सुभाष चोपड़ा बने दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष, कैपेन कमेटी की कमान कीर्ति आज़ाद को

दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस पार्टी ने एक साथ एक तीर से कई निशाने साधते हुये आखिरकार लम्बी मशक्त के बाद कांग्रेस आला कमान ने दिल्ली में अपने नाराज़ मतदाताओं को एक साथ लाने का प्रयास किया है। दिल्ली में पंजाबी और बनिया परंम्परागत वोट को साधते हुये दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान कांग्रेस के पुराने वफादार नेता सुभाष चोपड़ा को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं पूर्वांचली मतदाताओं को अपने पक्ष में एक जुट करने के लिये कीर्ति आजाद को कैपेन कमेटी का चीफ बनाया है।

सुभाष चोपड़ा दिल्ली कांगे्रस पार्टी के दोबारा अध्यक्ष बनाये गयेे है वे सन 2002 से 2006 तक दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष रहे चुके है। उन पर पार्टी ने फिर से भरोसा जताते हुये दिल्ली में टूटी पड़ी व गुटबाजी में फंसी कांग्रेस को एक जुट करने की कोशिश की है। सुभाष चोपड़ा पंजाबी समुदाय से ताल्लुक रखते है। उनकी पंजाबी और बनिया समुदाय में अच्छी पकड़ मानी जाती है। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रहे है और तभी से कांग्रेस की राजनीति करते आ रहे है उनके इन्हीं अनुभव को देखते हुये कांगेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। सुभाष चोपड़ा तीन बार विधायक रहे इसी आधार पर पुराने नेताओं को एक साथ फायदा मिलेगा क्योंकि मौजूदा वक्त में कांग्रेस पार्टी को भले ही दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने की चुनौती हो परंतु इस समय पार्टी को दिल्ली में खोए हुये जनाधार को एक जुट करने के साथ साथ दिल्ली में आप पार्टी में गये कांग्रेस के मतदाता को वापिस लाना भी अह्म चुनौती है। क्योकि कांग्रेस का कहना है कि आप पार्टी का कोई जनाधार तो था नहीं कांग्रेस पार्टी के वोटों पर आप पार्टी ने कब्जा रखा है।

तहलका संवाददाता ने सुभाष चोपड़ा से कांग्रेस पार्टी में चल रही गुटबाजी की बात की तो उन्होंने बताया कि मेरे खिलाफ कोई गुटबाजी नहीं है फिर भी कार्यकर्ताओं, नेताओं की जो भी दिक्कत होगी उसको मिल बैठ कर दूर करेंगे। इस समय सबको साथ लेकर चलना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है। अगर कांग्रेस एक साथ हो गई तो दिल्ली में कांग्रेस का जीत का परचम फिर से लहरायेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो भी विकास हुआ है वो कांग्रेस के शासन काल के दौरान हुआ ही है वर्तमान आप पार्टी की सरकार अपना प्रचार कर रही है और दिल्ली की जनता को गुमराह कर रही है। ऐसे में कांग्रेस अब जनता के बीच जाकर कांग्रेस की नीतियों से अवगत कराएगी। सुभाष चोपड़ा ने बताया कि उनका मुख्य उद्ेश्य आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत दर्ज कराना है और बेहत्तर प्रदर्शन करना है। क्योंकि कांग्रेस आला कमान ने जो उन पर भरोसा जताया है उस पर खरा उतरना है। 2003 में उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के दौरान दिल्ली एमसीडी के चुनाव में कांगे्रस पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिये कीर्ति के नाम की चर्चाएं जोरों पर रही है पर कांगेस में एक तबका कीर्ति आजाद के पक्ष में नहीं था । ऐसे में कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली के पदाधिकारियों की नब्ज टटोलते हुये किसी भी प्रकार का जोखिम न लेते हुये कीर्ति आजाद को कैपेन कमेटी का चीफ बनाया है और कहा कि अभी समय है अह्म जिम्मेदारी मिलेगी। कीर्ति आज़ाद मूल रूप से बिहार के है पर उनकी दिल्ली में पूर्वांचल मतदाओं में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। वे समय- समय पर दिल्ली में पूर्वांचल वालों के अधिकार के लिये संघर्ष करते रहते हंै। कीर्ति आजाद बिहार कांग्रेस के मुख्यमंत्री भगवत झा के बेटे है। कीर्ति आजाद ने बताया कि दिल्ली में पूर्वांचल के लोगों का भाजपा और आप पार्टी ने वोट बैंक के तौर पर प्रयोग किया है । कांग्रेस पार्टी पूर्वांचलियों का सम्मान और उनके अधिकारों का हक दिलाकर रहेगी।