ऊन का गोला, धीरे-धीरे खोला होता | Tehelka Hindi

फिल्में, समाज और संस्कृति A- A+

ऊन का गोला, धीरे-धीरे खोला होता

शुभम उपाध्याय 2014-07-15 , Issue 13 Volume 6
िफल्म » एक विलेन  निर्देशक»  मोहित सूरी   लेखक » तुषार हीरानंदानी, मिलाप झावेरी                          कलाकार » सिद्धार्थ मल्होत्रा, श्रद्धा कपूर, रितेश देशमुख, आमना शरीफ

िफल्म » एक विलेन
निर्देशक» मोहित सूरी
लेखक » तुषार हीरानंदानी, मिलाप झावेरी
कलाकार » सिद्धार्थ मल्होत्रा, श्रद्धा कपूर, रितेश देशमुख, आमना शरीफ

मोहित सूरी हमेशा से ही कोरियन फिल्मों के मुरीद रहे हैं. हम भी. लेकिन करण जौहर या यश चोपड़ा के प्रेम को समर्पित तीव्र संगीतमय चलचित्रों पर हिंसा पर इतराते कोरियाई सिनेमा के पैरहन को चढ़ा दो तो ऊब ही होगी. या कहें कोरियन ‘आई सॉ द डेविल’ (जिस पर ‘एक विलेन’ आधारित है, बिना आभार-साभार) में अगर आशिकी 2 जैसी कोई प्रेम कहानी मिला दें, उसी तरह के ट्रीटमेंट और गीतों के साथ, तो फिर हम आखिर तक तने तो रहेंगे, जागरुक सिनेमा प्रेमी की तरह, लेकिन अंतहीन ऊब की छाया छटेगी नहीं. वो आशिकी 3 नाम के डर से हमें बारम्बार रूबरू कराएगी, अपने कुछ हिस्सों में यह कोरियाई फिल्म जैसा साहस जरूर दिखाएगी लेकिन फिर शार्ट-कट मार वापस अनेकों बार हमें हमारी भारतीय नाटकीयता के दर्शन ही कराएगी और धमकाएगी, थोड़ा और करीब जाकर दर्शन करा दूं, पूछ कर.

अति नाटकीयता, अति मानवीयता, गीतों की अति, प्रेम की अति, गति की अति और कुछ ऐसी अतियां जिनके शब्द अभी बने नहीं, मिलकर ‘एक विलेन’ को अच्छी बन सकने वाली फिल्म से साधारण फिल्म बना देते हैं. पागलखाने में ‘शहंशाह’ दिखाए जाते वक्त सिद्धार्थ की एंट्री का दृश्य हो या ‘जरूरत’ गीत पर बढ़िया दो मिनिट के सिंगल शाट में सिद्धार्थ का फाइटिंग सीक्वेंस, सूरी को फिल्म बनाने के क्राफ्ट की बेहद अच्छी जानकारी है. उन्हें गानों को दृश्यों के साथ चलाना सलीके से आता है, हीरो-हीरोइन से अच्छा काम करवाना भी, अपने विलेन से भी, लेकिन उनकी ‘एक विलेन’ का विलेन उसकी कहानी है जो भारतीय होने के गुरूर में हमारा सर झुका देती है. हीरो को विलेन को पकड़ने का ‘क्लू’ जिस चीज से मिलता है वो इतना हास्यास्पद है कि हास्यास्पद शब्द का इतनी कम तीव्रता का होना अखरता है. एक कमतर विलेन श्रद्धा कपूर भी हैं, जिनको लंबी भूमिका देने की मजबूरी ने कहानी को और ज्यादा कमजोर किया है. वे उन दृश्यों में रोशनी फैलाने आती हैं, जिनकी फिल्म को जरूरत नहीं है.

Pages: 1 2 Single Page

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 6 Issue 13, Dated 15 July 2014)

1 Comment