नई दिल्ली | तहलका न्यूज | स्नेहलता
8 अक्टूबर… भारतीय वायुसेना के इतिहास का वो दिन, जब देश अपने उन जांबाज वायु योद्धाओं को सलाम करता है, जो आसमान से देश की सीमाओं की निगरानी करते हैं और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के खिलाफ मोर्चा संभालते हैं।
आज भारतीय वायुसेना अपना 94वां स्थापना दिवस मना रही है। भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। लेकिन इसकी पहली परिचालन उड़ान 1 अप्रैल 1933 को हुई थी। उस समय भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ 4 वेस्टलैंड वापिटी विमान, 6 अधिकारी और 19 वायु सैनिक थे।
यही छोटा-सा दल आगे चलकर दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं में शामिल होने वाली भारतीय वायुसेना की नींव बना।
क्यों मनाया जाता है एयरफोर्स डे?
एयरफोर्स डे सिर्फ हवाई प्रदर्शन या परेड का दिन नहीं है। यह भारतीय वायुसेना की स्थापना, उसके गौरवशाली इतिहास और देश की सुरक्षा में उसके योगदान को याद करने का दिन है।
युद्ध के मैदान से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और राहत-बचाव अभियानों तक भारतीय वायुसेना ने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
चार विमानों से शुरू हुआ सफर
1933 में चार विमानों से शुरू हुई भारतीय वायुसेना ने समय के साथ अपनी ताकत और तकनीक दोनों को लगातार बढ़ाया।
आज इसके लड़ाकू बेड़े में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे प्रमुख विमान शामिल हैं।
यानी जिस वायुसेना की शुरुआत सिर्फ चार विमानों से हुई थी, आज उसके पास अलग-अलग भूमिकाओं के लिए लड़ाकू विमान, परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां हैं।
तेजस… आत्मनिर्भर भारत की उड़ान
भारतीय वायुसेना के लिए तेजस सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता की पहचान भी है।
हल्के लड़ाकू विमान तेजस को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इसकी पहली वायुसेना स्क्वाड्रन 45 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग डैगर्स’ थी।
राफेल… हवा में ताकत का नया अध्याय
राफेल को भारतीय वायुसेना में 2020 में शामिल किया गया। इसके आने से भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक मार करने और आधुनिक हवाई युद्ध की क्षमता को मजबूती मिली।
दूसरी तरफ सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना के भारी लड़ाकू विमानों में अहम स्थान रखता है। 2024 में 12 अतिरिक्त सुखोई-30 एमकेआई खरीदने का समझौता भी हुआ था।
सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं
भारतीय वायुसेना की ताकत सिर्फ लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है।
सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130जे सुपर हरक्यूलिस जैसे परिवहन विमान सैनिकों और सैन्य साजो-सामान को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं अपाचे, चिनूक और एलसीएच जैसे हेलीकॉप्टर भी वायुसेना की सामरिक क्षमता को बढ़ाते हैं।
आधुनिक युद्ध का बदलता चेहरा
आज युद्ध सिर्फ आसमान में लड़ाकू विमानों की भिड़ंत तक सीमित नहीं है। ड्रोन, रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक प्रहार करने वाली तकनीक आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
इसीलिए भारतीय वायुसेना भी लगातार नई तकनीक और आधुनिक युद्ध प्रणाली को अपने बेड़े में शामिल कर रही है।
इस साल एयरफोर्स डे की थीम है—“भारतीय वायुसेना — अचूक, अभेद्य और सटीक।”
चार विमानों से शुरू हुआ सफर आज तेजस, राफेल और सुखोई जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों तक पहुंच चुका है।
94 साल का यह सफर सिर्फ विमानों की संख्या बढ़ने की कहानी नहीं है… यह बदलती तकनीक, बढ़ती ताकत और देश की हवाई सीमाओं की रक्षा के संकल्प की कहानी है।
एयरफोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के हर वायु योद्धा को तहलका न्यूज का सलाम।




