धार्मिक आयोजनों में आपदा से निपटने के लिए एनडीएमए में बन सकता है अलग सेल

सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली।

कोलकाता के चोरबागन के दुर्गा पंडाल में मचे भगदड़ के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने तमाम कार्यक्रम रद्द किया और घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने घटना की विस्तृत जानकारी ली और राहत तथा बचाव कार्य की समीक्षा की। धार्मिक आयोजनों में लगातार हो रही इन घटनाओं को देखते हुए बहुत जल्द ही एनडीएमए में एक विशेष सेल का गठन हो सकता है। सेल धार्मिक आयोजनों में होने वाले हादसे के बाद रिस्पांस के लिए विशेष रूप से ट्रेंड होंगे।

एनडीएमए के तहत काम करने वाली एनडीआरएफ में धार्मिक स्थानों या भीड़ वाले जगहों पर होने वाले भगदड़ पर क्विक रिस्पांस का कोई विशेष इकाई नहीं है। इसकी सभी 16 बटालियन और इसकी खोज एवं बचाव टीम मानव निर्मित या प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए ट्रेंड है। घायलों को बाहर निकालने, प्राथमिक चिकित्सा देने और अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने का काम एनडीआरएफ करती है।

एनडीआरएफ के एक अधिकारी का कहना है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की स्पष्ट गाइड लाइन पहले से हैं। इसमें सारा ब्यौरा है कि किसी कार्यक्रम या भीड़ एकत्र होने वाले जगह पर क्या और कैसी व्यवस्था होनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि इस गाइड लाइन का पालन हो रहा है या नहीं प्राधिकरण इसकी निगरानी नहीं करता है। क्योंकि भीड़ और भगदड़ रोकने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और राज्य पुलिस की होती है। लेकिन यदि व्यवस्था प्राधिकरण के गाइड लाइन के मुताबिक सख्ती से हो तो इस तरह की घटना रोकी जा सकती है।

हालांकि कुंभ या अन्य बड़े धार्मिक आयोजन के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन कई बार पहले से ही एनडीआरएफ की टीम की तैनाती आयोजन स्थल पर करती है। जैसा प्रयागराज कुंभ के दौरान हुआ था। लेकिन यह सतर्कता सिर्फ हादसा होने के बाद राहत कार्य के लिए किया जाता है। यदि इसकी जगह प्राधिकरण को यह अधिकार दिया जाए कि वह यह देख और सुनिश्चित कर सके कि आयोजन के लिए प्राधिकरण द्वारा तय मानकों का सही से पालन किया जा रहा है या नहीं। सूत्रों का कहना है कि इसी के तहत प्राधिकरण में एक विशेष सेल गठित हो सकता है जो धार्मिक आयोजनों के लिए विशेष रूप से ट्रेंड हो।