लोगों की राय इसे ख़त्म कर देने के पक्ष में है और वे इसे ख़त्म करने के हक़ में प्रदर्शन कर रहे हैं। कश्मीर की मुख्या धारा की बड़ी पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी

(पीडीपी) के अलावा राष्ट्रीय दल माकपा और कांग्रेस की प्रांतीय इकाईयां, अन्य राजनितिक दलों के अलावा अलगाववादी संगठन भी अनुच्छेद 35-ए को बनाये रखने पर जोर दे रहे हैं।

धारा ३५ ए में प्रावधान है कि सूबे से बाहर के लोग जम्मू कश्मीर में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते। घाटी के अलगाववादी संगठनों के बंद के आह्वान के कारण सोमवार को भी वहां जान जीवन ठप्प रहा। बंद के कारण घाटी भर में आम दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे जबकि सड़कों पर वाहन भी काम ही दिख रहे हैं।

बंद को देखते हुए घाटी में ट्रेन सेवा आज तक के लिए निलंबित कर दी गयी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा किसी भी आशंका से बचाने के लिए किया गया है। उधर सूबे के एक प्रशासनिक अधिकारी शाह फैसल ने रविवार को अमेरिका में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 35 ए को रद्द करने से बाकी देश से जम्मू कश्मीर का नाता खत्म हो जाएगा। शाह के ब्यान को कुछ तबकों ने विवादित बताया है जबकि कुछ ने इसका समर्थन किया है। गौरतलब है कि २०१० बैच के अधिकारी शाह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के टॉपर रहे हैं। फैसल ने कहा कि ”इसके बाद (धारा ३५ए) को ख़त्म कर देने से चर्चा के लिए कुछ भी नहीं बचेगा। ”जम्मू कश्मीर के संबंध में विशेष संवैधानिक प्रावधान से देश की संप्रभुता और अखंडता को कोई खतरा नहीं है। राज्य के लिए कुछ विशेष प्रावधान हैं जिनसे यह देश की अखंडता को कोई खतरा नहीं है।”

अब देवरिया के शेल्टर होम में मासूमों से बहशियाना काण्ड

अभी बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में मासूमों के साथ बहशियाना काण्ड की स्याही सूखी भी नहीं है कि उत्तर प्रदेश के देवरिया से वैसे ही शर्मनाक मामले की जानकारी मिली है। देवरिया के एक बालिका गृह – मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण और सामाजिक सेवा संस्थान – में भी लड़कियों के शारीरिक शोषण का मामला सामने आया है। यह मामला तब सामने आया जब रविवार शाम संरक्षण गृह से भागी एक लड़की ने पुलिस को इस भयावह जुल्म की जानकारी दी।

इसके तुरंत बाद पुलिस में हड़कंप मच गया और आनन-फानन पुलिस ने रात को ही संरक्षण गृह पर छापा मार कर वहां रह रही ४२ में से २४ लड़कियों को मुक्त करा लिया। हालांकि इस शेल्टर होम से अभी भी १८ लड़कियां गायब बताई गईं हैं। पुलिस ने इस मामले में होम की संचालिका और उसके पति और बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस गायब लड़कियों की तलाश में जुट गयी है।

इस मामले में उत्तर प्रदेश की महिला और बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि पिछले साल सीबीआई के इंस्पेक्शन के बाद यह पाया गया था कि देवरिया का शेल्टर होम अवैध तरीके से चल रहा है। लड़कियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने और इसे बंद करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। शेल्टर होम में कई अवैध गतिविधियां चल रही थीं। पहली अगस्त को एफआईआर दर्ज करवाई गई है। शेल्टर होम में पंजीकृत बच्चियों का सही रेकार्ड भी नहीं है। ”मामले की जांच चल रही है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला थाने पहुंच कर लड़की ने अपनी आपबीती सुनाई जिसके बाद महिला थाना के एसओ ने तत्काल एसपी को इसकी सूचना दी। एसपी रोहन पी कनय हरकत में आए और पुलिस फोर्स भेजकर मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण और सामाजिक सेवा संस्थान पर छापेमारी करवाई। इस बालिका संरक्षण गृह एनजीओ की सूची में 42 लड़कियों के नाम दर्ज हैं। अनियमितताओं के कारण इस एनजीओ के मान्यता जून, २०१७ में ख़त्म कर दी गई थी।

सीबीआई ने भी संरक्षण गृह को अनियमितताओं में चिह्नित कर रखा है। संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे चला रही है।

उधर एसपी रोहन पी कनय ने बताया कि बिहार के बेतिया जिले की 10 साल की बच्ची रविवार देर शाम किसी तरह संरक्षण गृह से निकलकर महिला थाने पहुंची। उसने जानकारी दी वहां शाम चार बजे के बाद रोजाना कई लोग काले और सफेद रंग की कारों से आते थे और ”मैडम” के साथ लड़कियों को लेकर जाते थे। वे देर रात रोते हुए लौटती थीं और उस समय उनकी स्थिति अच्छी नहीं होती थी। आरोप के मुताबिक संरक्षण गृह में भी गलत काम होता है। लड़की ने बताया कि उन लोगों से झाड़ू पोछा भी करवाया जाता था।

संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन और बेटे को पकड़ लिया गया है। पूछताछ में उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए हैं। उनके खिलाफ मानव तस्करी, देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि एसपी देवरिया को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली काट सकती है जन सुनवाई में हिस्सा न लेने वाले अधिकारियों की सीएल

अब दिल्ली सरकार के उन अधिकारियों का आधे दिन का आकस्मिक अवकाश (सीएल) काटा जायेगा जो कामकाजी दिनों में जन सुनवाई बैठकों में हिस्सा नहीं लेते और अपनी अनुपस्थिति का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

पिछले साल मई में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे कामकाजी दिनों में अपने कार्यालयों में सुबह 10 से 11 बजे तक मुलाकात का समय लिये बिना लोगों से मिलें।

भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली सरकार के प्रशासनिक विभाग ने विभाग प्रमुखों से कहा है कि वे जन सुनवाई के समय में अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

विभाग ने विभागाध्यक्षों को हाल में लिखे पत्र में कहा, ‘‘आपात स्थिति, फील्ड विजिट ड्यूटी की स्थिति में सुबह 10 से 11 बजे के बीच जन शिकायतों को सुनने के लिये एक लिंक अधिकारी उपस्थित रहना चाहिये।’’

पत्र में यह भी कहा गया है कि जन सुनवाई के समय में अनुपस्थिति के बारे में अधिकारियों का स्पष्टीकरण विशेष वैध कारणों से समर्थित होना चाहिये।

पत्र में कहा गया है, ‘‘अगर दोषपूर्ण अधिकारियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो विभागाध्यक्ष आधे दिन का आकस्मिक अवकाश काट सकते हैं और उसकी जानकारी प्रशासनिक सुधार विभाग को दी जानी चाहिये ताकि सक्षम प्राधिकार उसे देख सकें।’’

पिछले साल केजरीवाल ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे कामकाजी दिनों में अपने कार्यालयों में बिना मुलाकात का समय लिये, लोगों से मिलें। इसके दायरे से फील्ड कर्मचारियों को बाहर रखा गया था।

स्वतंत्रता दिवस पर आतंकी साजिश बेनकाब

स्वतंत्रता दिवस में बड़ी आतंकी साजिश पुलिस ने बेनकाब कर दी है। उसने सोमवार को जम्मू के गाँधी नगर में एक आतंकी को हथियारों और गोला बारूद के साथ पकड़ा है। यह आतंकी दिल्ली जाने की तैयारी में था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक गांधी नगर पुलिस स्टेशन में दिल्ली पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के अधिकारी पकडे गए आतंकी से पूछताछ कर रहे हैं। इस आतंकी की पहचान अरफान हुसैन वानी पुत्र गुलाम हुसैन वानी है और वो कश्मीर के अवंतीपोरा में डंगर गाँव का निवासी बताया गया है। उससे पूछताछ के दौरान पता चला है कि वो दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान फिदायीन हमले की साजिश को अंजाम देने के इरादे से भारत आया था। उसने कबूल किया है कि वो आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़ा है। वो जम्मू के गांधी नगर क्षेत्र में पुलिस के हाथ लगा। उसके पास बैग से चीन निर्मित आठ यूबीजीएल ग्रेनेड बरामद हुए हैं।

पता चला है कि यह आतंकी रविवार को पुलवामा से जम्मू पहुंचा और वहां से गांधीनगर आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अरफान दिल्ली जाने वाली बस में सवार होने की तैयारी कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी भनक लग गई और वह पकड़ा गया। पकडे आतंकी से पूछताछ की जा रही है। अभी यह पता नहीं चला है कि क्या उसके और साथी भी जम्मू या किसी और जगह आये हैं।

अरफान से पूछताछ में यह साफ़ हो गया है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू या दिल्ली में सीरियल ब्लॉस्ट करने की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए पकिस्तान से यहाँ भेजा गया था। उसने कबूल कबूल किया है कि उसे पाकिस्तान और कश्मीर में बैठे आतंकी नेताओं ने निर्देश दिए।

समझा जाता है कि अरफान हो सकता है कि पहले ही दिली या जामु में मौजूद अपने साथियों को गोला बारूद देने के लिए यहाँ आया हो।

खुफिया एजेंसियों ने पहले ही दिल्ली में 72वेें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान आतंकी फिदायीन हमले के संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया हुआ है। इस अलर्ट के बाद दिल्ली एनसीआर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए तमाम सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं। दिल्ली के लाल किले के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और मेट्रो की सुरक्षा में लगी सीआइएसएफ को अत्याधिक सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किये गए हैं।

सिंधू का सपना फिर टूटा

पीवी सिंधू ने विश्व बैडमिटन चैंपियनशिप में रजत पदक जीत लिया है। फाइनल में वह स्पेन की कैरोलिना मारिन से 19-21,10-21 से 46 मिनट में हार गई। दोनों खिलाडियों के बीच यह 12वीं भिडंत थी जिसमें से पांच बार सिंधू और सात बार मारिन जीती है। इस साल  खेली गई प्रतियोगिताओं के फाइनल में सिंधू की यह चैथी हार है।

2016 के रियो ओलंपिक के साथ बड़े मुकाबलों के फाइनल में सिंधू की यह आठवीं हार है। रियो के बाद वह लगातार दो बार 2017-2018 में हांगकांग ओपन सुपर सीरिज़ हारी। फिर इस साल इंडियन ओपन और थाईलैंड ओपन के फाइनल में भी सिंधू को हार का मुंह देखना पड़ा।

यह बात सही है कि सिंधू को छोड़ कर कोई भारतीय विश्व चैंपियनशिप में पदक नहीं जीत पाया। सिंधू ने विश्व चैंपियनशिप में दो  रजत और दो कांस्य पदक जीते हैं। सिंधू ने ये दो कांस्य पदक 2013 में गुंझाओ और 2014 में कोपनहेगन में जीते थे। दूसरी और मारिन का विश्व चैंपियनशिप  का यह तीसरा खिताब रहा। उनके अलावा कोई भी और महिला खिलाडी तीन बार यह खिताब नहीं जीत पाई। इससे पूर्व वह 2014 और 2015 में भी यह खिताब जीत चुकी है।

कांग्रेस ने कहा प्रधान मंत्री पद का फैसला लोकसभा चुनाव के बाद

लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के खिलाफ मजबूत गठबंधन बनाने के विपक्षी दलों की कोशिश के बीच कांग्रेस ने तय किया है कि फिलहाल पूरा ध्यान विपक्षी पार्टियों को एकजुट कर नरेंद्र मोदी को हराने पर लगाया जाएगा।

पार्टी के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री पद के बारे में निर्णय चुनाव नतीजे आने के बाद होगा।

सूत्रों ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए सपा, बसपा और अन्य बीजेपी विरोधी दलों के बीच भी ‘रणनीतिक समझ’ बन गई है.

उन्होंने दावा किया कि अगर उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में ‘सही से’ गठबंधन हो गया तो बीजेपी सत्ता में नहीं लौटने वाली है.

लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने के सवाल पर सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस फिलहाल दो चरणों में काम कर रही है. पहला चरण सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाकर भाजपा और नरेंद्र मोदी को हराना है.

दूसरा चरण चुनाव परिणाम का है जिसके बाद दूसरे बिंदुओं पर बात होगी.

शिवसेना के साथ तालमेल की संभावना के सवाल पर कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि हमारा गठबंधन समान विचाराधारा वाले दलों के साथ हो सकता है और शिवसेना एवं कांग्रेस की विचाराधारा अलग है, इसलिए उसके साथ गठबंधन नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा के बीच पुराना गठबंधन है और वह आगे भी जारी रहेगा।

क्रिकेट की पिच से अब देश के कप्तान

यह सही है कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में अभी हाल में हुए चुनावों में सबसे ज़्यादा मत पाकर उभरी है पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी। इस पार्टी को सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 172 सीटें हासिल नहीं हुई हंै। इसे 116 सीटें मिली हैं लेकिन देश में यह सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने वाला दल है। इसके सुप्रीमो हैं क्रिकेट टीम के कप्तान हरफन मौला इमरान खान। पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रहते हुए उन्होंने एक ज़माने में विश्व कप भी हासिल किया था। तकरीबन पिछले दो दशक से वे पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय हैं। कहा जाता है कि दूसरी छोटी पार्टियों और इंडिपेंडेंटिली विजयी उम्मीदवारों को साथ लेकर वे सरकार बनाने का जादुई अंक 172 हासिल करने की कशमकश में जुटे हैं। अनुमान है देश की आजादी के दिन से कुछ पहले ही यानी 11 अगस्त को देश की कमान वे अपने हाथ में ले लेंगे।

क्रिकेट में ऑल राउंडर कहलाने वाले इमरान खान पाकिस्तान के अब प्रधानमंत्री। पाकिस्तान की आज़ादी दिवस से ऐन पहले वे पाकिस्तान के नए वजीर-ए-आलम बनेंगे। लंदन की ऑक्सफोर्ड यूूनिवर्सिटी से स्नातक इमरान खान में उदारता है और देश के विधान और लोकतंत्र के लिए प्रेम भी। उनकी इस खासियत को पाकिस्तान के बड़े सैनिक अफसर भी मानते हैं जिनके सहयोग से वे देश की कमान संभाल रहे हैं।

पाकिस्तान के आम चुनाव में रिगिंग और सेना की चाहत पर ही देश की बागडोर की जिम्मेदारी के आरोपों में नया कुछ नहीं है। ये पहले भी लगते रहे हैं। इमरान खान के साथ भी हैं। लेकिन पाकिस्तान चुनाव आयोग के घोषित नतीजों के अनुसार उन्हें 116 सीटों पर विजय हासिल हुई है। यानी वे पाकिस्तान के बड़े कद्दावर नेताओं में आज एक हैं जिनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को जनता की अदालत में मौका मिला है। उनके मुकाबले में रही पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी। शरीफ इन दिनों जेल में हैं और फिलहाल अस्पताल में है, उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को 64 सीटें हासिल हुई हैं। तीसरे नंबर पर हैं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) जिसके अध्यक्ष हैं आसिफ अली जरदारी। इसकी ओर से पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भी चुनाव मैदान में उतरे थे। उनकी पार्टी को कुल 43 सीटें मिली। हालांकि उन्हेें पाकिस्तानी जनता ने एक पहचान दी है।

पाकिस्तानी संसद में निचला सदन जो नेशनल असेंबली कहलाता है उसकी कुल सीटें 342 हैं। इसमें 272 सीटों के लिए सीधा चुनाव पूरे देश में होता है। विजयी पार्टी को 172 का वह जादुई अंक ज़रूर चाहिए जिससे वह सरकार बना सके। इस बार के चुनाव में कई छोटी पार्टियां और निर्दलीय जीते हैं। जिनकी तादाद 48 से ऊपर है। अब आल राउंडर इमरान इन सभी छोटी पार्टियों और निर्दलीयों से बातचीत में लगे हैं जिनसे उनकी पार्टी के एजंडेे और न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर सहमति बन सके और वे प्रधानमंत्री बनकर देश में शंाति, सुरक्षा, आर्थिक बेहतरी और विकास की तस्वीर को अमली जामा पहना सकें।

पीटीआई के नेता नईमुल हक ने संवाददाताओं को बताया कि विभिन्न छोटी पार्टियों और निर्दलीय नेताओं से विभिन्न चुनावी घोषणा पत्रों और न्यूनतम साझा कार्यक्रमों पर बातचीत बड़े ही तरीके से हो रही है। न्यूनतम साझा कार्यक्रमों के आधार पर ही बन रही सहमति के आधार पर ही हमारा अनुमान है कि इमरान खान पाकिस्तान की आज़ादी के मौके के आने के पहले वजीरे आलम हो जाएंगे।

इमरान खान ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि जिन बड़ी पार्टियों ने और दूसरे लोगों ने आम चुनाव में रिगिंग की बात कही है उसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। उनकी इस पेशकश पर विपक्षी दलों से कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

हालांकि छिटपुट घटनाओं बतौर इस्लामाबाद के कयुमाबाद इलाके के कूड़ेदान से करीब एक दर्जन बैलट पेपर ज़रूर मिलने की बात कही गई। पीपीपी से नेशनल एसेबली में 241 सीट के उम्मीदवार मोअज्जम अली कुरैशी की इस शिकायत को डॉन अखबार को डीआईजी पुलिस अमीरफारूकी ने बताया। पुलिस ने कुरैशी साहब को जि़ले के रिटर्निग ऑफीसर को इस बारे में जानकारी देने की सलाह भी दी। सियालकोट के कंैटोनमेंट इलाके में कश्मीर पार्क के पास खाली बैलेट बॉक्स मिले हैं।

उधर मोहाजिर समुदाय के नेता और वॉएस ऑफ कराची के चेयरमैन नदीम नुसरत ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने भ्रष्टाचार विरोधी संस्थान और पाकिस्तानी अदालतों का बेइंतहा इस्तेमाल किया जिससे नवाज शरीफ और उनकी बेटी को चुनाव के ऐन पहले पाकिस्तान बुलाकर जेल में बंद कराया। चुनाव प्रचार के दिनों से ही पाकिस्तान में पूरी चुनावी प्रक्रिया में खोट की बात नज़र आ रही थी। इमरान खान और उनकी पार्टी के नेताओं को सेना खास तवज्जुह दे रही थी। उनकी पार्टी और नेताओं के विरोधियों को चुनाव प्रचार के विभिन्न कामों में सेना और पुलिस तरह-तरह के अड़ंगे लगा रही थी। उन्होंने वाशिंगटन से मांग की कि अंतरराष्ट्रीय देखरेख में पाकिस्तान में फिर से चुनाव कराएं जाएं।

पाकिस्तान के विभिन्न बड़े विपक्षी दलों के नेतृत्व में शुक्रवार को एक बैठक हुई। इसमें इस साल जुलाई में हुए चुनाव, चुनाव प्रचार की मुश्किलों और चुनावी नतीजों के अलावा रिगिंग और सेना के दखल के मुद्दों पर बात हुई। तकरीबन सभी दलों के नेताओं ने आम सहमति से पाकिस्तान चुनाव आयोग के चुनावी नतीजों को खारिज कर दिया। इनकी मांग थी कि देश में फिर से चुनाव कराए जाएं और उन्हें ट्रांस्पेरेंट रखा जाए।

इस बैठक की अध्यक्षता पीएमएल एम के अध्यक्ष शाहबाज शरीफ और मुताहिदा मजलिस ए अमाल के अध्यक्ष मौलाना फजलुर रहमान ने की। इस बैठक में जमाम-ए-इस्लामी के प्रमुख सिनेटर सिराजुल हक सिंध के गवर्नर मोहम्मद जुबैद, अवामी नेशनल पार्टी के प्रमुख असफंदमार वली खान, कौमी वतन पार्टी के अध्यक्ष आफताब अहमद खान शेरमाओ, नेशनल पार्टी सिनेटर मीर हाफिज बिजेंजो और कई और नेता थे।

इन सभी नेताओं ने कहा इस चुनाव में आए नतीजे जनता के नतीजे नहीं हैं। हम इसे नहीं मानते। इस पर पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान ने सहयोग की अपील के साथ जांच का भरोसा दिया।

दुनिया के तमाम राजनीतिको की तुलना में इमरान हिंदुस्तान के घर-घर में जाने जाते हैं। उनके विरोधियों का आरोप है कि उनकी जीत इस चुनाव में रिगिंग के चलते हुई।

क्रिकेट के पुराने शौकीनों को याद होगा खेल के मैदान में भी इमरान पर जब बाल के साथ टेंपरिंग करने का आरोप लगता था तो वे कहते,’मंै खेलना बंद कर दूंगा अगर कोई यह साबित कर दे कि मैंने बाल के साथ टेंपरिंग की है।Ó पाकिस्तान की राजनीति में बीस साल की सक्रियता के बाद देश की बागडोर संभालने का उनका वक्त अब आया यह भी बड़ी बात है।

कहा जाता है कि क्रिकेट में ऑल राउंडर कहलाने वाले इमरान साहब इसलिए जीते क्योंकि उनके पीछे पाकिस्तानी सेना थी। कुछ कहते हैं कि वे रिगिंग के चलते जीते। सवाल यह भी है कि फिर वे बमुश्किल क्यों जीते। बहरहाल पाकिस्तान के पुराने प्रधानमंत्रियों की तरह उन्होंने भी कश्मीर का ही मुद्दा उठाया। मगर यह उम्मीद भी जताई कि दोनों मुल्कों में अच्छे रिश्ते होंगे। आपसी व्यापार बढ़ेगा। कश्मीर का मुद्दा हल करने के लिए दोनों देशों में बातचीत का सिलसिला जारी रहे। भारत के साथ हम अपने संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा यह ज़रूर है कि इमरान भारतीय मीडिया के उस रवैए से निराश दिखे। उनका कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह में उन्हें बालीवुड की किसी फिल्म के विलेन जैसा पेश किया गया।

भारत और पाकिस्तान में आपसी व्यापार में रुकावट सीमाई तनाव, राजनीतिक जुमलेबाजी और आतंकवाद के चलते आती रही है। ‘मैं चाहता हूं कि भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढ़े इससे इस उप महाद्वीप में अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी। दक्षिण एशिया की गरीबी दूर होगी। दोनों ही देशों को इससे लाभ होगा। भारत से संबंध हम बेशक सुधारना चाहेंगे बशर्ते वहां का नेतृत्व भी यही चाहे। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के तकरीबन 65 साल के कप्तान इमरान खान कहते हैं ‘हमारी सरकार बातचीत के ही जरिए मतभेदों को हल करने के लिए तैयार है। इसमें कश्मीर एक बड़ा मुद्दा है। वे (भारत) एक कदम उठाएं तो हम दो कदम उठा सकते हैं। लेकिन बातचीत की शुरूआत तो होÓ।

इमरान खान ने पद संभालने की संभावना के दौरान ही देश में सुशासन और आर्थिक चुनौती से निबटने का संकेत दिया। वे पाकिस्तान के पांचवे प्रधानमंत्री हैं जो लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पढ़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से वे वीआईपी संस्कृति को समाप्त करेंगे। हम आज इसलिए पीछे हैं क्योंकि जो सत्ता में हैं उनके लिए अलग प्रणाली है। व्यवस्था सभी के लिए एक सी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री आवास को वे जल्दी ही शिक्षा संस्थान में बदल देंगे।

चोरी-छुपे हुए चुनाव,

नतीजा रहा बुरा: शरीफ

इस्लामाबाद की आदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मिलने आए लोगों से बातचीत मेें चुनावों को चोरी छुपे कराया गया बताया और कहा कि इसके जो जाली नतीजे आए हैं उसका असर देश पर बुरा पड़ेगा। उन्होंने फैसलाबाद, लाहौर और रावलपिंडी में आए नतीजों पर आश्चर्य जताया। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इन इलाकों में उनके उम्मीदवार जीतेंगे लेकिन उनकी हार हुई।

अब क्या हैं – चुनौतियां इमरान के सामने

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बतौर अब इमरान खान को अमेरिका के साथ देश के तनावपूर्ण संबंधों को दुरूस्त करना होगा। देश की भूमि से हो रही आतंकवादी गतिविधियों को थामना होगा। चीन के साथ और मधुर संबंध बनाने होंगे। चीन सरकार ने नई सरकार को पूरे सहयोग का वादा भी किया है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत बहुत खराब है उसे दुरूस्त करना होगा। पाकिस्तान में नकदी का संकट गहराया हुआ है जिसके कारण 2013 के बाद इसे फिर शायद इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से दूसरी बार मदद लेनी होगी। इसकी पूरी तैयारी करनी होगी। पाकिस्तान के नए नायक को भारत सरकार से भी अच्छे संबंध बनाने की कोशिश करनी होगी। नई दिल्ली ने इमरान के प्रधानमंत्री होने की संभावना पर बड़ी ही सतर्कता से अपनी शुभकामना भेजी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि नई सरकार एक सुरक्षित, स्थाई और सुरक्षित दक्षिण एशिया बनाने में अपने पड़ोसियों के साथ सहयोग करेगी। इस पर इमरान ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी कि वे दो कदम आगे बढ़कर दोनों देशों में शांति की पहल लेंगे। लेकिन उन्होंने कश्मीर मुद्दे को रेखांकित किया। इस पर भारत चकित भी नहीं है। इमरान के चुनावी दस्तावेज में कश्मीर समस्या का समाधान संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रस्तावों के तहत कराने की बात कही गई है।

लाइबीरिया के बाद पाकिस्तान में खिलाड़ी राष्ट्राध्यक्ष!

अफ्रीका में लाइबीरिया एक देश है जहां के राष्ट्रपति जार्ज विया फुटबाल के नामी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं। इसी साल के शुुरू में वे जीते और लाइबेरिया के राष्ट्रपति बने। अब एशिया में पाकिस्तान भी एक ऐसा देश है जहां अब प्रधानमंत्री इमरान खान हैं। इस समय इमरान पैंसठ साल के हैं। उन्होंने 1971 में क्रिकेट को अपना कैरियर चुना। वे दुनिया भर में बेस्ट आल राउंडर बतौर ख्यात हैं। क्रिकेट की पिच पर जबरर्दस्त आक्रामक गेंदबाजी के लिए वे मशहूर रहे हैं। तकरीबन बीस साल के बाद उन्होंने खेल से संन्यास ले लिया और राजनीति में आए।

अपनी युवावस्था में इमरान खान लंदन की ऊंची हाईक्लास सोसाइटी के सिरमौर थे। पाकिस्तान की टीम को उनके नेतृत्व में 1992 में विश्वकप जीतने का मौका मिला था। इसी साल के शुरू में उन्होंने अपनी धार्मिक सलाहकार से शादी कर ली। वे पहले भी दो शादियां कर चुके थे। उनकी पहली पत्नी जेमिमा खान थीं।

अपनी छैल-छबीली और बेहद रईस नौजवान की छवि दुरूस्त करने और अच्छा और नेक मुसलमान बनने की कोशिश में उन्हें कुछ समय लगा। लेकिन बाद में वे उत्तरी पाकिस्तान में खास तौर पर कट्टर पख्तून जनसंख्या में उनकी लोकप्रियता बेहद बढ़ी। उन्होंने 1996 में पीटीआई का गठन किया। पाक संसद में 2013 में उन्हें महज एक ही सीट मिली। ऑक्सफोड से ग्रैजुएट होने के कारण उनमें कट्टरता ज्य़ादा नहीं है। उन्होंने हमेशा पाकिस्तान को भ्रष्टाचार से मुक्त संपन्न देश बनाने की बात अपने भाषणों में रखी। पिछले आम चुनाव में पाक नेशनल असेंबली में उनकी पार्टी तीसरी सेह्यबसे बड़ी पार्टी बतौर उभरी। उन्हें पाकिस्तान के उस मध्यम वर्ग ने भी सहयोग दिया जो देश में बढ़ते भ्रष्टाचार से उकता चुका था।

मालानी ही नहीं दो और हिंदू भी जीते

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार मुस्लिम बहुल सिंध प्रांत से तीन हिंदू उम्मीदवार नेशनल एसेंबली में आए। ये सभी पीपीपी के उम्मीदवार हैं। महेश मालानी नेशनल एसेंबली-222 थार से जीते। जबकि हरिराम किश्वरी लाल प्रोविंशनल एसेंबली-147 से मीरपुर खास से जीते। जमशोरो के ज्ञानु मल उर्फ ज्ञानचंद इसरानी प्रोविशनल एसेंबली -81 से जीते। ये सभी निचली जाति के उम्मीदवार हैं जो थार रेगिस्तान की हिंदू जनसंख्या में 90 फीसद है।

चुनावी छटा

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य हैं। इनमें 272 का सीधा मुकाबला होना है। साठ सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। उसके अलावा दस सीटें अल्पसंख्यक धार्मिक तबकों की होती हैं। चुनाव विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधित्व के हिसाब से होता है। एक सरकार पार्टी तभी बना पाती है जब उसे कम से कम 172 सीटें हासिल हुई हों।

हिंदोस्तां के घर-घर में हैं इमरान!

यह किस्सा तब का है जब क्रिकेट कप्तान इमरान का नाम सुनते ही कोलकाता की खूबसूरत लड़कियों के गाल और कनपटी लाल हो जाती थी। हर लड़की जो लंबाई में पांच-सात और खुद को खूबसूरत मानती, पूछती, दादा, इमरान कोलकाता आएगा क्या? आप मुझे उससे मिला सकेंगे क्या? लेकिन वह ईडेन गार्डेन तो जाएगा। क्या मेरे लिए पास दिला देंगे। फिर वह अपने स्कूल, कालेज में क्रिकेट के शौकीनों से पूछती, कहती ध्यान रखना, मैं साथ चलूंगी। पाकिस्तान ने इमरान की कप्तानी में विश्वकप क्या जीता था। कोलकाता में लड़कियों के सिर अजब सा जुनून था।

महिला क्रिकेट में भले बांग्ला कन्याएं आगे न निकल पाती हों लेकिन उनमें इमरान से मिलना और उसके आटोग्राफ लेने का भूत सवार था। तब कोलकाता में माक्र्सवादी राज ढलान की ओर था। चौरंगी में स्टेटसमैन की बिल्डिंग और उसके विशाल परिसर पर तब के संपादक और प्रापर्टी डीलर्स ने डील की शुरूआत हो गई थी। थोड़ा ही आगे पार्कस्ट्ीट में तब भी पुराने रोमन-यूरोपियन-बांग्ला स्थाापत्य में भव्य मकान बने दिखते थे। वैसे ही होटल और रेस्तरां। देर रात उन पुराने मकानों से अंग्रेजी, बांग्ला, ओडिया गाने और संगीत सड़कों पर भी सुनाई देते। वहीं कहीं उषा भी रहती थी।

इसी जगह एक तिराहे पर लगा था वह बड़ा सा पोस्टर। उससे पता चलता था कि आ रहा है क्रिकेट का ऑल राउंडर ईडेन गार्डेन में तब शायद ही कोई कहता इमरान तो पाकिस्तान का खिलाड़ी है। विश्वकप तो पाकिस्तान को मिला। आश्चर्य तब और होता जब कुलीन बांग्ला मध्य वर्ग की सुंदर सजा-संवरी लड़कियां राह चलते अचानक पोस्टर पढऩे लगती और सिहर उठतीं। क्योंकि पोस्टर में यह तो लिखा ही नहीं था कि कब आना है क्रिकेट के शहंशाह इमरान को ईडेन गार्डेन में!

तब के मशहूर आल राउंडर इमरान खान आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं। सोचिए जरा, कोलकाता में उनकी दीवानी बनीं लड़कियों की उम्र आज क्या होगी? लेकिन यह तय मानिए वे आज भी गहरी सांस लेते हुए, आंखे बंद कर दिल पर हाथ रख कर उसी इमरान को याद करती होगी। जिसके लिए वे पार्क स्ट्ीट में लगे बड़े पोस्टर को देखने आया करती थीं। यह था खेल के प्रति बंगप्रेम। लेकिन तब छैल-छबीले इमरान को न तो तब के ढाई दशक पहले की न तो वह याद होगी जब उनकी एक झलक पाने के लिए किस कदर लड़कियां दौड़ती भागती थीं। कितनों को उन्होंने ऑटोग्राफ  दिए और कितनों को वे दूसरी सुबह याद रख पाए। लेकिन कइयों के पास आज भी छोटी सी डिबिया में उनकी फोटो के साथ उनका ऑटोग्राफ  है। है न, आश्चर्य की बात! मन में जलन तो होती है। लेकिन क्या करें और ऊपर से इमरान यह कहते हैं क्रिकेट के कारण हिंदुस्तान के घर-घर में है मेरी तस्वीर! और यह सच भी है!

भूख से तीन बच्चों की देश की राजधानी में मौत!

जब संसद में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ‘जुमलाबाजी’ और जफ्फी की राजनीति गरमा रही थी, ठीक उसी वक्त वहां से 12 किलोमीटर दूर देश की राजधानी में तीन मासूम बहनें भूख से मर रही थी। उनकी उम्र थी आठ साल, चार साल और दो साल। भूख से ये मौतें हमें याद दिलाती हैं कि जब आप रात को भोजन कर पूरी तरह तृप्त हो जाते हैं, उस समय देश के 20 करोड़ लोग बिना रोटी खाए सो जाते हैं।

यह घटना किसी दूरदराज की नहीं, झारखंड या छतीसगढ़ की नहीं बल्कि देश की राष्ट्रीय राजधानी की है जहां बच्चों की मौतें भूख से हुईं। ये मौतें उस देश में हुईं जो खुद को दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था का देश कहलाता है। यहां हर मिनट पांच लोग भूख से मरते हैं। विकास का हमारे दावे का मखौल बन गया। दुनिया के एक तिहाई भूखे लोग भारत में हैं। राष्ट्रीयसंघ के फूंड एड एग्रीक्लचरल ऑरगेनाइजेशन के अनुसार बीस करोड़ भारतीय रोज भूखे रहते हैं और वे कुपोषण के शिकार हैं।

हालांकि हमारा दावा है कि देश में फूड सिक्यूरिटी एक्ट बना हुआ है भोजन हर जीव का प्राथिमक अधिकार है और केंद्र और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि हर नागरिक को जो भूखा है वे उसके खाने-पीने की व्यवस्था करें। पर अब मानसी, शिखा और पारूल की मौतों पर एक दूसरे पर दोष मढऩे, राजनीति करने और जांच कराने का पुराना सिलसिला अब चल रहा है।

दिल्ली सरकार ने मौतों की जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन हम सभी जानते हैं कि इस तरह की जांच और उसकी रपटों का क्या हश्र होता रहा है। कोई उनकी परवाह नहीं करता। वे किसी कोने में धूल फांकती रहती हैं। हम सब लोगों के लिए यह शर्म की बात है जो राजधानी में रह रहे गरीब परिवारों के दुख दर्द को नहीं समझ पाते। जहां बच्चों को आठ दिनों से भोजन नहीं मिला।

यह कितने अफसोस की बात है कि दिल्ली में मंडावली इलाके में जहां यह परिवार रहता था उससे कुछ ही दूरी पर आंगनवाड़ी केंद्र है जिसके बारे में कहा जाता है कि वे बच्चों को मुफ्त खाना और शिक्षा देते हैं। इस देश में हर किसी का पेट भरने के लिए पर्यात्य भोजन है। लेकिन हर साल 88,800 रु पएकरोड़ का या उसका 40 फीसद बर्बाद हो जाता है।

यह बेहद शर्मनाक है कि हम उन परिवारों को राशन नहीं मुहैया कराते जिनके पास राशनकार्ड नहीं हंै। इस परिवार के साथ भी ‘राशनकार्ड नहीं तो राशन नहीं’, का सिद्धांत दुकानदार और अफ सरों ने अपनाया जिसके कारण यह अनर्थ हुआ। इस परिवार की साथी भूख थी। क्या प्रशासन घर की दहलीज तक राशन नहीं पहुंचा सकता था। लेकिन सच्चाई बहुत तकलीफ देह होती है। हर दिन 7000 भारतीय भूख से मरते हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स, की 119 देशों की सूची में भारत का स्थान 100वां है।

लेकिन हमारे देश में यह अजब सा चलन है कि भाजपा जिम्मेदार ठहराती है ‘आप’ को। ‘आप’ जिम्मेदार ठहराती है भाजपा को। और कंाग्रेस जिम्मेदार ठहराती हैं ‘आप’ और भाजपा को। आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। मगर सच्चाई यही है कि भूख से ही हुई हैं मौतें। यानी 21वीं सदी के भारत का सच यही है।

इस संपादकीय को पढऩे के बाद अपने कुछ मिनट उन तीन बच्चियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी लगाइए। उसमें साफ  लिखा है कि इनके पेट में एक ग्राम भी भोजन नहीं था। हम नहीं चाहते कि बच्चे मानसी, शिखा और पारूल की तरह भूखमरी के शिकार हों।

सेना की पकड़ से बाहर नहीं हैं इमरान खान

यह सच है कि देश के गठन के बाद 71 सालों से पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में पाकिस्तानी सेना एक प्रमुख भूमिका निभाती रही है। यह 30 साल से अधिक समय तक प्रत्यक्ष सेना शासन के अधीन रहा और यह भी सुनिश्चित है कि चुनी हुई सरकार भी इसके अप्रत्यक्ष नियंत्रण में है।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि देश के चुने हुए किसी भी प्रधानमंत्री ने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नही किया है और देश की स्थापना के बाद कम से कम 30 प्रधानमंत्री हुए हैं। इसके अलावा इस अवधि के दौरान 15 राष्ट्रपति और तीन संविधानों को भी देखा गया है। इतिहास में यह दूसरी बार है कि चुने हुए प्रधानमंत्री ने स्थान ग्रहण किया है।

हाल ही में सपंन्न हुए चुनावों के अभियान में यह स्पष्ट हुआ कि सेना क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का समर्थन कर रही थी। इसलिए पाकिस्तान नेशनल असेंबली के चुनावों के आए नतीजों से कोई हैरानी नहीं हुई। इमरान खान ने न केवल सेना के साथ गठबंधन किया बल्कि वे उसकी भाषा भी बोल रहे थे। पाकिस्तान के मुस्लिम-लीग-नवाज (पीएमएलएन) के अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी नवाज शरीफ को भारत के समर्थक और सेना विरोधी के रूप में पेश कर रहे थे। मतदान से एक दिन पहले भी वह यह कह रहे थे कि नवाज शरीफ के दिमाग में पाकिस्तान की बजाए ‘भारत के हित’ हैं।

यह सर्वविदित है कि जब नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे तो वे खुद को महत्वपूर्ण साबित करने की कोशिश कर रहे थे। यह शक्तिशाली सेना को पंसद नहीं था। जिस तरह से उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मज़बूर किया गया और उन्हें चुनाव लडऩे और जीवन भर कोई सार्वजनिक पद ग्रहण करने से रोका गया इससे स्पष्ट है कि उन्हें जानबूझकर हटाया गया है। उनके खिलाफ यह आरोप था कि उन्होंने अपने आयकर रिटर्न में यह घोषित नहीं किया था कि उन्हें बेटे की कंपनी से कुछ धन मिला था। उन्हें न तो धन मिला था और न ही उनके खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का आरोप था। फिर भी देश की सर्वोच्च अदालत ने उन्हें शरियत कानून के तहत ईमानदार नहीं होने के कारण दोषी ठहराया। इसने उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया और उन्हें कार्यालय छोडऩे के लिए मज़बूर कर दिया। यह व्यापक तौर पर माना जाता है कि सेना ने न्यायपालिका के माध्यम से कार्रवाई की थी और यह ”न्यायिक तख्तापलट’ था।

जैसे इतना ही काफी नहीं था, राष्ट्रीय उत्तरदायित्व आयोग ने फैसला सुनाया कि उन्होंने लंदन में ‘अनधिकृत धन’ से अपार्टमेंट खरीदे थे और उन्हें 10 साल जेल की सज़ा सुनाई। उनकी बेटी मरियम जिसे उनका उत्तराधिकारी भी माना जाता है उसे सात साल जेल की सज़ा दी गई। ‘पनामा पेपर’ के माध्यम से यह खुलासा किया गया था जिसमें यह बताया गया था कि शरीफ परिवार द्वारा विदेशों में रखे अवैध धन से अपार्टमेंट खरीदे गए थे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप साबित नहीं हुआ।

हाल के चुनाव में उनका किसी भी सार्वजनिक कार्यालय के लिए चुनाव लडऩे में उनकी अयोग्ता और जेल की सज़ा मुख्य मुद्दा बन गया था। वास्तव में उन्होंने लंदन में बीमार पत्नी को छोड़कर चुनावों की पूर्व संध्या पर पाकिस्तान पहुंच कर सहानुभूतिपूर्ण वोट बटोरने का एक बड़ा दांव चला था। जैसे ही वे और उनकी बेटी मरियम पाकिस्तान पहुंचे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि उनका यह दाव असफल हो गया और उनकी पार्टी चुनाव हार गई। अब वह लंबे समय तक जेल में रहेंगे।

जबकि पीएमएल की पंजाब प्रांत में महत्वपूर्ण पकड़ रही है जो अपने आकार और सीटों के संख्या के कारण देश की राजनीति को प्रभावित करता है। पूर्व मुख्यमंत्री और नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ की हार के साथ शरीफ परिवार की पकड़ कमज़ोर हो गई है। उन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाता यदि पार्टी ने नेशनल असेंबली चुनाव जीता होता।

भारत और भारतीयों के साथ उनके मेलजोल के कारण इमरान खान और उनकी पार्टी की जीत अपेक्षाकृत भारत के लिए लाभदायक हो सकती है। पाकिस्तान का अन्य कोई प्रधानमंत्री इमरान खान की तरह लंबी अवधि के लिए भारत में नहीं आया। राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में और फिर राष्ट्रीय टीम के कप्तान के रूप में अक्सर भारत आते रहे और यहां उनके मित्रों और प्रशंसकों का विस्तृत दायरा है। अपने क्रिकेट करियर के बाद भी वह देश के विशेषज्ञ कमेंटेटर के रूप मे भारत आते रहे हैं। वह दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधार के बड़े समर्थक रहे हैं और उन्होंने संबंधों को मज़बूत करने के लिए इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के बीच ‘एशेज कप’ की तरह नियमित क्रिकेट टूर्नामेंट का सुझाव भी दिया था।

हालांकि चुनाव अभियान के दौरान भारत के प्रति उनके दृष्टिकोण में विशेष बदलाव आया। उन्होंने भारत की आलोचना की और भारत पर पाकिस्तान की सेना को कमज़ोर करने के लिए सब कुछ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ ने भी मुंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका को स्वीकार कर ऐसा करने की कोशिश की है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार चुनावी दौड़ में भारत अतीत की तरह प्रचार अभियान को मुख्य केंद्र नहीं था। मैदान मे सभी तीन प्रमुख दलों ने भारत के साथ बातचीत की मांग की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुझाव के अनुसार कश्मीर मुद्दे को सुलझाने की मांग की।

इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के दो मुख्य प्रतिद्वंद्वियों पाकिस्तान मुस्लिम-लीग-नवाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने अपनी हार के लिए बड़े पैमाने पर सेना द्वार की गई हेरा-फेरी और हस्तक्षेप को जिम्मेवार ठहराया है। उन्होंने नतीजों को मानने से इंकार किया इसके अलावा वे और कर भी क्या सकते थे। सेना ने दोनों पार्टियों का लंबे समय तक परीक्षण किया और वे किसी ऐसे व्यक्ति को वापस लेना चाहते थे तो उनके दबाव में रहे। यह देखना बाकी है कि इमरान खान अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय समझ के साथ भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारेंगे या बाड़ लगाने की कोशिश करेंगे। यह तब तक संभव नहीं जब तक वह अपनी राजनीतिक शक्ति पा नहीं लेते।

हालांंिक भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए यह बड़ी बात है कि पाकिस्तानी मतदाताओं ने चरमपंथी तत्वों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इससे भारत के विभिन्न हिस्सों में चरमपंथी तत्वों के लिए समर्थन में कमी आई है। पाकिस्तानी मतदाताओं ने ऐसे तत्वों के प्रतिनिधियों को खारिज कर दिया है।

मुंबई हमले के मास्टर माइंड और अंतरराष्ट्रीय आतंकी हाफिज सईद ने अल्लाह-हो-अकबर तेहरिक (एएटी) के बैनर तले नेशनल असेंबली और प्रांतीय विधायिकाओं के लिए 265 उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा। उनके बेटे और दामाद भी उम्मीदवार थे। पर पार्टी को हार मिली। जो इस तरह के आतंकवादी समूहों के लिए जन समर्थन की कमी को दर्शाता है। हालांकि पार्टी को सेना का समर्थन भी प्राप्त था। परन्तु इसके खिलाफ जनता की राय एक सबक है कि आम लोग हिंसा से घृणा करते हैं वे शांति चाहते हैं।

इमरान खान जानते हैं कि वे सेना की मदद और समर्थन के बिना लंबे समय तक इस पद पर रहने की वे उम्मीद नहीं कर सकते, इसलिए उन्हें नाजुक संतुलन बनाना होगा। यही कारण है कि भारत निकट भविष्य में किसी भी प्रमुख नीतिगत बदलाव की उम्मीद नहीं कर सकता है।

जबकि इमरान खान को स्थापित होने और अपने पांव जमाने के लिए समय चाहिए, भारत पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों के बारे में किसी भी प्रकार के नीति बदलाव की उम्मीद नही कर सकता है, इस प्रकार पड़ोसी देश में सरकार में बदलाव होने के बावजूद ”शासन परिवर्तन’’ नहीं हुआ है और भारत को इसके साथ संबंधों में सुधार की संभावनाओं पर ज़्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए।