हम तो सुधारना चाहते हैं, अलग पार्टी की बात तो अरविंद करते हैं’

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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य प्रो. आनंद कुमार

आपलोग यह कह रहे हैं कि न तोड़ेंगे, न छोड़ेंगे, सुधरेंगे और सुधारेंगे लेकिन लग तो नहीं रहा कि पार्टी इसके लिए तैयार है. दो दिन पहले ही अरविंद केजरीवाल ने फिर से एक बार दुहराया कि आप लोगों को निकाले जाने का फैसला किस प्रकार सही था. ऐसे में सुधरने और सुधारने की कोई गुंजाइश बचती है क्या?
सुधरने और सुधारने की गुंजाइश हमेशा रहती है. मेरी उम्र अभी इतनी नहीं हुई है कि मैं सुधर न सकूं. मैं तो सुधरने के लिए तैयार हूं. बाकियों को भी सुधरना ही होगा. जब गौतम बुद्ध अंगुलीमाल को सुधार सकते हैं, महात्मा गांधी हिंसा फैला रही भीड़ को अहिंसक बना सकते हैं तो सुधार की गुंजाइश यहां भी है. हम इसी गुंजाइश को तलाश रहे हैं. हमलोगों के लिए आम आदमी पार्टी एक औजार है. हम कार्यकर्ताओं ने मिलकर इस औजार को बनाया है. हम इसमें सुधार नहीं करेंगे तो कौन करेगा. फिलहाल जो लोग पार्टी में हैं और अपने को नायक-अधिनायक समझ रहे हैं उन्हें हमने यानी कार्यकर्ताओं ने बनाया है. वो नायक नहीं हैं. वो हमारे एजेंट हैं जिन्हें हमने वहां बिठाया है. हमने इनकी छवि बनाई है क्योंकि हमें नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पसंद नहीं थे. अब अगर ये नापसंद होने की हदतक विकृत हो जाएंगे तो जनता इनके साथ भी वही करेगी जो वो बाकी नेताओं के साथ करती है. जनता इन्हें भी बदल देगी. क्योंकि नेता को यह भ्रम हो सकता है कि उससे जनता है लेकिन असलियत में नेता, जनता से होता है. और अगर जनता ने इन्हें देवता नहीं माना तो वही वाली बात हो जाएगी-मानो तो देवता नहीं तो पत्थर.

आम आदमी पार्टी दो हिस्सों में बंट चुकी है. अगर ‘स्वराज संवाद’ के आयोजन को आधार बनाकर पार्टी ने आप लोगों की प्राथमिक सदस्यता भी छीन ली तो फिर आपकी रणनीति क्या होगी?
अगर ऐसा कुछ हुआ तो इसे क्रिकेट की भाषा में हिट विकेट होना कहेंगे. अगर पार्टी प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, प्रो. आनंद कुमार, अजीत झा, प्रो. राकेश सिन्हा, विशाल शर्मा, क्रिस्टिना शामी, मेधा पाटकर जैसे लोगों को प्राथमिक सदस्य होने लायक भी नहीं मानती और इन्हें हटा देती है तो लोग यही कहेंगे कि आम आदमी पार्टी सत्ता के विकार से पीड़ित हो चुकी है. अभी तक यह साफ नहीं है कि इनलोगों का गुनाह क्या है? इनकी गलती क्या है? क्या अपराध हुआ है, यह साफ नहीं है लेकिन फैसले धड़ाधड़ आ रहे हैं. लोग यह भी कहेंगे कि पार्टी के मौजूदा नेतृत्व का एक हिस्सा अहंकार से पीड़ित है. शायद दिल्ली चुनाव में मिले बहुमत से इनलोगों का दिमाग खराब हो गया है. जब पार्टी हमें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर देगी तब हम सोचेंगे कि क्या करना है. अभी तो हम सुधरने और सुधारने की ही कोशिश कर रहे हैं.

क्या  ‘स्वराज संवाद’  के जरिए आप लोग अपनी जमीन नहीं तलाश रहे हैं? क्या आप इस बैठक के माध्यम से यह नहीं देखना-समझना चाह रहे हैं कि पार्टी के कितने कार्यकर्ता आपके साथ हैं?
(हंसते हुए) फिलहाल, किसानों की जमीन तो नरेंद्र मोदी हड़पना चाहते हैं. और अगर हमारे पास कोई जमीन है जिसे नरेंद्र मोदी के ये नए संस्करण छीनना चाहते हैं तो उन्हें मुबारक. योगेंद्र यादव, आसमान से उतरे किसी हवा-हवाई नेता का नाम नहीं है. योगेंद्र यादव एक ऐसा नेता है जो 30 साल लंबी राजनीतिक यात्रा से बना है. उनकी अपनी जमीन है, हमें अपनी जमीन तलाशने की कतई जरूरत नहीं है. योगेंद्र यादव ने हरियाणा में झाड़ू को हर गली-मुहल्ले तक पहुंचा दिया है. जब पार्टी दिल्ली में योगेंद्र यादव को निकालने और रखने के लिए बैठक कर रही थी तो उस वक्त वो हरियाणा में किसानों के पक्ष में रैली कर रहे थे. इस रैली ने खट्टर सरकार के दांत खट्टे कर दिए हैं. और अगर ऐसा हुआ है तो इससे यह साबित होता है कि योगेंद्र यादव और उनके साथियों की जमीन सुरक्षित है. इसलिए हमें जमीन तलाशने की कोई जरूरत नहीं है.

आम आदमी पार्टी को सुधारने की बजाय आप लोग अपनी एक नई पार्टी क्यों नहीं बना रहे हैं? नई पार्टी के साथ लोगों के बीच जाने का कोई विचार है क्या?
हम पार्टी छोड़ने, तोड़ने और नई पार्टी बनाने के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रहे हैं. वैसे भी यह सवाल हमसे नहीं श्री अरविंद केजरीवाल से पूछा जाना चाहिए. हमने तो अबतक एक बार भी नहीं कहा कि हम नई पार्टी बनाएंगे लेकिन वो दो बार कह चुके हैं कि अगर ये लोग पार्टी में रहे तो मैं अपने 67 विधायकों के साथ अलग पार्टी बना लूंगा. वो अलग पार्टी बनाना चाह रहे हैं. हम तो पार्टी में सुधार लाना चाहते हैं. हम तो पार्टी को अपने उन कार्यकर्ताओं की याद दिलाना चाहते हैं जिन्हें पार्टी भूल चुकी है. वैसे भी यह पार्टी न तो अरविंद केजरीवाल की है, न ही प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की. यह देश की पार्टी है, जनता की पार्टी है. यह किसी एक व्यक्ति की पार्टी नहीं है. हां, फिलहाल पार्टी में कुछ ऐसे किराएदार आ गए हैं जो पार्टी में गलत जगहों पर फ्लैट पा गए हैं और अब ये लोग केवल गणेश वंदना करके मालिक बनना चाह रहे हैं. अब ऐसे किरायदारों को यह समझाना होगा कि वो मालिक नहीं बन सकते. हमें विश्वास है कि यह काम पार्टी का कार्यकर्ता कर लेगा. इस पार्टी के कार्यकर्ता बड़े शक्तिशाली हैं.

1 COMMENT

  1. before dehli election mr. shanti bhushan clearly oppose AAP which was enough to understand that he doesnt like kejriwal…as he himself declared Kiran bedi A better candidate than AK ….if such a senior leader creates panic than AK is right at his end & a real volunteer and a common man will always support AK….

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