स्तंभ Archives | Page 2 of 12 | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
मंच पर लंपट

इन दिनों देश और धर्म के लिए मुचैटा लेने वालों की भरमार हो गई है. यह वैसा बोलना नहीं है जैसा किसी लोकतांत्रिक समाज में होता है. यह गालियों और धमकियों से लदी भाषा है जो अपने से इतर नजरिया रखने वाले को थप्पड़ मारने के लिए मचल रही है.  

भारत एक देश नहीं विचार है

इन दिनों जब एक धार्मिक रंगत वाला रक्तपिपासु राष्ट्रवाद और भारतीयता सत्ता का संरक्षण पाकर बलबला रहे हैं, यह सवाल हर आदमी को खुद से जरूर पूछना चाहिए क्योंकि यह जिंदगी और मौत का मसला बनता जा रहा है. ये स्वयंभू राष्ट्रवादी धार्मिक भावनाओं को आहत करने, देशविरोधी काम करने,  

दलित-सवर्ण शादी और डर का साया

माननीय प्रधानमंत्री जी सादर बहुत संकोच से आपको यह पत्र लिख रहे हैं. बहुते सोचे-विचारे हमलोग कि का इतनी छोटी-छोटी बातों में प्रधानमंत्री से बात करनी चाहिए! बहस हुई हमारे बीच इस बात पर. कुछ ने कहा कि अपने देश के प्रधानमंत्री का काम क्या यही है कि वे टोले-मोहल्ले  

डिजिटल इंडिया में टाइपराइटर

इस बार मैं अभी गुजरे कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में एक कविता कहना चाहता हूं. हफ्ता न मिलने से सांड़-सा बौराया लखनऊ का पुलिसवाला है जो बूट की ठोकरों से राजभवन को जाती सदर सड़क के फुटपाथ पर एक टाइपराइटर तोड़ रहा है, वहीं तमाशा देखने वालों से घिरा,  

प्रतिरोध के कवि ‘डॉ. डैंग’

यूं ही लुढ़क जाएगी गर्दन सबसे ज्यादा दुख सिर्फ चश्मे को होगा खो जाएगा उसका चेहरा अपनी कमानियों से ब्रह्मांड को जैसे तैसे थामे और य र ल व श व ल र य अभी धुआं है अभी आग है अभी खाक है थोड़ा तो वक्त लगेगा संयत होने में,  

विचार के जवाब में गोली का जमाना

कर्नाटक में धर्मांधता, पाखंड विरोधी लेखक एम एम कलबुर्गी की हत्या के बाद कई धुंधली चीजों पर रोशनी गिरी है और वे फिर से चमक उठी हैं. अक्सर निराश लेखक बड़बड़ाते पाए जाते हैं कि हमें कौन पढ़ता है, लिखे का क्या असर होता है, समाज पर जिनका अवैध वर्चस्व  

एक शून्य के बाद दूसरा शून्य

इंटरनेट न होने का बहाना भी नहीं चल सकता. यूरोप में भटक रहा हूं. जैसे हमारे यहां गांव में किसी अतिथि के आने पर पानी दिया जाता है वैसे ही यहां किसी घर, होटल या पब में पहुंचने पर वाईफाई मिल जाता है. जिंदगी तकनीक पर इस कदर निर्भर हो  

रोजे बिना इफ्तार कैसा!

धर्मनिरपेक्षता लोकतंत्र से जुड़ा एक आधुनिक विचार है जिसे भारतीय नेताओं ने अवसरवाद की ट्रिक में बदल दिया है. धार्मिक अवसरों पर राजनीति करने वाले ये चेहरे आजकल जालीदार टोपी में नजर आ रहे हैं  

‘योग का मतलब तो कुल-जमा होता है !’

योग ही नहीं आयुर्वेद, शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय-नृत्य आदि हिंदू पद्धति की ऐसी देन हैं जिस पर हिंदू-मुसलमान समेत सभी भारतीय समान अधिकार मानते हैं