नई दिल्ली | तहलका न्यूज | स्नेहलता
“बचपन से मगरमच्छ से नहीं डरा, कॉकरोच से डर गया!” अभिनेता प्रकाश राज के इस तीखे तंज ने 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबका ध्यान खींचा। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ऐलान किया कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए युवाओं को सड़कों पर उतरना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), वोट काटे जाने की आशंका और दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों पर पाबंदियों को लेकर सवाल उठाए गए।
प्रकाश राज की चुनौती—मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार जवाब दें
प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों और युवाओं को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सार्वजनिक रूप से सवालों का जवाब देने की चुनौती दी।
उन्होंने जंतर-मंतर पर विरोध की जगह सीमित करने की कोशिशों पर तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर को “छू-मंतर” करने की कोशिश के बावजूद विरोध की आवाज दबाई नहीं जा सकती। उनके मुताबिक, अब देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगे।
प्रकाश राज ने हिरासत से जुड़े मामलों और कथित तौर पर पीड़ित लोगों के साथ हुए व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने संबंधित मामलों में जवाबदेही की मांग की।
अभिजीत दिपके का आह्वान—तिरंगा लहराना अपराध नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने युवाओं, छात्र संगठनों, नागरिक समाज और आम लोगों से अपने शहरों में तिरंगा लेकर निकलने की अपील की। उन्होंने कहा कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है और लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना जरूरी है।
दिपके ने घोषणा की कि 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर पहुंचने का कार्यक्रम है। उन्होंने इसे मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा अभियान बताया। उन्होंने अलग-अलग जिलों और इलाकों के लोगों से भी शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होने की अपील की।
प्रशांत भूषण ने एसआईआर और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा सामने आया है।
भूषण ने फॉर्म-6 के इस्तेमाल, मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है।
दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन, अनुमति से जुड़े विवाद और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट हुई तथा यातायात और मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों से आम लोगों को परेशानी हुई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती थी, तो आयोजकों को समय रहते वैकल्पिक स्थान क्यों नहीं बताया गया। वक्ताओं ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
“यह सिर्फ वोट काटने का मामला नहीं, लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार किसी एक संगठन तक सीमित मुद्दे नहीं हैं। उन्होंने छात्र संगठनों, युवाओं, किसानों और नागरिक समाज से एकजुट होने की अपील की।
प्रकाश राज ने जनता की आवाज दबाए जाने के आरोपों पर सवाल उठाए, जबकि अभिजीत दिपके ने तिरंगे को लोकतांत्रिक एकजुटता का प्रतीक बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से अभियान में शामिल होने का आह्वान किया।
अब निगाहें 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित कार्यक्रम और इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर रहेंगी।




