चेंज डॉट ओआरजी : जनमत का जरिया

सबसे प्रसिद्ध याचिका तेजाबी हमले की शिकार बनने के बाद नई जिंदगी की शुरुआत करने वाली लक्ष्मी ने 2013 में शुरू की थी. अपने अनुभव को बांटते हुए लक्ष्मी बताती हैं, ‘मैंने याचिका तब शुरू की जब मुझे महसूस हुआ कि सरकार इस जघन्य कृत्य पर रोकथाम लगाने को लेकर गंभीर नहीं है. मुझे ऑफलाइन भी समर्थन प्राप्त था पर उतनी संख्या में नहीं जितना कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए जरूरी थी. इंटरनेट अब किसी भी मुद्दे पर बहस और अपनी असहमति व्यक्त करने का एक बड़ा माध्यम बन गया है, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लक्ष्मी ने अपनी मुहिम के समर्थन में चेंज डॉट ओआरजी का सहारा लिया. पचास हजार से ज्यादा लोग उनकी याचिका के समर्थन में आगे आए. लक्ष्मी कहती हैं, ‘मैं अब भी पोर्टल का उपयोग करती हूं और यह बड़ी सुकून देने वाली बात है कि अब यह हिंदी में भी शुरू हो चुका है.’  वह प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहती हैं, ‘यह बहुत ही अच्छी बात है कि अब मैं याचिका अपनी भाषा में लिख और पढ़ सकती हूं.’

लक्ष्मी की याचिका ने सफलता का स्वाद तब चखा जब वह तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के पास देश में तेजाब की खुली बिक्री रोके जाने की मांग लेकर पहुंची और चेंज डाॅट ओआरजी पर अपने समर्थन को दिखाया. तब केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि तेजाब की खुदरा बिक्री पर कठोर नियंत्रण किया जाए. इसके बाद न जाने कितनी ही मासूमों के सपने जला चुके घरेलू सफाई के काम आने वाले तेजाब को विष अधिनियम, 1919 के अंतर्गत आने वाले पदार्थों में शामिल कर लिया गया.

इसमें कोई दो राय नहीं कि चेंज डॉट ओआरजी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल का वर्तमान में एक सबसे लोकप्रिय जरिया है. लेकिन इसके पीछे लगा ‘डॉट ओआरजी’ भ्रम की स्थिति भी पैदा करता है और इस कारण से इसे अक्सर गलती से नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन (एनजीओ)समझ लिया जाता है. समस्या याचिका शुरू करने वाले के सत्यापन को लेकर भी होती है. हैदराबाद की नालसर लॉ यूनिवर्सिटी का ही उदाहरण लें जहां छात्रों और लोकल मीडिया ने एक -दूसरे पर आरोप लगाते हुए याचिका लगानी शुरू कर दी. अब इनमें कौन सही था और कौन गलत, यह विवाद उत्पन्न हो गया. बहरहाल, ऐसी गड़बड़ अक्सर होती रहती हैं.

भारत में चेंज डॉट ओआरजी ने समाज की समस्या बन चुके विभिन्न मुद्दों के खिलाफ लोगों को आवाज उठाने का अवसर दिया है. प्रदीप राज कहते हैं, ‘लोगों का सही जगह तक पहुंचना ही देश में सबसे बड़ी चुनौती है. अगर हम स्कूल नहीं जा सकते, कॉलेज भी नहीं जा सकते, अस्पताल और ऑफिस भी नहीं जा सकते क्योंकि हम अपंग हैं तो फिर अधिकारों की बात करने का क्या फायदा! हम उन्हीं मौजूद कानूनों और उपायों को लागू कराने में जूझते हैं जिनसे हमारे अधिकार सुनिश्चित होते हैं. बिल पेश हो जाते हैं, पारित हो जाते हैं पर इन नए बने कानूनों को कभी लागू नहीं किया जाता.’ ऐसे में चेंज डॉट ओआरजी अपनी बात रखने और लक्ष्य तक प्रभावी पहुंच बनाने का एक आसान तथा क्रांतिकारी माध्यम है.

जो भी कहा जाए, पर यह सच है कि चेंज डॉट ओआरजी ने आम जनता को अपने मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाने का एक माध्यम दिया है. लोकतंत्र की आत्मा को सुरक्षित रखने का यह एक नया तरीका है, जो कि लोगों का है, लोगों के लिए है और लोगों के द्वारा है.

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