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जाट आंदोलन के समय पुलिस ने उपद्रवियों को खुली छूट दे रखी थी : प्रकाश सिंह

हरियाणा में इस साल फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, लूटपाट व आगजनी की घटनाओं के दौरान पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन राज्य सरकार ने किया था.  

मोदी, भाजपा या राजनीति तो महज हथियार हैं, राष्ट्रवाद का उन्माद तो पूंजीवादियों को चाहिए : सच्चिदानंद सिन्हा

देश में इन दिनों राष्ट्रवाद का हो-हल्ला कुछ ज्यादा ही मचा हुआ है. आपने इस बारे में सुना और पढ़ा ही होगा लेकिन इस विषय पर कुछ कहा नहीं. क्या सोचते हैं आप? इस विषय को अगर प्रचलित तौर-तरीकों से समझने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि यह शब्द  

महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण

बिहार में सरकार बनाने के बाद नीतीश कुमार ने एक और चुनावी वादा पूरा किया है. 19 जनवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. यह आरक्षण महिलाओं को पहले से  

ग्राम स्वराज का काला सच

पत्नी के चुनाव हारने पर पति ने किया मर्डर, प्रत्याशी की गोली मार कर हत्या, भाई के हारने पर ताऊ को मार डाला, प्रत्याशी के भतीजे को मारी गोली, प्रधानी का चुनाव हारने पर समर्थक को मारी गोली. ये उत्तर प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनाव नतीजे आने  

‘कांग्रेस ने छात्रसंघों का अपराधीकरण किया’

छात्र राजनीति के लगभग खात्मे की कोई एक वजह नहीं है. ऐसी बड़ी सामाजिक-राजनीतिक परिघटना के अनेक कारण होते हैं. 70 के दशक के बाद बदलाव का बड़ा बिंदु है आपातकाल. उस दौरान दो चीजें हुईं. एक तो आपातकाल के खिलाफ बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ. जिसमें समाजवादी छात्र संगठन,  

‘यूपी में आम्बेडकर का प्रभाव रहा है, बिहार के दलित गांधी टोपी में ही फंसे रह गए’

यह पुराना सवाल है लेकिन जरूरी भी कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में दलित राजनीति अपने समूह के लिए अलग मजबूत नेतृत्व या राजनीति की तलाश क्यों पूरा नहीं कर सकी जबकि इसकी संभावनाओं के बीज मौजूद हैं. वैसे इसके ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक कारण रहे हैं. ऐतिहासिक  

बिहार में दलित राजनीति को नेतृत्व की दरकार

रमाशंकर आर्य पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. वे दलित मसलों के जानकार हैं. बिहार के चुनाव परिणाम से खुश दिखते हैं. उनकी खुशी का राज भाजपा की हार में छिपा है. कहते हैं, ‘चलिए यह अच्छा हुआ कि रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी की हार हुई. यह उनके लिए  

हमारे सामाजिक ढांचे में ही खराबी है

हर दिन कहीं न कहीं ​दलितों पर क्रूरतापूर्ण हमलों की खबरें आती हैं. आप पूछते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है? दरअसल, हमारे पूरे समाज की संरचना ही ऐसी है कि यहां दलितों पर हमले कोई हैरानी की बात नहीं है. यह होना ही है. सत्ता में भागीदारी बढ़ने  

तुरुप का इक्का

67 साल की उम्र. 11 सालों तक खुद चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति. पिछले लोकसभा चुनाव में पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती, दोनों की बुरी हार. लोकसभा चुनाव के पहले ही दिल का ऑपरेशन और डॉक्टरों की सख्त हिदायत कि न ज्यादा भागदौड़ करनी है, न ही तनाव  

पटेल आरक्षण चाहते हैं या सिर्फ आंदोलन

इस समय पटेल आंदोलन क्यों शुरू हुआ? क्या ये सच में पटेलों के लिए आरक्षण पाने की मुहिम है या ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को खत्म करने की साजिश? शुक्र है अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तक फिलहाल इस आंदोलन की आंच नहीं पहुंची. क्या यह आंदोलन नरेंद्र मोदी