केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चुनौती देते हुए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की पेशकश की। हरियाणा के करनाल में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर औपचारिक रूप से बहस की मांग करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है।
शाह की यह पेशकश एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आई है। राहुल गांधी लगातार सरकार पर मतदाता सूचियों में हेरफेर करने का आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को भी विभिन्न मुद्दों पर खुली बहस की चुनौती दी है।
भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए शाह ने राहुल गांधी पर भ्रामक जानकारी फैलाने, राजनीतिक अव्यवस्था को बढ़ावा देने और मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध करके लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस नेता को चुनौती दी कि वे धरने-प्रदर्शन और सार्वजनिक बयानबाजी करने के बजाय अपने आरोप संसद में उठाएं।
शाह ने कहा, “क्या आपको लगता है कि हमारा 80 साल पुराना लोकतंत्र आपकी चालों का शिकार हो जाएगा? राहुल जी, हम भी सड़कों पर उतरना जानते हैं। भाजपा आपको संसद, विधानसभा, गांवों और हर जगह करारा जवाब देगी। झूठ फैलाना बंद कीजिए। अगर चर्चा करनी है तो प्रधानमंत्री को पत्र लिखिए। हम संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार हैं और वहां पूरे मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।”
उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी को वास्तव में अपने आरोपों पर भरोसा है तो उन्हें संसद में उनका बचाव करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
शाह ने कहा, “अगर आप जिम्मेदारी के साथ चर्चा करना चाहते हैं और आपकी चिंताओं में सच्चाई, दम और तर्क है तो संसद के भीतर आइए और चर्चा कीजिए। आमने-सामने बैठकर बात करते हैं। लेकिन आप जवाबों का सामना नहीं कर पाएंगे और हमेशा की तरह भाग जाएंगे।”
गृह मंत्री ने राहुल गांधी की उस हालिया चुनौती का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को विभिन्न मुद्दों पर खुली बहस के लिए आमंत्रित किया था। शाह ने कहा कि इस तरह की बहस के लिए संसद ही उचित मंच है। उन्होंने कहा कि केवल सार्वजनिक बयान देकर प्रधानमंत्री को चुनौती देना पर्याप्त नहीं है। राहुल गांधी को औपचारिक रूप से संसद में चर्चा की मांग करनी चाहिए।
एसआईआर को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए शाह ने तर्क दिया कि पार्टी की लगातार चुनावी हार के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा, “2014 में एसआईआर कहां था? तब भी आप पूरी तरह हार गए थे। 2019 में एसआईआर कहां था? तब भी आप चुनाव हार गए। 2024 में भी कोई एसआईआर नहीं हुआ, फिर भी आपको हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा और महाराष्ट्र में भी एसआईआर नहीं हुआ था। आप हर जगह हारे।”
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव हारने के बाद निर्वाचन आयोग और इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों पर सवाल उठाने लगती है, जबकि जीत मिलने पर इन्हीं व्यवस्थाओं पर चुप रहती है।
केरल, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी जीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल किया कि जब पार्टी चुनाव जीतती है तो उसे चुनावी व्यवस्था पर भरोसा रहता है, लेकिन हारने के बाद उसी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए विभिन्न चुनावों में राहुल गांधी और कांग्रेस जनता का समर्थन हासिल करने में बार-बार नाकाम रहे हैं। हरियाणा का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कांग्रेस नेताओं ने बड़े चुनावी दावों के साथ मैदान में उतरने के बावजूद हार का सामना किया।
शाह ने भाजपा की लगातार चुनावी सफलताओं का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जनता के भरोसे को दिया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने मोदी को लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाने का जनादेश दिया। उन्होंने हरियाणा में भी भाजपा की सत्ता में वापसी का उल्लेख किया, जहां मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार के बाद नायब सिंह सैनी लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
एसआईआर के बचाव में उतरे शाह, घुसपैठियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना
शाह के भाषण का एक बड़ा हिस्सा एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करने और कांग्रेस पर अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए इसका विरोध करने का आरोप लगाने पर केंद्रित रहा।
राहुल गांधी के इस दावे का जवाब देते हुए कि मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं, शाह ने इन आंकड़ों का वर्गीकरण पेश कर पुनरीक्षण प्रक्रिया को सही ठहराने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि इन 13 करोड़ नामों में से 2.8 करोड़ मृत व्यक्तियों के थे और कोई मृत व्यक्ति मतदान नहीं कर सकता। इसके अलावा 6.25 करोड़ लोग अपना स्थान बदल चुके थे। एक करोड़ नाम तीन अलग-अलग सूचियों में दोहराए गए थे और बाकी तीन करोड़ घुसपैठिए थे, जिनके खिलाफ कार्रवाई के कारण कांग्रेस एसआईआर का विरोध कर रही है।”
शाह ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ मोदी सरकार की नीति को तीन चरणों में बांटते हुए कहा कि इसमें पहले उनकी पहचान करना, फिर मतदाता सूचियों से उनके नाम हटाना और अंत में उन्हें देश से निर्वासित करना शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपात्र लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाने का समर्थन करने के बजाय घुसपैठियों को बचाने के लिए राजनीतिक अभियान चला रही है।
उन्होंने पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस की तैयारियों पर भी सवाल उठाए। शाह ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने बूथ स्तरीय अभिकर्ताओं को प्रभावी ढंग से तैनात करने में विफल रही। उन्होंने पूछा कि जब पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी, तब कांग्रेस के प्रतिनिधि कहां थे और उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्तियां क्यों नहीं दर्ज कराईं।
शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान तेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता लोगों को एसआईआर के पीछे का उद्देश्य समझाएं और विपक्ष की ओर से फैलाए जा रहे कथित भ्रामक प्रचार का जवाब दें।
रामलीला मैदान की रैली को लेकर कांग्रेस पर हमला
शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाया कि रैली में 10 लाख लोग शामिल हुए थे। शाह ने कहा कि रामलीला मैदान की क्षमता लगभग 70 हजार लोगों की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रैली का मकसद चुनावी अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक माहौल बनाना और घुसपैठियों को संरक्षण देना था। 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए शाह ने कांग्रेस की राजनीतिक विरासत और लोकतंत्र की रक्षा करने के उसके दावों पर भी सवाल उठाए।
एक अन्य राजनीतिक हमले में गृह मंत्री ने राहुल गांधी से उनकी विदेश यात्राओं, विशेषकर हाल की वियतनाम यात्रा का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने यात्रा की अवधि, वहां राहुल गांधी की मुलाकातों और दौरे के उद्देश्य तथा कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए।
शाह ने कहा, “आप लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। लोगों को यह जानने का अधिकार है।”
उन्होंने राहुल गांधी को हरियाणा में किसी सार्वजनिक चौक या चौराहे का नाम बताने की चुनौती भी दी, जहां दोनों के बीच खुली बहस हो सके। शाह ने कहा कि भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष वहां राहुल गांधी से मिलने के लिए तैयार रहेंगे और बाद में प्रधानमंत्री मोदी भी इस चर्चा में शामिल हो सकते हैं।
संसद की कार्यवाही बाधित करने का कांग्रेस पर आरोप
करीब 28 मिनट के अपने भाषण के दौरान शाह ने बार-बार कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं होने देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “संसद की कार्यवाही बाधित करना कांग्रेस की संस्कृति रही है।” शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष रचनात्मक बहस में हिस्सा लेने के बजाय सदन का बहिष्कार और सड़कों पर प्रदर्शन करने का रास्ता अपना रहा है।
उन्होंने कहा कि संसद विपक्ष के लिए सरकार से सवाल पूछने और जवाब मांगने का उचित लोकतांत्रिक मंच है। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी पर सदन की कार्यवाही नहीं चलने देने और फिर राजनीतिक मतभेदों को लेकर सड़कों पर उतरने का आरोप लगाया।
शाह ने दावा किया कि 22 अक्टूबर को शुरू हुआ भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान 5 नवंबर को संपन्न हुआ और इस दौरान देशभर में लोगों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया।
रैली में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री एवं करनाल के सांसद मनोहर लाल खट्टर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, हरियाणा भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी, सह-प्रभारी डॉ. भोला सिंह तथा राज्य के कई मंत्री और विधायक शामिल हुए।
पंजाब सरकार पर भी शाह का निशाना
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में शाह ने पड़ोसी राज्य पंजाब का रुख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा और उन्हें हरियाणा से शासन चलाने का तरीका सीखने की नसीहत दी।
शाह ने दावा किया कि सैनी सरकार ने 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिया है। उन्होंने हरियाणा को किसान हितैषी शासन का उदाहरण बताते हुए भाजपा सरकार की नीतियों की तुलना पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार से की।
शाह की इस टिप्पणी का राजनीतिक महत्व हरियाणा से आगे पंजाब तक भी है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।




