‘I Love Mahadev’ बनाम ‘I Love Mohammad’, नितेश राणे के बयान पर छिड़ी बहस
मुंबई, 23 अगस्त | स्नेहलता
अंधेरी में कांवड़ यात्रा के दौरान महाराष्ट्र मंत्री का विवादास्पद बयान, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज
मुंबई में कांवड़ यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे के एक बयान ने सियासी बहस को फिर हवा दे दी है। राणे ने अंधेरी में आयोजित कांवड़ यात्रा के दौरान कहा कि मुंबई में “I Love Mohammad नहीं, I Love Mahadev चलेगा”। राणे ने मुंबई और महाराष्ट्र को भगवान महादेव की भूमि बताते हुए हिंदू धार्मिक आयोजनों और त्योहारों को बड़े स्तर पर मनाने की बात कही। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश 2025 में ‘I Love Mohammad’ पोस्टर विवाद के बाद शुरू हुआ था ‘I Love Mahadev’ अभियान
दरअसल, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान “I Love Mohammad” लिखे पोस्टरों को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद कई जगहों पर इसके जवाब में “I Love Mahadev” लिखे पोस्टर और अभियान दिखाई दिए थे। देखते ही देखते यह मामला धार्मिक नारों और पोस्टरों की राजनीति से जुड़ गया। अब महाराष्ट्र में नितेश राणे के ताजा बयान ने इसी पुराने विवाद की यादें फिर ताजा कर दी हैं। उनके बयान को जहां समर्थक हिंदू धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
मुंबई जैसे महानगर में धार्मिक नारों पर राजनीतिक बयानबाजी संवेदनशील, आने वाले दिनों में प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना
मुंबई जैसे महानगर में इस तरह के धार्मिक नारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हमेशा संवेदनशील रही है। ऐसे में राणे का बयान आने के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है। फिलहाल, “I Love Mahadev” बनाम “I Love Mohammad” की बहस एक बार फिर सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। सवाल यह है कि धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति और राजनीतिक बयानबाजी के बीच की सीमा आखिर कहां तय होगी?



