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कॉलेजियम असल में काम कैसे करता है

जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने बीती 28, जुलाई को अपने ब्लॉग ‘सत्यम ब्रूयात’ में यह लेख अंग्रेजी में लिखा था. कुछ ही समय बाद उन्होंने इसे अपने ब्लॉग से हटा दिया. इसीलिए इसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं. जजों की नियुक्ति पर लिखी उनकी यह टिप्पणी भी उतनी ही विस्फोटक है जितनी कि 20 जुलाई को लिखी उनकी वह टिप्पणी जिसने पूरे देश में भूचाल ला दिया था. अपनी पहली टिप्पणी में जस्टिस काटजू ने केंद्र सरकार के...  

हिंदी मीडिया का ‘अंग्रेजी लाओ’ आंदोलन…

क्या अंग्रेजी की भाषायी श्रेष्ठता के सामने अपनी हीनता की ग्रंथि से निकला है.  

‘गैरसरोकारी बनाम गैरसरकारी संगठन!’

आखिर क्यों गैरसरकारी संगठनों (एनजीओ) के पक्ष या विपक्ष में एकतरफा बात नहीं की जा सकती?  

भुला दिया गया ‘होलोकास्ट’

अंग्रेजी राज की गलत नीतियों के चलते 1943-44 के दौरान बंगाल में पड़ा अकाल 40 लाख जिंदगियां लील गया था, लेकिन दुनिया के दूसरे देशों के उलट भारत का इतिहास और वर्तमान इस त्रासदी पर ज्यादा बात नहीं करता  

चिंतन के सिर पर ठीकरा

कल तक सत्तारूढ़ होकर जिनका दिल बाग बाग था, आज उनके हाथों से सत्ता की बागडोर पूरी तरह से छूट चुकी थी. ऐसा क्यों हुआ इसकी वजह को इस चिंतन शिविर में खोजा जाना था. सब महारथी आ चुके थे सिवा आलाकमान के. आलाकमान के सबसे विश्वासपात्र जिन्हें आदरपूर्वक सब  

राजनीति में कितनी संस्कृति?

राजनीति और साहित्य के बीच घटती इस दूरी का, लोकतंत्र के महापर्व में वास्तविक संस्कृति की अनुपस्थिति का खामियाजा सिर्फ लेखकों और संस्कृतिकर्मियों को नहीं, पूरे समाज को भुगतना पड़ेगा  

‘फतवा सुझाव से ज्यादा कुछ नहीं’

फतवों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप ही है.  

नेता जमीनी, जमींदोज हम !

‘जी बताइए, कैसे आना हुआ?’ उन्होंने पूछा. ‘एक सवाल पूछना है आपसे’, मैंने जवाब दिया. ‘क्या आप पत्रकार हैं?’ उन्होंने अपनी नजरें मुझ पर गड़ा दी. ‘जी नहीं!’ मैंने स्पष्ट किया. मैंने देखा वह मुझे घूर रहे थे. उनकी आंखें धीरे-धीरे लाल हो रही थीं. उनकी आंखें मुझे तौल रही  

वह भी एक दौर था

सांप्रदायिकता के हल के लिए नेताओं का मुंह ताकने की बजाय लोग खुद पहल करें.  

‘हर्पीज और एलर्जी अलग हैं’

मुझे बहुत से पाठकों ने कहा कि आप ‘हर्पीज’ पर लिखें- ‘हर्पीज’ यानी ‘हर्पीज जॉस्टर’, (जैसे गांधीजी बोलो तो लोग यह मान लेते हैं कि महात्मा गांधी.) पर ‘हर्पीज जॉस्टर’ की बात बताऊंगा तो चिकनपॉक्स की बात भी स्वत: निकलेगी. दोनों ही बीमारियों में बदन पर दाने निकल आते हैं.