‘हमारा दृढ़ विश्वास मंगलराज में है, हमने अपने 15 वर्ष के शासन के दौरान बेजुबान लोगों को जुबान दिया’

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क्या विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की इतनी बड़ी जीत की उम्मीद आपको थी?

पूरा दो सौ प्रतिशत. जदयू और कांग्रेस के संग महागठबंधन बनने के दिन से ही उम्मीद थी. बिहार में राजग के किसी भी नेता में मुझे हरा देने का दम नहीं है. प्रचार के दौरान ही हमने देख लिया था कि लहर हमारे पक्ष में है.

बहुत सारे चुनाव सर्वेक्षणों में आपको या महागठबंधन को बढ़त में नहीं दिखाया गया या फिर ज्यादा भाव नहीं दिया गया. क्या आप इससे निराश हुए?

देखिए, हम राजनीति विज्ञान का पढ़ाई किया हूं और बहुत अच्छे से जानता हूं कि चुनाव सर्वेक्षण और एग्जिट पोल कइसे किया जाता है. जब आप  लोगों का हाल-चाल लीजिएगा, उन लोगों के सुख-दुख में भागीदार बनिएगा त किसी भी परीक्षा में कभी फेल नहीं होइएगा, फिर चाहे उ विधानसभा या लोकसभा चुनाव ही काहे न हो.

आपने पहली बार नॉन प्लेइंग कैप्टन के रूप में 2014 के चुनाव का सामना किया और राजद 40 में से कुल 4 सीट ही जीत सकी. 2014 के चुनावों में आप इतनी बुरी तरह से क्यों हारे?

बिहार में एक कहावत है, जब परिवार बंटता है न त उसका नाजायज फायदा गांव का लोग उठाता है. हम और हमारा छोटा भाई नीतीश अलग-अलग रास्ता पकड़ लिया था, इसीलिए सांप्रदायिक ताकतों को लाभ मिला. अब जब हम एक हो गए हैं तब लोगों ने उन्हें दूर बिहार से उखाड़ फेंका.

आपको ऊंची जातियों का दुश्मन माना जाता है, खासकर जब आपने घोषणा की कि यह लड़ाई अगड़ों और पिछड़ों की है. क्या आप वाकई अगड़ों के दुश्मन हैं?

हम अगड़ा जाति के गरीबों के विरोध में कभी नहीं रहा हूं. हम उन लोगों को पिछड़ा मानता हूं क्योंकि उ सब जरूरी साधनों से वंचित रहे हैं. हम बांटो और राज करो की राजनीति में विश्वास नहीं करता हूं. हमारा विरोध समाज के शोषकों से है. ये वीपी सिंह थे जिन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू किया. क्या वे पिछड़ी जाति के थे? वे हमारे नेता हैं. आज भी हमारी पार्टी में अगड़ी जाति के बहुत सारा नेता भरा हुआ है.

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