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बिहार की मंत्री मंजू वर्मा का इस्तीफ़ा

विपक्ष की लगातार मांग के बाद आखिर बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने अपने पद से बुधवार शाम इस्तीफा दे दिया। बालिका गृह यौनशोषण मामले में उनका और पति चंद्रेश्वर वर्मा का नाम आने के बाद विपक्ष जोरदार तरीके से उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।

मंजू वर्मा ने बुधवार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया है। सीबीआइ की चल रही जांच में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के कॉल डिटेल्स खंगालने के बाद ये सामने आया था कि मंजू वर्मा की ब्रजेश से बात होती थी। मंत्री ने खुद मंगलवार को ये स्वीकार किया था कि उनकी बालिका गृह मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से बात होती थी हालांकि उनका दावा था कि उनकी बात सिर्फ विभागीय मामलों से सम्बंधित होती थी। मंजू ने कहा था कि कभी कभार उनके पति भी कॉल रिसीव कर लिया करते थे।

गौरतलब है कि ब्रजेश ठाकुर के मोबाइल फोन के सीडीआर से खुलासा हुआ था कि जनवरी से अब तक मंजू वर्मा से ब्रजेश ठाकुर की 17 बार बात हुई है। इस बीच जेडीयू ने मंजू के इस्तीफे पर कहा है कि उनने आधार पर इस्तीफा दिया है। खुलासे के बाद से ही मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले को लेकर बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा पर इस्तीफे का दवाब बन रहा था और विपक्ष लगातार इसकी मांग कर रहा था।

मुख्यमंत्री नीतीश ने सोमवार को कहा था कि किसी को अकारण जिम्मेदार ठहराकर इस्तीफ़ा कैसे लिया जा सकता है। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि अगर कुछ भी साक्ष्य सामने आता है तो वो इस्तीफ़ा लेने में देर नहीं करेंगे। अब आखिर मंजू का इस्तीफा हो ही गया।

दिल्ली में अब भीख मांगना हुआ अपराध की श्रेणी से बाहर

अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस कृत्य को दंडित करने के प्रावधान असंवैधानिक बताया और उन्हें रद्द करने को कहा।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की एक पीठ ने कहा कि इस फैसले का अपरिहार्य नतीजा यह होगा कि इस अपराध के कथित आरोपी के खिलाफ बंबई के भीख मांगना रोकथाम कानून के तहत लंबित मुकदमा रद्द किया जा सकेगा।

अदालत ने कहा कि इस मामले के सामाजिक और आर्थिक पहलू पर अनुभव आधारित विचार करने के बाद दिल्ली सरकार भीख के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों पर काबू के लिए वैकल्पिक कानून लाने को स्वतंत्र है।

अदालत ने 16 मई को पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है जहां सरकार भोजन या नौकरियां प्रदान करने में असमर्थ है।

उच्च न्यायालय भीख को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

पीटीआई भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने कहा था कि बंबई के भीख मांगने पर रोकथाम कानून में पर्याप्त संतुलन है। इस कानून के तहत भीख मांगना अपराध की श्रेणी में है।

हर्ष मंडर और कर्णिका साहनी की जनहित याचिकाओं में राष्ट्रीय राजधानी में भिखारियों के लिए मूलभूत मानवीय और मौलिक अधिकार मुहैया कराए जाने का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने बंबई के भीख मांगने पर रोकथाम कानून को भी चुनौती दी है।

राजाजी हाल में भगदड़, २ की मौत

करूणानिधि की मौत के बाद पूरे तमिलनाडु से लाखों की तादाद में लोग अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने चेन्नई पहुँच रहे हैं। इसी दौरान बुधवार को राजाजी हॉल, जहाँ करूणानिधि का शव मरीना बीच ले जाने से पहले अंतिम दर्शन के लिओए रखा गया था, में भारी भीड़ ले चलते भगदड़ मचने से 2 लोगों की मौत हो गई है। इस भगदड़ में चार दर्जन लोग घायल हो गए। इस बीच करूणानिधि का शव मरीना बीच ले जाने की तैयारी कर ली गयी हैं उन्हें चार बजे के करीब दफनाया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजाजी हाल पहुंचकर वरिष्ठ नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि देने के लिए राजाजी हॉल में लाखों लोग उमड़ पड़े है। इस दौरान पुलिस और भीड़ के बीच धक्कामुक्की होने से वहां भड़दड मच गयी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। इसमें कई लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है।

सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अभिनेता रजनीकांत और कमल हासन ने भी दिवगंत नेता को अंतिम विदाई दी। वहां बढ़ती भीड़ को देखकर पुलिस ने राजाजी हॉल में प्रवेश पर रोक लगा दी जिससे खफा डीएमके समर्थक दीवार फांदकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इसी बीच पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कुछ घंटे की कोर्ट में चली लड़ाई में करूणानिधि को मरीना बीच पर पर दफ़न करने की हरी झंडी दे दी। इस मसले को लेकर सूबे में तनाव की स्थिति बन गयी थी क्योंकि एआईडीएमके सरकार ने करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने का कुछ कारण देकर विरोध किया था। हालाँकि कोर्ट ने बुधवार को कुछ घंटे की सुनवाई के बाद डीएमके की अप्पील को मंजूर करते हुए करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की इज़ाज़त दे दी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करूणानिधि के अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर पहले चेनेई पहुँच गए हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी मंजूरी दी है। इस तरह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत डीएमके नेता एम करुणानिधि के पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर ही दफ़नाया जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट में मंगलवार और बुधवार सुबह कुछ घंटे चली सुनवाई के बाद करुणानिधि को अन्नादुरई की समाधि के बगल में दफनाने की अनुमति मिल गयी।

करूणानिधि को दफ़नाने के स्थान को लेकर मंगलवार रात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के घर पर सुनवाई शुरू हुई थी, जिसे सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अदालत ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। डीएमके चाहती थी कि उनके नेता के शव को मरीना बीच पर जगह मिले, जहां तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गजों के शव दफ़नाए गए थे हालांकि प्रदेश की एआईएडीएमके सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी जिसके बाद डीएमके कोर्ट में गयी थी। पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी बेहद करीबी जे जयललिता मरीना बीच पर ही दफन किए गए थे और वहीं उनके स्मारक बनाए गए। ये दोनों राजनीति में करुणानिधि के कट्टर विरोधी थे।

दक्षिण भारत की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले करुणानिधि की मंगलवार को हुई मृत्यु के बाद से ही इस मसले पर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ था। डीएमके ने तमिलनाडु के मरीना बीच पर करुणानिधि को दफनाने के लिए जमीन की मांग की है। तमिलनाडु सरकार ने विपक्षी द्रमुक को उसके दिवंगत नेता पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को दफनाने के लिए मरीना बीच पर जगह देने से इनकार कर दिया। हालांकि कल देर रात इस मामले की सुनवाई शरू तो हुई थी लेकिन अदालत सरकार की मनाही के तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई थी।

तमिलनाडु सरकार ने उसे इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री सी राजगोपालचारी और के कामराज के स्मारकों के समीप जगह देने की पेशकश की। सरकार के इस कदम पर विवाद पैदा हो गया । इसके बाद डीएमके तमिलनाडु सरकार के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय गयी। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने करुणानिधि के लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी को पत्र लिखा था और उनसे मरीना बीच पर दिवंगत नेता के मार्गदर्शक सी एन अन्नादुरई के समाधि परिसर में जगह देने की मांग की थी।

स्टालिन ने अपने पिता के निधन से महज कुछ ही घंटे पहले इस संबंध में मुख्यमंत्री से भेंट भी की थी। सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित कई मामलों और कानूनी जटिलताओं के कारण मरीना बीच पर जगह देने में असमर्थ है। अतएव सरकार राजाजी और कामराज के स्मारकों के समीप सरदार पटेल रोड पर दो एकड़ जगह देने के लिए तैयार है।

मरीना बीच पर दो गज ज़मीन

आखिर कुछ घंटे की कोर्ट में चली लड़ाई में करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की हरी झंडी मिल गयी इस मसले को लेकर सूबे में तनाव की स्थिति बन गयी थी क्योंकि एआईडीएमके सरकार ने करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने का कुछ कारण देकर विरोध किया था। हालाँकि कोर्ट ने बुधवार को कुछ घंटे की सुनवाई के बाद डीएमके की अप्पील को मंजूर करते हुए करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की इज़ाज़त दे दी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करूणानिधि के अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर पहले चेनेई पहुँच गए हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी मंजूरी दी है। इस तरह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत डीएमके नेता एम करुणानिधि के पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर ही दफ़नाया जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट में मंगलवार और बुधवार सुबह कुछ घंटे चली सुनवाई के बाद करुणानिधि को अन्नादुरई की समाधि के बगल में दफनाने की अनुमति मिल गयी।

करूणानिधि को दफ़नाने के स्थान को लेकर मंगलवार रात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के घर पर सुनवाई शुरू हुई थी, जिसे सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अदालत ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। डीएमके चाहती थी कि उनके नेता के शव को मरीना बीच पर जगह मिले, जहां तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गजों के शव दफ़नाए गए थे हालांकि प्रदेश की एआईएडीएमके सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी जिसके बाद डीएमके कोर्ट में गयी थी। पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी बेहद करीबी जे जयललिता मरीना बीच पर ही दफन किए गए थे और वहीं उनके स्मारक बनाए गए। ये दोनों राजनीति में करुणानिधि के कट्टर विरोधी थे।

दक्षिण भारत की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले करुणानिधि की मंगलवार को हुई मृत्यु के बाद से ही इस मसले पर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ था। डीएमके ने तमिलनाडु के मरीना बीच पर करुणानिधि को दफनाने के लिए जमीन की मांग की है। तमिलनाडु सरकार ने विपक्षी द्रमुक को उसके दिवंगत नेता पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को दफनाने के लिए मरीना बीच पर जगह देने से इनकार कर दिया। हालांकि कल देर रात इस मामले की सुनवाई शरू तो हुई थी लेकिन अदालत सरकार की मनाही के तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई थी।

तमिलनाडु सरकार ने उसे इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री सी राजगोपालचारी और के कामराज के स्मारकों के समीप जगह देने की पेशकश की। सरकार के इस कदम पर विवाद पैदा हो गया । इसके बाद डीएमके तमिलनाडु सरकार के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय गयी। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने करुणानिधि के लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी को पत्र लिखा था और उनसे मरीना बीच पर दिवंगत नेता के मार्गदर्शक सी एन अन्नादुरई के समाधि परिसर में जगह देने की मांग की थी।

स्टालिन ने अपने पिता के निधन से महज कुछ ही घंटे पहले इस संबंध में मुख्यमंत्री से भेंट भी की थी। सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित कई मामलों और कानूनी जटिलताओं के कारण मरीना बीच पर जगह देने में असमर्थ है। अतएव सरकार राजाजी और कामराज के स्मारकों के समीप सरदार पटेल रोड पर दो एकड़ जगह देने के लिए तैयार है।

मुत्तुवेल करुणानिधि का निधन

कलाईनार। प्यार से उनके समर्थक और तमिलनाडु के लोग उन्हें इसी नाम से बुलाते थे। राजनीति और उससे पहले तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक के रूप में मुत्तुवेल करुणानिधि का अपना मुकाम था। ९४ साल के करुणानिधि करीब ७८ साल तक तमिल राजनीति में रहे और बाद के सालों में देश की राजनीति का भी बड़ा चेहरा बने। किसी समय कांग्रेस विरोध की धुरी रहे करूणानिधि बाद में कांग्रेस और यूपीए के साथ भी रहे। पिछले कुछ दिन से बीमार चल रहे करुणानिधि आखिर मंगलवार को उसी कावेरी अस्पताल में अपने हज़ारों समर्थकों की दुआओं के बीच शाम ६.१० पर इस संसार को विदा कह गए, जिसमें वे कुछ दिन से भर्ती थे।

अस्पताल ने शाम पोन सात बजे प्रेस रिलीज में बताया की काफी कोशिशों के बाबजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी सहित देश के तमाम बड़े नेताओं, विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने उनके निधन पर गहरा दुःख जताते हुए इस देश की राजनीति के लिए बड़ा नुक्सान बताया है।

यदि उनके जीवन पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि जब वे १४ साल के थे ”हिन्दी-विरोधी” आंदोलन के जरिये करुणा ने अपने राजनीतिक जीवन का आगाज़ किया। उनका जन्म ३ जून सन 1924 को मुत्तुबेल और अंजुगम के यहां भारत के नागपट्टिनम के तिरुक्कुवलइ में दक्षिणमूर्ति के रूप में हुआ था। सन १९६९ में डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई की मौत के बाद करुणा को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना दिया गया। और ये पांच बार (1969 -71, 1971 -761989 -91, 1996 -2001 ,2006 -2011 ) तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके है। करूणानिधि ने अपने 60 साल के राजनीति के कॅरिअर में अपनी भागीदारी बाले हर किसी चुनाब में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। 2004 के लोकसभा चुनाब में उन्होंने तमिलनाडु और पुदुचेरी में डीएमके के नेतृत्व बाली डीपीए का नेतृत्व किया और लोकसभा की 40 सीटों को जीत लिया। इसके बाद उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाब में उन्होंने डीएमके के जरिये जीती गई सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 18 कर दिया। और तमिलनाडु और पुदुचेरी में यूपीए का नेतृत्व कर बहुत छोटे से गठबंधन के बाबजूद उन्होंने बहा पर 28 सीटों पर जीत प्राप्त की।

एम करूणानिधि तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक भी थे। उनके समर्थक उन्हें कलाईनार कहकर बुलाते थे।

करुणानिधि ने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में अपने करियर का शुभारंभ किया। अपनी बुद्धि और भाषण कौशल के माध्यम से वे बहुत जल्द एक राजनेता बन गए। वे द्रविड़ आंदोलन से जुड़े थे और उसके समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे। उन्होंने तमिल सिनेमा जगत का इस्तेमाल करके पराशक्ति नामक फिल्म के माध्यम से अपने राजनीतिक विचारों का प्रचार करना शुरू किया।[10] पराशक्ति तमिल सिनेमा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई क्योंकि इसने द्रविड़ आंदोलन की विचारधाराओं का समर्थन किया और इसने तमिल फिल्म जगत के दो प्रमुख अभिनेताओं शिवाजी गणेशन और एस. एस. राजेन्द्रन से दुनिया को परिचित करवाया। शुरू में इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था लेकिन अंत में इसे 1952 में रिलीज कर दिया गया। यह बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी हिट फिल्म साबित हुई लेकिन इसकी रिलीज विवादों से घिरी था। रूढ़िवादी हिंदूओं ने इस फिल्म का विरोध किया क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिसने ब्राह्मणवाद की आलोचना की थी। इस तरह के संदेशों वाली करूणानिधि की दो अन्य फ़िल्में पनाम और थंगारथनम थीं। इन फिल्मों में विधवा पुनर्विवाह, अस्पृश्यता का उन्मूलन, आत्मसम्मान विवाह, ज़मींदारी का उन्मूलन और धार्मिक पाखंड का उन्मूलन जैसे विषय शामिल थे। जैसे-जैसे उनकी सुदृढ़ सामाजिक संदेशों वाली फ़िल्में और नाटक लोकप्रिय होते गए, वैसे-वैसे उन्हें अत्यधिक सेंसशिप का सामना करना पड़ा; 1950 के दशक में उनके दो नाटकों को प्रतिबंधित कर दिया गया।

जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर करुणानिधि ने 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया और हिंदी विरोधी आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने अपने इलाके के स्थानीय युवाओं के लिए एक संगठन की स्थापना की। उन्होंने इसके सदस्यों को मनावर नेसन नामक एक हस्तलिखित अखबार परिचालित किया। बाद में उन्होंने तमिलनाडु तमिल मनावर मंद्रम नामक एक छात्र संगठन की स्थापना की जो द्रविड़ आन्दोलन का पहला छात्र विंग था। करूणानिधि ने अन्य सदस्यों के साथ छात्र समुदाय और खुद को भी सामाजिक कार्य में शामिल कर लिया। यहां उन्होंने इसके सदस्यों के लिए एक अखबार चालू किया जो डीएमके दल के आधिकारिक अखबार मुरासोली के रूप में सामने आया।

कल्लाकुडी में हिंदी विरोधी विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी, तमिल राजनीति में अपनी जड़ मजबूत करने में करूणानिधि के लिए मददगार साबित होने वाला पहला प्रमुख कदम था। इस औद्योगिक नगर को उस समय उत्तर भारत के एक शक्तिशाली मुग़ल के नाम पर डालमियापुरम कहा जाता था। विरोध प्रदर्शन में करूणानिधि और उनके साथियों ने रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम को मिटा दिया और रेलगाड़ियों के मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए पटरी पर लेट गए। इस विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई और करूणानिधि को गिरफ्तार कर लिया गया। करूणानिधि को तिरुचिरापल्ली जिले के कुलिथालाई विधानसभा से 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए पहली बार चुना गया।

प्रदेश सरकार ने बुधवार को प्रदेश में करूणानिधि के निधन पर छुट्टी घोषित की है। करीब डेढ़ साल पहले तमिलनाडु की एक और बड़ी नेता जयललिता का भी लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया था।

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांघी बुधवार को चेन्नई में अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने जा रहे हैं।

अस्पताल और करूणानिधि के घर के बाहर जमा समर्थकों में शोक की लहर है। कईयों का रो-रोकर बुरा हाल है। हाथों में करुणानिधि की तस्वीर लिए वे रो रहे हैं। उनके गंभीर बीमार होने की खबर के बाद कुछ लोगों के आत्महत्या करने की भी खबर है।

चंडीगढ़-शिमला राजमार्ग पर जाम

चंडीगढ़-शिमला हाईवे दुर्घटना के कारण सुबह तीन बजे से जाम लगा हुआ हैै। दोनों तरफ यातायात रूका हुआ है। इस जाम में सैंकडों यात्री और दैनिक यात्री फसे हुए हैं। यह कहना उचित है कि इस सड़क पर चार लेन बनाने का जो काम चल रहा है उसने  इन पहाड़ियों को कमज़ोर कर दिया है,  इनसे मिट्टी और पत्थर गिर रहे हैं। लगातार रूक-रूक कर होने वाली बारिश के कारण प्रशासन को रास्ता साफ करने में  मुश्किल हो रही है।

कश्मीर के गुरेज़ में मुठभेड़ : ४ जवान शहीद

विलम्ब से मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू कश्मीर के गुरेज़ सेक्टर में सोमवार की रात घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान ४ जवान शहीद हो गए हैं। इस मुठभेड़ में हालांकि सुरक्षा बालों ने चार आतंकवादियों को भी ठिकाने लगा दिया। सूचना के मुताबिक गोलीबारी के बाद कुछ और आतंकवादी सीमा के दूसरी तरफ वापस भाग गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार देर रात गुरेज इलाके में सेना ने घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन कासो चलाया। इस दौरान हुई मुठभेड़ में सेना के चार जवान शहीद हो गये जबकि सुरक्षाबलों ने चार आतंकवादियों को भी ढेर कर दिया। सेना में सूत्रों के अनुसार सेना की 36 आरआर और 9 गरनेडियर ने मिलकर नियंत्रण रेखा ( एलओसी) के नाने सेक्टर और बकतूर में सर्च अभियान शुरू किया।

इस दौरान आतंकियों की घुसपैंठ को रोकने के लिए की गई गोलीबारी में चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। उनके शव एलओसी पर पड़े हैं। हालांकि इस मुठभेड़ में सेना के चार जवान भी शहीद हो गये हैं। बांडीपोरा के पुलिस प्रमुख शेचा जुलफिकार के मुताबिक उनकी रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में आतंकी छिपे हुए थे। उनके मुताबिक गोलीबारी हुई है और मौके पर पुलिस की टीम को भेजा गया है। उधर उपायुक्त चौधरी शाहिद ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम की उल्लंघन की घटना है। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी का इन्तजार है।

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने ली शपथ

वरिष्ठता के मसले पर विवाद के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के तीन नए जजों को शपथ दिलाई गयी। सबसे पहले जस्टिस इंदिरा बनर्जी और उनके बाद जस्टिस विनीत सरन को शपथ दिलाई गई जबकि अब तक उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को तीसरे नंबर सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ दिलाई गई। जस्टिस जोसेफ के चीफ जस्टिस बनने की संभावना अब कम हो गई है क्योंकि उनकी नियुक्ति जनवरी में की जानी थी लेकिन देर से की गई।

गौरतलब है कि पिछले काफी समय से इस बात पर गंभीर मतभेद चल रहे थे कि जजों को किस क्रम में शपथ दिलाई जाए। जस्टिस जोसेफ को सबसे पहले शपथ दिलाने और वरिष्ठता के मसले पर सोमवार को कुछ वरिष्ठ जजों ने मुख्या न्यायाधीश दीपक मिश्रा से भेंट की थी।

इन जजों का कहना था कि केंद्र ने प्रमोशन में जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता कम की। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश ने इन जजों को भरोसा दिलाया था कि वरिष्ठता में दूसरे नंबर के जज जस्टिस रंजन गोगोई से इस मुद्दे पर बात करेंगे हालांकि जस्टिस जोसेफ को तीसरे नंबर पर ही शपथ दिलाई गयी जिससे वे वरिष्ठता में अन्य दोनों से कनिष्ठ हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों का मानना है कि इससे जस्टिस जोसेफ के भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने में बाधा आ सकती है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के सर्कुलर में कहा गया था कि जस्टिस जोसेफ को तीन जजों में सबसे आखिर में शपथ दिलाई जाएगी। अभी तक कहा गया है कि ये फैसला सरकार का है और इसे जजों की नियुक्ति को नोटिफाई करने के बाद लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज इसे जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में दखल मान रहे हैं।

जहाँ तक वरिष्ठता की बात है परंपरा के मुताबिक यह इस आधार पर तय होती है कि जज की नियुक्ति कब हुई है। अगर कोई दो जज एक ही दिन नियुक्त हुए हैं तो उनकी नियुक्ति का क्रम उनकी वरिष्ठता तय करेगा। दो जज अगर एक ही दिन नियुक्त हुए तो अधिक दिन हाई कोर्ट का जज वरिष्ठ माना जाएगा।

जस्टिस बनर्जी और जस्टिस सरन जस्टिस जोसफ की तुलना में ज्यादा दिन तक हाई कोर्ट के जज रहे हैं हालांकि जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश कॉलेजियम ने 10 जनवरी, 2018 को की थी। अन्य दो जजों की सिफारिश कॉलेजियम ने 16 जुलाई को की थी। इस लिहाज से देखा जाये तो जोसेफ वरिष्ठ हो जाते हैं।

विदेशी नागिरकों को नहीं मिलेगा जीएसटी रिफंड

भारत आने वाले विदेशी नागिरकों को यहां से वस्तुओं की खरीद और उसे अपने साथ ले जाने पर उन्हें शायद ही जीएसटी रिफंड प्रदान करे।

वित्त मंत्रालय ने ये भी कहा है कि सरकार ने एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) कानून के संबंधित प्रावधानों को लागू नहीं किया है।

ये जानकारी सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत पूछे गये एक सवाल के जवाब में दी गई है ।

आवेदन में विदेशी नागरिक के भारत में खरीदे गये सामान पर जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया के बारे में ब्योरा मांगा गया था।

कुछ पश्चिमी देश विदेशी नागरिकों द्वारा खरीदे गये सामान पर कुछ करों की वापसी करते हैं।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने पीटीआई- भाषा को बताया है कि, ‘‘आईजीएसटी की धारा 15 को अभी लागू नहीं किया गया है। इसीलिए विभाग के पास इस बारे में कोई सूचना नहीं है।’’

संबंधित धारा के अनुसार एक विदेशी नागरिक के भारत में खरीदे गये सामान और उसे अपने साथ ले जाने पर भुगतान किये गये एकीकृत कर को ‘रिफंड’ किया जाएगा। इसे निर्धारित उपायों एवं शर्तों के तहत ‘रिफंड’ किया जाएगा।

इंटरनेट की तेज़ गति करती है नींद को प्रभावित

क्या आप जानते हैं कि इंटरनेट की तेज़ गति आपकी नींद को प्रभावित करती है? एक शोध के मुताबिक़ जो लोग डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन (डीएसएल) का प्रयोग करते हैं वह डीएसएल इंटरनेट नहीं इस्तेमाल करने वालों की तुलना में 25 मिनट कम नींद ले पाते हैं।

इटली के बोकोनी यूनिवर्सिटी और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के शोधकर्ताओं ने बताया कि तेज गति के इंटरनेट के प्रयोग से उन लोगों में नींद की अवधि और नींद पूरी होने की संतुष्टि घटती है जो सुबह में काम या पारिवारिक कारणों के लिए समय नहीं निकाल पाते।

बोकोनी यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक फ्रांसेस्को बिल्लारी ने कहा, “डीएसएल इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग बिना डीएसएल के इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के मुकाबले 25 मिनट कम सोते हैं।”

बता दें कि डीएसएल एक ऐसी तकनीक है जो साधारण तांबे की टेलीफोन तारों की बजाए ज्यादा बैंडविथ के इंटरनेट को घरों और छोटे कारोबारों तक पहुंचाता है।

बिल्लारी ने कहा, “ऐसे लोग सात से नौ घंटे की नींद नहीं ले पाते और वह अपनी नींद से संतुष्ट भी नहीं हो पाते।”

वैज्ञानिक सात से नौ घंटे की नींद लेने को जरूरी बताते हैं। यह शोध ‘जर्नल ऑफ इकोनॉमिक बिहेवियर एंड ऑर्गनाइजेशन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।