‘यह लोकतंत्र के रूप में नया राजतंत्र है’ | Tehelka Hindi

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‘यह लोकतंत्र के रूप में नया राजतंत्र है’

बनारस में गणेश प्रतिमा विसर्जन के समय पुलिस द्वारा संतों पर लाठीचार्ज करने के विरोध में संतों ने पांच अक्टूबर को ‘अन्याय प्रतिकार यात्रा’ निकाली, जिसमें हिंसा और आगजनी होने के बाद शहर में अशांति फैल गई और नौबत कर्फ्यू तक पहुंच गई. उस यात्रा की अगुवाई श्री विद्यामठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कर रहे थे. उनसे निराला की बातचीत

निराला November 3, 2015

svami mukteshvaranandबनारस अब तो शांत दिख रहा है लेकिन सुना जा रहा है कि अंदर ही अंदर अभी माहौल गर्म है. ये उपद्रव आपके नेतृत्व में निकली अन्याय प्रतिकार यात्रा के कारण हुआ, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज किया और बाद में कर्फ्यू भी लगा. क्या आगे भी ऐसी कोई यात्रा निकालने की योजना है?

अन्याय प्रतिकार यात्रा और उसके बाद संतों का सम्मेलन दोनों ही ऐतिहासिक रहे. काशी में उस दिन वर्षों बाद दलगत और संगठनागत भावना से ऊपर उठकर सनातन समाज एक हो गया. साधु-संतों ने एकजुटता दिखाई. अब जब ऐतिहासिक कदम उठ गए हैं तो लड़ाई आगे भी जारी रहेगी लेकिन अब लड़ाई का तरीका बदल देंगे क्योंकि इस तरीके में सरकार को अराजकता फैलाने में सहूलियत मिल जाती है. मगर हम अपनी आवाज बंद नहीं करेंगे.

आपने 15 दिन पहले से ही अन्याय प्रतिकार यात्रा की घोषणा कर दी थी, फिर उस रोज इस यात्रा में हिंसा क्यों फैली? क्या आपकी तैयारी पूरी नहीं थी?

हमारे लोग तो वहां पहुंच भी नहीं सके थे, जहां से हंगामे की शुरुआत हुई. हंगामे की शुरुआत गोदौलिया चौक से हुई और तब तक हमारे लोग पीछे ही थे. वहां पहले से ही भारी संख्या में पुलिसवाले और हजारों लोग मौजूद थे. अब वे हजारों लोग कौन थे, जिन्होंने माहौल को इस कदर खराब कर दिया, ये तो जांच से ही पता चलेगा. हम चाहते हैं कि सरकार इसकी निष्पक्ष जांच करवाए.

आपके धुर विरोधी रहे विश्व हिंदू परिषद और दूसरे संगठन भी आपकी इस यात्रा में साथ थे और आपके अनुसार हिंसा में आपके लोग शामिल नहीं थे. ऐसे में आपको अराजकता फैलाने का संदेह किस पर है?

ये कैसे कहें. बिना जांच के कुछ कहना ठीक नहीं, लेकिन मैं बार-बार कहूंगा कि सरकार को जांच करवानी चाहिए कि ये कौन लोग थे, जिन्होंने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसा में बदल दिया. फिर पुलिस ने माहौल को और बिगाड़ दिया. हां, इतना जरूर कहूंगा कि राज्य सरकार का रवैया शुरू से सहयोगपूर्ण नहीं था.

सरकार उनसे बात कर ले, जिन पर लाठियां चली हैं ताकि उनके मन में पुलिस-प्रशासन के बारे में बनी धारणा टूटे वरना कल को वे बच्चे ही तो नक्सली बनेंगे

इस यात्रा में साध्वी प्राची भी आईं थीं, जबकि उस खेमे के लोग राम जन्मभूमि आंदोलन के समय से ही आपके विरोधी रहे हैं. ये कैसे संभव हुआ?

अन्याय प्रतिकार यात्रा के करीब एक पखवाड़े पहले मैं पुलिस के लाठीचार्ज का शिकार हुआ था. जाहिर है, चोट लगी थी और मैं अस्पताल में भर्ती था. तब एक संत साथी होने के नाते साध्वी प्राची मुझे देखने अस्पताल आई थीं. उसी समय उन्होंने कहा था कि वे भी यात्रा में शामिल होंगी. हमने तब ही शर्त रख दी थी कि अगर वे आएंगी तो मर्यादा में रहकर ही बोलेंगी. फिर जब वे मंच पर आईं और जैसे ही मुसलमानों के बारे में कुछ बोलने की शुरुआत की, मैंने उनसे माइक छीन लिया.

यह भी अजीब है कि आपकी अन्याय प्रतिकार यात्रा में तो साध्वी प्राची समेत विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों के कई नामी लोग शामिल हुए, जबकि कुछ दिन पहले जब आप पर पुलिस का लाठीचार्ज हुआ था तो स्वामी जीतेंद्रानंद और शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद जैसे लोगों ने आपके विरोध में बयान दिए थे. 

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