एक दृष्टिविहीन आयोजन

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पुस्तक : हिंदी कहानी का युवा परिदृश्य
संपादक:  सुशील सिद्धार्थ
मूल्य : 1400 रुपये (तीन खंड)
प्रकाशन : सामयिक प्रकाशन

हिंदी कहानी के हालिया इतिहास को देखें तो लगभग हर दस साल पर कहानीकारों की एक नई पीढ़ी दस्तक देती रही है. हर पीढ़ी के रचनाकारों को उनके दशक या कहानी की किसी धारा के साथ जोड़कर पहचाना गया. ऐसा पहली बार हुआ कि सन 2000 के बाद बड़ी संख्या में सक्रिय हुए रचनाकारों को ‘नई पीढ़ी’ और उनकी कहानियों को ‘युवा कहानी’ जैसा बेतुका नाम दे दिया गया. इस नई पीढ़ी को कहानियां लिखते हुए लगभग डेढ़ दशक हो चुके हैं. बावजूद इसके वे अब भी युवा हैं. हिंदी कहानी के इतिहास में ‘युवा कहानी’ एक ऐसी परिघटना है जिसमें कोई भी युवा कभी भी शामिल होकर युवा परिदृश्य का विस्तार कर सकता है. भले ही प्रारंभिक युवा कहानीकार और शामिल नए युवा कहानीकार के बीच रचनाशीलता और उम्र की दृष्टि से दो दशक का ही फर्क क्यों न हो. ऐसा प्रतीत होता है कि ‘युवा कहानी’ के साथ ही हिंदी कहानी के इतिहास का अंत हो चुका है. यह हमारे संपादकों, समीक्षकों और आलोचकों की दृष्टिविहीनता का ज्वलंत उदाहरण है जो दो-दो दशक के अंतर के बावजूद सबको एक साथ समेटकर युवा परिदृश्य का निर्माण कर रहे हैं. सुशील सिद्धार्थ द्वारा तीन खंडों में संपादित ‘हिंदी कहानी का युवा परिदृश्य’ एक ऐसा ही दृष्टिविहीन आयोजन है. इसमें कुल सत्ताइस रचनाकारों की एक-एक कहानी और उनके वक्तव्य को शामिल किया गया है. प्रत्येक खंड में नौ-नौ रचनाकार हैं. इन रचनाकारों में सबसे वरिष्ठ युवा कहानीकार शरद सिंह (51) हैं तो सबसे कनिष्ठ युवा कहानीकार सोनाली सिंह (32) हैं. संपादक के इस युवा परिदृश्य में चौदह स्त्रियां हैं और तेरह पुरुष. सबसे आश्चर्य तो यह है कि यहां इतिहास बनाने वाले युवा कहानीकारों की श्रेणी में जयंती रंगनाथन, हुस्न तबस्सुम निहां, गीताश्री, सोनाली सिंह, ज्योति चावला आदि तो शामिल हैं लेकिन कुणाल सिंह, मो. आरिफ, गीत चतुर्वेदी, मनोज कुमार पांडेय, अनिल यादव, राजीव कुमार, सूर्यनाथ सिंह, प्रेम भारद्वाज आदि जैसे कहानीकार शामिल नहीं हैं. राजीव कुमार और मनोज कुमार पांडेय से तो वक्तव्य मंगवाकर भी इन्हें शामिल नहीं किया गया. उम्र, रचनाकाल का आरंभ, प्रकाशन, प्रतिनिधित्व, आदि जैसा एक भी वस्तुनिष्ठ आधार नहीं है जो इस संकलन में कहानीकारों के शामिल किए जाने और न किए जाने के औचित्य को सिद्ध कर सके. यह संकलन निजी रुचि-अरुचि और राग-द्वेष पर आधारित एक असफल प्रयास है.

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