Home Blog Page 1262

मैरीकॉम फाइनल में

भारत की शान कही जाने वालीं दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के ४८ किलो भारवर्ग के फाइनल में पहुँच गयी हैं। फाइनल में उनका मुकाबला यूक्रेन की हना ओखोटा से होगा। यदि वो फाइनल जीत जातीं हैं तो दुनिया में विश्व मुक्केबाजी में पुरषों और महिलाओं में ७ मैडल जीतने वाली दूसरी खिलाड़ी हो जाएंगी।

अपना शानदार अभियान जारी रखते हुए सेमीफाइनल में उत्तर कोरिया की किम ह्यांग मी को बेहतरीन मुकाबले में ५-० से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इसी के साथ मैरीकॉम ने विश्व चैम्पियनशिप में अपने छठे स्वर्ण पदक की ओर कदम बढ़ा लिए हैं। वैसे वे इससे पहले ५ स्वर्ण के अलावा एक रजत पदक भी जीत चुकी हैं। पांच जजों ने मैरीकॉम के हक में २९-२८, ३०-२७, ३०-२७, ३० -२७, ३०-२७ से फैसला दिया।

इस तरह मैरीकॉम विश्व चैंपियनशिप के इतिहास की महानतम महिला बॉक्सर बनने से एक कदम दूर हैं। वे तीन बच्चों की मां हैं और उनकी उम्र भी ३५ साल है लेकिन वे जिस ताजगी से खेल रही हैं उसे देखकर लगता है कि उनकी उम्र भी उनके आगे पानी भर्ती है।

यह उनका सातवां फाइनल होगा। छठे विश्व खिताब से पहले मैरीकॉम ने कहा कि हर प्रतिद्वंदी कठिन होता है और वे फाइनल के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं। मणिपुर की यह महान  मुक्केबाज स्वर्ण पदक जीतती हैं तो वह रेकार्ड छह स्वर्ण जीतने वाली दुनिया की पहली महिला  मुक्केबाज बन जाएंगी।

मैरी ने २००१ में हुई पहली महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत जीता था। इसके बाद २००२, २००५, २००६, २००८, २०१० में स्वर्ण जीते। आयरलैंड की दिग्गज कैटी और मैरी के एक समान पांच-पांच स्वर्ण हैं।

जीत के बाद फाइनल को लेकर मैरीकॉम ने कहा – ”मैं हना को देखूंगी और उनके खेल पर ध्यान दूंगी।  फाइनल में मैं कोशिश करूंगी की जीत हासिल कर सकूं। यहां के दर्शकों ने भी मुझे बहुत समर्थन दिया है। मैं अपने साथ-साथ देश को भी गर्व करने का मौका दूंगी।”

उधर भारत की एक और मुक्केबाज लवलिना को ६९ किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की निएन चीन चेन ने ४-० से हरा दिया। लवलिना ने अच्छा खेला और चेन को कड़ी टक्कर दी।

करतारपुर कॉरिडोर को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

केंद्र सरकार ने गुरु नानक की जयंती से एक दिन पहले गुरूवार को करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी दे दी। दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस मंजूरी पर मुहर लगाई गयी। पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने सर्कार के इस फैसले का स्वागत किया है।

केंद्र की इस मंजूरी के बाद लंबे समय से प्रतीक्षित भारत के क्षेत्र में करीब तीन किलोमीटर करतार साहिब कॉरिडोर बनाये जाने का रास्ता साफ हो गया है। गौरतलब है कि पंजाब के मंत्री नवोट सिद्धू जब इमरान खान के पीएम शपथ ग्रहण समारोह में गए थे तो उन्होंने इस मसले पर ब्यान दिया था कि पाकिस्तान की नई सरकार करतार साहिब कॉरिडोर को लेकर सकारात्मक रुख रखती है जिसके बाद अकाली दल और भाजपा ने उनपर जोरदार हमला कर दिया था।

अब करतारपुर कॉरिडोर बनाने के मसले पर श्रेय लेने की होड़ लग गयी है। केंद्रीय मंत्री और अकाली दल नेता हरसिमरत कौर ने कहा कि उनकी पार्टी अकाली दल की अपील पर केंद्र सरकार ने जो फैसला लिया है, वह इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करती हैं। उनके पति और पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भी मोदी सर्कार को आइल धन्यवाद किया है।

इधर पंजाब के मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए  कहा कि ”दो पड़ोसी देशों के बीच यह कॉरिडोर पुल का काम करेगा”। उन्होंने कहा – ”भारत सरकार से मैंने अनुरोध किया है कि इस बारे में पाकिस्तान सरकार को लिखे। मैं उम्मीद करता हूं कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के वादे के मुताबिक पत्र तैयार है।”

सतना हादसे में ९ लोगों की मौत

सतना के बिरसिंगपुर इलाके में गुरूवार को एक स्कूली वहां और बस के बीच भयंकर टक्कर में नौ  लोगों की मौत हो गई। जान गंवाने वालों में आठ स्कूल में पढ़ने वाले बच्व्चे हैं। हादसे में कुछ लोग घायल भी हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे में एक चालक की भी मौत हो गयी है। सतना प्रसाशन ने  ने हादसे में मारे गए बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख और घायलों को ५०-५०  हजार की राहत राशि देने की घोषणा की है।

यह हादसा गुरूवार सुबह स्कूल जाने के वक्त हुआ। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने स्कूल लकी कॉन्वेंट  में ताला जड़ दिया। हंगामे की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर राहुल जैन भी स्कूल पहुंचे और लोगों को शांत किया। परिजन स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सुबह लकी कॉन्वेंट स्कूल की गाड़ी बरसिंगपुर जा रही थी, तभी रीवा-चित्रकूट के बीच चलने वाली तेज रफ्तार बस स्कूली गाड़ी से टकरा गई। हादसा इतना भयानक था कि स्कूली गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही पांच बच्चों ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक बच्चों की शिनाख्त कर उनके परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक बस की गति तेज होने के कारण यह घटना घटी हालांकि अभी कारणों का पता लगाया जा रहा है। घायल बच्चों को सतना के जिला अस्पताल में दाखिल किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और एक चालक को गिरफ्तार कर लिया है

मुंबई में किसान आंदोलन समाप्त

मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के लिखित भरोसे के बाद किसानों ने अपना आंदोलन इस साल में दूसरी बार वापस ले लिया है। किसानों की करीब १९ मांगों पर सरकार ने भरोसा दिलाया है की इन पर जल्द अमल किया जाएगा।

किसान प्रतिनिधियों की सरकार से बातचीत हुई।  इस बातचीत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिलों के अधिकारियों से भी किसान मुद्दों को हल करने के तौर तरीके पूछे गए। अंत में सरकार ने लिखित में किसानों की मांगें मानाने का भरोसा दिया जिसे किसानों में स्वीकार कर लिया और अपना आंदोलन स्थिगित करने का ऐलान कर दिया।

इससे पहले सुबह से ही महाराष्ट्र में किसानों की आवाज और मुखर होती दिखी। लोक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पैदल मार्च करते हुए राज्य के आदिवासी और किसान मुंबई पहुंच गए । वे रविवार को कल्याण से निकले थे। उनकी मांग थी कि उनका कर्ज माफ किया जाए, उन्हें सूखे का मुआवजा मिले और जंगलों की जमीन को आदिवासियों को हस्तांतरित की जाए। इसके अलावा उनकी और भी मांगें हैं। राज्य के किसान इससे पहले भी अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं।

किसानों का आरोप है कि पिछले प्रदर्शन के दौरान सरकार के किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांग न मानी तो दो दिन का यह प्रदर्शन और भी लंबा चल सकता है। आजाद मैदान पहुंचकर किसान सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे। इसके बाद सरकार सक्रिय हुई और बातचीत का प्लेटफार्म तैयार किया गया।

किसानों की मांग में लोड शेडिंग की समस्या, वनाधिकार कानून लागू किया जाना, सूखा राहत, न्यूनतम समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करना शामिल है। सड़क पर उतरे किसानों का कहना है कि पिछले प्रदर्शन के नौ माह बाद भी सरकार के वादे पूरे नहीं हुए हैं। किसानों के इस आंदोलन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आंदोलनों से जुड़े लोग शामिल हैं।

हम तीन दल साथ थे : उमर अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के विधानसभा भंग करने के फैसले पर नैशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उम्र अब्दुल्ला ने सवाल उठाया है। उन्होंने गुरूवार को प्रेस कांफ्रेंस करके पहली बार स्वीकार किया कि तीन दल (पीडीपी, एनसी, कांग्रेस) साथ थे। अब्दुल्ला  भाजपा महासचिव राम माधव पर भी भड़के और उन्हें पाकिस्तान वाले ब्यान को साबित करने की  चुनौती दी।

प्रेस कांफ्रेंस में उमर अब्दुल्ला ने राम माधव से या तो आरोप साबित करने या माफी मांगने को कहा।  उमर अब्दुल्ला ने यह टिप्पणी भाजपा महासचिव राम माधव के उस बयान को लेकर कही जिसमें उन्होंने कहा था कि ”हो सकता है कि पीडीपी और एनसी को मिलकर सरकार बनाने का निर्देश सीमा पार से मिला होगा क्योंकि वे अभी तक लोकल बॉडी के चुनावों का बहिष्कार कर रहे थे।” उम्र इस ब्यान पर काफी गुस्से में दिखे।

नैशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कश्मीर को बदनाम करने की साजिश हुई है। कश्मीर ने साजिश का खामियाजा भुगता है। हॉर्स ट्रेडिंग के सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस बात की जांच करवाई जाए कि कौन लोग पैसे के लेन-देन में लगे हुए थे। ”राज्यपाल ये बताएं कि उन्हें इसकी जानकारी कहां से मिली। वे लोग कौन थे जो हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे थे।”

उन्होंने कहा कि आज उनसे पूछा जा रहा है कि अपने से अलग विचारधारा वाली पीडीपी के साथ जाने को हम कैसे तैयार हुए। ”पहले वो ये बताएं कि जब बीजेपी-पीडीपी का गठबंधऩ बना था उस वक्त ये सवाल क्यों नहीं उठा। हमने सूबे के हित में यह फैसला किया। अपने तमाम विरोध दरकिनार किये लेकिन बीजेपी ने विधानसभा भंग करवा दी।”

उमर अब्दुल्ला मजाक में यह भी कहा कि ने कहा कि ”राज्यपाल के पास कैसा फैक्स मशीन है कि वो वनवे काम करता है। उससे सिर्फ आउटगोइंग होती है, इनकमिंंग नहीं होती है।”

यह पूछने पर कि क्या नैशनल कांफ्रेंस राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में चुनौती देगी उम्र ने कहा – ”जिस दल (पीडीपी)  ने राज्यपाल को खत भेजा, कायदे से वही कोर्ट में जा सकता है। हमने तो उन्हें स्पोर्ट की बात की थी हम मुख्य पार्टी नहीं।”

राज्यपाल ने विधानसभा भंग की

जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग कर दी गयी है। राज्यपाल एसपी मालिक ने देर रात इसका आदेश जारी किया।
इससे कुछ देर पहले ही पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल मालिक को फैक्स से चिठ्ठी भेजकर अपने साथ ५६ विधायक होने का दावा किया था। हालाँकि कहा जा रहा है कि मशीन ख़राब होने से फैक्स नहीं मिला। राज्यपाल के इस फैसले का महबूबा मुफ्ती, नैशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह असंबैधानिक है। उधर सज्जाद लोन ने भी ऐसा ही दावा सरकार बनाने के लिए किया लेकिन राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी है। वैसे विधानसभा १९ दिसंबर तक रह सकती थी लेकिन राज्यपाल ने आश्चर्यजनक फैसला कर लिया।
अपने पत्र में महबूबा ने कहा था कि चूँकि वे श्रीनगर में हैं वे उनसे तत्काल मिलने की स्थिति में नहीं हैं और वे उनकी (राज्यपाल) की सुविधा के मुताबिक सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए मिलना चाहती हैं। विधानसभा भंग करने के बाद देखना होगा क्या स्थिति बनती है।
पत्र में महबूबा ने राज्यपाल को लिखा है कि ”आपको मीडिया रिपोर्ट्स से भी जानकारी मिली होगी कि नैशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस उसे (पीडीपी) को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। हमारे पास अपने २९, एनसी के १५ और कांग्रेस के १२ विधायकों सहित कुल ५६ विधायकों का समर्थन है।”
इस बीच भाजपा ने गुरूवार को अपने विधायकों की अर्जेन्ट बैठक तलब की है। इससे पहले तेज राजनीतिक घटनाक्रम में पीडीपी, एनसी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया। अभी यह तय नहीं की नैशनल कांफ्रेंस सरकार में शामिल होगी या नहीं।  यदि हुई तो, चर्चा है जम्मू में उसके वरिष्ठ नेता देवेंदर राणा उप मुख्यमंत्री बनाये जा सकते हैं। गुरूवार को एनसी की भी बैठक हो रही है।
दिन में भाजपा की जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेता से मुख्य धारा के नेता बने सज्जाद लोन को आगे करके सरकार बनाने की कोशिशों को झटका देते हुए भाजपा की दो साल तक सरकार में साझीदार रही पीडीपी ने पुराने अपनी प्रतिद्वंदी रही नैशनल कांफ्रेंस से हाथ मिलाने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस भी इस गठबंधन की सहयोगी होगी।
”तहलका” की जानकारी के मुताबिक पीडीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बना सकते हैं और नैशनल कांफ्रेंस इस सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है। पता चला है कि अल्ताफ बुखारी इस सरकार में मुख्यमंत्री हो सकते हैं। गुरूवार को बुखारी राज्यपाल से इस सिलसिले में मिलकर सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं।
हालाँकि ”तहलका” को यह भी जानकारी मिली है कि भाजपा की कोशिश है कि यह गठबंधन किसी भी सूरत में सरकार न बना सके ऐसे में हो सकता है कि भाजपा विधानसभा भंग करवाने की कोशिश करे। इस समय जम्मू कश्मीर विधानसभा निलंबित अवस्था (सस्पेंडेड एनिमेशन ) में है और यदि जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक १९ दिसंबर तक वहां सरकार नहीं बन पाती है तो विधानसभा भंग होगी ही।
पीडीपी नेतृत्व की नैशनल कांफ्रेंस के सर्वेसर्वा फ़ारूक़ अब्दुल्ला से सरकार में शामिल होने को लेकर बात हुई लेकिन उन्होंने इस पर हामी नहीं भरी। फ़ारूक़ इस समय सिक्किम में हैं। हालांकि वे सरकार को कुछ मुद्दों की शर्त पर बाहर से समर्थन देने को तैयार हो गए हैं। फ़ारूक़ की हाँ के बाद पीडीपी के वरिष्ठ नेता और विधायक अल्ताफ बुखारी श्रीनगर में नैशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह से मिले और इस मसले पर विस्तार से बातचीत की। वैसे यह बातचीत आधिकारिक रूप से किसी भी दल ने स्वीकार नहीं की है।
कांग्रेस आलाकमान ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई। सूत्रों के मुताबिक राज्य में पीडीपी के टॉप नेताओं ने जब दिल्ली में इस बाबत संपर्क किया तो उनका रुख सकारात्मक रहा। इसके बाद इस मसले पर गंभीरता से चिंतन हुआ। शुरू में कांग्रेस लीडरशिप कुछ हिचकिचा रही थी लेकिन बाद में राज्य के बड़े नेताओं के साथ बातचीत हुई और सरकार को लेकर सकरात्मक रुख का फैसला किया गया।
जम्मू कश्मीर की विधानसभा में ८७ सदस्य होते हैं और सरकार बनाने का बहुमत ४४ से पूरा हो जाता है। वैसे विधानसभा की कुल संख्या ८९ जिसमें दो सदस्य नॉमिनेटेड होते हैं। पीडीपी, एनसी और कांग्रेस का जोड़ ५५ हो जाता है। वैसे पीडीपी के दो विधायक आबिद अंसारी और इमरान रजा पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। यह माना जाता है कि वे सज्जाद लोन को समर्थन दे रहे हैं।
पहले एनसी धारा-३७० और ३५ए जैसे मुद्दों को समर्थन की शर्त में जोड़ना चाहती थी हालाँकि बाद में यह तये हुआ कि सरकार का मुख्य एजेंडा जम्मू कश्मीर में खराब हो रहे हालात होगा। एनसी बाद में, कहते हैं, इसके लिए सहमत हो गयी।
दिलचस्प यह भी है कि पीडीपी से भाजपा का गठबंधन टूटने के बाद नैशनल कांफ्रेंस तीसरा मोर्चा बनाकर सरकार बनाने के हक़ में तैयार हो गयी थे हालाँकि बाद में यह बात सिरे नहीं चढ़ी। इसके बाद भाजपा ने बड़ा दांव चलते हुए अलगाववादी से मुख्या धरा के नेता बने सज्जाद लोन को सरकार बनाने के लिए तैयार किया। इस पर बात लगातार जारी थी और गठबंधन कुछ आकार लेता भी दिखा रहा था।  भाजपा के २५ सदस्य हैं और उसे लगता था कि यदि कुछ तोड़-फोड़ हो जाती है तो बहुमत का आंकड़ा छुआ जा सकता है।
यह चर्चा चल ही रही थी कि पीडीपी- एनसी-कांग्रेस का तिकोन सामने आ गया। देखना दिलचस्प होगा कि गुरूवार तक क्या राजनीतिक घटनाक्रम होता है।  भाजपा भी अपने स्तर पर कोशिश में है और यह भी किसी सूरत में नहीं चाहती कि इस तिकोन गठबंधन की सरकार बन पाए।

चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे बंद

पहाड़ी से दो बार भारी मलबा गिरने के बाद चंडीगढ़- मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग बनाला के पास बंद हो गया है। बुधवार को सुबह मलवा गिरने के बाद सड़क बंद हो गयी हालाँकि कुछ घंटे की मेहनत के बाद इसे शुरू कर दिया गया। दोपहर ढाई बजे दुबारा मलवा गिरने से फिर बंद हो गयी।
शिमला मुख्यालय पहुँची जानकारी के मुताबिक नेशनल हाईवे बनाला गांव के पास पहाड़ी से भारी मलबा आने के बाद दोबारा बंद हो गया है। वहां सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गयी हैं। छोटे वाहनों को मंडी-कूल्लू के लिए वाया कटौला भेजा रहा है। दोपहर दो बजे के बाद से एनएच पूरी तरह से बंद हो गया है।
सुबह करीब साढ़े नौ बजे बनाला के पास शनि मंदिर के नजदीक पहाड़ी से भारी मलबा नेशनल हाईवे पर आ गया था और करीब दो घंटे तक यातायात बाधित हो रहा। इसके बाद मौके पर पहुंच कर एसडीएम सदर मदन कुमार ने अभी एकतरफा यातायात को बहाल करवा दिया लेकिन दोपहर बाद  दोबारा पहाड़ी से मलबा आया और पूरा एनएच बाधित हो गया। गौरतलब है कि फोरलेन के लिए सड़क की कटिंग का कार्य चला हुआ है जिससे बार-बार मलबा गिरने की समस्या हो रही है।
खुलेगा रोहतांग दर्रा
लाहुल-स्पीति के लोगों की सुविधा के लिए जल्द ही रोहतांग दर्रे को खोल दिया जाएगा। रोहतांग से यातायात को बहाल करने के लिए बीआरओ ने बुधवार दोपहर से काम शुरू कर दिया है। कुल्लू के उपयुक्त यूनुस ने बताया कि जिला प्रशासन लगातार सीमा सड़क संगठन के संपर्क में है। ”बीआरओ के अधिकारियों को रोहतांग दर्रे पर यातायात जल्द बहाल करने को कहा गया है। मढ़ी में बचाव चौकी स्थापित की गई है। अगर कोई व्यक्ति रोहतांग दर्रे को पैदल पार करना चाहता है, तो वह बचाव चौकी में अवश्य अपना पंजीकरण करवाए, न कि खराब मौसम में रोहतांग को पैदल पार करने की कोशिश करे।”

मांगों को लेकर किसान फिर आंदोलित

अलग-अलग मांगों को लेकर महाराष्ट्र के किसान फिर आंदोलन की राह पर हैं। बुधवार को २५ हज़ार से ज्यादा किसान आदिवासी लोक संघर्ष समिति के बैनर तले पैदल मार्च करते हुए कल मुंबई में दाखिल हो जाएंगे। इस बीच महाराष्ट्र सरकार में भाजपा की सहयोगी शिव सेना ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है।
आंदोलनकारी किसान कृषि कर्ज माफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों और वन अधिकार अधिनियम को लागू किए जाने की मांग कर रहे हैं। किसानों की यह भी मांग है कि कृषि श्रमिकों की पेंशन योजना में बढ़ोतरी की जाए और कीट हमलों से हुए नुकसान का उन्हें मुआवजा मिले। किसानों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो  आंदोलन लंबा चल सकता है।
किसान लोड शेडिंग की समस्या, वनाधिकार कानून लागू करने, सूखे से राहत, न्यूनतन समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने जैसी मांगों के साथ फडणवीस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है।  वे कुछ महीने पहले भी आंदोलन कर चुके हैं लेकिन उनका कहना है कि जो भरोसा उन्हें दिया गया था उसपर कोइ अमला नहीं हुआ।
आंदोलनकारी किसान आज़ाद मैदान पहुंचकर राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाये हुए हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि पिछले प्रदर्शन के करीब आठ माह गुजर जाने के बावजूद फडणवीस सरकार उनकी मांगों पर कुंडली मारे बैठी है। गौरतलब है कि किसानों के इस आंदोलन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आंदोलनों से जुड़े लोग शामिल हैं।
उधर मुंबई में किसानों के पैदल मार्च पर शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि पार्टी किसानों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के मुद्दों को लेकर अधिक संवेदनशील होना चाहिए। उनके मुताबिक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी सरकार से किसानों के मुद्दे पर बात करेगी।

अमृतसर ब्लास्ट का एक हमलावर पकड़ा

चार दिन पहले अमृतसर जिले के राजासांसी में निरंकारी भवन में हुए ग्रेनेड हमले का एक आरोपी  गिराफ्तार कर लिया गया है। यह हमलावर पंजाब के धालीवाल का रहने वाला है।
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार शाम प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि अमृतसर हमले में इस्तेमाल किए गए बम का निर्माण पाकिस्तान की आर्डिनेंस फैक्ट्री में हुआ है। सिंह ने कहा कि एक हमलावर पकड़ लिया गया और अब दूसरे को भी जल्दी पकड़ लिया जाएगा। उनके मुताबिक उसकी भी पहचान कर ली गयी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस हमलावर को आज गिरफ्तार किया गया है उसका नाम बिक्रमजीत सिंह है।  उनके मुताबिक पकड़ा गया हमलावार पंजाब के धालीवाल गांव का रहने वाला है। उन्होंने खुलासा किया कि दूसरे आरोपी हमलावर का नाम अवतार सिंह है। ”उसे भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”
अमरिंदर ने खुलासा किया कि कश्मीर के आतंकी अब पंजाब की ओर रुख कर रहे हैं। ”हम इस सिलसिले को रोकें देंगे।” मुख्यमंत्री के मुताबिक निरंकारी भवन हमले में इस्तेमाल की गई बाइक को भी बरामद कर लिया गया है। उन्होंने साफ़ कहा कि यह सीधे तौर पर एक आतंकी हमला था।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने पंजाब के लोगों को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान और आईएसआई को मुंहतोड़ जवाब देंगे। ”इस हमले के पीछे खालिस्तानी लिबरेशन फोर्स का हाथ है।” गौरतलब है कि एनआईए की टीम भी हमले के अगले ही दिन अमृतसर पहुँच गयी थी।
पंजाब पुलिस की इस सफलता के सरकार और पुलिस की तारीफ़ की जा रही है। चार दिन के भीतर एक हमलावर को पकड़ लेने और दूसरे की पहचान कर लेने से लोगों का सरकार की चुस्ती के प्रति भरोसा बना है। वैसे मुख्यमंत्री ने भी लोगों को भरोसा दिलाया है कि आतंकियों को पैर नहीं पसारने दिए जायेंगे।

जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार की तैयारी !

भाजपा की जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेता से मुख्य धारा के नेता बने सज्जाद लोन को आगे करके सरकार बनाने की कोशिशों को झटका देते हुए भाजपा की दो साल तक सरकार में साझीदार रही पीडीपी ने पुराने सहयोगी को झटका देते हुए दशकों से अपनी प्रतिद्वंदी रही नैशनल कांफ्रेंस से हाथ मिलाने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस भी इस गठबंधन की सहयोगी होगी।
”तहलका” की जानकारी के मुताबिक पीडीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बना सकते हैं और नैशनल कांफ्रेंस इस सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है। पता चला है कि अल्ताफ बुखारी इस सरकार में मुख्यमंत्री हो सकते हैं। गुरूवार को बुखारी राज्यपाल से इस सिलसिले में मिलकर सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं।
हालाँकि ”तहलका” को यह भी जानकारी मिली है कि भाजपा की कोशिश है कि यह गठबंधन किसी भी सूरत में सरकार न बना सके ऐसे में हो सकता है कि भाजपा विधानसभा भंग करवाने की कोशिश करे। इस समय जम्मू कश्मीर विधानसभा निलंबित अवस्था (सस्पेंडेड एनिमेशन ) में है और यदि जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक १९ दिसंबर तक वहां सरकार नहीं बन पाती है तो विधानसभा भंग होगी ही।
पीडीपी नेतृत्व की नैशनल कांफ्रेंस के सर्वेसर्वा फ़ारूक़ अब्दुल्ला से सरकार में शामिल होने को लेकर बात हुई लेकिन उन्होंने इस पर हामी नहीं भरी। फ़ारूक़ इस समय सिक्किम में हैं। हालांकि वे सरकार को कुछ मुद्दों की शर्त पर बाहर से समर्थन देने को तैयार हो गए हैं। फ़ारूक़ की हाँ के बाद पीडीपी के वरिष्ठ नेता और विधायक अल्ताफ बुखारी श्रीनगर में नैशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह से मिले और इस मसले पर विस्तार से बातचीत की। वैसे यह बातचीत आधिकारिक रूप से किसी भी दल ने स्वीकार नहीं की है।
कांग्रेस आलाकमान ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई। सूत्रों के मुताबिक राज्य में पीडीपी के टॉप नेताओं ने जब दिल्ली में इस बाबत संपर्क किया तो उनका रुख सकारात्मक रहा। इसके बाद इस मसले पर गंभीरता से चिंतन हुआ। शुरू में कांग्रेस लीडरशिप कुछ हिचकिचा रही थी लेकिन बाद में राज्य के बड़े नेताओं के साथ बातचीत हुई और सरकार को लेकर सकरात्मक रुख का फैसला किया गया।
जम्मू कश्मीर की विधानसभा में ८९ सदस्य होते हैं और सरकार बनाने का बहुमत ४५ से पूरा हो जाता है। पीडीपी, एनसी और कांग्रेस का जोड़ ५५ हो जाता है। वैसे पीडीपी के दो विधायक आबिद अंसारी और इमरान रजा पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। यह माना जाता है कि वे सज्जाद लोन को समर्थन दे रहे हैं।
पहले एनसी धारा-३७० और ३५ए जैसे मुद्दों को समर्थन की शर्त में जोड़ना चाहती थी हालाँकि बाद में यह तये हुआ कि सरकार का मुख्य एजेंडा जम्मू कश्मीर में खराब हो रहे हालात होगा। एनसी बाद में, कहते हैं, इसके लिए सहमत हो गयी।
दिलचस्प यह भी है कि पीडीपी से भाजपा का गठबंधन टूटने के बाद नैशनल कांफ्रेंस तीसरा मोर्चा बनाकर सरकार बनाने के हक़ में तैयार हो गयी थे हालाँकि बाद में यह बात सिरे नहीं चढ़ी। इसके बाद भाजपा ने बड़ा दांव चलते हुए अलगाववादी से मुख्या धरा के नेता बने सज्जाद लोन को सरकार बनाने के लिए तैयार किया। इस पर बात लगातार जारी थी और गठबंधन कुछ आकार लेता भी दिखा रहा था।  भाजपा के २५ सदस्य हैं और उसे लगता था कि यदि कुछ तोड़-फोड़ हो जाती है तो बहुमत का आंकड़ा छुआ जा सकता है।
यह चर्चा चल ही रही थी कि पीडीपी- एनसी-कांग्रेस का तिकोन सामने आ गया। देखना दिलचस्प होगा कि गुरूवार तक क्या राजनीतिक घटनाक्रम होता है।  भाजपा भी अपने स्तर पर कोशिश में है और यह भी किसी सूरत में नहीं चाहती कि इस तिकोन गठबंधन की सरकार बन पाए।