अब ट्रेनों में आसानी से मिलेगा कन्फर्म टिकट! 4161 गांवों को बदल देंगी रेलवे की ये 3 बड़ी परियोजनाएं…

देश में रेलवे की बढ़ती भीड़, लंबी वेटिंग लिस्ट और ट्रेनों की कम क्षमता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। अब केंद्र सरकार ने इसी समस्या को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

AI Image
AI Image

अंशिका गौड़/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने रेलवे की तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब ₹23,437 करोड़ खर्च होंगे और इनके जरिए भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर नई लाइनें जुड़ेंगी। सरकार का कहना है कि इससे रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, ज्यादा ट्रेनें चल सकेंगी और लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। किसको कितना फायदा होगा और क्या हैं ये परियोजनाएं? आइए विस्तार से जानते हैं…

किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी?

सरकार ने जिन तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है उनमें नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंतकल-वाड़ी तीसरी और चौथी लाइन और बुढ़वल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं। ये परियोजनाएं मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों से होकर गुजरेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा कर लिया जाए।

इन परियोजनाओं के जरिए रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ ट्रेनों की आवाजाही को भी तेज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि नई लाइनें जुड़ने से व्यस्त रूट्स पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।

1. नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन

Image Source: Rail Ministry

# फायदे…(Source: Rail Ministry)

  • – रेलवे ट्रैक की क्षमता बढ़ेगी, जिससे ज्यादा ट्रेनें चलाना आसान होगा।
  • – पश्चिमी तट के बड़े बंदरगाहों से माल ढुलाई तेज और बेहतर होगी।
  • – दादरी, आगरा, कानपुर जैसे औद्योगिक इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा।
  • – महाकालेश्वर, रणथंभौर, मथुरा-वृंदावन जैसे पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
  • – हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
  • – कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी, जो लगभग 5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर मानी जा रही है।
  • – लॉजिस्टिक लागत घटेगी और कारोबार को फायदा मिलेगा।
  • – परियोजनाओं के जरिए लाखों मानव-दिवस रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

2. गुंतकल-वाड़ी तीसरी और चौथी लाइन

Image Source: Rail Ministry

# फायदे…(Source: Rail Ministry)

  • – मौजूदा रेल लाइन अभी लगभग 90% क्षमता पर चल रही है और आगे दबाव बढ़ने की संभावना है।
  • – रायचूर, येरमरस और बल्लारी जैसे आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी।
  • – कोयला खदानों से कोयले की ढुलाई आसान होगी, साथ ही बड़े बंदरगाहों से उर्वरक और अन्य सामान तेजी से पहुंच सकेंगे।
  • – मंत्रालयम, श्री नेट्टिकांती अंजनेय स्वामी मंदिर और रायचूर किला जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी।
  • – हर साल करीब 17.4 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा बढ़ेगी।
  • – हर साल लगभग 36 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
  • – लॉजिस्टिक लागत में हर साल करीब 801 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।
  • – परियोजना से करीब 156 लाख मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

3. बुढ़वल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन

Image Source: Rail Ministry

# फायदे…(Source: Rail Ministry)

  • – मौजूदा रेल लाइन अभी 78% क्षमता पर चल रही है और आगे यह दबाव 127% तक पहुंचने का अनुमान है।
  • – इस परियोजना से हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई थर्मल पावर प्लांट्स तक कोयले की सप्लाई आसान होगी।
  • – श्यामनाथ मंदिर और नैमिषारण्य (नीमसार) जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी।
  • – हर साल करीब 15.5 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी, जिसमें खाद्यान्न, कोयला, रसायन और सीमेंट जैसी चीजें शामिल हैं।
  • – हर साल लगभग 14.4 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है, जो करीब 60 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है।
  • – लॉजिस्टिक लागत में हर साल करीब 321 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
  • – परियोजना से करीब 70 लाख मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

4161 गांवों और 83 लाख लोगों को क्या फायदा होगा?

इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा असर उन गांवों और छोटे शहरों पर पड़ेगा जहां अब तक रेलवे कनेक्टिविटी सीमित रही है। सरकार के मुताबिक करीब 4,161 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लगभग 83 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे लोगों के लिए यात्रा आसान होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे शहरों का संपर्क बड़े आर्थिक केंद्रों से मजबूत होगा।

रेलवे लाइन बढ़ने से स्थानीय व्यापार और उद्योग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। जिन इलाकों में अभी ट्रेनें कम चलती हैं या देरी ज्यादा होती है, वहां नई लाइनों के बनने से ट्रेनों की आवाजाही तेज हो सकेगी।

‘रेलवे में वैसी ही क्रांति होगी जैसी अटल जी ने सड़कों में लाई थी’ — अश्विनी वैष्णव

Photo Credit: ANI

रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने इन परियोजनाओं को भारतीय रेलवे के लिए बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee ने गोल्डन क्वाड्रिलेटरल हाईवे नेटवर्क बनाकर देश में सड़क क्रांति लाई थी, उसी तरह अब प्रधानमंत्री Narendra Modi रेलवे सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, कोलकाता-मुंबई और दिल्ली-गुवाहाटी जैसे हाई डेंसिटी रेल रूट्स पर लगातार फोर लाइनिंग का काम किया जा रहा है ताकि रेलवे की क्षमता कई गुना बढ़ाई जा सके।

वैष्णव ने आगे कहा कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बढ़ने वाली भारी भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को कम करने के लिए रेलवे नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक नई लाइनें जुड़ने से हजारों अतिरिक्त ट्रेनें चलाना आसान होगा, माल ढुलाई तेज होगी और आने वाले 40-50 वर्षों की जरूरतों को पूरा करने लायक रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे सड़क परिवहन के मुकाबले ज्यादा पर्यावरण अनुकूल है और इन परियोजनाओं से Carbon Emissions में बड़ी कमी आएगी।

यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या पर कैसे असर पड़ेगा?

हर साल गर्मियों की छुट्टियों, छठ पूजा, दिवाली, होली और नए साल के दौरान रेलवे पर भारी दबाव पड़ता है। बड़ी संख्या में यात्रियों को वेटिंग टिकट लेकर सफर करना पड़ता है। रेल मंत्रालय का कहना है कि रेलवे की क्षमता बढ़ाए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

इसी वजह से सरकार हाई डेंसिटी रूट्स पर मल्टी-ट्रैकिंग कर रही है। यानी जहां अभी दो लाइनें हैं, वहां तीसरी और चौथी लाइन जोड़ी जाएगी। इससे एक साथ ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति कम होगी। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-गुवाहाटी जैसे बड़े रूट्स पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

पर्यटन और धार्मिक स्थलों को मिलेगा बड़ा फायदा

इन परियोजनाओं से कई बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने वाली है। महाकालेश्वर, रणथंभौर नेशनल पार्क, कुनो नेशनल पार्क, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम और नैमिषारण्य जैसे स्थानों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

सरकार का मानना है कि बेहतर रेलवे नेटवर्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कारोबार को फायदा पहुंचेगा। खासकर धार्मिक पर्यटन वाले इलाकों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

माल ढुलाई, रोजगार और पर्यावरण को भी फायदा

ये परियोजनाएं सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं बल्कि माल ढुलाई के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही हैं। रेलवे के मुताबिक कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा-इस्पात, कंटेनर और उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की ढुलाई इन रूट्स से होती है। नई लाइनें बनने के बाद हर साल करीब 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।

सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से तेल आयात में करीब 37 करोड़ लीटर की बचत होगी और लगभग 185 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। इसे करीब 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया गया है। साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान बड़े स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।