स्नेहलता | नई दिल्ली
AQI में उतार-चढ़ाव के बीच दिल्ली-NCR में प्रदूषण की चुनौती बरकरार, GRAP-1 लागू; बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए बढ़ी चिंता
दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सर्दियों की आहट के साथ प्रदूषण पर निगरानी तेज हो गई है। 24 अक्टूबर 2026 की सुबह राजधानी के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में बड़ा अंतर देखने को मिला। कहीं हवा मध्यम श्रेणी में रही, तो कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने अब चुनौती है कि हवा की गुणवत्ता और खराब होने से पहले प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। निर्माण स्थलों से उड़ती धूल, वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वायु प्रदूषण की समस्या को बढ़ा सकती हैं।
कहीं AQI 270, कहीं 145: एक ही शहर में हवा की अलग-अलग तस्वीर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से जुड़ी वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के 24 अक्टूबर की सुबह 8 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी में AQI 270, बवाना में 240, DTU क्षेत्र में 245 और द्वारका सेक्टर-8 में 206 दर्ज किया गया। वहीं, IHBAS, दिलशाद गार्डन में AQI 145 और आनंद विहार में 177 रहा। यानी राजधानी के अलग-अलग इलाकों में हवा की गुणवत्ता एक जैसी नहीं है।
राष्ट्रीय AQI पैमाने पर 101 से 200 तक का स्तर मध्यम और 201 से 300 तक का स्तर खराब माना जाता है। खराब श्रेणी में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। खासकर अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
GRAP-1 लागू, अब प्रदूषण पर लगाम लगाने की चुनौती
दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता खराब होने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को तत्काल प्रभाव से लागू किया था। इसके तहत संबंधित एजेंसियों को सड़क की धूल नियंत्रित करने, पानी का छिड़काव और मशीनी सफाई बढ़ाने, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने तथा खुले में कचरा जलाने पर रोक लागू कराने जैसे कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
GRAP-1 लागू होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली-NCR में लॉकडाउन लगा दिया गया है या सभी वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रदूषण नियंत्रण के लिए शुरुआती कार्रवाई का चरण है। आगे की कार्रवाई वायु गुणवत्ता और संबंधित आधिकारिक आदेशों पर निर्भर करेगी।
सिगरेट के धुएं जैसा खतरा, लेकिन कितनी सिगरेट के बराबर?
प्रदूषण के खतरे को समझाने के लिए अक्सर हवा में मौजूद PM2.5 कणों की तुलना सिगरेट के धुएं से की जाती है। ये बेहद महीन कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।




