पंजाब के संगरूर जिले के लहरागागा क्षेत्र में छोटियां गांव के पास रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे में आठ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ, जब सड़क किनारे आराम कर रहे मजदूरों के एक समूह को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा दोपहर करीब तीन बजे हुआ। बागवानी से संबंधित काम में लगे मजदूर सड़क किनारे पानी पीने और आराम करने के लिए रुके हुए थे। इसी दौरान जाखल की ओर से पटियाला जा रही शेवरले ऑप्ट्रा मैग्नम कार कथित तौर पर अनियंत्रित हो गई और मजदूरों के समूह में जा घुसी।
कार चालक की पहचान रैधराना गांव निवासी परगट सिंह काला के रूप में हुई है। हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया। खबर लिखे जाने तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
मृतकों की पहचान करमजीत कौर, देस राज सिंह, जीवन सिंह, रंजीत कौर, बंतो कौर, सरबजीत कौर, रानी कौर और निक्की कौर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि इनमें से सात मजदूर अलीशेर गांव के निवासी थे। पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मजदूर ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम कर रहे थे, जिसे आमतौर पर मनरेगा के नाम से जाना जाता है। बताया जा रहा है कि समूह में करीब 23 मजदूर थे, जो हादसे के समय काम से कुछ देर का विराम लेकर सड़क किनारे बैठे थे।
एंबुलेंस पहुंचने में देरी का आरोप
हादसे की सूचना मिलने के बाद पास की एक फैक्टरी में काम करने वाले हरविंदर सिंह सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचने वालों में शामिल थे। उन्होंने घटनास्थल के मंजर को बेहद दर्दनाक बताते हुए कहा कि कई मजदूर सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़े थे और कुछ की हालत गंभीर थी।
हरविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य में देरी हुई। उनके मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा एंबुलेंस बुलाए जाने के बावजूद उसे घटनास्थल तक पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग गया।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने भी आरोप लगाया कि घायल मजदूर सड़क किनारे मदद के इंतजार में तड़पते रहे और अधिकारी जरूरी औपचारिकताओं में लगे रहे। प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि कुछ लोगों की मौत समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के कारण हुई हो सकती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हादसे के बाद आपातकालीन चिकित्सा सहायता में हुई कथित देरी की जांच की मांग उठ सकती है।
हरविंदर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने के करीब 15 मिनट बाद चालक वहां से फरार हो गया।
ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, मुआवजे की मांग
हादसे के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और मजदूर घटनास्थल पर एकत्र हो गए। उन्होंने आरोपी चालक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक बरिंदर कुमार गोयल ने हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख जताया और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी घटना को हृदयविदारक बताया। उन्होंने जिला प्रशासन से घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और मृतकों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की अपील की।
वड़िंग ने कहा, “ये सबसे गरीब मजदूर हैं, जो अपनी आजीविका कमाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।” उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
प्रशासन ने मदद का भरोसा दिया, पुलिस जांच में जुटी
संगरूर की उपायुक्त पूनमदीप कौर ने कहा कि जिला प्रशासन घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
उन्होंने कहा, “प्रशासन घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और पीड़ितों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
संगरूर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पलविंदर चीमा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस चालक की तलाश में छापेमारी कर रही है और मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कार किन परिस्थितियों में अनियंत्रित हुई, हादसे के बाद घटनास्थल पर क्या-क्या हुआ और आपातकालीन चिकित्सा सहायता में देरी किए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।




