चाट मसाला

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hrithik-roshanमत बन ओशो, अच्छा नहीं ये शो
रितिक रोशन नए रजनीश ओशो हैं. फिल्म इंडस्ट्री के ओशो. लेकिन वे जितने अच्छे अभिनेता हैं, बतोलेबाजी में उतने ही खराब ओशो. दुख किसके जीवन में नहीं है, हारता कौन नहीं है, घर में दरारें किसके नहीं हैं, लेकिन रितिक अपनी परेशानियों को फिल्म के लिए की जाने वाली पीआर से आगे ले जाकर दर्शकों को इरीटेट करने वाला ओशो-छाप प्रवचन बना देते हैं. एक सामान्य सवाल के जवाब में पूरा हस्तिनापुर बसा देते हैं, त्रासदी की कथा वाचना के साथ. ‘बैंग बैंग ने व्यक्तिगत परेशानियों का सामना करने में मेरी मदद की.’ ‘बैंग बैंग मेरी सबसे बड़ी विजय है, उसका पूरा होना ही विजय है.’ ‘विषम परिस्थितियां ही, संघर्ष या दर्द, आदमी के दिमाग की मसल्स को मजबूत बनाती हैं. जैसे आप शरीर के लिए जिम जाते हैं, विषम परिस्थितियां आपके दिमाग के लिए जिम हैं.’ क्या है ये सब आखिर? एक सेंसिबल अभिनेता दुनिया को यह दिखाने के लिए कि वह पाजिटिव है और संघर्ष से हार नहीं मानता आखिर इतना बैचेन क्यों हैं? गंभीर शोध तो बनता है!

katrina-kaifअभिनय की ऐसी की तैसी!
कैटरीना सबकुछ करेंगी. बहन इसाबेल की फिल्मों में मदद. लांच के वक्त महंगी कारों के रुख से परदा हटाना. जरूरत पड़ने पर सलमान से मदद लेना. सर्जरी कराकर लौटे रणबीर कपूर का ध्यान रखना. शॉपिंग करना. बैंग बैंग के लिए एक्शन सीन्स करना. उन एक्शन सीन्स को अभिनय बताकर उसकी पीआरगीरी करना. अपनी भविष्य की ननद करीना कपूर की तारीफ करना. बैंग बैंग को अपने जीवन की कठिनतम फिल्म बताना. लेकिन वे अभिनय नहीं करेंगी. बैंग बैंग भी धूम 3 की तरह करेंगी, जैसा कि फिल्म के ट्रेलर से विदित है, और आगे भी वे ही फिल्में करेंगी जो भले ही उनसे अच्छा अभिनय न मांगें, उनकी खूबसूरती मांगें, उनका नृत्य मांगें. लेकिन इसमें उनका भी पूरा कसूर नहीं है. जब लोग-बाग सिर्फ उनका कमली गाना देखने के लिए धूम 3 जैसी फिल्म तीन बार देखने जाते हैं, आलोचना आलू-चना खाकर सो जाती है, और कैट जैसे सुपरसितारे फिल्मों में अभिनय की जरूरत पर सवाल अपनी मुस्कान से हर जगह उठाते नजर आते हैं.

kajolकाजोल काहे तुम ऐसी घनघोर?
काजोल की तुनकमिजाजी से सब वाकिफ हैं. कई सालों तक अच्छे अभिनय की आड़ में वे कभी कुनकुनी तुनकती रहीं कभी उबल के तुनकती रहीं. लेकिन जैसे-जैसे करण जौहर सरीखों ने उनका साथ छोड़ा उनके तुनकने का तना कम चौड़ा होता गया. अब हाल ये है कि एक प्रोडक्ट के विज्ञापन के लिए हाल ही में हुई शूटिंग के दौरान सभी उनका प्यार से भरापूरा व्यवहार देखकर दंग रह गए. वे समय से आईं, और नन्हे-मुन्ने बच्चों के सही शॉट देने का पेशेंस से इंतजार करती रहीं. कलयुग से सतयुग में जाने की जल्दी रखने वाले जरा रुकें. कुछ दिन बाद, एक दूसरे विज्ञापन की शूट के दौरान वे पुराने घनघोर रूप में फट से लौट आई, और सहायकों पर ऐसे जमकर चिल्लाई जैसे चिली खाकर आईं हों. जब डायरेक्टर ने उनसे एक सीन के लिए दूसरा टेक देने को कहा, काजोल ने उन्हें ऐसे घूरा जैसे डायरेक्टर ने टेक नहीं चाय देने को कहा. अच्छा हुआ डायरेक्टर ने तमीज से अभिनय करने को नहीं कहा, वरना…!

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