मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: द्वारका टनल और कानपुर-कबरई हाईवे को हरी झंडी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लिए दो बड़ी सड़क अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल ₹14,115 करोड़ से अधिक खर्च किए जाएंगे, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और बुंदेलखंड क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-248BB) को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने के लिए 8.1 किलोमीटर लंबी छह लेन की सड़क सुरंग परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर ₹6,969.67 करोड़ की लागत आएगी। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित की जाएगी।

सरकार के अनुसार, इस परियोजना में करीब 3.14 किलोमीटर लंबी भूमिगत ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जाएगी, जो पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील साउदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से गुजरेगी। टनल का लगभग 1.98 किलोमीटर हिस्सा रिज क्षेत्र के नीचे होगा, जिसके लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे द्वारका, गुरुग्राम, IGI एयरपोर्ट और पश्चिमी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली तक का सफर आसान और तेज हो जाएगा। महिपालपुर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम में भी कमी आने की उम्मीद है।

इसके अलावा, कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में कानपुर और कबरई (महोबा) के बीच NH-34 के 117.7 किलोमीटर लंबे 4/6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर ₹7,145.14 करोड़ खर्च किए जाएंगे और इसे NHAI द्वारा BOT (टोल) मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

यह हाईवे भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा और बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक विकास, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को गति देगा। परियोजना के पूरा होने के बाद कानपुर और कबरई के बीच यात्रा का समय करीब साढ़े तीन घंटे से घटकर डेढ़ घंटे रह जाएगा। हाईवे कानपुर, हमीरपुर और महोबा जिलों से होकर गुजरेगा तथा इससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच संपर्क भी बेहतर होगा।

सरकार का कहना है कि इन दोनों परियोजनाओं से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अकेले कानपुर-कबरई परियोजना से निर्माण के दौरान लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है।