न्यायिक नियुक्ति आयोग पर सु्प्रीम कोर्ट में याचिका

supreme-court-300x199केंद्र की एनडीए सरकार ने काफी समय से चर्चा में रहे न्यायिक नियुक्ति विधेयक को भले ही संसद में आसानी पारित करवा लिया हो लेकिन इसकी राह अभी-भी पूरी तरह से आसान नहीं हुई है.

जजों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम व्यवस्‍था को हटाने से जुड़े 121 वें संविधान संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चार जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं. इनपर अगले सोमवार को सुनवाई होनी है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में कॉलेजियम व्यवस्‍था के स्‍थान पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) की स्‍थापना को असंवैधानिक बताया गया है.

ये याचिकाएं पूर्व अतिरिक्त महा न्यायाधिवक्ता बिश्वजीत भट्टाचार्य, एडवोकेट आरके कपूर व मनोहर शर्मा और सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड असोसिएशन की ओर से दायर की गई हैं.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविधान में 121 वां संशोधन विधेयक और एनजेएसी विधेयक 2014, असंवैधानिक हैं क्योंकि ये संविधान के बुनियादी ढांचे में बदलाव करते हैं.

उनका यह भी तर्क है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका को संविधान की धारा 50 के मुताबिक स्पष्ट रूप से अलग-अलग किया गया है और इससे न्यायप्रणाली को स्वतंत्र होकर कार्य करने की ताकत मिलती है. याचिकाओं के मुताबिक संविधान में राज्य के नीति निर्देशक प्रावधानों के तहत यह अनुच्छेद निचली अदालतों के साथ-साथ ऊपरी अदालतों तक बराबरी से लागू होता है.

याचिकाकर्ताओं में से एक भट्टचार्य का कहना है कि संविधान भारत के मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति का अधिकार देता है. वे तर्क देते हैं, ‘ अब यह अधिकार एनजेएसी को दिया जा रहा है. आयोग में शामिल चीफ जस्टिस और उनके साथ दो और जस्टिसों की राय को कानून मंत्री वीटो पावर के इस्तेमाल से कभी-भी नकार सकते हैं. इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता बाधित होती है और यह संविधान की उस मूल भावना, जिसके तहत न्यायपालिका को अलग से अधिकार दिए गए हैं, के खिलाफ है.’

राज्य सभा में बीते 14 अगस्त को ही 121वें संविधान संशोधन और एनजेएसी विधेयक को पारित किया है और इससे एक दिन पहले यह लोकसभा में पारित हुआ था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here