एक बार फिर Diego Garcia Island बना महाशक्तियों की टक्कर का केंद्र, अमेरिका-ब्रिटेन आमने-सामने

Indian Ocean में मौजूद डिएगो गार्सिया आइलैंड एक बार फिर दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच तनाव की वजह बन गया है। अमेरिका और ब्रिटेन के बीच इस द्वीप को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं, वहीं चीन की बढ़ती मौजूदगी ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है।

Diego Garcia Island | Image: Getty Images
Diego Garcia Island | Image: Getty Images

नई दिल्ली: हिंद महासागर में स्थित Diego Garcia Island इन दिनों अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन गया है। यह छोटा सा द्वीप अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और भारत जैसे देशों के लिए बेहद अहम माना जाता है। हाल ही में अमेरिकी सीनेट में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस हुई, जिसके बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

दरअसल, ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरिशस को सौंपने की तैयारी में है। डिएगो गार्सिया इसी चागोस समूह का हिस्सा है और यहां अमेरिका-ब्रिटेन का बड़ा सैन्य बेस मौजूद है। अमेरिकी नेताओं को डर है कि अगर मॉरिशस पर चीन का प्रभाव बढ़ा, तो भविष्य में इस इलाके में बीजिंग की पकड़ मजबूत हो सकती है।

अमेरिका के लिए डिएगो गार्सिया बेहद खास है क्योंकि यह हिंद महासागर के बीचोंबीच स्थित है। यही वजह है कि इसे मध्य पूर्व, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए सैन्य और लॉजिस्टिक हब माना जाता है। खाड़ी युद्ध, अफगानिस्तान और इराक युद्ध के दौरान भी इस बेस का इस्तेमाल किया जा चुका है। यहां लंबी रनवे, गहरे पानी का बंदरगाह और आधुनिक सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं।

अमेरिका का मानना है कि चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। चीन पहले ही पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट और अफ्रीका के जिबूती में अपनी मौजूदगी मजबूत कर चुका है। इसी रणनीति को “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” कहा जाता है।

भारत के लिए भी यह मामला काफी अहम है। भारत का ज्यादातर समुद्री व्यापार और ऊर्जा आयात हिंद महासागर के रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर चीन इस क्षेत्र में और मजबूत होता है, तो भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि भारत ने मॉरिशस के दावे का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही वह हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक ताकत भी बढ़ा रहा है। भारत सेशेल्स और अंडमान-निकोबार जैसे इलाकों में अपनी निगरानी और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिएगो गार्सिया सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में चल रही बड़ी रणनीतिक लड़ाई का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिका, चीन और भारत की रणनीति पूरी दुनिया की नजर में रहेगी।