साधना से सिद्धि: गंगा से गंगासागर तक खिला कमल : PM Modi

चुनावी नतीजों ने बदली देश की सियासी तस्वीर: जीत के बाद भाजपा मुख्यालय से पीएम मोदी ने जिस दैवीय आशीर्वाद का उल्लेख किया, वह उनके भावनात्मक जुड़ाव और 'नेशन फर्स्ट' की नीति को परिभाषित करता है…

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का शंखनाद: बंगाली कुर्ते में पीएम मोदी ने दिया भविष्य की राजनीति का संकेत…
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का शंखनाद: बंगाली कुर्ते में पीएम मोदी ने दिया भविष्य की राजनीति का संकेत…

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली।भारतीय राजनीति के फलक पर आज का दिन केवल मतगणना का नहीं, बल्कि एक युगगामी परिवर्तन का साक्षी बना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भाजपा मुख्यालय पहुंचे, तो उनके परिधान से लेकर संबोधन तक, सब कुछ एक नए भारत की राजनीतिक उद्घोषणा कर रहा था।

बंगाली कुर्ता-पाजामा पहनकर उन्होंने न केवल बंगाल की संस्कृति को सम्मान दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि भाजपा अब उत्तर भारत की सीमाओं को लांघकर ‘गंगा से गंगासागर’ तक अपनी पैठ बना चुकी है। वर्षों की वैचारिक साधना जब चुनावी सिद्धि में बदलती है, तो उसका वैभव कार्यकर्ताओं के चेहरों पर साफ झलकता है। यह जीत केवल सीटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि ‘परफॉर्मेंस की राजनीति’ पर जनता की अटूट मुहर है।

प्रधानमंत्री ने इसे केवल दलगत जीत न मानकर भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विजय बताया। बंगाल में 93 प्रतिशत मतदान का जिक्र करना उन आलोचकों को सीधा जवाब था, जो अक्सर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। यह चुनावी परिणाम दर्शाते हैं कि देश अब ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ खड़ा है।

असम में भाजपा की हैट्रिक और पुदुचेरी से लेकर उपचुनावों तक मिली सफलता यह प्रमाणित करती है कि विकास का ‘डबल इंजन’ मॉडल अब क्षेत्रीय अस्मिताओं के साथ तालमेल बिठाने में सफल रहा है।

काशी की गंगा से लेकर असम की ब्रह्मपुत्र तक, पीएम मोदी ने जिस दैवीय आशीर्वाद का उल्लेख किया, वह उनके भावनात्मक जुड़ाव और ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति को परिभाषित करता है। नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी का यह पहला बड़ा इम्तिहान था, जिसमें संगठन की शक्ति और नेतृत्व की दृष्टि का अद्भुत समन्वय दिखा। यह नतीजे भविष्य के उन बड़े बदलावों की नींव हैं, जहां राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की साधना बन चुकी है।