Volume 8 Issue 14 Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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आदिवासी हूं, मुश्किलों को चुनौती नहीं मानता और खुद को माओवादी कहे जाने से भी नहीं घबराता : बीजू टोप्पो

आपने बीकॉम की पढ़ाई की है, पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती-किसानी की है. फिर कैमरे से लगाव कैसे हो गया? जब मैं रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ रहा था तभी से राजनीति और सामाजिक सरोकारों में मन रम गया था. रांची आया तो हमारे कुछ साथियों ने मिलकर पलामू छात्रसंघ  

समान नागरिक संहिता तो छोड़िए हमने तो आपराधिक संहिता को भी समान नहीं रहने दिया: आरिफ मोहम्मद खान

समान नागरिक संहिता लागू किए जाने के बारे में आपकी क्या राय है? हमारा संविधान अपने अनुच्छेद 44 के द्वारा राज्य के ऊपर यह जिम्मेदारी डालता है कि वह भारत के समस्त नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा. हम सब संविधान को मानते हैं और  

महिला अधिकारों से जुड़ा है समान नागरिक संहिता का मामला

समान नागरिक संहिता लागू करने में कोई तकनीकी मुश्किल नहीं है, बल्कि राजनीतिक मुश्किल है. इस मुद्दे का राजनीतिकरण हुआ है. संविधान सभा में इस पर बहुत बहस हुई थी. डॉ. आंबेडकर ने इसके बारे में बहुत विस्तार से इसके पक्ष में संविधान सभा में बोला था. बहुत बहस-मुबाहिसे के  

हम जिसकी पूजा करते हैं उसी को ये बूचड़खाने में काट देते हैं तो तनाव तो पैदा होगा ही : विनय कटियार

उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव के क्या कारण रहे और इस बार अलग क्या है? एक बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव का कारण कल्याण सिंह का पार्टी छोड़कर जाना था. इस कारण प्रदेश की पिछड़ी खासकर लोध जातियों ने पार्टी का साथ छोड़  

पेरुमल मुरुगन : एक फैसले की कहानी

‘यह चिंता का विषय है कि एक विकसित होते समाज के रूप में हमारी सहिष्णुता का स्तर नीचे जाता प्रतीत हो रहा है. किसी भी विपरीत विचार या सामाजिक सोच को समय-समय पर धमकियों और हिंसक बर्ताव का सामना करना पड़ता है. सामाजिक रीति-रिवाजों पर लोगों के भिन्न-भिन्न विचार होते  

समान नागरिक संहिता : एक देश एक कानून

हाल ही में केंद्र सरकार ने विधि आयोग को पत्र लिखकर समान नागरिक संहिता (यूनीफाॅर्म/कॉमन सिविल कोड) यानी सभी के लिए एक जैसे कानून पर सुझाव मांगा है. अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से अपना रुख साफ करने को कहा था. इसके  

भाजपा से दूर होते मांझी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कब क्या बोलेंगे, यह सिर्फ वही जानते हैं. वे सुबह कुछ और शाम को कुछ और बोल सकते हैं. वे इतनी बार बयान बदलते हैं कि भले ही उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाए लेकिन वे चौंकाने वाले होने की वजह  

‘चौदह साल के कठिन परिश्रम का फल रियो ओलंपिक के टिकट के रूप में अब मिला’

पहली कक्षा में पढ़ने वाली छह साल की वह मासूम तब एथलीट शब्द का मतलब तक नहीं समझती थी जबकि उसकी खुद की बड़ी बहन एक एथलीट थी. वह तो बस स्कूल की दौड़ प्रतियोगिता में पहला स्थान पाना चाहती थी. एक दिन उसकी एथलीट बहन ने उससे बोला, ‘तू  

‘नई पार्टी का गठन रमन सिंह के गांव में इसलिए किया ताकि शेर की मांद में घुसकर उसका शिकार करूं’

तीस साल आपने कांग्रेस में बिताए फिर अचानक से पार्टी से मोहभंग होने का क्या कारण रहा? किसी से कोई मोहभंग नहीं है. दो भावनात्मक कारणों से मैंने नया दल या नई राह पर चलने का फैसला किया. पहला कारण यह कि मुझे लगता है कि एक बेहद गरीब आदिवासी  

रज्जाक भाई! आपका बहुत-बहुत शुक्रिया, मुझे मेरी ईदी देने के लिए…

ईद के दिन छुट्टी होती है लेकिन निजी क्षेत्रों में काम करने वालों को ये सौभाग्य कहां मिलता है. उस दिन मुझे एक जरूरी बिजनेस मीटिंग के लिए गाजियाबाद जाना था. दिन के करीब 11 बजे मैं गाजियाबाद पहुंचा. वहां एक वरिष्ठ साथी अपनी कार से आए. वे कार से