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खंडित ठगी

फिल्म रिव्यु : राजा नटवरलाल  

प्यार पूंजीवादी नहीं चाहिए…

हमारी फिल्मी प्रेम कहानियों में, ज्यादातर में, परतें नहीं होती, परत-दर-परत खुलते-बनते-बिगड़ते-सिसकते रिश्ते नहीं होते. वे सतह पर ही टहलती हैं, वहीं बिखरे पड़े पॉपकार्न खाने में व्यस्त रहती हैं. हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया, जो अपने कुछ हिस्सों में मजेदार है, प्यार को पूंजीवाद का शिकार बना देती है, ऐसा  

ऊन का गोला, धीरे-धीरे खोला होता

मोहित सूरी हमेशा से ही कोरियन फिल्मों के मुरीद रहे हैं. हम भी. लेकिन करण जौहर या यश चोपड़ा के प्रेम को समर्पित तीव्र संगीतमय चलचित्रों पर हिंसा पर इतराते कोरियाई सिनेमा के पैरहन को चढ़ा दो तो ऊब ही होगी. या कहें कोरियन ‘आई सॉ द डेविल’ (जिस पर  

शिप ऑफ थीसियस: पुर्जों के अलावा भी आदमी में कुछ है क्या

फिल्म समीक्षा फिल्म » शिप ऑफ थीसियस    निर्देशक»  आनंद गांधी     लेखक » खुशबू रांका, पंकज कुमार, आनंद गांधी कलाकार » आइदा-ऐल-कशेफ, नीरज कबी, सोहम शाह, फराज खान, विनय शुक्ला कहानियां तीन हैं. तीसरी में एक मारवाड़ी लड़का, जो बकौल अपनी नानी बस पैसे के बारे में सोचता है,  

कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो

फिल्म समीक्षा फिल्म » घनचक्कर निर्देशक»  राज कुमार गुप्ता लेखक » परवेज शेख, राज कुमार गुप्ता कलाकार » विद्या बालन, इमरान हाशमी, राजेश शर्मा, नमित दास हमारी दुनिया की प्रॉब्लम है कि इसमें हंसी इतने स्वाभाविक ढंग से दाखिल नहीं होती, जैसे जीवन का हिस्सा हो. यही प्रॉब्लम घनचक्कर की भी है. यह कई  

यह फिल्म समीक्षा नहीं है

संदर्भ फिल्म - हिम्मतवाला