अरविंद चतुर्वेदी
मुंबई की दलाल स्ट्रीट की 29 मंजिला इमारत के बेसमेंट में दिन के 1:30 बजे जोरदार धमाका हुआ। ऊपर से नीचे तक चारों तरफ अफरातफरी मच गई। फिर 2:55 मिनट पर एयर इंडिया बिल्डिंग के बेसमेंट में भी बम फटा। 3:05 मिनट पर जवेरी बाजार, 3:10 मिनट पर सी रॉक होटल और 3.13 मिनट पर प्लाजा सिनेमा पर एक बाद एक धमाके हुए। इन बारह धमाकों से मुंबई दहल गई। लोग लाशों के बीच अपनों को ढूंढ रहे थे।
इन सबका गुनाहगार था, दाऊद इब्राहिम कासकर। भारत के सबसे वांछित अपराधियों में से एक। 1993 के मुंबई बम धमाकों के मुख्य साजिशकर्ताओं के तौर पर इसकी पहचान हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। यह अनीस इब्राहिम शेख, छोटा शकील, जावेद चिकना और टाइगर मेमन जैसे अपने साथियों के साथ मिलकर डी-कंपनी नामक एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क चलाता है। एनआईए के एक बयान के अनुसार, दाऊद लंबे समय से आतंकवाद-संबंधी आपराधिक गतिविधियों जैसे हथियार तस्करी, नशीले पदार्थों से संबंधित आतंकवाद, अंडरवर्ल्ड आपराधिक गिरोह, मनी लॉन्ड्रिंग, विदेशी मुद्रा का प्रचलन, आतंक निधि जुटाने के लिए प्रमुख संपत्तियों का अनधिकृत कब्जा/अधिग्रहण और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और अल कायदा (एक्यू) सहित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के साथ सक्रिय सहयोग में शामिल रहा है।
1955 में जन्मे इब्राहिम ने मुंबई के अंधकारमय जगत में अपना सफर शुरू किया। अपने भाई शब्बीर के साथ मिलकर अंडरवर्ल्ड में अपनी जगह बनाई। उनका गिरोह, जिसमें कभी 25000 लोग काम करते थे। अपनी बेरहम कार्यशैली और तस्करी, जबरन वसूली और लक्षित हत्याओं में संलिप्तता के कारण दाऊद ने बहुत तेजी से अपराध की दुनिया में अपनी जगह बना ली। अपने क्रूर कारनामे के लिए कुख्यात हो गया। 1980 के दशक के अंत तक, इब्राहिम मुंबई के अंडरवर्ल्ड के निर्विवाद सरगना के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका था और अपार शक्ति और प्रभाव रखता था।
1993 में, दुनिया ने इब्राहिम के आतंक के भयानक परिणामों को देखा। मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाकों ने तबाही मचा दी, जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गए, हजारों लोग घायल हुए। डी कंपनी की रची साजिश का कारण अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस का प्रतिशोध में रची गई साजिश बताया गया। आतंकवाद की इस घटना ने इब्राहिम को वैश्विक खतरे के रूप में स्थापित कर दिया, जिसके चलते भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसे आतंकवादी घोषित कर उसके सिर पर 25 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर दिया। तब से इब्राहिम सार्वजनिक दृष्टि से गायब है। खबरों के मुताबिक वह पाकिस्तान के कराची में रह रहा है, हालांकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इससे इनकार किया है। भारतीय अधिकारियों ने राजनयिक चैनलों, खुफिया नेटवर्क और यहां तक कि इंटरपोल रेड नोटिस का उपयोग करते हुए उसकी गिरफ्तारी के लिए अथक प्रयास किए हैं। फिर भी, दाऊद इब्राहिम फरार है। जिसे पाकिस्तान में सरकारी संरक्षण प्राप्त है। दाऊद डायबिटीज के गंभीर रोग से पीड़ित है। हाई ब्लडप्रेशर, दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। हमारे कंसल्टिंग एडिटर की रिपोर्ट यह भी बताती है कि दाऊद पैरों में हुए गैंग्रीन से बुरी तरह से पीड़ित है। वह वफादार सहयोगियों से घिरा तो है, पर उसकी जिंदगी बिस्तर पर गुजर रही है। उसकी आंखें लगातार छत को देख रही हैं। दाऊद
इब्राहिम स्वतंत्रता का प्रश्न भारत में गहराई से गूंज रहा है। वह शक्तिशाली अपराधियों को प्राप्त दंडमुक्ति, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने की चुनौतियों का प्रतीक है। पाकिस्तान में उसकी उपस्थिति द्विपक्षीय संबंधों पर संदेह पैदा करती है। सबूतों के बावजूद पाकिस्तान उसे पनाह देने से इनकार करता है।
भ्रष्टाचार, हिंसा और भय पर आधारित उसका गुप्त साम्राज्य क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। ऐसे नेटवर्क को नष्ट करने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, मजबूत खुफिया जानकारी साझा करना और प्रभावी वित्तीय कार्रवाई आवश्यक है।
तहलका में प्रकाशित यह स्टोरी दाऊद इब्राहिम कासकर के काले कारनामों को उजागर करती है, जिसके बारे में दुनिया ने केवल सुन रखा है। तहलका दुनिया के सामने ऐसा टेप लेकर आ रहा है जिसे लोगों ने नहीं देखा है। यह टेप बताएगा कि अगर इन ताकतवर लोगों ने दाऊद को बढ़ावा और संरक्षण नहीं दिया होता तो दाऊद सलाखों के पीछे होता। हमारे डिप्टी एडिटर रियाज हाशमी, कंसल्टिंग एडिटर सुनील कालरा और राघवेंद्र द्विवेदी की टीम ने दाऊद को लेकर पड़ताल की है, कि आज दाऊद इब्राहिम कासकर किस हाल में है।




