अनूप मणि त्रिपाठी, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
अनूप मणि त्रिपाठी
अनूप मणि त्रिपाठी
Articles By अनूप मणि त्रिपाठी
लतीफे भी हमसे कुछ कहते हैं!

एक लतीफा सुनिए! चोर अभी चोरी करता कि सोने वाले से टकरा गया. लाइट जली तो उसे पता चला कि वह एक नेता के घर घुस आया है. चोर ने नेता के पैर छुए और पाइप के रास्ते नीचे उतरने लगा. नेता ने पूछा, ‘और तो सब ठीक है मगर  

ग्रह से पहले पूर्वग्रह

मिशन- बृहस्पति के चंद्रमा ‘टाइटन’ पर जीवन की खोज. मिशन की मौजूदा बाधा- उड़ान के वक्त नारियल का पहली बार में न फूटना. वैज्ञानिक अब टाइटन पर- अभी टाइटन की सरजमीं पर उतर के अपना ताम-झाम सेट करते और जीवन की खोज में खटते कि उनकी नजर सामने एक बड़ी  

हंसी का बिजूका

‘यह मूर्ति कैसी?’ ‘ये लाफिंग बुद्धा है.’ ‘मजेदार लग रहा है.’ ‘सो तो है, इससे ‘गुडलक’ आता है’ ‘कैसे?’ ‘देख नहीं रहे, कितना खिलखिला कर हंस रहा है!’ ‘तो!’ ‘हंसने से वैसे भी मनहूसियत दूर हो जाती है.’ ‘तो आप खुद क्यों नहीं हंसते?’ मेरी इस बात पर वे मुस्कुराए.  

कभी मिले तो पूछिएगा !

अभी मैं लिखने बैठा ही था कि अचानक अंधेरा छा गया. कुछ नजर नहीं आता था. जबकि लाइट आ रही थी. आंखों को कई बार भींचा. ट्यूब लाइट की तरह लपलपाया. मगर कोई फायदा नहीं. तभी किसी ने मेरा हाथ पकड़ा. मैं कांप गया. ‘डरो नहीं! अराम से बैठो यहां!’  

पत्थरों की कथाएं

अभी दूसरा पत्थर जवाब देता कि ठक! से एक आवाज हुई. सड़क के बीचोबीच पड़ा हुआ पत्थर लुढ़कता हुआ किनारे आ गया. अब एक इस पार तो दूसरा उस पार था.  

इस सूरत-ए-मौसम में हमारी सूरत

भकभकाती भूमिका - आ गई! चली गई! की आवाज गली-गली में रह-रह कर सुनाई दे रही है. गोकि मां भगवती का जयकारा हो रहा हो. ‘कटौती’ सबसे ज्यादा घृणित शब्द है इन दिनों. चिलचिलाती गर्मी में हम ऐसे उबल रहे हैं कि जैसे बंदे न हो के हम अंडे हों!  

चिंतन के सिर पर ठीकरा

कल तक सत्तारूढ़ होकर जिनका दिल बाग बाग था, आज उनके हाथों से सत्ता की बागडोर पूरी तरह से छूट चुकी थी. ऐसा क्यों हुआ इसकी वजह को इस चिंतन शिविर में खोजा जाना था. सब महारथी आ चुके थे सिवा आलाकमान के. आलाकमान के सबसे विश्वासपात्र जिन्हें आदरपूर्वक सब  

पेश है चुनावी मौसम का हाल

गर्मी का मौसम चल रहा है. इसी बीच चुनाव भी पड़ गया है यानी सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसी बात हो गई. गर्मी का मौसम चुनावी मौसम में तब्दील हो गया है. इस मौसम का हाल बताने में मौसम विभाग को पसीने आ रहे हैं. अंदरखाने की बात है