हरियाणा में निजी कंपनी के लाइसेंस पर रोक लगाने की सरकार की पहल, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म

सरकार ने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर को 25 साल का बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले पर पुनर्विचार के लिए हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) को निर्देश दिया है। सरकार कानूनी चुनौती देने की तैयारी में है।

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए 25 साल के समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के क्रियान्वयन को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। इसके बाद करीब 40,000 बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने शुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल वापस ले ली। हड़ताल के कारण राज्य के कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। लोगों को कई-कई घंटे और कुछ इलाकों में एक दिन से भी अधिक समय तक बिजली संकट का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार इस आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर रही है, जिसमें अधिनियम की धारा 94 के तहत पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी शामिल है।

पंचकूला में सरकार और बिजली कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक के बाद हड़ताल वापस लेने का फैसला किया गया। यूनियनों का कहना है कि सरकार ने निजी बिजली वितरण लाइसेंस का विरोध करने की उनकी प्रमुख मांग स्वीकार कर ली है और उन्हें आश्वासन दिया है कि हरियाणा में बिजली सेवाओं का किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

सैनी ने कहा, “हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। किसी भी तरह का निजीकरण नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कर्मचारी तत्काल अपने काम पर लौटेंगे।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार एचईआरसी के फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प अपनाएगी और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की शेष मांगों पर चर्चा के लिए 3 नवंबर को एक और बैठक प्रस्तावित है।

लंबे बिजली कटौती और जल संकट

22 अक्टूबर से शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल ने हरियाणा में बिजली वितरण और खराबी ठीक करने के काम को बुरी तरह प्रभावित किया। गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल रहे। अनुमान के मुताबिक, करीब 10 लाख बिजली उपभोक्ताओं को आपूर्ति बाधित होने का सामना करना पड़ा। इस दौरान गुरुग्राम में महज 12 घंटे के भीतर 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज किए जाने की बात सामने आई।

गुरुग्राम के कई इलाकों में 24 घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रही, जबकि कुछ स्थानों पर लोगों ने 40 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं आने की शिकायत की। कम वोल्टेज और लंबे बिजली कटौती के कारण पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई, क्योंकि बिजली के अभाव में पंप नहीं चल सके।

फरीदाबाद के एनआईटी-2 इलाके में करीब 13 घंटे तक बिजली गुल रहने के बाद स्थानीय निवासियों ने सड़क जाम कर दिया। लोगों का कहना था कि बिजली न होने से उनके घरों में पानी की आपूर्ति भी ठप हो गई थी।

गुरुग्राम के भीमगढ़ खेड़ी के निवासियों ने शुक्रवार को दौलताबाद फ्लाईओवर पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि बुधवार रात करीब 11 बजे से बिजली आपूर्ति बंद थी और बिजली कार्यालयों में फोन करने के बावजूद कोई अधिकारी उनकी शिकायत सुनने के लिए उपलब्ध नहीं था।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर भी बिजली संकट का व्यापक असर देखने को मिला। कुरुक्षेत्र में गुरुवार शाम तक कथित तौर पर शहर के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति ठप थी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को पीने के पानी, भोजन और मोबाइल फोन चार्ज करने तक में परेशानी हुई।

रेवाड़ी में व्यापारियों ने बताया कि इनवर्टर की बैटरी खत्म होने के बाद कारोबार ठप हो गया। चरखी दादरी में शहर के करीब आधे हिस्से और कई गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। बिजली की खराबी ठीक करने के लिए फील्ड कर्मचारियों की अनुपलब्धता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

बढ़ते जनाक्रोश के बीच कई जिलों के उपायुक्तों ने आपात स्थिति में बिजली की खराबी दूर करने के लिए अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया। इनमें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कर्मचारी भी शामिल थे। विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बिजली सबस्टेशनों और बिजली कार्यालयों पर पुलिस भी तैनात की गई।

निजी बिजली वितरण लाइसेंस

यह विवाद तब शुरू हुआ जब एचईआरसी ने 19 अक्टूबर को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया। इस लाइसेंस के तहत निजी कंपनी को राज्य के स्वामित्व वाली दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (डीएचबीवीएनएल) के समानांतर बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करने की अनुमति मिलती। आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति के लिए वैकल्पिक वितरक चुनने का विकल्प मिल सकता है।

राज्य सरकार के ताजा हस्तक्षेप का उद्देश्य इस लाइसेंस पर पुनर्विचार होने तक इसके क्रियान्वयन को रोकना है। इस संबंध में नियामकीय और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

सैनी ने कहा कि एचईआरसी एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, जो अपने कानून के तहत काम करती है। हालांकि, राज्य सरकार जनहित में नीतिगत निर्देश जारी करने के लिए विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रही है।

सरकार ने आयोग से अपने फैसले की समीक्षा करने और राज्य के निजी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के विरोध संबंधी रुख के अनुरूप कार्रवाई करने को कहा है।

सरकार ने धारा 94 के तहत पुनर्विचार याचिका दायर करने और विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष फैसले को चुनौती देने सहित आगे की कानूनी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस फैसले का लगातार विरोध किया था। उनका तर्क था कि गुरुग्राम और नूंह में निजी वितरक को अनुमति देना राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था के अप्रत्यक्ष निजीकरण के समान होगा।

कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा की चिंता

कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि निजी वितरक गुरुग्राम जैसे शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के अधिक लाभदायक उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकता है। ऐसी स्थिति में डीएचबीवीएनएल के पास ग्रामीण और कृषि उपभोक्ताओं का बड़ा हिस्सा रह सकता है, जिससे सरकारी बिजली वितरण कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर होने का खतरा है।

यूनियनों ने राज्य की बिजली वितरण कंपनियों में काम कर रहे करीब 40,000 नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों तथा इंजीनियरों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है।

उनका कहना है कि राज्य की मौजूदा बिजली वितरण कंपनियां आर्थिक रूप से सक्षम हैं और निजी कंपनियों के प्रवेश से उनके दीर्घकालिक कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन के गुरुग्राम जिला अध्यक्ष अमरजीत जाखड़ ने लाइसेंस का विरोध करने के सरकार के आश्वासन का स्वागत किया।

जाखड़ ने कहा, “सरकार ने एचईआरसी को लाइसेंस देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पत्र लिखने पर भी सहमति जताई है। हमारी यही मांग थी। इसलिए हमने हड़ताल वापस ले ली।”

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की शेष मांगों पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ 3 नवंबर को आगे की बातचीत होगी। हड़ताल वापस होने से सरकार और कर्मचारियों के बीच तत्काल टकराव तो कम हुआ है, लेकिन अन्य मांगों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड का कहना रहा है कि उसका प्रस्तावित नेटवर्क उपभोक्ताओं को बिजली वितरण का वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराएगा और बेहतर सेवाएं देने में मदद करेगा। कंपनी ने गुरुग्राम, मानेसर, सोहना और नूंह में चरणबद्ध तरीके से बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना बनाई थी।

कंपनी ने बिजली वितरण नेटवर्क के विकास के लिए पांच वर्षों में लगभग 4,717 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव दिया था। इसमें प्रस्तावित सेवा क्षेत्रों में बिजली वितरण से संबंधित बुनियादी ढांचा विकसित करना भी शामिल है।

हरियाणा सरकार के ताजा कदम पर कंपनी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उसके प्रतिनिधियों से बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी।

हड़ताल खत्म होने के बाद अब राज्य सरकार और बिजली वितरण कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिजली आपूर्ति सामान्य करना, लंबित शिकायतों का निपटारा करना और प्रभावित जिलों में खराबी ठीक करना है। हालांकि, इलेवन पावर के लाइसेंस का भविष्य नियामकीय समीक्षा और राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई कानूनी कार्यवाही के नतीजों पर निर्भर करेगा।