भारत में हरित रेल क्रांति: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल बुनियादी ढांचे में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल जन-परिवहन (इको-फ्रेंडली मास ट्रांजिट) परियोजनाओं के लिए एक नया मानदंड स्थापित करेगी और देश के लिए मील का पत्थर साबित होगी।"

टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन (सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, रेल मंत्रालय ने भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन के संचालन को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक परियोजना के तहत, उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन के अंतर्गत जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10 कोच वाली ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ आधारित डेमू (DEMU – डीजल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) ट्रेन चलाई जाएगी।

इस शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो जाएगा—जिनमें जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन शामिल हैं—जो वर्तमान में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

रेलवे बोर्ड द्वारा 22 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह मंजूरी मार्च में अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) द्वारा सफलतापूर्वक पूरे किए गए ‘ऑसिलेशन ट्रायल रन’ (दोलन परीक्षण) के बाद दी गई है।

रेलवे बोर्ड के सिविल इंजीनियरिंग निदेशक किशन रावत द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, इस ट्रेन का व्यावसायिक संचालन कड़ाई से केवल जींद-सोनीपत रूट पर ही किया जाएगा। ट्रेनसेट के नियमित रखरखाव और सर्विसिंग के लिए दिल्ली के शकूरबस्ती में एक विशेष सुविधा केंद्र (मेंटेनेंस डिपो) तैयार किया गया है।

रखरखाव के लिए जींद और शकूरबस्ती के बीच ट्रेनसेट की आवाजाही को ‘डेड कंडीशन’ (पारंपरिक लोकोमोटिव/इंजन द्वारा खींचकर) में किया जाएगा, जिसे मौजूदा रेलवे नियमों के सख्त पालन के तहत सुनिश्चित करना होगा।

चूंकि हाइड्रोजन तकनीक के लिए बेहद सटीक और सुरक्षित संचालन की आवश्यकता होती है, इसलिए रेलवे बोर्ड ने कड़े सुरक्षा और परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को ट्रेन में लगे ‘लीक डिटेक्टर’ और ‘फ्लेम डिटेक्टर’ (आग का पता लगाने वाले सेंसर) की नियमित जांच करनी होगी। धूल जमने से इन सेंसरों की सटीकता प्रभावित हो सकती है, इसलिए उनकी नियमित सफाई और मेंटेनेंस अनिवार्य है।b हरियाणा के जींद में स्थित हाइड्रोजन जनरेशन यूनिट से वाहनों के ईंधन के रूप में उपयोग के लिए कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस (CHG) के भंडारण और फिलिंग का लाइसेंस पहले ही दिया जा चुका है। अनाधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए इस पूरे परिसर में 24/7 सुरक्षा व्यवस्था रहेगी, और रीफ्यूलिंग चक्र के डेटा लॉग तक पूरी पहुंच के साथ केंद्रीय कंट्रोल रूम में चौबीसों घंटे कर्मचारियों की तैनाती रहेगी।

भारतीय रेलवे रीफ्यूलिंग स्टेशनों और ऑनबोर्ड संचालन में तैनात होने वाले सभी कर्मचारियों को व्यापक प्रशिक्षण देगा। तैनाती से पहले कर्मचारियों को आधिकारिक ‘सक्षमता प्रमाण पत्र’ (कॉम्पिटेंसी सर्टिफिकेट) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।  कमर्शियल सर्विस की शुरुआत के शुरुआती तीन महीनों तक, हाइड्रोजन ट्रेनसेट की तकनीकी समझ रखने वाले प्रमाणित विशेषज्ञों की एक टीम ट्रेन में सफर करेगी, ताकि रास्ते में आने वाली किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके। शकूरबस्ती मेंटेनेंस डिपो में छह महीने के भीतर एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट लगाई जाएगी, और भविष्य के सभी हाइड्रोजन रेक में अंडर-गियर उपकरणों की पॉजिटिव माउंटिंग सुनिश्चित की जाएगी।