Home Blog Page 1113

केबिनेट ने किया १३ प्वॉइंट रोस्टर ख़त्म

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ऐसे हर फैसले को मंजूरी दे रही है जिससे उसे  लाभ मिल सके। अब दलित-आदिवासियों और ओबीसी को साधने की कवायद में सरकार ने १३ प्वॉइंट रोस्टर को बदलकर २०० प्वॉइंट रोस्टर सिस्टम लागू करने के अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी गुरूवार को मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदान की गयी।
सरकार के मौजूदा कार्यकाल की आखिरी केबिनेट बैठक मानी जा रही है। विपक्ष पहले ही चुनावों की घोषणा में देरी को लेकर सवाल उठाने लगा है। आज की मंत्रिमंडल के फैसलों की बैठक के बाद जानकारी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया कांफ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि १३ प्वाइंट रोस्टर सिस्टम की जगह आरक्षण के पुराने २०० प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को बहाल करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी गयी है।
उनके मुताबिक एससी/एसटी/ओबीसी को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पुराने सिस्टम के हिसाब से आरक्षण को बहाल करने को मंजूरी दी गई है जबकि ५० नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) बनाने को भी मंजूरी दी गई। जेटली ने कहा कि १३ प्वाइंट रोस्टर की वजह से विश्वविद्यालयों में कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्व कम हो जाता, इसकी वजह से केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाने का फैसला किया।
जेटली न कहा कि चीनी उत्पादन के लिए कैबिनेट ने अतिरिक्त फंड को मंजूरी के  अलावा आर्थिक मामलों की केंद्रीय समिति ने पश्चिम बंगाल के नरायणगढ़ और ओडिशा के भद्रक के बीच तीसरे रेलवे लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दी है। दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों के लिए दिल्ली के उप राज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है जो यह विचार करेगी की जहां लोगों की रिहायश हो गई है वहां उन्हें जमीन का मालिकाना हक़ कैसे दिया जाए, इस पर विचार किया जाएगा।  क्योंकि इन जगहों पर बड़ी आबादी रहती है।
इसके अलावा घाटे में चल रहे थर्मल पावर प्रोजेक्ट को राहत देने, हाइड्रो पावर सेक्टर को बढ़ावा देने, हाइड्रो पावर सेक्टर को रिन्यूएबल एनर्जी का दर्जा देने, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए मिलने वाले फंड का इस्तेमाल करने की हाइड्रो पावर कंपनी को इजाजत, चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड में एनएचपीसी के निवेश, सिक्किम में ५०० मेगावाट के लैंसो तीस्ता हाइड्रो प्रोजेक्ट के अधीग्रहण, बिहार के बक्सर में ६६० मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट को मंजूरी, यूपी के खुर्जा में सुपर थर्मल पावर प्लांट, जिसकी क्षमता १३२० मेगावाट होगी, शुरू करने, एमपी में अमेनिया कोल माइंस में काम शुरू करने के निवेश और दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट फेज-४ को भी मंजूरी मंत्रीमंगल की आज की बैठक में दे दी गयी है।

राफेल पर खुद की जांच का आदेश दें मोदी : राहुल

लगता है चुनाव में राफेल का मुद्दा मोदी सरकार का पीछा नहीं छोड़ेगा। लगातार राफेल पर नए खुलासों से लोगों के बीच इस खरीद को लेकर आशंका बढ़ती जा रही है। और अब सरकार के अटार्नी जनरल के सर्वोच्च न्यायालय में ब्यान कि रक्षा मंत्रालय से राफेल से जुडी फाइलें चोरी हो गयी हैं, लोगों के बीच सरकार के राफेल की साफ़-सुथरी खरीद के दावों पर भ्रम बन गया है। इन सब के बीच  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरूवार को फिर सीधे पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर वे दोषी नहीं हैं तो खुद के खिलाफ जांच की इजाजत क्यों नहीं देते?
राहुल ने राफेल पर अंग्रेजी अखबार ”द हिन्दू” में हुए नए खुलासे और सर्वोच्च अदालत में अटार्नी जनरल के ब्यान को आधार बनाते हुए कहा – ”पीएमओ समानांतर बातचीत क्यों कर रहे थे। उसका कोई कारण होगा। वरना नेगोशिएशन टीम तो अपना काम कर ही रही थी। अगर सरकार कह रही है कि राफेल सौदे के दस्तावेज चोरी होने से ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट का उल्लंघन हुआ है, तो उस पर एफआईआर दर्ज कराएं। पीएमओ का मतलब प्रधानमंत्री ऑफिस नहीं, सीधे प्रधानमंत्री हैं।’’
कांग्रेस अध्यक्ष ने राफेल डील को लेकर मोदी और कारोबारी अनिल अंबानी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा – ”राफेल इसलिए समय पर नहीं आ पाया क्योंकि उसका पैसा अनिल अंबानी के पास पहुंच गया। फाइल में लिखा है पीएमओ ने सारी सौदेबाजी की। मोदी राफेल डील पर दैसो से समानांतर बातचीत कर रहे थे। अगर वे दोषी नहीं हैं तो खुद के खिलाफ जांच की इजाजत क्यों नहीं देते? इस पर जेपीसी को क्यों नकारा जा रहा है?”
प्रेस कांफ्रेंस में राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने रात में सीबीआई प्रमुख को हटाया। ”सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें फिर इस पद पर लाया गया, लेकिन फिर हटा दिया गया। सबकी जांच होती है तो प्रधानमंत्री की भी होनी चाहिए। पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने एक टेप में साफ कहा है कि (राफेल सौदे की) सारी फाइलें उनके पास हैं।
पहले आपने कहा कि राफेल में कुछ नहीं है। बाद में हमने बताया कि कुछ गड़बड़ हुई है। इसके बाद हिंदू अखबार ने नाम के साथ लिखा कि राफेल में गड़बड़ हुई।
हमने जब जेपीसी की मांग की तो सरकार उसे नहीं मानी। प्रधानमंत्री खुद क्यों नहीं कहते कि मैं चौकीदार हूं, मैंने चोरी नहीं की है। उन्हें खुद इस मामले की जांच करानी चाहिए।”
राहुल ने कहा कि कल ही उन्होंने अखबार में पढ़ा कि जो सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए उनके परिवारों ने (एयर स्ट्राइक के) सबूत देने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि हमें चोट लगी है तो हमें दिखाइये कि क्या हुआ। गांधी ने कहा – ”‘प्रधानमंत्री पठानकोट में आईएसआई को बुलाते हैं। वे पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ को गले लगाते हैं और फिर हमें पाक का पोस्टर बॉय कहा जाता है। पाकिस्तान के असली पोस्टर बॉय तो खुद पीएम मोदी हैं।”

हंदवाड़ा में आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में गुरूवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर कर दिया गया है। यह मुठभेड़ अभी भी जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मुठभेड़ में एक आतंकी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया और इलाके को खाली करा के तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बता दें कि लगभग एक हफ्ते से रह-रहकर भारतीय सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रही हैं जिनमें  पिछले दिनों दो आतंकियों को ढेर किया गया था।
हंदवाड़ा के क्रालगुंड में बुधवार रात सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। तभी आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया गया लेकिन शायद उस वक्त वे बच निकलने में कामयाब हुए। एक बार फिर गुरुवार सुबह हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को ढेर कर दिया। मुठभेड़ अभी जारी है। इलाके को खाली करा के सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच संघर्ष पहली मार्च से लेकर तीन मार्च तक भी हुआ था जिसमें ५ जवान शहीद हो गए थे और तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। एक मामले में सीआरपीएफ के दो जवान और दो पुलिसकर्मी शुक्रवार को उस समय शहीद हो गए, जब एक आतंकवादी को मृत समझ लिया गया हालांकि वो ज़िंदा मलबे से उठकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी।

जम्मू बस अड्डे पर ग्रिनेड ब्लास्ट, २६ घायल

जम्मू के बस अड्डे पर ग्रिनेड ब्लास्ट होने की खबर है। इसमें २६ लोग घायल हो गए हैं। इनमें से २ की हालत गंभीर बताई गयी है।

तहलका की जानकारी के मुताबिक यह ब्लास्ट जम्मू के  हुआ है इसमें २६ लोग घायल हो गए हैं। इनमें दो की हालत गंभीर है। सभी को अस्पताल पहुँचाया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुँच गए हैं।

एक खबर के मुताबिक आतंकी ने अपनी जेब से निकालकर ग्रिनेड सड़क पर रोल कर दिया। वहां बसें भी खड़ी थीं। अभी आतंकी के बारे में कोइ सूचना नहीं है की वो कहाँ भागा।

घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बस स्टैंड पर ग्रेनेड धमाका होने की पुष्टि की है की है। इसमें करीब २६ लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के मुताबिक ग्रेनेड ब्लास्ट में घायल लोगों को जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है। दो लोगों की हालत गंभीर बताई गयी है। यह धमाका दोपहर में हुआ है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर शुरुआती जांच शुरु कर दी है। साथ ही, विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार है।

देश के ताज़े ज़ख़्म पर दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक से टांके

पाकिस्तान के बालाकोट में चल रहे जैश-ए-मोहम्मद के शिविर पर भारतीय वायु सेना के विमानों ने हमला करके कश्मीर के पुलवामा में मारे गए सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत का बदला तो ले लिया। पाकिस्तान पर भारतीय वायुसेना के विमानों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी काफी भीतर जाकर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र तक पहुंच कर पाकिस्तान को करारा जवाब दे दिया है जो पिछले एक अर्से से आतंकवाद की नर्सरी बना हुआ है।

विदेश सचिव विजय गोखले ने वायुसेना के हमले को गैर सैनिक, और ‘प्री-एम्पिटव’ कार्रवाई करार दिया और यह दावा किया कि इसमें बड़े पैमाने पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी, प्रशिक्षक, वरिष्ठ कमांडर और जिहादियों के समूह को नष्ट कर दिया गया।

जैश-ए-मोहम्मद ने खुले आम यह जिम्मेदारी ली थी कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हमले में उसका हाथ था। भारत के लिए तो हद की सीमा भी पार हो गई थी। पाकिस्तान ने भारत के धैर्य की परीक्षा 2016 में पठानकोट वायुसेना के अड्डे पर दो जनवरी को हुए हमले और उरी में 18 सितंबर और दूसरी घटनाओं में ली थी।

पूरा देश पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद क्रोध से उबल रहा था और आम राय बन रही थी कि भारत जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तान को सबक सिखाए।

वायुसेना के हमले से भारतीय सेना ने पाकिस्तान को यह जता दिया है कि यह जवाबी कार्रवाई करेगा यदि देश में उपद्रव की कोई हरकत होगी। पाकिस्तान के सामने अब मरता क्या न करता जैसी हालत हो गई है। यानी यदि यह पुष्टि करे तो मरे और न करे तो मरे। पाकिस्तानी नेता भी खासे चकराए से, बेहद गंभीर और सन्न से हैं।

पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता ने तो हवाई हमले से हुए विनाश को खारिज करना शुरू कर दिया है। उसका कहना है कि विमानों के बम खुले मैदान में गिरे और उससे कोई ज्य़ादा बर्बादी नहीं हुई। हालांकि

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारतीय कार्रवाई को गंभीर आक्रमण बताया है। उन्होंने कहा कि अब पाकिस्तान का अधिकार है कि वह जवाब दे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तो अपने ही बयान का विरोध कर दिया है। सितंबर 2016 में भी पाकिस्तान ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से इंकार किया था।

बहरहाल इस बार पाकिस्तानी सेना ने यह ज़रूर माना है कि भारतीय वायुसेना ने कार्रवाई की। हालांकि उसके असर से इंकार किया है। उधर राजनीतिक मोर्च पर भी पाकिस्तान अलग-थलग है। अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह आतंक छोड़ दे अन्यथा कोई समर्थन उसे नहीं मिलेगा। पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीन गई हैं जहां वे रूस और चीन के विदेश मंत्रियों से मिलेंगी।

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति यों भी खासी खराब है। वह जवाबी कार्रवाई तो नहीं कर सकता लेकिन एटमी हथियार से लैस होने के नाते कुछ भी उत्तेजक लापरवाही कर सकता है। सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 से ज़रूर आम चुनाव मे सत्ता गठबंधन का उत्साह बढ़ा है। अब ‘एक देश, एक आवाज़: हम नहीं झुकेंगे’ से जोश बना है और आम चुनाव होने हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महज 21 मिनट में सबसे बड़े आतंकवादी शिविर को नष्ट करने के बाद ‘जोश’ में हैं क्योंकि इसमें 300 आतंकवादियों के मारे जाने और विमानों के भी बिना किसी चुनौती के सुरक्षित लौट आने की बात है। लोग तो अब गलियों में दहाड़ते हैं, ‘जोश है’। सुनने वाले जवाब देते हैं ‘जबर्दस्त जी!’

राफेल पर कांग्रेस का फिर पीएम पर हमला

राफेल का भूत मोड सरकार का पीछा नहीं छोड़ेगा।  जहाँ सर्वोच्च न्यायालय में इस बाबत दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब १४ मार्च को अगली सुनवाई होगी वहीं अंग्रेजी अखबार ”द हिन्दू” ने बुधवार को एक और रिपोर्ट छापकर सरकार की बखिया उधेड़ने की कोशिश की है। उधर सरकार की ही इंडिया नेगोसिएशन टीम के दस्तावेजों के हवाले से कांग्रेस ने आज प्रेस कांफ्रेंस करके एक फिर पीएम मोदी पर राफेल में चोरी का आरोप लगाया।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राफेल को लेकर मोदी सरकार पर राफेल में चोरी करने का आरोप लगाया और एक बार फिर कहा – ”चौकीदार ने चोरी की है।” सुरजेवाला ने इंडिया नेगोसिएशन टीम (आईएनटी)  के हवाले से कहा कि जब कांग्रेस की सरकार १२६ जहाज खरीद रही थी, तब उनमें ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी शामिल थी। मगर मोदी सरकार के सौदे में यह नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा – ”चौकीदार की यह तीसरी चोरी है कि चौकीदार स्वंय इंडियन नेगोसिएशन टीम को बाइपास कर ३६ लड़ाकू जहाजों की नेगोशिएशन कर रहे थे।  दोस्तों यह सनसनीखेज बात है कि इन ३६ जहाजों के खरीदने का निर्णय इंडियन नेगोशिएशन टीम ने नहीं किया। इसका नेगोशिएशन अजित डोवल ने किया।
सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस में आगे कहा – ”राफेल घोटाले के लिए पीएम जिम्मेदार हैं।  इस सौदे में करप्शन है। ३६ की कीमत अधिक है १२६ से।” उन्होंने कहा कि ३६ राफेल की कीमत ६३,४५० करोड़ है। ”मोदी सरकार ३६ की कीमत ५९,१३२ करोड़ कहा गया।  चौकीदार की चोरी पकड़ी गई है।”
सुरजेवाला कि कहा कि जब यूपीए ले रही थी तो कीमत कम थी लेकिन मोदी जी के समय कीमत बढ़ गई। रक्षा सौदे में तकनीकी ट्रांसफर होना था लेकिन इसमें शामिल नहीं था। ३६ विमान ७०,२५० करोड़ पड़ रहा है। चौकीदार सबको छोड़कर खुद डील कर रहे थे। १२-१३ जनवरी को अजित डोवल फ्रांस गए और इस डील की बात की।  इंडियन नेगोसिएशन टीम ने ये फैसला नहीं किया।

अदालत में बोले एजी, राफेल के दस्तावेज चोरी

सर्वोच्च अदालत में बुधवार को राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल ने राफेल पर पुनर्विचार याचिका और गलत बयानी संबधी आवेदन खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि ये चोरी किये गये दस्तावेजों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि राफेल पर ”द हिंदू” अखबार की आज की रिपोर्ट कोर्ट में सुनवाई को प्रभावित करने जैसी है जो अपने आप में अदालत की अवमानना है।
अदालत ने राफेल डील मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करते हुए कहा कि वह ऐसे किसी भी पूरक हलफनामों अथवा अन्य दस्तावेजों पर गौर नहीं करेगा जो उसके समक्ष दखिल नहीं किये गये हैं। प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि जब प्राथमिकी दायर करने और जांच के लिए याचिका दाखिल की गईं तब राफेल पर महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया गया। अगर तथ्यों को दबाया नहीं गया होता तो सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में प्राथमीकि और जांच संबंधी याचिका को खारिज नहीं किया होता।
आज की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अधिवक्ता प्रशांत भूषण जिन दस्तावेजों पर भरोसा कर रहे हैं, वे रक्षा मंत्रालय से चुराए गये हैं।  राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेजों की चोरी होने के मामले की जांच चल रही है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने राफेल सौदे पर जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया है वे गोपनीय हैं और आधिकारिक गोपनीयता कानून का उल्लंघन हैं।
चीफ जस्टिस ने रंजन गोगोई ने कहा कि प्रशांत भूषण को सुनने का यह अर्थ नहीं है कि कोर्ट राफेल सौदे के दस्तावेजों को रेकार्ड में ले रहा है। उन्होंने अटॉर्नी जनरल से भोजनावकाश के बाद यह बताने को कहा कि राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेजों के चोरी होने पर क्या कार्रवाई की गयी ?

पाक नागरिकों की वीजा मियाद घटाई अमेरिका ने

अमेरिका ने पाकिस्तान को भारत के भीतर जाकर एफ-१६ इस्तेमाल करने पर जवाबतलबी करने के बाद अब एक बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तानी नागरिकों की वीज़ा मियाद पांच साल से घटाकर तीन महीने कर दी है। साथ ही वीजा की फीस भी पहले से ज्यादा कर दी गयी है।
 
पाकिस्तान के ऊपर भारत लगातार आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगता रहा है और पिछले तमाम हमलों के सबूत भी भारत की विभिन्न सरकारों ने पाकिस्तान को  इसका ज़यादा असर हुआ नहीं हुआ है। अब अमेरिका ने उसपर जो नया अंकुश लगाया है उसके मुताबिक अब पाकिस्तान के नागरिकों को तीन महींने से ज्यादा का वीज़ा नहीं मिलेगा।
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को झटका देते हुए अमेरिकी सरकार ने  पाकिस्तानी नागरिकों की वीज़ा अब सिर्फ टीम महीने कर दी है जो पहले पांच साल थी। इससे अब पाकिस्तान के नागरिकों को तीन महींने से ज्यादा का वीज़ा नहीं मिल पायेगा।
 
पाकिस्तान मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए आदेश के अनुसार, वर्क वीज़ा, जर्नलिस्ट वीज़ा, ट्रांसफर वीज़ा, धार्मिक वीज़ा के लिए फीस में बढ़ोतरी भी की गई है। अभी तक वीजा के लिए जो फीस ली जाती है उसमें ३२ से ३८ डॉलर तक की बढ़ोतरी की गई है।
 
पहले अमेरिका पाकिस्‍तान के नागरिकों को पांच साल तक का वीजा देता था। ट्रंप ने कुछ समय पहले ही कहा था कि वह इस मामले की रिपोर्ट देख रहे हैं और जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। अब वीसा की फीस भी ट्रम्प प्रशाशन ने बढ़ा दी है।

अयोध्या पर फैसला सुरक्षित

अयोध्या मामले में मध्यस्थता पर सर्वोच्च न्यायालय ने  ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने इस मामले की बुधवार को सुनवाई की, हालांकि, अभी सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं बताया कि वह इस पर फैसला कब सुनाएगी।

सुनवाई के दौरान जहां मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयार दिखा, वहीं हिंदू महासभा और रामलला पक्ष ने इस पर सवाल उठाए। हिंदू महासभा ने कहा कि जनता मध्यस्थता के फैसले को नहीं मानेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था कि दोनों पक्षकार बातचीत का रास्ता निकालने पर विचार करें। अगर एक फीसदी भी बातचीत की संभावना हो तो उसके लिए कोशिश होनी चाहिए।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई की शुरुआत में हिंदू महासभा ने पीठ से कहा जनता मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं होगी। तो इस पर संविधान पीठ ने कहा कि आप कह रहे है कि इस मसले पर समझौता नहीं हो सकता। जस्टिस बोबड़े ने हिंदू महासभा से कहा,  आप कह रहे हैं कि समझौता फेल हो जाएगा। आप प्री जज कैसे कर सकते हैं ?

इस रिपोर्ट के मुताबिक संविधान पीठ ने कहा यह केवल जमीन का विवाद नहीं है, यह भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यह दिल दिमाग और हीलिंग का मसला है। इसलिए कोर्ट चाहता है कि आपसी बातचीत से इसका हल निकले। जस्टिस बोबड़े ने कहा जो पहले हुआ उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं। विवाद में अब क्या है हम इस उस पर बात कर रहे हैं। कोई उस जगह बने और बिगड़े निर्माण या मन्दिर, मस्जिद और इतिहास को बदल नहीं कर सकता। बाबर था या नहीं, वो किंग था या नहीं ये सब इतिहास की बात है। सिर्फ आपसी बातचीत से ही बदल सकता है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट  गया है कि मुस्लिम पक्षकार की ओर ओर से राजीव धवन ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह कोर्ट के ऊपर है कि मध्यस्थ कौन हो? मध्यस्थता इन कैमरा हो। इस पर जस्टिस बोबड़े बोले ने कहा कि यह गोपनीय होना चाहिए।  साथ ही उन्होंने कहा पक्षकारों द्वारा गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।  मीडिया में इसकी टिप्पणियां नहीं होनी चाहिएं। प्रक्रिया की रिपोर्टिंग ना हो। अगर इसकी रिपोर्टिंग हो तो इसे अवमानना घोषित किया जाए।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह केवल पार्टियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि दो समुदायों को लेकर विवाद है। हम मध्यस्थता के माध्यम से लाखों लोगों को कैसे बांधेंगे? यह इतना आसान नहीं होगा। साथ ही जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से संकल्प की वांछनीयता एक आदर्श स्थिति है।  लेकिन असल सवाल यह है कि ये कैसे किया जा सकता है? मध्यस्थता का मकसद पक्षकारों के बीच समझौता कराना है। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए खुले हैं।

जब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि मध्यस्थता के जरिए हुए फैसले को लाखों लोगों के लिए बाध्यकारी कैसे बनाया जाए? तो मुस्लिम पक्ष ने कहा कि मध्यस्थता का सुझाव कोर्ट की तरफ से आया है और बातचीत कैसे होगी ये कोर्ट को तय करना है?

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि जब कोई पार्टी किसी समुदाय की प्रतिनिधि होती है, चाहे वह प्रतिनिधि के मुकदमे में कोर्ट की कार्यवाही हो या मध्यस्थता हो। उसे बाध्यकारी होना चाहिए।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट का फैसला एक बाध्यकारी चरित्र है. मध्यस्थता में हम कैसे लोगों को बाध्यकारी बना सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हिन्दू पक्ष ने कहा कि मान लीजिये की सभी पक्षों में समझौता हो गया तो भी समाज इसे कैसे स्वीकार करेगा? इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि अगर समझौता कोर्ट को दिया जाता है और कोर्ट उस पर सहमति देता है और आदेश पास करता है. तब वो सभी को मानना ही होगा।

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यस्थता के कुछ पैरामीटर हैं और उससे आगे नहीं जा सकता। उन्होंने 1994 में संविधान पीठ के फैसले का जिक्र किया, जिसमें पासिंग रिमार्क था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अंदरूनी हिस्सा नहीं है। रामलला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन ने बहस की। रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट ने इस मामले में आपसी बातचीत से विवाद को हल करने की कोशिश की थी लेकिन नहीं हो पाया था।

रिपोर्ट के मुताबिक रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया अयोध्या का मतलब राम जन्मभूमि। यह मामला बातचीत से हल नहीं हो सकता। साथ ही कहा कि मस्जिद किसी दूसरे स्थान पर बन सकती है। इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप अपना यह पक्ष मध्यस्थता के दौरान रख सकते हैं। इस पर रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि फिर मध्यस्थता का मतलब क्या है?

चुनाव का राष्ट्रवाद

कार्ल मार्क्स ने लिखा था – धर्म जनता की अफीम होता है। भाजपा ने धर्म की इस अफीम को अपनी राजनीति के लिए खूब इस्तेमाल किया है। तो क्या भाजपा अब देश को ”उग्र राष्ट्रवाद” की अफीम खिलाकर चुनाव की अपनी वैतरणी पार करने की तैयारी में है? ”मोदी है तो मुमकिन है” की टैगलाइन के साथ भाजपा केंद्रीकृत नेतृत्व की अवधारणा के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है क्योंकि शायद उसे लगता है कि विकास की जिस टैगलाइन के साथ वह २०१४ में बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, वह विकास उसे इस बार चुनाव की उताल लहरों के पार नहीं ले जा पायेगा।

भले अति राष्ट्रवाद दुधारी तलवार की तरह है जो भाजपा और देश दोनों को चोटिल कर सकता है, लेकिन भाजपा इसकी तैयारी कर चुकी है। धर्म की राजनीति करके भाजपा सत्ता की सीढ़ियां तो खूब चढ़ी, लेकिन पहला बहुमत उसे २०१४ में शुद्ध रूप से विकास (उस चुनाव के समय इसे गुजरात मॉडल का नाम दिया गया था) के लिए वोट मांगने पर मिला। विकास माने रोजगार, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था, सड़क-बिजली-पानी, किसानों का बेहतर जीवन और युवा उम्मीदों को ऐसी उड़ान का वादा कि वे खुद को नई और आलोकिक दुनिया में खड़ा देख सकें।

यह बड़ा प्रश्नचिन्ह है कि पीएम मोदी और उनके नेतृत्व वाली एनडीए सरकार धरातल पर देश की जनता को इस आलोकिक संसार की दहलीज तक भी पहुंचा पाई या नहीं। लाल किले से पीएम ने जिस ”नया भारत” की परिकल्पना भारतीय जनमानस के सामने रखी, क्या सचमुच वैसा ”नया भारत” हमारे सामने है?

इस नए भारत में विकास को क्यों ”उग्र राष्ट्रवाद” ने निगल लिया, इसका जवाब खोजना होगा। शायद भाजपा या उसके नेता इसका जवाब न भी दें। क्योंकि देते हैं तो उनसे यह सवाल ज़रूर पूछा जाएगा कि क्या देश ने विकास की वह अंतिम सीढ़ी चढ़ ली जो इसके बाद विकास के नाम पर करने के लिए कुछ और नहीं रह गया? यह भी कि क्या विकास की भी कोइ अंतिम सीढी होती है? यह भी कि क्या इस देश में अब कोइ भूखा नहीं रह गया? हर गाँव तक बिजली-पानी-सड़क पहुँच गयी? कोइ किसान अब आत्महत्या नहीं कर रहा? हर बच्चे को शिक्षा मिल रही है? राह चलती मां-बहन-बेटी-बहु की आबरू सुरक्षित है? और यह भी कि क्या यह मुद्दे राष्ट्रवाद नहीं हैं ?

सुना है भाजपा हाल की आतंकियों पर की कार्रवाई और भारत-पाक तनाव को ”चुनाव थीम” बनाना चाहती है। चर्चा है कि जाने-माने गीतकार-लेखक प्रसून जोशी उसके लिए ”चुनाव के गीत” लिखेंगे जिनमें ”मोदी है तो मुमकिन है” को आधार बनाकर आतंकवाद के खिलाफ पीएम मोदी को एक ”रॉबिनहुड” की तरह पेश किया जाएगा।

शायद इन गीतों में ”विकास और अच्छे दिन” की गाथा भी हो। लेकिन बहादुर रॉबिनहुड का एक और भी चेहरा इतिहास में माना जाता है जिसमें वह अमीरों से लूट करके गरीबों को बांटता था। आजके जमाने में इसे हम समाज की समानता के आर्थिक-सामाजिक रूप में देखें तो सवाल है कि क्या भाजपा पिछले पांच साल में ऐसी समानता समाज में बनाने में सफल हो पाई है?

भाजपा चुनाव से पहले ”युद्ध का उन्माद” पैदा करके २०१४ के जीत से पहले किये वादों और उन्हें पूरा न कर पाने के लांछन और चुनाव में उसके नुक्सान से भी बचना  चाहती है। एक तरह से भाजपा इन मुद्दों को चुनाव में परदे के पीछे धकेल देना चाहती है। भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि ”उग्र राष्ट्रवाद” विशाल मुद्दे की तरह सामने कर देना ”विकास के मुद्दे” के मुकाबले जीत की ज्यादा ”गारंटी” देता है।

पुलवामा से पहले भाजपा चुनाव के कड़े मुकाबले में झूलती दिख रही थी। यहाँ तक कि एक अमेरिकन थिंक टैंक तक ने उसकी सीटें १८० के आसपास आने का अनुमान लगाया था। भाजपा ने १० प्रतिशत अगड़ा आरक्षण, बजट के जरिये इनकम टैक्स की स्लैब ५ लाख करने जैसे मध्यवर्ग को जीतने और किसानों के खाते में पैसे डालने वाले उपाए भी किये ताकि चुनाव में इसका लाभ मिल सके। लेकिन माना जाता है इसके बावजूद हवा भाजपा के पक्ष में आती नहीं दिख रही थी।

इसके बाद कुछ ऐसी घटनाएं हुईं कि देश में अचानक माहौल बदला। पहले पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों की शहादत हुई। इसके बाद भारतीय वायुसेना की पाक क्षेत्र में जाकर ”एयर स्ट्राइक” हुई और फिर पाकिस्तान के जहाज हमारे हिस्से में घुसे। सीमा पर उबाल आया।

बस इसी दौरान पीएम मोदी की भाषा बदली और भाजपा का एजेंडा भी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सैनिकों की शहादत को चुनाव में भुनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। भाजपा ने इस आरोप को जवानों की शहादत के खिलाफ बता दिया। अब भाजपा खुलकर मैदान में है।

जितना विपक्ष भाजपा पर आरोप लगा रहा है भाजपा नेता इसे सेना और शहादत के खिलाफ बता रहे हैं। भाजपा को लगता है कि उसे चुनाव जिता सकने वाला मुद्दा मिल गया है। विपक्ष खासकर कांग्रेस पर ”देश के साथ गद्दारी करने” और ”पाकिस्तान से मिले होने” का आरोप लगाकर पीएम अपने कमोवेश हर भाषण में यह भी दावा कर रहे हैं कि ”देश को बचा सकने वाला ऐसा पराक्रम” सिर्फ उनके होने से संभव हुआ है। उनकी टैग लाइन है – ”मोदी है तो मुमकिन है”।

भाजपा और खुद मोदी अपने भाषणों में लोगों के बीच इस भय को पैदा कर रहे हैं कि कांग्रेस आई तो वह देश को नहीं बचा पाएगी इसके लिए उनका (मोदी) दुबारा सत्ता में आना बहुत ज़रूरी है। अब कांग्रेस नेता लाख कहें कि बहुत विपरीत परिस्थितियों और अमेरिका के बहुत कड़े विरोध के बावजूद इंदिरा गांधी ने १९७१ में पाकिस्तान से पूरा युद्ध करके और बांग्लादेश बनवाकर देश की सबसे बड़ी जंग जीती थी, भाजपा को लगता है कि आजकी पीढ़ी ४८ साल पहले के उस युद्ध के मुकाबले वर्तमान की ”सर्जिकल स्ट्राइक” को स्मरण रखकर उसे वोट देगी।

सीमा पर तनाव और उसके बाद की घटनाओं को भाजपा ”उग्र राष्ट्रवाद” के रूप में उभरने देना चाहती है। पीएम मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और सभी पार्टी नेता इस ”उग्र राष्ट्रवाद” को हवा दे रहे हैं। अगला चुनाव भाजपा के लिए युद्ध जैसा है। राजनीति अचानक युद्ध के रूप में बदल गयी है। भाजपा किसी भी सूरत में यह चुनाव जीतना चाहती है।

चुनाव हारने की स्थिति में भाजपा के सामने गंभीर खतरे खड़े होने का भय है। इनमें सबसे बड़ा है ब्रांड मोदी का करिश्मा ख़त्म होने का। भाजपा ने इन पांच सालों में सबकुछ मोदी के आसपास समेट दिया है। उनके भाजपा को चुनाव न जिता सकने के मायने होंगे एक और मोदी की तलाश में जुट जाना। दूसरे भाजपा के बहुत नेता मानते हैं कि गैर भाजपा सरकार (या कांग्रेस सरकार) आई तो पिछले पांच साल के कुछ लेखे-जोखे, जिनमें राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद भी शामिल है, पर वह भाजपा की मिट्टी पलीत करवा सकती है।

 पीएम अपनी जनसभाओं में ”मैं देश नहीं मिटने दूंगा” जैसी कवितामयी भाषा गढ़ने लगे हैं। उनकी यह ”रार” भले चुनाव को लक्ष्य करके हो, पार्टी के नेताओं और उनके समर्थकों को खूब भाने लगी है। वे चुनाव तक इस गति को बनाये रख सकेंगे या नहीं, अभी कहना मुश्किल है। साल १९९९ में कारगिल की विजय गाथा भी भाजपा को चुनाव में लाभ नहीं दे पाई थी। चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी को 182 सीटें ही मिलीं। यह 1998 लोकसभा चुनावों के सीट संख्या के बराबर थी। हाँ, उसके वोट प्रतिशत में 1.84 फीसदी की वृद्धि जरूर हुई।

हाल की तमाम घटनाओं के बीच एक और पक्ष भी है। जनता का एक बड़ा वर्ग आतंकवाद के खिलाफ मजबूत ऐक्शन तो चाहता है लेकिन वह युद्ध का समर्थन भी नहीं करता। देश आर्थिक रूप से जहाँ हैं, बेरोजगारी की जो हालत है उसमें एक युद्ध के मायने होंगे देश को ५० साल पीछे धकेल देना। हज़ारों-हज़ार लोगों को मौत के मुंह में झोंक देना और बेरोजगारी की एक बहुत गहरी खाई खोद देना।

बहुत लोग यह भी सवाल करते हैं कि पुलवामा जैसी त्रासद घटना सुरक्षा तंत्र की नाकामी का भी सबूत है। भाजपा इस नाकामी को स्वीकार नहीं करती। वह घटनाओं को अपने पक्ष में भुनाने के लिए राष्ट्रवाद को ढाल बना लेती है ताकि सुरक्षा की नाकामियां और कश्मीर की बिगड़ी हालत लोगों की नजर से ओझल रहे। आखिर सूचना होने के बावजूद ४० जवानों की बेशकीमती जिंदगियां गँवा देना सरकार की नाकामी तो है ही।

कारगिल भी सरकार और सुरक्षा की ऐसी ही चूक का नतीजा था। लोगों ने इसे उसी रूप में समझा भी था इसलिए इसके बाद हुए चुनाव में भाजपा १८४ की १८४ सीटों पर ही अटकी रही थी। करगिल युद्ध के बाद के चुनाव में उत्तर प्रदेश में तो भाजपा का प्रतिशत 9 फीसदी घट गया गया था। साल 1998 के चुनाव में भाजपा को 57 लोकसभा सीटें मिली थीं लेकिन कारगिल के बाद के चुनाव में यह घटकर 29 रह गईं।

बहुत लोग मानते हैं कि पुलवामा भी सरकार की सुरक्षा की नाकामी का नतीजा था। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में बालाकोट की एयर स्ट्राइक के टारगेट को लेकर जैसे प्रश्नचिन्ह लगाए गए हैं, वह भी भाजपा को बिचलित करते रहे हैं। इसके अलावा इस तनाव से सीमा पर लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। उनकी खेती चौपट हो गयी है और स्कूल-अस्पताल बंद हो गए हैं। उन्हें रिफ्यूजी कैम्पों में रहना पड़ रहा है।

सीमा पर रहने वाले यह लोग कभी भी सीमा पर तनाव के हक़ में नहीं रहते। उन्होंने पिछले सालों में बहुत कुछ खोया है। गरजती गोलियां इन लोगों को सिर्फ जख्म देती हैं। अखनूर सेक्टर के पलांवाला के अशोक कहते हैं – ”जो नेता युद्ध-युद्ध करते रहते हैं उन्हें अपने बच्चों को सेना में भेजना चाहिए तब पता चलेगा युद्ध क्या होता है। या फिर कुछ महीने के लिए हमारे पास सीमा के गाँवों में छोड़ देना चाहिए ताकि वे जान सकें गोली किस चिड़िया का नाम है।”

अब चुनाव को ज्यादा वक्त नहीं है। देखना है भाजपा की उग्र राष्ट्रवाद को भुनाने की इस कोशिश का उसे क्या सच में फायदा मिल पाता है। क्या भाजपा और इसके चुनाव रणनीतिकारों ने देश की जनता की नब्ज को सही पकड़ा है या वो कोइ बड़ी भूल कर बैठे हैं। इसका पता नतीजे आने पर ही चलेगा। देश की जनता पहले भी चुनाव गणितज्ञों को अपने फैसलों से चौंका चुकी है। क्या इस बार भी किसी के चौंकने की बारी है ?