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मुअनजोदड़ो की जगह अगर मोहेंजो दारो हो गया तो भाई किसके घाव दुख गए : नरेंद्र झा

आप छोटे परदे पर लंबे समय तक काम करने के बाद फिल्मों में आए. दोनों माध्यमों में क्या अंतर पाते हैं? टेलीविजन के लिए काम करते हुए आपको सोचने का मौका नहीं मिलता है. फिल्मों में आपको इसका मौका मिलता है. टेलीविजन का अपना एक गणित होता है जिसके तहत  

आज के समय में बैंडिट क्वीन बन ही नहीं पाती : गोविंद नामदेव

फिल्म  ‘सोलर एक्लिप्स’  से आपने भी हॉलीवुड की ओर कदम बढ़ा दिया है. इन दिनों हॉलीवुड जाने की होड़ मची हुई है. एक भारतीय कलाकार के लिए हॉलीवुड की फिल्म करना बड़ी बात क्यों है? ये बिल्कुल वैसे है जैसे कोई छोटे शहर से बड़े शहर जाना चाहता है. हॉलीवुड  

ये देखकर दुख होता है कि अभिनेत्रियों का इस्तेमाल डिजाइनर कपड़े बेचने के लिए किया जा रहा है : श्रेया नारायण

एक राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद अभिनय का ख्याल कब आया? मैं बिहार के मुजफ्फरपुर शहर से हूं. मैं ऐसे परिवार से हूं जिसने एक ही काम सीखा है और वो है पढ़ाई-लिखाई. मैंने दिल्ली में रहकर पढ़ाई की है. मैं एक अच्छी स्टूडेंट रही हूं और एमबीए किया  

बारह साल बाद ‘जूली’ की वापसी

सवाल ये है कि क्या आपने जूली का नाम सुना है.   अगर सुना है तो ठीक है, नहीं तो दो बातें होंगी. या तो ये खबर समझ में आएगी या फिर नहीं. समझ में आ गई तो ठीक है, नहीं तो आप ‘गूगल’ कर सकते हैं. अजी चलिए! कोई नहीं…  

‘मैं वो नहीं जो दिखता हूं, मैं वो हूं जो लिखता हूं’

कश्मीर के बारामुला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मानव कौल का बचपन मध्य प्रदेश के होशंगाबाद शहर में बीता. 90 के दशक में घाटी में तेजी से पांव पसारते आतंकवाद की वजह से उनके परिवार को पलायन करके होशंगाबाद आना पड़ा. उनके पिता कश्मीर में इंजीनियर थे, जिन्हें समय  

सोनचांद बस्तरवाली उड़नपरी

छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका देश-दुनिया में अक्सर सुर्खियों में रहता है. माओवादियों की मांद के कारण. पुलिसिया कार्रवाई के कारण. और इन दोनों के बीच के समीकरण साधने की राजनीति के कारण. उसी बस्तर के बकावड़ जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर बसे एक गांव की रहनेवाली सोनबारी  

साल की सबसे कमाऊ फिल्म बनी तनु वेड्स मनु रिटर्न्स

कंगना रनौत के जुड़वां अभिनय से सजी ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ 100 करोड़ क्लब में शामिल होकर साल की सबसे सफल फिल्म बन गई है. 30 करोड़ के साधारण बजट के साथ बॉक्स ऑफिस पर अवतरित हुई इस फिल्म का 10 दिनों में कुल कारोबार 103.47 करोड़ रुपये हो गया  

हंस लीजिए, लेकिन खुश होने वाली बात नहीं है !

फिल्म में सब कुछ कॉमेडी की चाशनी में ऐसे घोला गया है कि आपको ऐतराज नहीं होता  

अनफ्रीडम : आजादी की दरकार

भारत जैसे आजाद मुल्क में इन दिनों ‘बैन’ यानी ‘प्रतिबंध’ शब्द अखबारों और समाचार चैनलों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है. आम तौर पर प्रतिबंध का नाम सुनते ही किसी ‘कठमुल्ला’ और उसके उल-जुलूल फतवे का ध्यान आता है, मगर हमारे देश में इन दिनों सेंसर बोर्ड (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड)