भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता बुधवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यातित उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक के द्वार खुलेंगे, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को कई प्रीमियम ब्रिटिश उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर मिल सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई मजबूती देगा, रोजगार के अवसर बढ़ाएगा तथा भारत के विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्रों को नई गति प्रदान करेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सीईटीए के साथ-साथ भारत-यूके सामाजिक सुरक्षा समझौता भी 15 जुलाई से लागू हो गया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते तथा सामाजिक सुरक्षा समझौते के लागू होने से भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।”
गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों, उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही प्रौद्योगिकी, नवाचार और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा। सामाजिक सुरक्षा समझौते से ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों को भी लाभ मिलेगा और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
सीईटीए के तहत ब्रिटेन में भारत से निर्यात होने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। पहले जिन उत्पादों पर 70 प्रतिशत तक शुल्क लगता था, वे अब शून्य शुल्क के साथ ब्रिटिश बाजार में प्रवेश कर सकेंगे। इससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
इस समझौते से जिन प्रमुख क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं—
- वस्त्र एवं रेडीमेड परिधान
- चमड़ा एवं फुटवियर
- रत्न एवं आभूषण
- समुद्री उत्पाद
- इंजीनियरिंग उत्पाद
- ऑटो कंपोनेंट्स
- प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद
- रसायन
- औषधि (फार्मास्यूटिकल्स)
- कृषि उत्पाद
- चाय एवं कॉफी
- विद्युत मशीनरी
- फल एवं बागवानी उत्पाद
वस्त्र और परिधान उद्योग इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय रेडीमेड परिधानों और वस्त्रों पर ब्रिटेन में 4 से 16 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। अब यह शुल्क पूरी तरह समाप्त हो गया है, जिससे ब्रिटिश बाजार में भारतीय परिधानों की मांग और हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है। इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सीईटीए का लाभ केवल निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को भी कई प्रीमियम ब्रिटिश उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। इनमें स्कॉच व्हिस्की, लग्जरी कारें, कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट और कुछ खाद्य उत्पाद शामिल हैं, क्योंकि इन पर लगने वाले आयात शुल्क में चरणबद्ध कमी की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीईटीए भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत है। व्यापारिक बाधाओं को कम करने और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने से यह समझौता द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देगा, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा तथा विनिर्माण, सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

