नई दिल्ली: चित्रकूट प्रशासन का मानना है कि फ्लड प्लेन जोन तय होने से यह साफ हो जाएगा कि नदी के आसपास कौन-कौन से इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इसके बाद उन क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर रोक लगाने और लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की योजना तैयार करना आसान होगा। शासन स्तर से संबंधित विभागों को इस काम के लिए निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
मां मंदाकिनी नदी चित्रकूट की आस्था और संस्कृति से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का लंबा समय इसी क्षेत्र में बिताया था। यही वजह है कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। सामान्य दिनों में नदी का जलस्तर करीब 123.500 मीटर रहता है, जबकि बाढ़ के समय यह बढ़कर 131.500 मीटर तक पहुंच जाता है। इससे घाटों के आसपास कटान और जलभराव की स्थिति बन जाती है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले 100 वर्षों में आई बाढ़ के आंकड़ों का अध्ययन शुरू कर दिया है। अधिकारी पुराने रिकॉर्ड, नदी के बहाव और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में कई विभाग मिलकर काम करेंगे और रिपोर्ट तैयार होने के बाद मंदाकिनी नदी का फ्लड प्लेन जोन आधिकारिक रूप से घोषित किया जाएगा।
चित्रकूट के डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि यह पूरा काम एनजीटी के निर्देशों के तहत किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पहल से भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। प्रशासन अब ऐसी रणनीति तैयार करने में जुटा है जिससे हर साल आने वाली बाढ़ का असर कम किया जा सके।




