‘मोहल्लों की लड़ाई बन गई सांप्रदायिक दंगा !’

2
288
इलेस्ट्रेशनः मनीषा यादव
इलेस्ट्रेशनः मनीषा यादव

दीवाली का दूसरा दिन था. मैं शाम को नोएडा की तरफ निकल गई. रात के 9 बजते-बजते मेरे पास घर से एक के बाद एक कई फोन आने लगे. पता चला, मेरा घर जो कि त्रिलोकपुरी में है, वहां पथराव हो रहा है. घरवालों ने कहा अभी कहीं बाहर ही रहो, जब मामला शांत होगा, हम बुला लेंगे. उस रात तकरीबन दो-ढाई बजे मैं घर पहुंची. इलाके में काफी पुलिस तैनात थी, लेकिन माहौल शांत हो चुका था.

अगले दिन भाईदूज था. छुट्टी का एक आैैर दिन. रात को देर से लौटने की वजह से घर में मेरी किसी से पिछली रात के पथराव और लड़ाई के बारे में बात नहीं हुई थी. मैं आधी नींद में ही थी कि अचानक गली से हल्का शोर आने लगा. मेरा 23 साल का छोटा भाई शोर सुनते ही मामला जानने के लिए बाहर की तरफ निकल गया. शोर थोड़ा और बढ़ा तो मैं और मेरे घर की बाकी महिलाएं खिड़की तक पहुंचकर बाहर देखने लगीं.

गली से सड़क का एक हिस्सा दिख रहा था जहां लोग चिल्लाते हुए भागते-दौड़ते दिख रहे थे. मैं समझ गई जरूर आसपास कहीं लड़ाई हुई है. लेकिन फिर मिनटों में लोग गली से गुजरकर भाग रहे थे. गली में रहनेवाले लोग फटाफट अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद करने लगे. भागते दौड़ते लोगों से टुकड़ों-टुकड़ों में जानकारियां मिल रही थी, ‘ ब्लॉक-27 की दुकानों में आग लगा दी है… पथराव हो रहा है…आंसू गैसे के गोले छोड़े जा रहे हैं… गोलियां चल रही हैं…’

मेरे घर में उस वक्त कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था. बड़े भाई सुबह ऑफिस निकल चुके थे. छोटा भाई जो मामला जानने निकला था, वह फोन रिसीव नहीं कर रहा था. इस इलाके में आठ-नौ साल रहते हुए मुझे दिन के वक्त ऐसा डरावना अहसास पहली बार हुआ. जिन ब्लॉकों की बात हो रही थी वे हमारे बिल्कुल बगल में थे और गलियों के रास्ते इंटर-कनेक्टिड भी. अक्सर उन ब्लॉकों में कुछ लड़कों के आपसी झगड़ों को हल्की-फुल्की पत्थरबाजी में बदलते मैंने कई बार देखा था लेकिन यह कुछ अलग था.

कुछ ही मिनटों में अफवाहें तेजी से फैलने लगीं. मेरे ही ब्लॉक के दूसरी गली में रहनेवाली मेरी बहन ने तो यह तक सुन लिया कि लोग तलवारें लेकर आ रहे हैं… दो छोटे बच्चों की मां के लिए वह पल कितना खौफनाक होगा इसे समझना कोई मुश्किल बात नहीं. यहां मेरे घर पर अलग डर और आशंकाओं का माहौल था. मेरे छोटे भाई का फोन नॉट रीचेबल आने लगा था और बाहर से शोर बढ़ने लगा था.

2 COMMENTS

  1. हमने इंसानों को जाति-धर्म में विभाजित कर रखा है ये उसी का नतीजा है। वाकई दुखद है कि किसी को अपना घर छोड़ने को सोचना पद एः है।

  2. Shabd kafi hadd taq sthiti ka sajiv chitran kar rahe hain. Vastavik anubhav behad hi bhayavah hoga. Dua hai jaldi hi iss sadme se ubar jao.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here