पांच योजनाएं

सबला ( राजीव गांधी किशोरी सशक्तीकरण योजना )

11 से 18 वर्ष की किशोरियों के लिए चलाई जा रही राजीव गांधी किशोरी सशक्तिकरण योजना को सबला नाम से जाना जाता है. केंद्र सरकार की यह योजना देश भर के 200 जिलों में प्रभावी है. सबला खास तौर से उन किशोरियों पर केंद्रित है जो स्कूल नहीं जा रही हों और इसलिए इस योजना के अंतर्गत किशोरियों को दो वर्गों में विभाजित किया गया है. एक वर्ग 11 से 14 वर्ष की उन किशोरियों का है जो स्कूल छोड़ चुकी हों और दूसरे वर्ग में 15 से 18 वर्ष की सभी किशोरियों को शामिल किया गया है. योजना के अंतर्गत ग्राम/मोहल्ले के आंगनबाड़ी केंद्र में किशोरियों का नामांकन किया जाता है और उन्हें निर्धारित दिन आवंटित किए जाते हैं जब उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र में उपस्थित होना होता है. दिनों का आवंटन इस तरह से किया जाता है कि स्कूल न जाने वाली युवतियां स्कूली युवतियों के संपर्क में आएं और स्वयं भी स्कूल जाने हेतु प्रेरित हों. सबला के मुख्य उद्देश्यों में किशोरियों को स्वावलंबी एवं सशक्त बनाना, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार करना, उन्हें सार्वजनिक एवं सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली की जानकारी देना और औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा प्रदान करना शामिल हैं. सभी युवतियों की स्वास्थ्य जांच भी योजना के अंतर्गत की जाती है और उन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड की गोलियों के साथ ही वर्ष में 300 दिन पोषाहार भी प्रदान किया जाता है. आंगनबाड़ी केंद्रों में इन युवतियों को विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक जानकारी भी दी जाती है. प्रोत्साहन हेतु इस योजना में ‘सखी’ और ‘सहेली’ जैसे पद भी बनाए गए हैं जिन पर इन्हीं युवतियों में से किसी को नियुक्त किया जाता है. इन केंद्रों पर वर्ष में एक दिन ‘किशोरी दिवस’ भी मनाया जाता है जो प्रत्येक राज्य में वहां की सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है. सबला योजना भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही है. 

जननी सुरक्षा योजना 

भारत में प्रसव के दौरान होने वाली नवजात शिशुओं और माताओं की मृत्युदर काफी ज्यादा है. इस मृत्युदर को कम करने के उद्देश्य से ही जननी सुरक्षा योजना को केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया है. जननी सुरक्षा योजना पूर्ण रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अंतर्गत आती है. यह योजना भारत के सभी राज्यों में प्रभावी है जिसके अंतर्गत प्रत्येक गांव में कुछ स्वयंसेविकाओं को नियुक्त किया गया है जिन्हें आशा नाम से भी जाना जाता है. आशा का कार्य है कि सभी गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लाभों से अवगत कराए और उन्हें इसके लिए प्रेरित भी करे. आशा को गर्भवती महिलाओं की देखभाल हेतु आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री भी प्रदान की जाती है. योजना को बढ़ावा देने हेतु प्रत्येक संस्थागत प्रसव पर आशाओं को नकद भुगतान किया जाता है. सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की है जिनसे योजना से संबंधित आवश्यक जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं. 

योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ एवं पोषक आहार भी उपलब्ध कराया जाता है. गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं को संस्थागत प्रसव करवाने पर या घर पर ही प्रशिक्षित महिला द्वारा प्रसव करवाने पर नकद सहायता भी प्रदान की जाती है. शहरी क्षेत्र की महिलाओं को प्रसव के बाद 1,000 रुपये तथा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1,400 रुपये प्रदान किए जाते हैं. इस योजना का लाभ गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली 19 वर्ष से अधिक उम्र की सभी गर्भवती महिलाओं को दो बच्चों के जन्म तक दिया जाता है. योजना में प्रसव के बाद प्रसूता एवं नवजात शिशु को घर तक पहुंचाने हेतु वाहन उपलब्ध करवाने का प्रावधान भी है. योजना का लाभ लेने हेतु गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण करवाना होता है. गांव की आशा से मिलकर भी इस योजना का लाभ लिया जा सकता है. प्रसूता को यदि इस योजना का लाभ न मिले तो अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी या मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से शिकायत की जा सकती है. 

महिला समाख्या योजना

महिला समाख्या योजना विशेष तौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों की ग्रामीण महिलाओं के लिए चलाई जा रही एक योजना है. समानता हासिल करने और महिलाओं को शिक्षित एवं सशक्त बनाने में इस योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसकी एक विशेषता यह भी है कि इस योजना को पूर्ण रूप से महिलाओं द्वारा ही संचालित किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप अधिक से अधिक महिलाएं इसका हिस्सा बनने के लिए आकर्षित होती हैं. इस योजना के मुख्य उद्देश्यों में महिलाओं की आत्मछवि तथा आत्मविश्वास में वृद्घि करना, ऐसा वातावरण तैयार करना जहां महिलाएं ज्ञान तथा सूचना प्राप्त कर सकें जिससे वे समाज में एक सकारात्मक भूमिका निभा सकें, महिलाओं तथा किशोरियों की शिक्षा के लिए अवसर प्रदान करना तथा औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रमों में महिलाओं तथा लड़कियों की अधिक सहभागिता प्राप्त करना शामिल हैं. महिला समाख्या योजना में मात्र उद्देश्यों की प्राप्ति के बजाय प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया है जिसके तहत महिलाओं को स्वयं अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करने और अपनी पसंद के अनुसार ज्ञान तथा सूचना प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाता है.

1989 में शुरू की गई यह योजना वर्तमान में 10 राज्यों में प्रभावी है. इस योजना के तहत पेयजल, स्वास्थ्य और दैनिक न्यूनतम आवश्यकताओं में सुधार के साथ ही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, बाल विवाह, दहेज आदि समस्याओं से निजात दिलाने की पहल भी की गई है. शिक्षा के क्षेत्र में सर्व शिक्षा अभियान और मध्याह्न भोजन योजना जैसे कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के साथ ही प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने में भी महिला समाख्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक महिला समाख्या के कार्यकर्ता सक्रिय हैं जिनसे इस योजना के संबंध में जानकारी हासिल की जा सकती है. 

लाडली

दिल्ली सरकार की इस योजना को विशेष रूप से लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने एवं उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है. लाडली योजना में कई ऐसे प्रावधान हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की लड़कियों के भविष्य को आर्थिक मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं और साथ ही उनको घर एवं समाज में बराबरी का दर्जा दिलवाने का काम भी कर रहे हैं.

लाडली योजना को दिल्ली सरकार द्वारा सन 2008 में लागू किया गया. जनवरी, 2008 और उसके बाद पैदा हुई लड़कियों को जन्म से ही इस योजना का लाभ मिल रहा है जबकि 2008 से पहले पैदा हुई बालिकाओं को उनके सरकारी स्कूलों में नामांकन के अनुसार लाभान्वित किया जा रहा है. दिल्ली में पैदा हुई वे सभी लड़कियां इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम हो और वह कम से कम पिछले तीन साल से दिल्ली में रह रहे हों. 

लाडली योजना के अंतर्गत दिल्ली के किसी भी अस्पताल/नर्सिंग होम अथवा संस्था में जन्म लेने वाली बालिका को 11,000 रुपये दिए जाते हैं और यदि बालिका का जन्म इसके अलावा कहीं और हुआ हो तो उसे 10,000 रुपये दिए जाने का प्रावधान है. यह धनराशि बालिका के खाते में जमा करवाई जाती है. इसके अलावा कक्षा एक, छह और नौ में दाखिले के समय भी बालिका के खाते में प्रत्येक बार पांच हजार रुपयेे जमा करवाए जाते हैं. कक्षा 10 पास करने पर तथा 12वीं में दाखिला लेने पर भी 5-5 हजार रुपये इस खाते में जमा करवाए जाने का नियम लाडली योजना में है. 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर और कक्षा 10 उत्तीर्ण करने के बाद ही बालिका इस पूरी रकम को ब्याज सहित अपने खाते से निकाल सकती है. दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की इस योजना का लाभ लेने हेतु आवेदन पत्र निकटतम सरकारी स्कूल, समाज कल्याण विभाग या भारतीय स्टेट बैंक से प्राप्त किया जा सकता है. 

स्वाधार

निराश्रित और बेसहारा महिलाओं को आधार प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा स्वाधार योजना को लागू किया गया है. योजना के अंतर्गत देश भर में स्वाधार गृह खोले गए हैं जहां इन महिलाओं के रहने, खाने, कपड़े एवं स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था के साथ ही इनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की भी जिम्मेदारी ली जाती है. यह योजना उन महिलाओं पर केंद्रित है जो कठिन और विपरीत परिस्थितियों में रह रही हैं. वेश्यावृति, रिहा कैदी, प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा अथवा अन्य किसी भी कारण से बेसहारा हुई महिलाओं को इस योजना के अंतर्गत स्वाधार गृह में लाया जाता है और उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है. महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्वाधार गृह में तीन साल तक रखा जा सकता है. इस दौरान उन्हें शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करके आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जाती है. स्वाधार गृह में महिलाओं के लिए हेल्पलाइन भी चलाई जाती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी मदद भी प्रदान की जाती है जिससे घरेलू हिंसा जैसे अपराधों से पीड़ित महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ सकती हैं. 55 वर्ष की बुजुर्ग महिलाओं को पांच साल तक स्वाधार गृह में रखा जा सकता है जिसके बाद उन्हें वृद्धाश्रम या किसी अन्य संस्था में भेज दिया जाता है. स्वाधार गृह में 18 वर्ष तक की लड़कियां और 12 वर्ष तक के लड़के भी अपनी मां के साथ रह सकते हैं. स्वाधार गृहों की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक समिति का गठन किया गया है. जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत कई जिला स्तरीय उच्चाधिकारी इस समिति के सदस्य होते हैं जिन्हें नियमित रूप से स्वाधार गृहों का निरीक्षण करना होता है. इस योजना को राज्य सरकारों के समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला विकास सहकारी समितियों एवं नगर निगमों के साथ मिलकर कार्यान्वित किया जाता है.

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