16 अंकों की वर्चुअल आईडी से हो सकेगी आपके आधार की सुरक्षा

0
102

aadhaar

अगर आपको किसी सर्विस की सेवा के लिए बार-बार आधार कार्ड या आधार नंबर की पहचान कराने की जरूरत होती है या फिर आधार के डेटा की गोपनीयता का खतरा बना रहता है तो अब न सिर्फ इस झंझट से छुटकारा मिलने वाला है, बल्कि आपका डाटा और भी ज्यादा सुरक्षित होने वाला है।
आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने इसकी सिक्योरिटी के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस दिशा में यूआईडीएआई ने एक नया कॉन्सेप्ट पेश किया है जिसका नाम है ‘वर्चुअल आईडी’। अब विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अपना आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा। आधार कार्ड होल्डर इसकी वेबसाइट से अपना 16 अंकों का वर्चुअल आईडी बना सकेगा जिसे वह सिम वेरिफिकेशन समेत विभिन्न जगह दे सकता है। यानी अब उसे अपना 12 अंकों का बायोमेट्रिक आईडी देने की जरूरत नहीं होगी।
नई प्रणाली का उद्देश्य आधार संख्या के लीक होने और दुरुपयोग के मामलों को कम करना है और 119 करोड़ लोगों की पहचान संख्या की गोपनीयता को बढ़ावा देना है. अब आधार डिटेल देने के समय या वेरिफिकेशन के समय इसी 16 अंको से काम चल जाएगा. ध्यान देने वाली बात है कि यह 16 अंकों का वर्चुअल आईडी कुछ समय के लिए ही मान्य होगा. तय समय के बाद यूजर को अपना नया आईडी जारी करना होगा।
यूआईडीएआई ने कहा है कि एक मार्च से यह सुविधा आ जाएगी। हालांकि 1 जून से यह अनिवार्य हो जाएगी।
यूजर जितनी बार चाहे उतनी बार वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकेगा। यह आईडी सिर्फ कुछ समय के लिए ही वैलिड रहेगी।
यूआईडीएआई के मुताबिक यह सीमित केवाईसी होगी। इससे संबंधित एजेंसियों को भी आधार डिटेल की एक्सेस नहीं होगी। ये एजेंसियां भी सिर्फ वर्चुअल आईडी के आधार पर सब काम निपटा सकेंगी। यूआईडीएआई ने वर्चुअल आईडी की जो व्यवस्था लाई है, इसके तहत यूजर जितनी बार चाहे उतनी बार वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकेगा। यह आईडी सिर्फ कुछ समय के लिए ही वैलिड रहेगी।
लिमिटेड केवाईसी सुविधा आधार यूजर्स के लिए नहीं बल्कि एजेंसियों के लिए है। एजेंसियां केवाईसी के लिए आपका आधार डिटेल लेती हैं और उसे स्टोर करती हैं। लिमिटेड केवाईसी सुविधा के बाद अब एजेंसियां आपके आधार नंबर को स्टोर नहीं कर सकेंगी। इस सुविधा के तहत एजेंसियों को बिना आपके आधार नंबर पर निर्भर हुए अपना खुद का केवाईसी करने की इजाजत होगी। एजेंसियां टोकनों के जरिए यूजर्स की पहचान करेंगी। केवाईसी के लिए आधार की जरूरत कम होने पर उन एजेंसियों की तादाद भी घट जाएगी जिनके पास आपके आधार की डिटेल होगी।
करीब 15,000 लोगों पर किए गए एक सवेर्क्षण में सामने आया है कि 52 फीसदी लोग सरकारी एजेंसियों द्वारा अपने आधार विवरणों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस सवेर्क्षण को नागरिक मंच लोकलसर्किल ने किया है। इसमें लोगों से उनके आंकड़ों की साइबर सुरक्षा के बारे में पूछा गया। इसमें यूआईडीएआई द्वारा आधार जानकारी को हैकरों व सूचना विक्रेताओं से सुरक्षा में समर्थ होने को लेकर सवेर् में 20 फीसदी लोगों ने ‘कुछ हद तक आश्वस्त’ होने की बात कही, जबकि 23 फीसदी ने ‘पूरा विश्वास’ जताया।