योग गुरु अयंगर नहीं रहे

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Gurujiविश्वविख्यात योग गुरु और अयंगर स्कूल ऑफ योग के संस्थापक बीकेएस अयंगर का आज सुबह पुणे में निधन हो गया. वह 96 वर्ष के थे. अयंगर दिल और गुर्दे समेत कई शारीरिक तकलीफों से जूझ रहे थे.

दिसंबर 1918 में कर्नाटक के बेल्लूर में शिक्षक पिता श्री कृष्णमाचार के घर जन्मे बेल्लूर कृष्णमाचार सुंदरराजा (बीकेएस) अयंगर का योग से परिचय 16 वर्ष की उम्र में हुआ जब उनकी मुलाकात उनके गुरु श्री टी कृष्णमाचार्य से हुई. महज दो वर्ष की शिक्षा के बाद उनके गुरु ने उन्हें योग का प्रशिक्षण देने के लिए पुणे भेज दिया. उन्होंने दुनिया भर को अयंगर योग की जो शिक्षा दी वह अतुलनीय है.

पद्यविभूषण से सम्मानित बीकेएस अयंगर को निर्विवाद रूप से दुनिया का सबसे बड़ा योग गुरू कहा जा सकता है जिसने पश्चिमी दुनिया को योग की खूबियों से परिचित कराया. अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने सन 2002 में लिखा, ‘अयंगर ने पश्चिमी दुनिया को योग से परिचित कराने के लिए जितना कुछ किया, किसी अन्य व्यक्ति ने शायद ही किया हो.’ वर्ष 2004 में टाइम मैगजीन ने उनके वैश्विक प्रभाव को मान्यता देते हुए उनको दुनिया के चुनिंदा जीवित प्रभावशाली लोगों में शामिल किया. अयंगर की लिखी पुस्तक लाइ ऑन योगा को उसने योग की बाइबिल कहकर पुकारा.

अयंगर ने प्राचीन पतंजलि सूत्र का प्रचार प्रसार करने के अलावा अपनी विशिष्ट अयंगर योग शैली के योगों को दुनिया के करीब 60 देशों में विशिष्ट स्थान दिलाया. उस वक्त योग के जो अन्य स्वरूप प्रचलित थे उनमें व्यायाम अथवा योग को बहुत तेज गति से अंजाम दिया जाता था. इनके विपरीत अयंगर योग की अपनी निजी शैली लेकर आए जिसे अयंगर योग के नाम से जाना गया. इस योग शैली में शरीर को योग की खास मुद्राओं में काफी देर तक स्थिर रखना होता है. यह योग और ध्यान का एक मिश्रण तैयार करता है. इस शैली को अयंगर के पश्चिमी देशों में मौजूद अनुयाइयों ने काफी सराहा.

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