सुनीता तोमर…

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ये लाइनें 30 सेकेंड के उस वीडियो की हैं, जिसे केंद्र सरकार ने तंबाकू निषेध अभियान के तहत जारी किया था. अभियान की ब्रांड एंबेसडर और वीडियो का चेहरा कैंसर पीड़ित सुनीता तोमर थीं. ‘थीं’ इसलिए क्योंकि सुनीता की आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है. इस महीने की एक तारीख को उन्होंने ग्वालियर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. कैंसर पीड़ित सुनीता को जीवन के आखिरी दिनों में किसी तरह की सरकारी सहायता भी नसीब न हो सकी.

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद से तमाम अभियान चलाए गए. अभियानों के जरिये देश का चेहरा बदलने का डंका पीटा गया. स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, जनधन योजना, डिजिटल इंडिया, सांसद आदर्श ग्राम योजना… ये कुछ नाम हैं, जिन्हें वर्तमान सरकार ने शुरू कर लोगों का जीवन बदलने का दावा किया है. अभियान की सफलता या असफलता उस समय की सरकार के चाल, चरित्र और चेहरे की हकीकत को बयां करता है. तंबाकू निषेध अभियान ऐसा ही एक नाम है, जो सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है. इसकी सफलता इस बात से जाहिर हो रही है कि अभियान का चेहरा रहीं सुनीता तोमर की दरिद्रता में असमय मौत हो गई. 28 वर्षीय सुनीता की मौत हमारे सरकारी तंत्र और कार्यप्रणाली के चेहरे पर करारा तमाचा है.

देश के हृदय प्रदेश कहे जानेवाले मध्य प्रदेश के छोटे से जिले भिंड की रहने वाली सुनीता की शादी 14 साल की कम उम्र में ट्रक ड्राइवर बृजेंद्र सिंह तोमर से हुई थी. उनके दो बच्चे ध्रुव (13) और गंधर्व (10) हैं. सुनीता बच्चों की शिक्षा को लेकर बहुत आग्रही थीं.

पान हमारे खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है. अब गुटका-तंबाकू हमारे खानपान का अपभ्रंश हिस्सा हो चले हैं. तंबाकू या गुटका चबाना हमारे समाज में दबंगई और रुतबे का प्रतीक समझे जाते हैं. सुनीता भी तंबाकू चबाने की लत का शिकार थीं. धीरे-धीरे यही लत उनके लिए घातक साबित हो गई. तंबाकू खाने के कुछ सालों के दौरान ही सुनीता के ओरल कैंसर से पीड़ित होने का पता चला. पति बृजेंद्र के अनुसार, ‘सुनीता की बीमारी का पता साल 2013 में चला था. भिंड के एक अस्पताल में कुछ समय इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में रेफर कर दिया.’ मुंबई में डॉक्टरों ने चेकअप के बाद ऑपरेशन करने की बात कही. ऑपरेशन के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो वर्ल्ड लंग फाउंडेशन नाम की संस्था आगे आई. यह विकासशील देशों में कैंसर पीड़ितों की इलाज में मदद करती है.

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तंबाकू सेवन से ऑपरेशन के बाद उनका चेहरा विकृत होने के बाद लोग उनसे बात करने में भी कतराने लगे थे. सुनीता को खाने में सिर्फ तरल पदार्थ ही दिया जाता था. टाटा मेमोरियल अस्पताल में उनका इलाज सर्जन डॉ. पंकज चतुर्वेदी की देखरेख में हो रहा था. पंकज कैंसर का इलाज करने के साथ ही इसके प्रति जागरुकता फैलाने के लिए अभियान भी चलाते हैं. सुनीता के बारे में पता चलने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन्हें अपने अभियान का चेहरा बनाया. साल 2014 में मुंबई में इलाज के दौरान ही सुनीता पर कैंसर के प्रति जन जागरुकता अभियान के तहत 30 सेकेंड का वीडियो शूट किया गया.


मोदी के नाम खत

बृजेंद्र के अनुसार, सुनीता ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक मार्मिक पत्र लिखा था. जिसके मुताबिक, ‘गुटका हर दुकान पर खुलेआम बिकता है. छोटे बच्चों से लेकर नौजवान, बूढ़े, महिलाएं आदि इसका सेवन कर रहे हैं. इसलिए तंबाकू की बिक्री पर रोक जरूरी है. कानून तो है लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है. मैं किसी को तंबाकू खाते देखती हूं तो मेरी रूह कांप जाती है. पैकेट में सचित्र चेतावनी लोगों को जागरूक करती है और  इससे वे तंबाकू सेवन छोड़ने के लिए सोचने पर मजबूर होते हैं.’

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