नीट पर विवाद खत्म

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Medical-Admission

क्या है विवाद?

डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए पूरे देश में एक ही प्रवेश परीक्षा को लेकर हुआ विवाद अब खत्म हो गया है. राष्ट्रपति ने इस आशय की अधिसूचना पर हस्ताक्षर करके राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) को एक साल तक लागू न करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मान्यता दे दी. नीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की वजह से विवाद गहरा गया था जिसमें अदालत ने देश भर में निजी और सरकारी सभी मेडिकल काॅलेजों में एक ही प्रवेश परीक्षा कराने का आदेश दिया था. नीट का 15 राज्यों ने विरोध करके केंद्र सरकार को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने पर रोक लगाने के लिए विवश कर दिया. अध्यादेश के मुताबिक 24 जुलाई, 2016 तक नीट प्रभावहीन माना जाएगा. इस अवधि में सभी राज्यों को यहां तक कि निजी मेडिकल कॉलेजों को अगले सत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

क्यों है राज्यों का विरोध?

दरअसल राज्यों का विरोध अगले सत्र के लिए होने वाली परीक्षा को नीट में शामिल करने को लेकर था. उनका कहना है कि परीक्षा को लेकर सारी तैयारियां हो गई हैं. नीट लागू करने का सीधा असर सत्र को शुरू करने पर पड़ेगा. केंद्र की मोदी सरकार ने नीट को तत्काल प्रभाव से लागू करने पर अगला सत्र देर से शुरू होने की समस्या को व्यावहारिक मानते हुए इसे अगले साल से लागू करने का फैसला किया. हालांकि दिल्ली सहित कुछ राज्य इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की वकालत कर रहे हैं. दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने तो इसे शिक्षा माफिया से जोड़कर राष्ट्रपति से अध्यादेश पर दस्तखत नहीं करने तक की अपील कर डाली. इनकी दलील है कि मेडिकल परीक्षा को लेकर देश भर के निजी मेडिकल कॉलेज भारी-भरकम डोनेशन लेकर सीटें भरते हैं. इसके अलावा शिक्षा माफिया सिर्फ निजी कॉलेजों में ही नहीं, राज्य सरकारों द्वारा आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक कराने से लेकर फर्जी दाखिला कराने तक अपना प्रभावी दखल रखते हैं.    

क्यों पड़ी नीट की जरूरत?

मेडिकल कॉलेजों में पैसे के बल पर अयोग्य छात्रों की पहुंच बढ़ने की शिकायतों को सही पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए एक ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया. नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा की तर्ज पर एक केंद्रीय एजेंसी को सभी कालेजों को अपनी सीटों की संख्या बतानी होगी. केंद्र व राज्य सरकारों और निजी मेडिकल कॉलेजों की कुल सीटों के लिए वह एजेंसी देशव्यापी स्तर पर परीक्षा कराएगी.