‘देश की धड़कन’ एचएमटी बंद!

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किसी जमाने में घरों में ‘हाईस्कूल में फर्स्ट डिवीजन लाओगे तो घड़ी दिलाएंगे’ जैसे जुमले सुनना आम था. घड़ी यानी एचएमटी ‘जनता’. और फिर जब घड़ी आती तो शुरू होते किस्से. पता चलता कि वो घड़ी जिसे पिताजी हाथ तक नहीं लगाने देते, वो उनकी पहली कमाई से खरीदी थी. मां की पहली ‘एचएमटी’ उनके पिताजी ने बीए पास होने पर दिलाई थी. ‘देश की धड़कन’ के नाम से मशहूर हुई इन घड़ियों से हिंदुस्तानी लोगों का भावनात्मक जुड़ाव रहा है.

कभी स्टेटस सिंबल रही एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) की घड़ियां जल्द ही बाजार से नदारद हो जाएंगीं. केंद्र सरकार ने इन्हें बनाने वाली कंपनियों एचएमटी वॉचेज और एचएमटी चिनार वॉचेज को बंद करने का निर्णय लिया है. इस समूह की एक और कंपनी एचएमटी बियरिंग्स पर भी ताला लगेगा. ये तीनों कंपनियां लंबे वक्त से घाटे में चल रही थीं और सरकार का मानना है कि इनका पुनरुद्धार नहीं किया जा सकता.

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एचएमटी समूह को पिछली तीन तिमाही के दौरान हर तिमाही में करीब 25 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. पिछले वित्त वर्ष में भी इसे करीब 96 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. पिछले पांच सालों में से चार साल के दौरान कंपनी ने घाटा ही उठाया है. इसी के चलते इसके पुनरुद्धार की उम्मीदें धूमिल हो गईं थीं. सरकार के इस फैसले से 1985 में उत्तराखंड के रानीबाग में एचएमटी की वॉच फैक्ट्री की नींव रखने वाले वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी खुश नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरे सामने एचएमटी फैक्ट्री बंद न होती तो अच्छा होता.’

केंद्र सरकार के इस निर्णय के चलते कंपनियों में काम कर रहे करीब हजार लोगों की रोजी-रोटी पर तलवार लटक गई है. सरकार का कहना है कि प्रभावित कर्मचारियों को आकर्षक वीआरएस पैकेज दिया जाएगा. यह पैकेज 2007 के वेतनमान के आधार पर दिया जाएगा. तीनों कंपनियों को बंद करने और प्रभावित कर्मचारियों के वीआरएस के लिए 427.48 करोड़ रुपये फिलहाल मंजूर कर लिए गए हैं. फैसले के मुताबिक कंपनियों की चल-अचल संपत्तियों को सरकारी नीति के तहत बेचा जाएगा.

फिलहाल भारी उद्योग विभाग के अधीन मैन्यूफैक्चरिंग, कंसल्टेंस और कॉन्ट्रैक्टिंग करने वाले 31 केंद्रीय उपक्रम हैं, जिनमें 12 उपक्रम लाभ में और बाकी 19 घाटे में चल रहे हैं. इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने ये फैसला किया है. केंद्र सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से एचएमटी कंपनी को बंद करने का फैसला सितंबर 2014 में लिया गया था.

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 दृष्टिहीनों के लिए भी बनाई थी घड़ी

  • एचएमटी कंपनी की स्थापना वर्ष 1953 में की गई थी जबकि कंपनी की घड़ी बनाने की पहली इकाई वर्ष 1961 में बंगलुरू में जापान की सिटीजन वाच कंपनी के सहयोग से स्थापित की गई थी. साल 1972 और फिर 1975 में इस इकाई का विस्तार भी किया गया था.
  • बंगलुरू स्थित इस इकाई में बनी पहली घड़ी को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जारी किया था.
  • ‘जनता’ घड़ी एचएमटी की सबसे लोकप्रिय घड़ियों में एक मानी जाती है. दूसरी घड़ियों में पायलट, झलक, सोना सबकी प्रिय थीं. दृष्टिहीनों के लिए भी कंपनी ने ‘एचएमटी ब्रेल’ घड़ी बनाई थी.
  • घड़ियों के पुर्जे बनाने के लिए 1978 में टुमकुर (कर्नाटक) और 1985 में रानीबाग (उत्तराखंड) में नई इकाईयां लगाई गईं थीं.