दिल्ली दंगल का ऐलान

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nirvachanशनिवार को दिल्ली में हुई नरेंद्र मोदी की रैली और केजरीवाल के पलटवार से मचे घमसान को चुनाव आयोग ने और भी रोमांचक कर दिया है. आयोग ने दिल्ली चुनाव पर बने सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए सात फरवरी की तारीख मुकर्रर की है. चुनाव के नतीजे 10 फरवरी को घोषित हो जाएंगे. चुनाव तारीख की घोषणा के साथ ही राजधानी में आचार संहिता लागू हो गई है. मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने तारीखों की घोषणा की.

दिल्ली में करीबन 1.3 करोड़ मतदाता हैं जो 11,000 बूथों पर मताधिकार का प्रयोग करेंगे. पहली बार मताधिकार का का इस्तेमाल करने वाले वोटरों की संख्या 1,72,450 है. आयोग लोगों के घरों तक फोटो वोटर स्लिप भी पहुंचाएगी जिससे उन्हें वोट डालने में सुविधा हो.

राजनीतिक पार्टियां तैयार

दिल्ली विधानसभा अगर भाजपा के लिए नाक की लड़ाई है तो आप के लिए यह मूंछ बचाने की जद्दोजहद. थकी-थकी सी दिख रही दिल्ली कांग्रेस के लिए भी यह साख बचाने का मौका है. भाजपा और आप पार्टी ने एक दूसरे पर सीधा प्रहार कर के चुनावों को द्विपक्षीय बना दिया है.

आप पार्टी ‘दिल्ली डायलाग’ के चुनावों से काफी पहले से ही जनता के बीच अपना प्रचार-प्रसार कर रही है. इन सभाओं में केजरीवाल कुर्सी छोड़ने के लिए कई बार माफ़ी भी मान चुके हैं. अलग अलग मुद्दे पर डायलॉग कर ‘आप’ जनता में कम हुई साख को वापस पाने की कोशिश कर रही है. चुनावी तैयारी में एक कदम आगे रहने के लिए ‘आप’ ने पहले ही अपने सभी 70 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है.

भाजपा भी हरियाणा चुनाव के बाद से मंडल स्तर पर लोगों से जुड़ने की कवायद शुरू कर चुकी है. दिसंबर में सदस्यता अभियान के जरिए भाजपा ने अपना पूरा जोर लगा दिया है. हालांकि अब तक पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की कोई घोषणा नहीं की गई है. अमित शाह ने पहले ही पार्टी के नेताओं को टिकट के लिए किसी भी तरह की गुटबाजी से दूर रहने की सलाह दे दी है. 10 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की रैली के जरिए पार्टी ने अपने अभियान का औपचारिक ऐलान कर दिया है.

कांग्रेस की तरफ से अरविंदर सिंह लवली अकेले कमान संभाले हुए हैं. अब तक पार्टी 24 उम्मीदवारों का नाम जारी कर चुकी है. इनमें से 12 को पिछले चुनाव में भी टिकट मिले थे. अरविंदर सिंह लवली, हारून यूसुफ व ओखला के विधायक आसिफ मोहम्मद का नाम इस लिस्ट में शामिल है. मटियामहल से पांच बार विधायक रह चुके शोएब इक़बाल कांग्रेस में शामिल हुए थे पार्टी ने उन्हें भी टिकट दिया है.

पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा जादुई आंकडे से सिर्फ चार सीट दूर रह गई थी. दूसरी तरफ क्रांति की गोद से निकली केजरीवाल की ‘आप’ ने इतिहास रचते हुए 28 सीटों पर परचम लहराया था. कांग्रेस के समर्थन से 49 दिन तक सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने 14 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद 17 फरवरी से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन चल रहा था.

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